14. जुज़ - कुरान पढ़ें

14. जुज़
15 · अल-हिज्र
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓرٰ۠ تِلْكَ اٰيَاتُ الْكِتَابِ وَقُرْاٰنٍ مُب۪ينٍ1
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह किताब अर्थात स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं
رُبَمَا يَوَدُّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْ كَانُوا مُسْلِم۪ينَ2
ऐसे समय आएँगे जब इनकार करनेवाले कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता कि हम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते!
ذَرْهُمْ يَاْكُلُوا وَيَتَمَتَّعُوا وَيُلْهِهِمُ الْاَمَلُ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ3
छोड़ो उन्हें खाएँ और मज़े उड़ाएँ और (लम्बी) आशा उन्हें भुलावे में डाले रखे। उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा!
وَمَٓا اَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ اِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَعْلُومٌ4
हमने जिस बस्ती को भी विनष्ट किया है, उसके लिए अनिवार्यतः एक निश्चित फ़ैसला रहा है!
مَا تَسْبِقُ مِنْ اُمَّةٍ اَجَلَهَا وَمَا يَسْتَاْخِرُونَ5
किसी समुदाय के लोग न अपने निश्चि‍त समय से आगे बढ़ सकते है और न वे पीछे रह सकते है
وَقَالُوا يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ي نُزِّلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ اِنَّكَ لَمَجْنُونٌۜ6
वे कहते है, "ऐ व्यक्ति, जिसपर अनुस्मरण अवतरित हुआ, तुम निश्चय ही दीवाने हो!
لَوْ مَا تَاْت۪ينَا بِالْمَلٰٓئِكَةِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ7
यदि तुम सच्चे हो तो हमारे समक्ष फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते?"
مَا نُنَزِّلُ الْمَلٰٓئِكَةَ اِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُٓوا اِذًا مُنْظَر۪ينَ8
फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है और उस समय लोगों को मुहलत नहीं मिलेगी
اِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَاِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ9
यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ ف۪ي شِيَعِ الْاَوَّل۪ينَ10
तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है
وَمَا يَاْت۪يهِمْ مِنْ رَسُولٍ اِلَّا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ11
कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने उपहास न किया हो
كَذٰلِكَ نَسْلُكُهُ ف۪ي قُلُوبِ الْمُجْرِم۪ينَۙ12
इसी तरह हम अपराधियों के दिलों में इसे उतारते है
لَا يُؤْمِنُونَ بِه۪ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْاَوَّل۪ينَ13
वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं
وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَابًا مِنَ السَّمَٓاءِ فَظَلُّوا ف۪يهِ يَعْرُجُونَۙ14
यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें,
لَقَالُٓوا اِنَّمَا سُكِّرَتْ اَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَسْحُورُونَ۟15
फिर भी वे यही कहेंगे, "हमारी आँखें मदमाती हैं, बल्कि हम लोगों पर जादू कर दिया गया है!"
وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَٓاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِر۪ينَۙ16
हमने आकाश में बुर्ज (तारा-समूह) बनाए और हमने उसे देखनेवालों के लिए सुसज्जित भी किया
وَحَفِظْنَاهَا مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ رَج۪يمٍۙ17
और हर फिटकारे हुए शैतान से उसे सुरक्षित रखा -
اِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَاَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُب۪ينٌ18
यह और बात है कि किसी ने चोरी-छिपे कुछ सुनगुन ले लिया तो एक प्रत्यक्ष अग्निशिखा ने भी झपटकर उसका पीछा किया -
وَالْاَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَاَلْقَيْنَا ف۪يهَا رَوَاسِيَ وَاَنْبَتْنَا ف۪يهَا مِنْ كُلِّ شَيْءٍ مَوْزُونٍ19
और हमने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ डाल दिए और उसमें हर चीज़ नपे-तुले अन्दाज़ में उगाई
وَجَعَلْنَا لَكُمْ ف۪يهَا مَعَايِشَ وَمَنْ لَسْتُمْ لَهُ بِرَازِق۪ينَ20
और उसमें तुम्हारे गुज़र-बसर के सामान निर्मित किए, और उनको भी जिनको रोज़ी देनेवाले तुम नहीं हो
وَاِنْ مِنْ شَيْءٍ اِلَّا عِنْدَنَا خَزَٓائِنُهُۘ وَمَا نُنَزِّلُهُٓ اِلَّا بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ21
कोई भी चीज़ तो ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक ज्ञात (निश्चिंत) मात्रा के साथ उतारते है
وَاَرْسَلْنَا الرِّيَاحَ لَوَاقِحَ فَاَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَسْقَيْنَاكُمُوهُۚ وَمَٓا اَنْتُمْ لَهُ بِخَازِن۪ينَ22
हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो
وَاِنَّا لَنَحْنُ نُحْي۪ وَنُم۪يتُ وَنَحْنُ الْوَارِثُونَ23
हम ही जीवन और मृत्यु देते है और हम ही उत्तराधिकारी रह जाते है
وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِم۪ينَ مِنْكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَاْخِر۪ينَ24
हम तुम्हारे पहले के लोगों को भी जानते है और बाद के आनेवालों को भी हम जानते है
وَاِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْۜ اِنَّهُ حَك۪يمٌ عَل۪يمٌ۟25
तुम्हारा रब ही है, जो उन्हें इकट्ठा करेगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْاِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍۚ26
हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है,
وَالْجَٓانَّ خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ مِنْ نَارِ السَّمُومِ27
और उससे पहले हम जिन्नों को लू रूपी अग्नि से पैदा कर चुके थे
وَاِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلٰٓئِكَةِ اِنّ۪ي خَالِقٌ بَشَرًا مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ28
याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करनेवाला हूँ
فَاِذَا سَوَّيْتُهُ وَنَفَخْتُ ف۪يهِ مِنْ رُوح۪ي فَقَعُوا لَهُ سَاجِد۪ينَ29
तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना!"
فَسَجَدَ الْمَلٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ اَجْمَعُونَۙ30
अतएव सब के सब फ़रिश्तो ने सजदा किया,
اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ اَبٰٓى اَنْ يَكُونَ مَعَ السَّاجِد۪ينَ31
सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करनेवालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया
قَالَ يَٓا اِبْل۪يسُ مَا لَكَ اَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِد۪ينَ32
कहा, "ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करनेवालों में शामिल नहीं हुआ?"
قَالَ لَمْ اَكُنْ لِاَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ33
उसने कहा, "मैं ऐसा नहीं हूँ कि मैं उस मनुष्य को सजदा करूँ जिसको तू ने सड़े हुए गारे की खनखनाती हुए मिट्टी से बनाया।"
قَالَ فَاخْرُجْ مِنْهَا فَاِنَّكَ رَج۪يمٌ34
कहा, "अच्छा, तू निकल जा यहाँ से, क्योंकि तुझपर फिटकार है!
وَاِنَّ عَلَيْكَ اللَّعْنَةَ اِلٰى يَوْمِ الدّ۪ينِ35
निश्चय ही बदले के दिन तक तुझ पर धिक्कार है।"
قَالَ رَبِّ فَاَنْظِرْن۪ٓي اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُونَ36
उसने कहा, "मेरे रब! फिर तू मुझे उस दिन तक के लिए मुहलत दे, जबकि सब उठाए जाएँगे।"
قَالَ فَاِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَر۪ينَۙ37
कहा, "अच्छा, तुझे मुहलत है,
اِلٰى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ38
उस दिन तक के लिए जिसका समय ज्ञात एवं नियत है।"
قَالَ رَبِّ بِمَٓا اَغْوَيْتَن۪ي لَاُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْاَرْضِ وَلَاُغْوِيَنَّهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ39
उसने कहा, "मेरे रब! इसलिए कि तूने मुझे सीधे मार्ग से विचलित कर दिया है, अतः मैं भी धरती में उनके लिए मनमोहकता पैदा करूँगा और उन सबको बहकाकर रहूँगा,
اِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَص۪ينَ40
सिवाय उनके जो तेरे चुने हुए बन्दे होंगे।"
قَالَ هٰذَا صِرَاطٌ عَلَيَّ مُسْتَق۪يمٌ41
कहा, "मुझ तक पहुँचने का यही सीधा मार्ग है,
اِنَّ عِبَاد۪ي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ اِلَّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْغَاو۪ينَ42
मेरे बन्दों पर तो तेरा कुछ ज़ोर न चलेगा, सिवाय उन बहके हुए लोगों को जो तेरे पीछे हो लें
وَاِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ43
निश्चय ही जहन्नम ही का ऐसे समस्त लोगों से वादा है
لَهَا سَبْعَةُ اَبْوَابٍۜ لِكُلِّ بَابٍ مِنْهُمْ جُزْءٌ مَقْسُومٌ۟44
उसके सात द्वार है। प्रत्येक द्वार के लिए एक ख़ास हिस्सा होगा।"
اِنَّ الْمُتَّق۪ينَ ف۪ي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍۜ45
निस्संदेह डर रखनेवाले बाग़ों और स्रोतों में होंगे,
اُدْخُلُوهَا بِسَلَامٍ اٰمِن۪ينَ46
"प्रवेश करो इनमें निर्भयतापूर्वक सलामती के साथ!"
وَنَزَعْنَا مَا ف۪ي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ اِخْوَانًا عَلٰى سُرُرٍ مُتَقَابِل۪ينَ47
उनके सीनों में जो मन-मुटाव होगा उसे हम दूर कर देंगे। वे भाई-भाई बनकर आमने-सामने तख़्तों पर होंगे
لَا يَمَسُّهُمْ ف۪يهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَج۪ينَ48
उन्हें वहाँ न तो कोई थकान और तकलीफ़ पहुँचेगी औऱ न वे वहाँ से कभी निकाले ही जाएँगे
نَبِّئْ عِبَاد۪ٓي اَنّ۪ٓي اَنَا۬ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُۙ49
मेरे बन्दों को सूचित कर दो कि मैं अत्यन्त क्षमाशील, दयावान हूँ;
وَاَنَّ عَذَاب۪ي هُوَ الْعَذَابُ الْاَل۪يمُ50
और यह कि मेरी यातना भी अत्यन्त दुखदायिनी यातना है
وَنَبِّئْهُمْ عَنْ ضَيْفِ اِبْرٰه۪يمَۢ51
और उन्हें इबराहीम के अतिथियों का वृत्तान्त सुनाओ,
اِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًاۜ قَالَ اِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ52
जब वे उसके यहाँ आए और उन्होंने सलाम किया तो उसने कहा, "हमें तो तुमसे डर लग रहा है।"
قَالُوا لَا تَوْجَلْ اِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَل۪يمٍ53
वे बोले, "डरो नहीं, हम तुम्हें एक ज्ञानवान पुत्र की शुभ सूचना देते है।"
قَالَ اَبَشَّرْتُمُون۪ي عَلٰٓى اَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ54
उसने कहा, "क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो, इस अवस्था में कि मेरा बुढापा आ गया है? तो अब मुझे किस बात की शुभ सूचना दे रहे हो?"
قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْقَانِط۪ينَ55
उन्होंने कहा, "हम तुम्हें सच्ची शुभ सूचना दे रहे हैं, तो तुम निराश न हो"
قَالَ وَمَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّه۪ٓ اِلَّا الضَّٓالُّونَ56
उसने कहा, "अपने रब की दयालुता से पथभ्रष्टों के सिवा और कौन निराश होगा?"
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ اَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ57
उसने कहा, "ऐ दूतो, तुम किस अभियान पर आए हो?"
قَالُٓوا اِنَّٓا اُرْسِلْنَٓا اِلٰى قَوْمٍ مُجْرِم۪ينَۙ58
वे बोले, "हम तो एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है,
اِلَّٓا اٰلَ لُوطٍۜ اِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ59
सिवाय लूत के घरवालों के। उन सबको तो हम बचा लेंगे,
اِلَّا امْرَاَتَهُ قَدَّرْنَٓاۙ اِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِر۪ينَ۟60
सिवाय उसकी पत्नी के - हमने निश्चित कर दिया है, वह तो पीछे रह जानेवालों में रहेंगी।"
فَلَمَّا جَٓاءَ اٰلَ لُوطٍۨ الْمُرْسَلُونَۙ61
फिर जब ये दूत लूत के यहाँ पहुँचे,
قَالَ اِنَّكُمْ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ62
तो उसने कहा, "तुम तो अपरिचित लोग हो।"
قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا ف۪يهِ يَمْتَرُونَ63
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हम तो तुम्हारे पास वही चीज़ लेकर आए है, जिसके विषय में वे सन्देह कर रहे थे
وَاَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَاِنَّا لَصَادِقُونَ64
और हम तुम्हारे पास यक़ीनी चीज़ लेकर आए है, और हम बिलकुल सच कह रहे है
فَاَسْرِ بِاَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ الَّيْلِ وَاتَّبِعْ اَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ اَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ65
अतएव अब तुम अपने घरवालों को लेकर रात्रि के किसी हिस्से में निकल जाओ, और स्वयं उन सबके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे। बस चले जाओ, जिधर का तुम्हे आदेश है।"
وَقَضَيْنَٓا اِلَيْهِ ذٰلِكَ الْاَمْرَ اَنَّ دَابِرَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِح۪ينَ66
हमने उसे अपना यह फ़ैसला पहुँचा दिया कि प्रातः होते-होते उनकी जड़ कट चुकी होगी
وَجَٓاءَ اَهْلُ الْمَد۪ينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ67
इतने में नगर के लोग ख़ुश-ख़ुश आ पहुँचे
قَالَ اِنَّ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ ضَيْف۪ي فَلَا تَفْضَحُونِۙ68
उसने कहा, "ये मेरे अतिथि है। मेरी फ़ज़ीहत मत करना,
وَاتَّقُوا اللّٰهَ وَلَا تُخْزُونِ69
अल्लाह का डर ऱखो, मुझे रुसवा न करो।"
قَالُٓوا اَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَم۪ينَ70
उन्होंने कहा, "क्या हमने तुम्हें दुनिया भर के लोगों का ज़िम्मा लेने से रोका नहीं था?"
قَالَ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ بَنَات۪ٓي اِنْ كُنْتُمْ فَاعِل۪ينَۜ71
उसने कहा, "तुमको यदि कुछ करना है, तो ये मेरी (क़ौम की) बेटियाँ (विधितः विवाह के लिए) मौजूद है।"
لَعَمْرُكَ اِنَّهُمْ لَف۪ي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ72
तुम्हारे जीवन की सौगन्ध, वे अपनी मस्ती में खोए हुए थे,
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِق۪ينَۙ73
अन्ततः पौ फटते-फटते एक भयंकर आवाज़ ने उन्हें आ लिया,
فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجّ۪يلٍۜ74
और हमने उस बस्ती को तलपट कर दिया, और उनपर कंकरीले पत्थर बरसाए
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّم۪ينَ75
निश्चय ही इसमें भापनेवालों के लिए निशानियाँ है
وَاِنَّهَا لَبِسَب۪يلٍ مُق۪يمٍ76
और वह (बस्ती) सार्वजनिक मार्ग पर है
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِلْمُؤْمِن۪ينَۜ77
निश्चय ही इसमें मोमिनों के लिए एक बड़ी निशानी है
وَاِنْ كَانَ اَصْحَابُ الْاَيْكَةِ لَظَالِم۪ينَۙ78
और निश्चय ही ऐसा वाले भी अत्याचारी थे,
فَانْتَقَمْنَا مِنْهُمْۢ وَاِنَّهُمَا لَبِاِمَامٍ مُب۪ينٍۜ۟79
फिर हमने उनसे भी बदला लिया, और ये दोनों (भू-भाग) खुले मार्ग पर स्थित है
وَلَقَدْ كَذَّبَ اَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَل۪ينَۙ80
हिज्रवाले भी रसूलों को झुठला चुके है
وَاٰتَيْنَاهُمْ اٰيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِض۪ينَۙ81
हमने तो उन्हें अपनी निशानियाँ प्रदान की थी, परन्तु वे उनकी उपेक्षा ही करते रहे
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا اٰمِن۪ينَ82
वे बड़ी बेफ़िक्री से पहाड़ो को काट-काटकर घर बनाते थे
فَاَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِح۪ينَۙ83
अन्ततः एक भयानक आवाज़ ने प्रातः होते- होते उन्हें आ लिया
فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَۜ84
फिर जो कुछ वे कमाते रहे, वह उनके कुछ काम न आ सका
وَمَا خَلَقْنَا السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَٓا اِلَّا بِالْحَقِّۜ وَاِنَّ السَّاعَةَ لَاٰتِيَةٌ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَم۪يلَ85
हमने तो आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके मध्य है, सोद्देश्य पैदा किया है, और वह क़ियामत की घड़ी तो अनिवार्यतः आनेवाली है। अतः तुम भली प्रकार दरगुज़र (क्षमा) से काम लो
اِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَل۪يمُ86
निश्चय ही तुम्हारा रब ही बड़ा पैदा करनेवाला, सब कुछ जाननेवाला है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَاكَ سَبْعًا مِنَ الْمَثَان۪ي وَالْقُرْاٰنَ الْعَظ۪يمَ87
हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया-
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ اِلٰى مَا مَتَّعْنَا بِه۪ٓ اَزْوَاجًا مِنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِن۪ينَ88
जो कुछ सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दी है, तुम उसपर अपनी आँखें न पसारो और न उनपर दुखी हो, तुम तो अपनी भुजाएँ मोमिनों के लिए झुकाए रखो,
وَقُلْ اِنّ۪ٓي اَنَا۬ النَّذ۪يرُ الْمُب۪ينُۚ89
और कह दो, "मैं तो साफ़-साफ़ चेतावनी देनेवाला हूँ।"
كَمَٓا اَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِم۪ينَۙ90
जिस प्रकार हमने हिस्सा-बख़रा करनेवालों पर उतारा था,
اَلَّذ۪ينَ جَعَلُوا الْقُرْاٰنَ عِض۪ينَ91
जिन्होंने (अपने) क़ुरआन को टुकड़े-टुकड़े कर डाला
فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ اَجْمَع۪ينَۙ92
अब तुम्हारे रब की क़सम! हम अवश्य ही उन सबसे उसके विषय में पूछेंगे
عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ93
जो कुछ वे करते रहे।
فَاصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَاَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِك۪ينَ94
अतः तु्म्हें जिस चीज़ का आदेश हुआ है, उसे हाँक-पुकारकर बयान कर दो, और मुशरिको की ओर ध्यान न दो
اِنَّا كَفَيْنَاكَ الْمُسْتَهْزِء۪ينَۙ95
उपहास करनेवालों के लिए हम तुम्हारी ओर से काफ़ी है
اَلَّذ۪ينَ يَجْعَلُونَ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ96
जो अल्लाह के साथ दूसरों को पूज्य-प्रभु ठहराते है, तो शीघ्र ही उन्हें मालूम हो जाएगा!
وَلَقَدْ نَعْلَمُ اَنَّكَ يَض۪يقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَۙ97
हम जानते है कि वे जो कुछ कहते है, उससे तुम्हारा दिल तंग होता है
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُنْ مِنَ السَّاجِد۪ينَۙ98
तो तुम अपने रब का गुणगान करो और सजदा करनेवालों में सम्मिलित रहो
وَاعْبُدْ رَبَّكَ حَتّٰى يَاْتِيَكَ الْيَق۪ينُ99
और अपने रब की बन्दगी में लगे रहो, यहाँ तक कि जो यक़ीनी है, वह तुम्हारे सामने आ जाए
16 · अन-नहल
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَتٰٓى اَمْرُ اللّٰهِ فَلَا تَسْتَعْجِلُوهُۜ سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ1
आ गया आदेश अल्लाह का, तो अब उसके लिए जल्दी न मचाओ। वह महान और उच्च है उस शिर्क से जो व कर रहे है
يُنَزِّلُ الْمَلٰٓئِكَةَ بِالرُّوحِ مِنْ اَمْرِه۪ عَلٰى مَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ٓ اَنْ اَنْذِرُٓوا اَنَّهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّٓا اَنَا۬ فَاتَّقُونِ2
वह फ़रिश्तों को अपने हुक्म की रूह (वह्यल) के साथ अपने जिस बन्दे पर चाहता है उतारता है कि "सचेत कर दो, मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तुम मेरा ही डर रखो।"
خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّۜ تَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ3
उसने आकाशों और धरती को सोद्देश्य पैदा किया। वह अत्यन्त उच्च है उस शिर्क से जो वे कर रहे है
خَلَقَ الْاِنْسَانَ مِنْ نُطْفَةٍ فَاِذَا هُوَ خَص۪يمٌ مُب۪ينٌ4
उसने मनुष्यों को एक बूँद से पैदा किया। फिर क्या देखते है कि वह खुला झगड़नेवाला बन गया!
وَالْاَنْعَامَ خَلَقَهَاۚ لَكُمْ ف۪يهَا دِفْءٌ وَمَنَافِعُ وَمِنْهَا تَاْكُلُونَۖ5
रहे पशु, उन्हें भी उसी ने पैदा किया, जिसमें तुम्हारे लिए ऊष्मा प्राप्त करने का सामान भी है और हैं अन्य कितने ही लाभ। उनमें से कुछ को तुम खाते भी हो
وَلَكُمْ ف۪يهَا جَمَالٌ ح۪ينَ تُر۪يحُونَ وَح۪ينَ تَسْرَحُونَۖ6
उनमें तुम्हारे लिए सौन्दर्य भी है, जबकि तुम सायंकाल उन्हें लाते और जबकि तुम उन्हें चराने ले जाते हो
وَتَحْمِلُ اَثْقَالَكُمْ اِلٰى بَلَدٍ لَمْ تَكُونُوا بَالِغ۪يهِ اِلَّا بِشِقِّ الْاَنْفُسِۜ اِنَّ رَبَّكُمْ لَرَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌۙ7
वे तुम्हारे बोझ ढोकर ऐसे भूभाग तक ले जाते हैं, जहाँ तुम जी-तोड़ परिश्रम के बिना नहीं पहुँच सकते थे। निस्संदेह तुम्हारा रब बड़ा ही करुणामय, दयावान है
وَالْخَيْلَ وَالْبِغَالَ وَالْحَم۪يرَ لِتَرْكَبُوهَا وَز۪ينَةًۜ وَيَخْلُقُ مَا لَا تَعْلَمُونَ8
और घोड़े और खच्चर और गधे भी पैदा किए, ताकि तुम उनपर सवार हो और शोभा का कारण भी। और वह उसे भी पैदा करता है, जिसे तुम नहीं जानते
وَعَلَى اللّٰهِ قَصْدُ السَّب۪يلِ وَمِنْهَا جَٓائِرٌۜ وَلَوْ شَٓاءَ لَهَدٰيكُمْ اَجْمَع۪ينَ۟9
अल्लाह के लिए ज़रूरी है उचित एवं अनुकूल मार्ग दिखाना और कुछ मार्ग टेढ़े भी है। यदि वह चाहता तो तुम सबको अवश्य सीधा मार्ग दिखा देता
هُوَ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً لَكُمْ مِنْهُ شَرَابٌ وَمِنْهُ شَجَرٌ ف۪يهِ تُس۪يمُونَ10
वही है जिसने आकाश से तुम्हारे लिए पानी उतारा, जिसे तुम पीते हो और उसी से पेड़ और वनस्पतियाँ भी उगती है, जिनमें तुम जानवरों को चराते हो
يُنْبِتُ لَكُمْ بِهِ الزَّرْعَ وَالزَّيْتُونَ وَالنَّخ۪يلَ وَالْاَعْنَابَ وَمِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ11
और उसी से वह तुम्हारे लिए खेतियाँ उगाता है और ज़ैतून, खजूर, अंगूर और हर प्रकार के फल पैदा करता है। निश्चय ही सोच-विचार करनेवालों के लिए इसमें एक निशानी है
وَسَخَّرَ لَكُمُ الَّيْلَ وَالنَّهَارَۙ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَۜ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِاَمْرِه۪ۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَۙ12
और उसने तुम्हारे लिए रात और दिन को और सूर्य और चन्द्रमा को कार्यरत कर रखा है। और तारे भी उसी की आज्ञा से कार्यरत है - निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है जो बुद्धि से काम लेते है-
وَمَا ذَرَاَ لَكُمْ فِي الْاَرْضِ مُخْتَلِفًا اَلْوَانُهُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ13
और धरती में तुम्हारे लिए जो रंग-बिरंग की चीज़े बिखेर रखी है, उसमें भी उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो शिक्षा लेनेवाले है
وَهُوَ الَّذ۪ي سَخَّرَ الْبَحْرَ لِتَاْكُلُوا مِنْهُ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُوا مِنْهُ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَاۚ وَتَرَى الْفُلْكَ مَوَاخِرَ ف۪يهِ وَلِتَبْتَغُوا مِنْ فَضْلِه۪ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ14
वही तो है जिसने समुद्र को वश में किया है, ताकि तुम उससे ताज़ा मांस लेकर खाओ और उससे आभूषण निकालो, जिसे तुम पहनते हो। तुम देखते ही हो कि नौकाएँ उसको चीरती हुई चलती हैं (ताकि तुम सफ़र कर सको) और ताकि तुम उसका अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम कृतज्ञता दिखलाओ
وَاَلْقٰى فِي الْاَرْضِ رَوَاسِيَ اَنْ تَم۪يدَ بِكُمْ وَاَنْهَارًا وَسُبُلًا لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَۙ15
और उसने धरती में अटल पहाड़ डाल दिए, कि वह तुम्हें लेकर झुक न पड़े। और नदियाँ बनाई और प्राकृतिक मार्ग बनाए, ताकि तुम मार्ग पा सको
وَعَلَامَاتٍۜ وَبِالنَّجْمِ هُمْ يَهْتَدُونَ16
और मार्ग चिन्ह भी बनाए और तारों के द्वारा भी लोग मार्ग पर लेते है
اَفَمَنْ يَخْلُقُ كَمَنْ لَا يَخْلُقُۜ اَفَلَا تَذَكَّرُونَ17
फिर क्या जो पैदा करता है वह उस जैसा हो सकता है, जो पैदा नहीं करता? फिर क्या तुम्हें होश नहीं होता?
وَاِنْ تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللّٰهِ لَا تُحْصُوهَاۜ اِنَّ اللّٰهَ لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ18
और यदि तुम अल्लाह की नेमतों (कृपादानों) को गिनना चाहो तो उन्हें पूर्ण-रूप से गिन नहीं सकते। निस्संदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
وَاللّٰهُ يَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ19
और अल्लाह जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ प्रकट करते हो
وَالَّذ۪ينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ لَا يَخْلُقُونَ شَيْـًٔا وَهُمْ يُخْلَقُونَۜ20
और जिन्हें वे अल्लाह से हटकर पुकारते है वे किसी चीज़ को भी पैदा नहीं करते, बल्कि वे स्वयं पैदा किए जाते है
اَمْوَاتٌ غَيْرُ اَحْيَٓاءٍۚ وَمَا يَشْعُرُونَۙ اَيَّانَ يُبْعَثُونَ۟21
मृत है, जिनमें प्राण नहीं। उन्हें मालूम नहीं कि वे कब उठाए जाएँगे
اِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌۚ فَالَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ قُلُوبُهُمْ مُنْكِرَةٌ وَهُمْ مُسْتَكْبِرُونَ22
तुम्हारा पूज्य-प्रभु अकेला प्रभु-पूज्य है। किन्तु जो आख़िरत में विश्वास नहीं रखते, उनके दिलों को इनकार है। वे अपने आपको बड़ा समझ रहे है
لَا جَرَمَ اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَۜ اِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِر۪ينَ23
निश्चय ही अल्लाह भली-भाँति जानता है, जो कुछ वे छिपाते है और जो कुछ प्रकट करते है। उसे ऐसे लोग प्रिय नहीं, जो अपने आपको बड़ा समझते हो
وَاِذَا ق۪يلَ لَهُمْ مَاذَٓا اَنْزَلَ رَبُّكُمْۙ قَالُٓوا اَسَاط۪يرُ الْاَوَّل۪ينَۙ24
और जब उनसे कहा जाता है कि "तुम्हारे रब ने क्या अवतरित किया है?" कहते है, "वे तो पहले लोगों की कहानियाँ है।"
لِيَحْمِلُٓوا اَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ الْقِيٰمَةِۙ وَمِنْ اَوْزَارِ الَّذ۪ينَ يُضِلُّونَهُمْ بِغَيْرِ عِلْمٍۜ اَلَا سَٓاءَ مَا يَزِرُونَ۟25
इसका परिणाम यह होगा कि वे क़ियामत के दिन अपने बोझ भी पूरे उठाएँगे और उनके बोझ में से भी जिन्हें वे अज्ञानता के कारण पथभ्रष्ट कर रहे है। सुन लो, बहुत ही बुरा है वह बोझ जो वे उठा रहे है!
قَدْ مَكَرَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَاَتَى اللّٰهُ بُنْيَانَهُمْ مِنَ الْقَوَاعِدِ فَخَرَّ عَلَيْهِمُ السَّقْفُ مِنْ فَوْقِهِمْ وَاَتٰيهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ26
जो उनसे पहले गुज़र है वे भी मक्कारियाँ कर चुके है। फिर अल्लाह उनके भवन पर नीवों की ओर से आया और छत उनपर उनके ऊपर से आ गिरी और ऐसे रुख़ से उनपर यातना आई जिसका उन्हें एहसास तक न था
ثُمَّ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ يُخْز۪يهِمْ وَيَقُولُ اَيْنَ شُرَكَٓاءِيَ الَّذ۪ينَ كُنْتُمْ تُشَٓاقُّونَ ف۪يهِمْۜ قَالَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْعِلْمَ اِنَّ الْخِزْيَ الْيَوْمَ وَالسُّٓوءَ عَلَى الْكَافِر۪ينَۙ27
फिर क़ियामत के दिन अल्लाह उन्हें अपमानित करेगा और कहेगा, "कहाँ है मेरे वे साझीदार, जिनके लिए तुम लड़ते-झगड़ते थे?" जिन्हें ज्ञान प्राप्त था वे कहेंगे, "निश्चय ही आज रुसवाई और ख़राबी है इनकार करनेवालों के लिए।"
اَلَّذ۪ينَ تَتَوَفّٰيهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُ ظَالِم۪ٓي اَنْفُسِهِمْۖ فَاَلْقَوُا السَّلَمَ مَا كُنَّا نَعْمَلُ مِنْ سُٓوءٍۜ بَلٰٓى اِنَّ اللّٰهَ عَل۪يمٌ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ28
जिनकी रूहों को फ़रिश्ते इस दशा में ग्रस्त करते है कि वे अपने आप पर अत्याचार कर रहे होते है, तब आज्ञाकारी एवं वशीभूत होकर आ झुकते है कि "हम तो कोई बुराई नहीं करते थे।" "नहीं, बल्कि अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम करते रहे हो
فَادْخُلُٓوا اَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ فَلَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّر۪ينَ29
तो अब जहन्नम के द्वारों में, उसमें सदैव रहने के लिए प्रवेश करो। अतः निश्चय ही बहुत ही बुरा ठिकाना है यह अहंकारियों का।"
وَق۪يلَ لِلَّذ۪ينَ اتَّقَوْا مَاذَٓا اَنْزَلَ رَبُّكُمْۜ قَالُوا خَيْرًاۜ لِلَّذ۪ينَ اَحْسَنُوا ف۪ي هٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌۜ وَلَدَارُ الْاٰخِرَةِ خَيْرٌۜ وَلَنِعْمَ دَارُ الْمُتَّق۪ينَۙ30
दूसरी ओर जो डर रखनेवाले है उनसे कहा जाता है, "तुम्हारे रब ने क्या अवतरित किया?" वे कहते है, "जो सबसे उत्तम है।" जिन लोगों ने भलाई की उनकी इस दुनिया में भी अच्छी हालत है और आख़िरत का घर तो अच्छा है ही। और क्या ही अच्छा घर है डर रखनेवालों का!
جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ لَهُمْ ف۪يهَا مَا يَشَٓاؤُ۫نَۜ كَذٰلِكَ يَجْزِي اللّٰهُ الْمُتَّق۪ينَۙ31
सदैव रहने के बाग़ जिनमें वे प्रवेश करेंगे, उनके नीचे नहरें बह रहीं होंगी, उनके लिए वहाँ वह सब कुछ संचित होगा, जो वे चाहे। अल्लाह डर रखनेवालों को ऐसा ही प्रतिदान प्रदान करता है
اَلَّذ۪ينَ تَتَوَفّٰيهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُ طَيِّب۪ينَۙ يَقُولُونَ سَلَامٌ عَلَيْكُمُۙ ادْخُلُوا الْجَنَّةَ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ32
जिनकी रूहों को फ़रिश्ते इस दशा में ग्रस्त करते है कि वे पाक और नेक होते है, वे कहते है, "तुम पर सलाम हो! प्रवेश करो जन्नत में उसके बदले में जो कुछ तुम करते रहे हो।"
هَلْ يَنْظُرُونَ اِلَّٓا اَنْ تَاْتِيَهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُ اَوْ يَاْتِيَ اَمْرُ رَبِّكَۜ كَذٰلِكَ فَعَلَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۜ وَمَا ظَلَمَهُمُ اللّٰهُ وَلٰكِنْ كَانُٓوا اَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ33
क्या अब वे इसी की प्रतीक्षा कर रहे है कि फ़रिश्ते उनके पास आ पहुँचे या तेरे रब का आदेश ही आ जाए? ऐसा ही उन लोगो ने भी किया, जो इनसे पहले थे। अल्लाह ने उनपर अत्याचार नहीं किया, किन्तु वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करते रहे
فَاَصَابَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ۟34
अन्ततः उनकी करतूतों की बुराइयाँ उनपर आ पड़ी, और जिसका उपहास वे कहते थे, उसी ने उन्हें आ घेरा
وَقَالَ الَّذ۪ينَ اَشْرَكُوا لَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَا عَبَدْنَا مِنْ دُونِه۪ مِنْ شَيْءٍ نَحْنُ وَلَٓا اٰبَٓاؤُ۬نَا وَلَا حَرَّمْنَا مِنْ دُونِه۪ مِنْ شَيْءٍۜ كَذٰلِكَ فَعَلَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۚ فَهَلْ عَلَى الرُّسُلِ اِلَّا الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ35
शिर्क करनेवालों का कहना है, "यदि अल्लाह चाहता तो उससे हटकर किसी चीज़ की न हम बन्दगी करते और न हमारे बाप-दादा ही और न हम उसके बिना किसी चीज़ को अवैध ठहराते।" उनसे पहले के लोगों ने भी ऐसा ही किया। तो क्या साफ़-साफ़ सन्देश पहुँचा देने के सिवा रसूलों पर कोई और भी ज़िम्मेदारी है?
وَلَقَدْ بَعَثْنَا ف۪ي كُلِّ اُمَّةٍ رَسُولًا اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ وَاجْتَنِبُوا الطَّاغُوتَۚ فَمِنْهُمْ مَنْ هَدَى اللّٰهُ وَمِنْهُمْ مَنْ حَقَّتْ عَلَيْهِ الضَّلَالَةُۜ فَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَانْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّب۪ينَ36
हमने हर समुदाय में कोई न कोई रसूल भेजा कि "अल्लाह की बन्दगी करो और ताग़ूत से बचो।" फिर उनमें से किसी को तो अल्लाह ने सीधे मार्ग पर लगाया और उनमें से किसी पर पथभ्रष्ट सिद्ध होकर रही। फिर तनिक धरती में चल-फिरकर तो देखो कि झुठलानेवालों का कैसा परिणाम हुआ
اِنْ تَحْرِصْ عَلٰى هُدٰيهُمْ فَاِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْد۪ي مَنْ يُضِلُّ وَمَا لَهُمْ مِنْ نَاصِر۪ينَ37
यद्यपि इस बात का कि वे राह पर आ जाएँ तुम्हें लालच ही क्यों न हो, किन्तु अल्लाह जिसे भटका देता है, उसे वह मार्ग नहीं दिखाया करता और ऐसे लोगों का कोई सहायक भी नहीं होता
وَاَقْسَمُوا بِاللّٰهِ جَهْدَ اَيْمَانِهِمْۙ لَا يَبْعَثُ اللّٰهُ مَنْ يَمُوتُۜ بَلٰى وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَۙ38
उन्होंने अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाकर कहा, "जो मर जाता है उसे अल्लाह नहीं उठाएगा।" क्यों नहीं? यह तो एक वादा है, जिसे पूरा करना उसके लिए अनिवार्य है - किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं। -
لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذ۪ي يَخْتَلِفُونَ ف۪يهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِب۪ينَ39
ताकि वह उनपर उसको स्पष्ट। कर दे, जिसके विषय में वे विभेद करते है और इसलिए भी कि इनकार करनेवाले जान लें कि वे झूठे थे
اِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ اِذَٓا اَرَدْنَاهُ اَنْ نَقُولَ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ۟40
किसी चीज़ के लिए जब हम उसका इरादा करते है तो हमारा कहना बस यही होता है कि उससे कहते है, "हो जा!" और वह हो जाती है
وَالَّذ۪ينَ هَاجَرُوا فِي اللّٰهِ مِنْ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةًۜ وَلَاَجْرُ الْاٰخِرَةِ اَكْبَرُۢ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَۙ41
और जिन लोगों ने इसके पश्चात कि उनपर ज़ुल्म ढाया गया था अल्लाह के लिए घर-बार छोड़ा उन्हें हम दुनिया में भी अच्छा ठिकाना देंगे और आख़िरत का प्रतिदान तो बहुत बड़ा है। क्या ही अच्छा होता कि वे जानते
اَلَّذ۪ينَ صَبَرُوا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ42
ये वे लोग है जो जमे रहे और वे अपने रब पर भरोसा रखते है
وَمَٓا اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ اِلَّا رِجَالًا نُوح۪ٓي اِلَيْهِمْ فَسْـَٔلُٓوا اَهْلَ الذِّكْرِ اِنْ كُنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَۙ43
हमने तुमसे पहले भी पुरुषों ही को रसूल बनाकर भेजा था - जिनकी ओर हम प्रकाशना करते रहे है। यदि तुम नहीं जानते तो अनुस्मृतिवालों से पूछ लो
بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِۜ وَاَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ الذِّكْرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ اِلَيْهِمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ44
स्पष्ट प्रमाणों और ज़बूरों (किताबों) के साथ। और अब यह अनुस्मृति तुम्हारी ओर हमने अवतरित की, ताकि तुम लोगों के समक्ष खोल-खोलकर बयान कर दो जो कुछ उनकी ओर उतारा गया है और ताकि वे सोच-विचार करें
اَفَاَمِنَ الَّذ۪ينَ مَكَرُوا السَّيِّـَٔاتِ اَنْ يَخْسِفَ اللّٰهُ بِهِمُ الْاَرْضَ اَوْ يَاْتِيَهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَۙ45
फिर क्या वे लोग जो ऐसी बुरी-बुरी चालें चल रहे है, इस बात से निश्चिन्त हो गए है कि अल्लाह उन्हें धरती में धँसा दे या ऐसे मौके से उनपर यातना आ जाए जिसका उन्हें एहसास तक न हो?
اَوْ يَاْخُذَهُمْ ف۪ي تَقَلُّبِهِمْ فَمَا هُمْ بِمُعْجِز۪ينَۙ46
या उन्हें चलते-फिरते ही पकड़ ले, वे क़ाबू से बाहर निकल जानेवाले तो है नहीं?
اَوْ يَاْخُذَهُمْ عَلٰى تَخَوُّفٍۜ فَاِنَّ رَبَّكُمْ لَرَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌ47
क्या अल्लाह की पैदा की हुई किसी चीज़ को उन्होंने देखा नहीं कि किस प्रकार उसकी परछाइयाँ अल्लाह को सजदा करती और विनम्रता दिखाती हुई दाएँ और बाएँ ढलती है?
اَوَلَمْ يَرَوْا اِلٰى مَا خَلَقَ اللّٰهُ مِنْ شَيْءٍ يَتَفَيَّؤُ۬ا ظِلَالُهُ عَنِ الْيَم۪ينِ وَالشَّمَٓائِلِ سُجَّدًا لِلّٰهِ وَهُمْ دَاخِرُونَ48
या वह उन्हें त्रस्त अवस्था में पकड़ ले? किन्तु तुम्हारा रब तो बड़ा ही करुणामय, दयावान है
وَلِلّٰهِ يَسْجُدُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِ مِنْ دَٓابَّةٍ وَالْمَلٰٓئِكَةُ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ49
और आकाशों और धरती में जितने भी जीवधारी है वे सब अल्लाह ही को सजदा करते है और फ़रिश्ते भी और वे घमंड बिलकुल नहीं करते
يَخَافُونَ رَبَّهُمْ مِنْ فَوْقِهِمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ۟50
अपने ऊपर से अपने रब का डर रखते है और जो उन्हें आदेश होता है, वही करते है
وَقَالَ اللّٰهُ لَا تَتَّخِذُٓوا اِلٰهَيْنِ اثْنَيْنِۚ اِنَّمَا هُوَ اِلٰهٌ وَاحِدٌۚ فَاِيَّايَ فَارْهَبُونِ51
अल्लाह का फ़रमान है, "दो-दो पूज्य-प्रभु न बनाओ, वह तो बस अकेला पूज्य-प्रभु है। अतः मुझी से डरो।"
وَلَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَلَهُ الدّ۪ينُ وَاصِبًاۜ اَفَغَيْرَ اللّٰهِ تَتَّقُونَ52
जो कुछ आकाशों और धरती में है सब उसी का है। उसी का दीन (धर्म) स्थायी और अनिवार्य है। फिर क्या अल्लाह के सिवा तुम किसी और का डर रखोगे?
وَمَا بِكُمْ مِنْ نِعْمَةٍ فَمِنَ اللّٰهِ ثُمَّ اِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فَاِلَيْهِ تَجْـَٔرُونَۚ53
तुम्हारे पास जो भी नेमत है वह अल्लाह ही की ओर से है। फिर जब तुम्हे कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो तुम उसी से फ़रियाद करते हो
ثُمَّ اِذَا كَشَفَ الضُّرَّ عَنْكُمْ اِذَا فَر۪يقٌ مِنْكُمْ بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَۙ54
फिर जब वह उस तकलीफ़ को तुमसे टाल देता है, तो क्या देखते है कि तुममें से कुछ लोग अपने रब के साथ साझीदार ठहराने लगते है,
لِيَكْفُرُوا بِمَٓا اٰتَيْنَاهُمْۜ فَتَمَتَّعُوا۠ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ55
कि परिणामस्वरूप जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसके प्रति कृतघ्नता दिखलाएँ। अच्छा, कुछ मज़े ले लो, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा
وَيَجْعَلُونَ لِمَا لَا يَعْلَمُونَ نَص۪يبًا مِمَّا رَزَقْنَاهُمْۜ تَاللّٰهِ لَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنْتُمْ تَفْتَرُونَ56
हमने उन्हें जो आजीविका प्रदान की है उसमें वे उसका हिस्सा लगाते है जिन्हें वे जानते भी नहीं। अल्लाह की सौगंध! तुम जो झूठ घड़ते हो उसके विषय में तुमसे अवश्य पूछा जाएगा
وَيَجْعَلُونَ لِلّٰهِ الْبَنَاتِ سُبْحَانَهُۙ وَلَهُمْ مَا يَشْتَهُونَ57
और वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते है - महान और उच्च है वह - और अपने लिए वह, जो वे चाहें
وَاِذَا بُشِّرَ اَحَدُهُمْ بِالْاُنْثٰى ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظ۪يمٌۚ58
और जब उनमें से किसी को बेटी की शुभ सूचना मिलती है तो उसके चहरे पर कलौंस छा जाती है और वह घुटा-घुटा रहता है
يَتَوَارٰى مِنَ الْقَوْمِ مِنْ سُٓوءِ مَا بُشِّرَ بِه۪ۜ اَيُمْسِكُهُ عَلٰى هُونٍ اَمْ يَدُسُّهُ فِي التُّرَابِۜ اَلَا سَٓاءَ مَا يَحْكُمُونَ59
जो शुभ सूचना उसे दी गई वह (उसकी दृष्टि में) ऐसी बुराई की बात हुई जो उसके कारण वह लोगों से छिपता फिरता है कि अपमान सहन करके उसे रहने दे या उसे मिट्टी में दबा दे। देखो, कितना बुरा फ़ैसला है जो वे करते है!
لِلَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ مَثَلُ السَّوْءِۚ وَلِلّٰهِ الْمَثَلُ الْاَعْلٰىۜ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ۟60
जो लोग आख़िरत को नहीं मानते बुरी मिसाल है उनकी। रहा अल्लाह, तो उसकी मिसाल अत्यन्त उच्च है। वह तो प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَلَوْ يُؤَاخِذُ اللّٰهُ النَّاسَ بِظُلْمِهِمْ مَا تَرَكَ عَلَيْهَا مِنْ دَٓابَّةٍ وَلٰكِنْ يُؤَخِّرُهُمْ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّىۚ فَاِذَا جَٓاءَ اَجَلُهُمْ لَا يَسْتَاْخِرُونَ سَاعَةً وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ61
यदि अल्लाह लोगों को उनके अत्याचार पर पकड़ने ही लग जाता तो धरती पर किसी जीवधारी को न छोड़ता, किन्तु वह उन्हें एक निश्चित समय तक टाले जाता है। फिर जब उनका नियत समय आ जाता है तो वे न तो एक घड़ी पीछे हट सकते है और न आगे बढ़ सकते है
وَيَجْعَلُونَ لِلّٰهِ مَا يَكْرَهُونَ وَتَصِفُ اَلْسِنَتُهُمُ الْكَذِبَ اَنَّ لَهُمُ الْحُسْنٰىۜ لَا جَرَمَ اَنَّ لَهُمُ النَّارَ وَاَنَّهُمْ مُفْرَطُونَ62
वे अल्लाह के लिए वह कुछ ठहराते है, जिसे ख़ुद अपने लिए नापसन्द करते है और उनकी ज़बाने झूठ कहती है कि उनके लिए अच्छा परिणाम है। निस्संदेह उनके लिए आग है और वे उसी में पड़े छोड़ दिए जाएँगे
تَاللّٰهِ لَقَدْ اَرْسَلْنَٓا اِلٰٓى اُمَمٍ مِنْ قَبْلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ اَعْمَالَهُمْ فَهُوَ وَلِيُّهُمُ الْيَوْمَ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ63
अल्लाह की सौगंध! हम तुमसे पहले भी कितने समुदायों की ओर रसूल भेज चुके है, किन्तु शैतान ने उनकी करतूतों को उनके लिए सुहावना बना दिया। तो वही आज भी उनका संरक्षक है। उनके लिए तो एक दुखद यातना है
وَمَٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ اِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي اخْتَلَفُوا ف۪يهِۙ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ64
हमने यह किताब तुमपर इसीलिए अवतरित की है कि जिसमें वे विभेद कर रहे है उसे तुम उनपर स्पष्टा कर दो और यह मार्गदर्शन और दयालुता है उन लोगों के लिए जो ईमान लाएँ
وَاللّٰهُ اَنْزَلَ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً فَاَحْيَا بِهِ الْاَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَسْمَعُونَ۟65
और अल्लाह ही ने आकाश से पानी बरसाया। फिर उसके द्वारा धरती को उसके मृत हो जाने के पश्चात जीवित किया। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए बड़ी निशानी है जो सुनते है
وَاِنَّ لَكُمْ فِي الْاَنْعَامِ لَعِبْرَةًۜ نُسْق۪يكُمْ مِمَّا ف۪ي بُطُونِه۪ مِنْ بَيْنِ فَرْثٍ وَدَمٍ لَبَنًا خَالِصًا سَٓائِغًا لِلشَّارِب۪ينَ66
और तुम्हारे लिए चौपायों में से एक बड़ी शिक्षा-सामग्री है, जो कुछ उनके पेटों में है उसमें से गोबर और रक्त से मध्य से हम तुम्हे विशुद्ध दूध पिलाते है, जो पीनेवालों के लिए अत्यन्त प्रिय है,
وَمِنْ ثَمَرَاتِ النَّخ۪يلِ وَالْاَعْنَابِ تَتَّخِذُونَ مِنْهُ سَكَرًا وَرِزْقًا حَسَنًاۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ67
और खजूरों और अंगूरों के फलों से भी, जिससे तुम मादक चीज़ भी तैयार कर लेते हो और अच्छी रोज़ी भी। निश्चय ही इसमें बुद्धि से काम लेनेवाले लोगों के लिए एक बड़ी निशानी है
وَاَوْحٰى رَبُّكَ اِلَى النَّحْلِ اَنِ اتَّخِذ۪ي مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا وَمِنَ الشَّجَرِ وَمِمَّا يَعْرِشُونَۙ68
और तुम्हारे रब ने मुधमक्खी के जी में यह बात डाल दी कि "पहाड़ों में और वृक्षों में और लोगों के बनाए हुए छत्रों में घर बना
ثُمَّ كُل۪ي مِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِ فَاسْلُك۪ي سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلًاۜ يَخْرُجُ مِنْ بُطُونِهَا شَرَابٌ مُخْتَلِفٌ اَلْوَانُهُ ف۪يهِ شِفَٓاءٌ لِلنَّاسِۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ69
फिर हर प्रकार के फल-फूलों से ख़ुराक ले और अपने रब के समतम मार्गों पर चलती रह।" उसके पेट से विभिन्न रंग का एक पेय निकलता है, जिसमें लोगों के लिए आरोग्य है। निश्चय ही सोच-विचार करनेवाले लोगों के लिए इसमें एक बड़ी निशानी है
وَاللّٰهُ خَلَقَكُمْ ثُمَّ يَتَوَفّٰيكُمْ وَمِنْكُمْ مَنْ يُرَدُّ اِلٰٓى اَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْ لَا يَعْلَمَ بَعْدَ عِلْمٍ شَيْـًٔاۜ اِنَّ اللّٰهَ عَل۪يمٌ قَد۪يرٌ۟70
अल्लाह ने तुम्हें पैदा किया। फिर वह तुम्हारी आत्माओं को ग्रस्त कर लेता है और तुममें से कोई (बुढापे की) निकृष्ट तम अवस्था की ओर फिर जाता है, कि (परिणामस्वरूप) जानने के पश्चात फिर वह कुछ न जाने। निस्संदेह अल्लाह सर्वज्ञ, बड़ा सामर्थ्यवान है
وَاللّٰهُ فَضَّلَ بَعْضَكُمْ عَلٰى بَعْضٍ فِي الرِّزْقِۚ فَمَا الَّذ۪ينَ فُضِّلُوا بِرَٓادّ۪ي رِزْقِهِمْ عَلٰى مَا مَلَكَتْ اَيْمَانُهُمْ فَهُمْ ف۪يهِ سَوَٓاءٌۜ اَفَبِنِعْمَةِ اللّٰهِ يَجْحَدُونَ71
और अल्लाह ने तुममें से किसी को किसी पर रोज़ी में बड़ाई दी है। किन्तु जिनको बड़ाई दी गई है वे ऐसे नहीं है कि अपनी रोज़ी उनकी ओर फेर दिया करते हों, जो उनके क़ब्ज़े में है कि वे सब इसमें बराबर हो जाएँ। फिर क्या अल्लाह के अनुग्रह का उन्हें इनकार है?
وَاللّٰهُ جَعَلَ لَكُمْ مِنْ اَنْفُسِكُمْ اَزْوَاجًا وَجَعَلَ لَكُمْ مِنْ اَزْوَاجِكُمْ بَن۪ينَ وَحَفَدَةً وَرَزَقَكُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِۜ اَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُونَ وَبِنِعْمَتِ اللّٰهِ هُمْ يَكْفُرُونَۙ72
और अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए तुम्हारी सहजाति पत्नियों बनाई और तुम्हारी पत्नियों से तुम्हारे लिए पुत्र और पौत्र पैदा किए और तुम्हे अच्छी पाक चीज़ों की रोज़ी प्रदान की; तो क्या वे मिथ्या को मानते है और अल्लाह के अनुग्रह ही का उन्हें इनकार है?
وَيَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَهُمْ رِزْقًا مِنَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ شَيْـًٔا وَلَا يَسْتَط۪يعُونَۚ73
और अल्लाह से हटकर उन्हें पूजते है, जिन्हें आकाशों और धरती से रोज़ी प्रदान करने का कुछ भी अधिकार प्राप्त नहीं है और न उन्हें कोई सामर्थ्य ही प्राप्त है
فَلَا تَضْرِبُوا لِلّٰهِ الْاَمْثَالَۜ اِنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ وَاَنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ74
अतः अल्लाह के लिए मिसालें न घड़ो। जानता अल्लाह है, तुम नहीं जानते
ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا عَبْدًا مَمْلُوكًا لَا يَقْدِرُ عَلٰى شَيْءٍ وَمَنْ رَزَقْنَاهُ مِنَّا رِزْقًا حَسَنًا فَهُوَ يُنْفِقُ مِنْهُ سِرًّا وَجَهْرًاۜ هَلْ يَسْتَوُ۫نَۜ اَلْحَمْدُ لِلّٰهِۜ بَلْ اَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ75
अल्लाह ने एक मिसाल पेश की है: एक ग़ुलाम है, जिसपर दूसरे का अधिकार है, उसे किसी चीज़ पर अधिकार प्राप्त नहीं। इसके विपरीत एक वह व्यक्ति है, जिसे हमने अपनी ओर से अच्छी रोज़ी प्रदान की है, फिर वह उसमें से खुले और छिपे ख़र्च करता है। तो क्या वे परस्पर समान है? प्रशंसा अल्लाह के लिए है! किन्तु उनमें अधिकतर लोग जानते नहीं
وَضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا رَجُلَيْنِ اَحَدُهُمَٓا اَبْكَمُ لَا يَقْدِرُ عَلٰى شَيْءٍ وَهُوَ كَلٌّ عَلٰى مَوْلٰيهُۙ اَيْنَمَا يُوَجِّهْهُ لَا يَاْتِ بِخَيْرٍۜ هَلْ يَسْتَو۪ي هُوَۙ وَمَنْ يَاْمُرُ بِالْعَدْلِۙ وَهُوَ عَلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ۟76
अल्लाह ने एक और मिसाल पेश की है: दो व्यक्ति है। उनमें से एक गूँगा है। किसी चीज़ पर उसे अधिकार प्राप्त नहीं। वह अपने स्वामी पर एक बोझ है - उसे वह जहाँ भेजता है, कुछ भला करके नहीं लाता। क्या वह और जो न्याय का आदेश देता है और स्वयं भी सीधे मार्ग पर है वह, समान हो सकते है?
وَلِلّٰهِ غَيْبُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَمَٓا اَمْرُ السَّاعَةِ اِلَّا كَلَمْحِ الْبَصَرِ اَوْ هُوَ اَقْرَبُۜ اِنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ77
आकाशों और धरती के रहस्यों का सम्बन्ध अल्लाह ही से है। और उस क़ियामत की घड़ी का मामला तो बस ऐसा है जैसे आँखों का झपकना या वह इससे भी अधिक निकट है। निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्ती है
وَاللّٰهُ اَخْرَجَكُمْ مِنْ بُطُونِ اُمَّهَاتِكُمْ لَا تَعْلَمُونَ شَيْـًٔاۙ وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْاَبْصَارَ وَالْاَفْـِٔدَةَۙ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ78
अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारी माँओ के पेट से इस दशा में निकाला कि तुम कुछ जानते न थे। उसने तुम्हें कान, आँखें और दिल दिए, ताकि तुम कृतज्ञता दिखलाओ
اَلَمْ يَرَوْا اِلَى الطَّيْرِ مُسَخَّرَاتٍ ف۪ي جَوِّ السَّمَٓاءِۜ مَا يُمْسِكُهُنَّ اِلَّا اللّٰهُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ79
क्या उन्होंने पक्षियों को नभ मंडल में वशीभूत नहीं देखा? उन्हें तो बस अल्लाह ही थामें हुए होता है। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए कितनी ही निशानियाँ है जो ईमान लाएँ
وَاللّٰهُ جَعَلَ لَكُمْ مِنْ بُيُوتِكُمْ سَكَنًا وَجَعَلَ لَكُمْ مِنْ جُلُودِ الْاَنْعَامِ بُيُوتًا تَسْتَخِفُّونَهَا يَوْمَ ظَعْنِكُمْ وَيَوْمَ اِقَامَتِكُمْۙ وَمِنْ اَصْوَافِهَا وَاَوْبَارِهَا وَاَشْعَارِهَٓا اَثَاثًا وَمَتَاعًا اِلٰى ح۪ينٍ80
और अल्लाह ने तुम्हारे घरों को तुम्हारे लिए टिकने की जगह बनाया है और जानवरों की खालों से भी तुम्हारे लिए घर बनाए - जिन्हें तुम अपनी यात्रा के दिन और अपने ठहरने के दिन हल्का-फुलका पाते हो - और एक अवधि के लिए उनके ऊन, उनके लोमचर्म और उनके बालों से कितने ही सामान और बरतने की चीज़े बनाई
وَاللّٰهُ جَعَلَ لَكُمْ مِمَّا خَلَقَ ظِلَالًا وَجَعَلَ لَكُمْ مِنَ الْجِبَالِ اَكْنَانًا وَجَعَلَ لَكُمْ سَرَاب۪يلَ تَق۪يكُمُ الْحَرَّ وَسَرَاب۪يلَ تَق۪يكُمْ بَاْسَكُمْۜ كَذٰلِكَ يُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْلِمُونَ81
और अल्लाह ने तुम्हारे लिए अपनी पैदा की हुई चीज़ों से छाँवों का प्रबन्ध किया और पहाड़ो में तुम्हारे लिए छिपने के स्थान बनाए और तुम्हें लिबास दिए जो गर्मी से बचाते है और कुछ अन्य वस्त्र भी दिए जो तुम्हारी लड़ाई में तुम्हारे लिए बचाव का काम करते है। इस प्रकार वह तुमपर अपनी नेमत पूरी करता है, ताकि तुम आज्ञाकारी बनो
فَاِنْ تَوَلَّوْا فَاِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ82
फिर यदि वे मुँह मोड़ते है तो तुम्हारा दायित्व तो केवल साफ़-साफ़ सन्देश पहुँचा देना है
يَعْرِفُونَ نِعْمَتَ اللّٰهِ ثُمَّ يُنْكِرُونَهَا وَاَكْثَرُهُمُ الْكَافِرُونَ۟83
वे अल्लाह की नेमत को पहचानते है, फिर उसका इनकार करते है और उनमें अधिकतर तो अकृतज्ञ है
وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِنْ كُلِّ اُمَّةٍ شَه۪يدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ84
याद करो जिस दिन हम हर समुदाय में से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर जिन्होंने इनकार किया होगा उन्हें कोई अनुमति प्राप्त न होगी। और न उन्हें इसका अवसर ही दिया जाएगा वे उसे राज़ी कर लें
وَاِذَا رَاَ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا الْعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ وَلَا هُمْ يُنْظَرُونَ85
और जब वे लोग जिन्होंने अत्याचार किया, यातना देख लेंगे तो न वह उनके लिए हलकी की जाएगी और न उन्हें मुहलत ही मिलेगी
وَاِذَا رَاَ الَّذ۪ينَ اَشْرَكُوا شُرَكَٓاءَهُمْ قَالُوا رَبَّنَا هٰٓؤُ۬لَٓاءِ شُرَكَٓاؤُ۬نَا الَّذ۪ينَ كُنَّا نَدْعُوا مِنْ دُونِكَۚ فَاَلْقَوْا اِلَيْهِمُ الْقَوْلَ اِنَّكُمْ لَكَاذِبُونَۚ86
और जब वे लोग जिन्होंने शिर्क किया अपने ठहराए हुए साझीदारों को देखेंगे तो कहेंगे, "हमारे रब! यही हमारे वे साझीदार है जिन्हें हम तुझसे हटकर पुकारते थे।" इसपर वे उनकी ओर बात फेंक मारेंगे कि "तुम बिलकुल झूठे हो।"
وَاَلْقَوْا اِلَى اللّٰهِ يَوْمَئِذٍۨ السَّلَمَ وَضَلَّ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَفْتَرُونَ87
उस दिन वे अल्लाह के आगे आज्ञाकारी एवं वशीभूत होकर आ पड़ेगे। और जो कुछ वे घड़ा करते थे वह सब उनसे खोकर रह जाएगा
اَلَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ زِدْنَاهُمْ عَذَابًا فَوْقَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يُفْسِدُونَ88
जिन लोगों ने इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका उनके लिए हम यातना पर यातना बढ़ाते रहेंगे, उस बिगाड़ के बदले में जो वे पैदा करते रहे
وَيَوْمَ نَبْعَثُ ف۪ي كُلِّ اُمَّةٍ شَه۪يدًا عَلَيْهِمْ مِنْ اَنْفُسِهِمْ وَجِئْنَا بِكَ شَه۪يدًا عَلٰى هٰٓؤُ۬لَٓاءِۜ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ تِبْيَانًا لِكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً وَبُشْرٰى لِلْمُسْلِم۪ينَ۟89
और उस समय को याद करो जब हम हर समुदाय में स्वयं उसके अपने लोगों में से एक गवाह उनपर नियुक्त करके भेज रहे थे और (इसी रीति के अनुसार) तुम्हें इन लोगों पर गवाह नियुक्त करके लाए। हमने तुमपर किताब अवतरित की हर चीज़ को खोलकर बयान करने के लिए और मुस्लिम (आज्ञाकारियों) के लिए मार्गदर्शन, दयालुता और शुभ सूचना के रूप में
اِنَّ اللّٰهَ يَاْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْاِحْسَانِ وَا۪يتَٓائِ ذِي الْقُرْبٰى وَيَنْهٰى عَنِ الْفَحْشَٓاءِ وَالْمُنْكَرِ وَالْبَغْيِۚ يَعِظُكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ90
निश्चय ही अल्लाह न्याय का और भलाई का और नातेदारों को (उनके हक़) देने का आदेश देता है और अश्लीलता, बुराई और सरकशी से रोकता है। वह तुम्हें नसीहत करता है, ताकि तुम ध्यान दो
وَاَوْفُوا بِعَهْدِ اللّٰهِ اِذَا عَاهَدْتُمْ وَلَا تَنْقُضُوا الْاَيْمَانَ بَعْدَ تَوْك۪يدِهَا وَقَدْ جَعَلْتُمُ اللّٰهَ عَلَيْكُمْ كَف۪يلًاۜ اِنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ91
अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करो, जबकि तुमने प्रतिज्ञा की हो। और अपनी क़समों को उन्हें सुदृढ़ करने के पश्चात मत तोड़ो, जबकि तुम अपने ऊपर अल्लाह को अपना ज़ामिन बना चुके हो। निश्चय ही अल्लाह जानता है जो कुछ तुम करते हो
وَلَا تَكُونُوا كَالَّت۪ي نَقَضَتْ غَزْلَهَا مِنْ بَعْدِ قُوَّةٍ اَنْكَاثًاۜ تَتَّخِذُونَ اَيْمَانَكُمْ دَخَلًا بَيْنَكُمْ اَنْ تَكُونَ اُمَّةٌ هِيَ اَرْبٰى مِنْ اُمَّةٍۜ اِنَّمَا يَبْلُوكُمُ اللّٰهُ بِه۪ۜ وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ مَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ92
तुम उस स्त्री की भाँति न हो जाओ जिसने अपना सूत मेहनत से कातने के पश्चात टुकड़-टुकड़े करके रख दिया। तुम अपनी क़समों को परस्पर हस्तक्षेप करने का बहाना बनाने लगो इस ध्येय से कहीं ऐसा न हो कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से बढ़ जाए। बात केवल यह है कि अल्लाह इस प्रतिज्ञा के द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेता है और जिस बात में तुम विभेद करते हो उसकी वास्तविकता तो वह क़ियामत के दिन अवश्य ही तुम पर खोल देगा
وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ لَجَعَلَكُمْ اُمَّةً وَاحِدَةً وَلٰكِنْ يُضِلُّ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَهْد۪ي مَنْ يَشَٓاءُۜ وَلَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ93
यदि अल्लाह चाहता तो तुम सबको एक ही समुदाय बना देता, परन्तु वह जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। तुम जो कुछ भी करते हो उसके विषय में तो तुमसे अवश्य पूछा जाएगा
وَلَا تَتَّخِذُٓوا اَيْمَانَكُمْ دَخَلًا بَيْنَكُمْ فَتَزِلَّ قَدَمٌ بَعْدَ ثُبُوتِهَا وَتَذُوقُوا السُّٓوءَ بِمَا صَدَدْتُمْ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِۚ وَلَكُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌ94
तुम अपनी क़समों को परस्पर हस्तक्षेप करने का बहाना न बना लेना। कहीं ऐसा न हो कि कोई क़दम जमने के पश्चात उखड़ जाए और अल्लाह के मार्ग से तुम्हारे रोकने के बदले में तुम्हें तकलीफ़ का मज़ा चखना पड़े और तुम एक बड़ी यातना के भागी ठहरो
وَلَا تَشْتَرُوا بِعَهْدِ اللّٰهِ ثَمَنًا قَل۪يلًاۜ اِنَّمَا عِنْدَ اللّٰهِ هُوَ خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ95
और तुच्छ मूल्य के लिए अल्लाह की प्रतिज्ञा का सौदा न करो। अल्लाह के पास जो कुछ है वह तुम्हारे लिए अधिक अच्छा है, यदि तुम जानो;
مَا عِنْدَكُمْ يَنْفَدُ وَمَا عِنْدَ اللّٰهِ بَاقٍۜ وَلَنَجْزِيَنَّ الَّذ۪ينَ صَبَرُٓوا اَجْرَهُمْ بِاَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ96
तुम्हारे पास जो कुछ है वह तो समाप्त हो जाएगा, किन्तु अल्लाह के पास जो कुछ है वही बाक़ी रहनेवाला है। जिन लोगों ने धैर्य से काम लिया उन्हें तो, जो उत्तम कर्म वे करते रहे उसके बदले में, हम अवश्य उनका प्रतिदान प्रदान करेंगे
مَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِنْ ذَكَرٍ اَوْ اُنْثٰى وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيٰوةً طَيِّبَةًۚ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ اَجْرَهُمْ بِاَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ97
जिस किसी ने भी अच्छा कर्म किया, पुरुष हो या स्त्री, शर्त यह है कि वह ईमान पर हो, तो हम उसे अवश्य पवित्र जीवन-यापन कराएँगे। ऐसे लोग जो अच्छा कर्म करते रहे उसके बदले में हम उन्हें अवश्य उनका प्रतिदान प्रदान करेंगे
فَاِذَا قَرَاْتَ الْقُرْاٰنَ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّج۪يمِ98
अतः जब तुम क़ुरआन पढ़ने लगो तो फिटकारे हुए शैतान से बचने के लिए अल्लाह की पनाह माँग लिया करो
اِنَّهُ لَيْسَ لَهُ سُلْطَانٌ عَلَى الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ99
उसका तो उन लोगों पर कोई ज़ोर नहीं चलता जो ईमान लाए और अपने रब पर भरोसा रखते है
اِنَّمَا سُلْطَانُهُ عَلَى الَّذ۪ينَ يَتَوَلَّوْنَهُ وَالَّذ۪ينَ هُمْ بِه۪ مُشْرِكُونَ۟100
उसका ज़ोर तो बस उन्हीं लोगों पर चलता है जो उसे अपना मित्र बनाते है और उस (अल्लाह) के साथ साझी ठहराते है
وَاِذَا بَدَّلْنَٓا اٰيَةً مَكَانَ اٰيَةٍۙ وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا يُنَزِّلُ قَالُٓوا اِنَّمَٓا اَنْتَ مُفْتَرٍۜ بَلْ اَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ101
जब हम किसी आयत की जगह दूसरी आयत बदलकर लाते है - और अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ वह अवतरित करता है - तो वे कहते है, "तुम स्वयं ही घड़ लेते हो!" नहीं, बल्कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते
قُلْ نَزَّلَهُ رُوحُ الْقُدُسِ مِنْ رَبِّكَ بِالْحَقِّ لِيُثَبِّتَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَهُدًى وَبُشْرٰى لِلْمُسْلِم۪ينَ102
कह दो, "इसे ता पवित्र आत्मा ने तुम्हारे रब की ओर क्रमशः सत्य के साथ उतारा है, ताकि ईमान लानेवालों को जमाव प्रदान करे और आज्ञाकारियों के लिए मार्गदर्शन और शुभ सूचना हो
وَلَقَدْ نَعْلَمُ اَنَّهُمْ يَقُولُونَ اِنَّمَا يُعَلِّمُهُ بَشَرٌۜ لِسَانُ الَّذ۪ي يُلْحِدُونَ اِلَيْهِ اَعْجَمِيٌّ وَهٰذَا لِسَانٌ عَرَبِيٌّ مُب۪ينٌ103
हमें मालूम है कि वे कहते है, "उसको तो बस एक आदमी सिखाता पढ़ाता है।" हालाँकि जिसकी ओर वे संकेत करते है उसकी भाषा विदेशी है और यह स्पष्ट अरबी भाषा है
اِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِۙ لَا يَهْد۪يهِمُ اللّٰهُ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ104
सच्ची बात यह है कि जो लोग अल्लाह की आयतों को नहीं मानते, अल्लाह उनका मार्गदर्शन नहीं करता। उनके लिए तो एक दुखद यातना है
اِنَّمَا يَفْتَرِي الْكَذِبَ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِۚ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْكَاذِبُونَ105
झूठ तो बस वही लोग घड़ते है जो अल्लाह की आयतों को मानते नहीं और वही है जो झूठे है
مَنْ كَفَرَ بِاللّٰهِ مِنْ بَعْدِ ا۪يمَانِه۪ٓ اِلَّا مَنْ اُكْرِهَ وَقَلْبُهُ مُطْمَئِنٌّ بِالْا۪يمَانِ وَلٰكِنْ مَنْ شَرَحَ بِالْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِنَ اللّٰهِۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌ106
जिस किसी ने अपने ईमान के पश्चात अल्लाह के साथ कुफ़्र किया -सिवाय उसके जो इसके लिए विवश कर दिया गया हो और दिल उसका ईमान पर सन्तुष्ट हो - बल्कि वह जिसने सीना कुफ़्र के लिए खोल दिया हो, तो ऐसे लोगो पर अल्लाह का प्रकोप है और उनके लिए बड़ी यातना है
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمُ اسْتَحَبُّوا الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا عَلَى الْاٰخِرَةِۙ وَاَنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِر۪ينَ107
यह इसलिए कि उन्होंने आख़िरत की अपेक्षा सांसारिक जीवन को पसन्द किया और यह कि अल्लाह कुफ़्र करनेवालो लोगों का मार्गदर्शन नहीं करता
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ طَبَعَ اللّٰهُ عَلٰى قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَاَبْصَارِهِمْۚ وَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ108
वही लोग है जिनके दिलों और जिनके कानों और जिनकी आँखों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है; और वही है जो ग़फ़लत में पड़े हुए है
لَا جَرَمَ اَنَّهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ109
निश्चय ही आख़िरत में वही घाटे में रहेंगे
ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذ۪ينَ هَاجَرُوا مِنْ بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُٓواۙ اِنَّ رَبَّكَ مِنْ بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ۟110
फिर तुम्हारा रब उन लोगों के लिए जिन्होंने इसके उपरान्त कि वे आज़माइश में पड़ चुके थे घर-बार छोड़ा, फिर जिहाद (संघर्ष) किया और जमे रहे तो इन बातों के पश्चात तो निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
يَوْمَ تَاْت۪ي كُلُّ نَفْسٍ تُجَادِلُ عَنْ نَفْسِهَا وَتُوَفّٰى كُلُّ نَفْسٍ مَا عَمِلَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ111
जिस दिन प्रत्येक व्यक्ति अपनी और प्रत्येक व्यक्ति को जो कुछ उसने किया होगा, उसका पूरा-पूरा बदला चुका दिया जाएगा, और उनपर कुछ भी अत्याचार न होगा
وَضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا قَرْيَةً كَانَتْ اٰمِنَةً مُطْمَئِنَّةً يَاْت۪يهَا رِزْقُهَا رَغَدًا مِنْ كُلِّ مَكَانٍ فَكَفَرَتْ بِاَنْعُمِ اللّٰهِ فَاَذَاقَهَا اللّٰهُ لِبَاسَ الْجُوعِ وَالْخَوْفِ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ112
अल्लाह ने एक मिसाल बयान की है: एक बस्ती थी जो निश्चिन्त और सन्तुष्ट थी। हर जगह से उसकी रोज़ी प्रचुरता के साथ चली आ रही थी कि वह अल्लाह की नेमतों के प्रति अकृतज्ञता दिखाने लगी। तब अल्लाह ने उसके निवासियों को उनकी करतूतों के बदले में भूख का मज़ा चख़ाया और भय का वस्त्र पहनाया
وَلَقَدْ جَٓاءَهُمْ رَسُولٌ مِنْهُمْ فَكَذَّبُوهُ فَاَخَذَهُمُ الْعَذَابُ وَهُمْ ظَالِمُونَ113
उनके पास उन्हीं में से एक रसूल आया। किन्तु उन्होंने उसे झुठला दिया। अन्ततः यातना ने उन्हें इस दशा में आ लिया कि वे अत्याचारी थे
فَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللّٰهُ حَلَالًا طَيِّبًاۖ وَاشْكُرُوا نِعْمَتَ اللّٰهِ اِنْ كُنْتُمْ اِيَّاهُ تَعْبُدُونَ114
अतः जो कुछ अल्लाह ने तुम्हें हलाल-पाक रोज़ी दी है उसे खाओ और अल्लाह की नेमत के प्रति कृतज्ञता दिखाओ, यदि तुम उसी को स्वामी मानते हो
اِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنْز۪يرِ وَمَٓا اُهِلَّ لِغَيْرِ اللّٰهِ بِه۪ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ115
उसने तो तुमपर केवल मुर्दार, रक्त, सुअर का मांस और जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो, हराम ठहराया है। फिर यदि कोई इस प्रकार विवश हो जाए कि न तो उसकी ललक हो और न वह हद से आगे बढ़नेवाला हो तो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
وَلَا تَقُولُوا لِمَا تَصِفُ اَلْسِنَتُكُمُ الْكَذِبَ هٰذَا حَلَالٌ وَهٰذَا حَرَامٌ لِتَفْتَرُوا عَلَى اللّٰهِ الْكَذِبَۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللّٰهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَۜ116
और अपनी ज़बानों के बयान किए हुए झूठ के आधार पर यह न कहा करो, "यह हलाल है और यह हराम है," ताकि इस तरह अल्लाह पर झूठ आरोपित करो। जो लोग अल्लाह से सम्बद्ध करके झूठ घड़ते है, वे कदापि सफल होनेवाले नहीं
مَتَاعٌ قَل۪يلٌۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ117
यह उपभोग थोड़ा है, उनके लिए वास्तव में तो दुखद यातना है
وَعَلَى الَّذ۪ينَ هَادُوا حَرَّمْنَا مَا قَصَصْنَا عَلَيْكَ مِنْ قَبْلُۚ وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلٰكِنْ كَانُٓوا اَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ118
जो यहूदी है उनपर हम पहले वे चीज़े हराम कर चुके है जिनका उल्लेख हमने तुमसे किया। उनपर तो अत्याचार हमने नहीं किया, बल्कि वे स्वयं ही अपने ऊपर अत्याचार करते रहे
ثُمَّ اِنَّ رَبَّكَ لِلَّذ۪ينَ عَمِلُوا السُّٓوءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابُوا مِنْ بَعْدِ ذٰلِكَ وَاَصْلَحُٓواۙ اِنَّ رَبَّكَ مِنْ بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ۟119
फिर तुम्हारा रब उनके लिए जिन्होंने अज्ञानवश बुरा कर्म किया, फिर इसके बाद तौबा करके सुधार कर लिया, तो निश्चय ही तुम्हारा रब इसके पश्चात बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
اِنَّ اِبْرٰه۪يمَ كَانَ اُمَّةً قَانِتًا لِلّٰهِ حَن۪يفًاۜ وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَۙ120
निश्चय ही इबराहीम की स्थिति एक समुदाय की थी। वह अल्लाह का आज्ञाकारी और उसकी ओर एकाग्र था। वह कोई बहुदेववादी न था
شَاكِرًا لِاَنْعُمِهِۜ اِجْتَبٰيهُ وَهَدٰيهُ اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ121
वह उसके (अल्लाह के) उदार अनुग्रहों के प्रति कृतज्ञता दिखलानेवाला था। अल्लाह ने उसे चुन लिया और उसे सीधे मार्ग पर चलाया
وَاٰتَيْنَاهُ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةًۜ وَاِنَّهُ فِي الْاٰخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِح۪ينَۜ122
और हमने उसे दुनिया में भी भलाई दी और आख़िरत में भी वह अच्छे पूर्णकाम लोगों मे से होगा
ثُمَّ اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ اَنِ اتَّبِعْ مِلَّةَ اِبْرٰه۪يمَ حَن۪يفًاۜ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ123
फिर अब हमने तुम्हारी ओर प्रकाशना की, "इबराहीम के तरीक़े पर चलो, जो बिलकुल एक ओर का हो गया था और बहुदेववादियों में से न था।"
اِنَّمَا جُعِلَ السَّبْتُ عَلَى الَّذ۪ينَ اخْتَلَفُوا ف۪يهِۜ وَاِنَّ رَبَّكَ لَيَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ124
'सब्त' तो केवल उन लोगों पर लागू हुआ था जिन्होंने उसके विषय में विभेद किया था। निश्चय ही तुम्हारा रब उनके बीच क़ियामत के दिन उसका फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे विभेद करते रहे है
اُدْعُ اِلٰى سَب۪يلِ رَبِّكَ بِالْحِكْمَةِ وَالْمَوْعِظَةِ الْحَسَنَةِ وَجَادِلْهُمْ بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُۜ اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَب۪يلِه۪ وَهُوَ اَعْلَمُ بِالْمُهْتَد۪ينَ125
अपने रब के मार्ग की ओर तत्वदर्शिता और सदुपदेश के साथ बुलाओ और उनसे ऐसे ढंग से वाद विवाद करो जो उत्तम हो। तुम्हारा रब उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया और वह उन्हें भी भली-भाँति जानता है जो मार्ग पर है
وَاِنْ عَاقَبْتُمْ فَعَاقِبُوا بِمِثْلِ مَا عُوقِبْتُمْ بِه۪ۜ وَلَئِنْ صَبَرْتُمْ لَهُوَ خَيْرٌ لِلصَّابِر۪ينَ126
और यदि तुम बदला लो तो उतना ही जितना तुम्हें कष्ट पहुँचा हो, किन्तु यदि तुम सब्र करो तो निश्चय ही यह सब्र करनेवालों के लिए ज़्यादा अच्छा है
وَاصْبِرْ وَمَا صَبْرُكَ اِلَّا بِاللّٰهِ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُ ف۪ي ضَيْقٍ مِمَّا يَمْكُرُونَ127
सब्र से काम लो - और तुम्हारा सब्र अल्लाह ही से सम्बद्ध है - और उन पर दुखी न हो और न उससे दिल तंग हो जो चालें वे चलते है
اِنَّ اللّٰهَ مَعَ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا وَالَّذ۪ينَ هُمْ مُحْسِنُونَ128
निश्चय ही, अल्लाह उनके साथ है जो डर रखते है और जो उत्तमकार है