19. जुज़ - कुरान पढ़ें
25 · अल-फुरकान26 · अश-शुअरा27 · अन-नमल
وَقَالَ الَّذ۪ينَ لَا يَرْجُونَ لِقَٓاءَنَا لَوْلَٓا اُنْزِلَ عَلَيْنَا الْمَلٰٓئِكَةُ اَوْ نَرٰى رَبَّنَاۜ لَقَدِ اسْتَكْبَرُوا ف۪ٓي اَنْفُسِهِمْ وَعَتَوْ عُتُوًّا كَب۪يرًا21
जिन्हें हमसे मिलने की आशंका नहीं, वे कहते है, "क्यों न फ़रिश्ते हमपर उतरे या फिर हम अपने रब को देखते?" उन्होंने अपने जी में बड़ा घमंज किया और बड़ी सरकशी पर उतर आए
يَوْمَ يَرَوْنَ الْمَلٰٓئِكَةَ لَا بُشْرٰى يَوْمَئِذٍ لِلْمُجْرِم۪ينَ وَيَقُولُونَ حِجْرًا مَحْجُورًا22
जिस दिन वे फ़रिश्तों को देखेंगे उस दिन अपराधियों के लिए कोई ख़ुशख़बरी न होगी और वे पुकार उठेंगे, "पनाह! पनाह!!"
وَقَدِمْنَٓا اِلٰى مَا عَمِلُوا مِنْ عَمَلٍ فَجَعَلْنَاهُ هَبَٓاءً مَنْثُورًا23
हम बढ़ेंगे उस कर्म की ओर जो उन्होंने किया होगा और उसे उड़ती धूल कर देंगे
اَصْحَابُ الْجَنَّةِ يَوْمَئِذٍ خَيْرٌ مُسْتَقَرًّا وَاَحْسَنُ مَق۪يلًا24
उस दिन जन्नतवाले ठिकाने की दृष्टि से अच्छे होगे और आरामगाह की दृष्टि से भी अच्छे होंगे
وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَٓاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلٰٓئِكَةُ تَنْز۪يلًا25
उस दिन आकाश एक बादल के साथ फटेगा और फ़रिश्ते भली प्रकार उतारे जाएँगे
اَلْمُلْكُ يَوْمَئِذٍۨ الْحَقُّ لِلرَّحْمٰنِۜ وَكَانَ يَوْمًا عَلَى الْكَافِر۪ينَ عَس۪يرًا26
उस दिन वास्तविक राज्य रहमान का होगा और वह दिन इनकार करनेवालों के लिए बड़ा ही मुश्किल होगा
وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلٰى يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَن۪ي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَب۪يلًا27
उस दिन अत्याचारी अत्याचारी अपने हाथ चबाएगा। कहेंगा, "ऐ काश! मैंने रसूल के साथ मार्ग अपनाया होता!
يَا وَيْلَتٰى لَيْتَن۪ي لَمْ اَتَّخِذْ فُلَانًا خَل۪يلًا28
हाय मेरा दुर्भाग्य! काश, मैंने अमुक व्यक्ति को मित्र न बनाया होता!
لَقَدْ اَضَلَّن۪ي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ اِذْ جَٓاءَن۪يۜ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْاِنْسَانِ خَذُولًا29
उसने मुझे भटकाकर अनुस्मृति से विमुख कर दिया, इसके पश्चात कि वह मेरे पास आ चुकी थी। शैतान तो समय पर मनुष्य का साथ छोड़ ही देता है।"
وَقَالَ الرَّسُولُ يَا رَبِّ اِنَّ قَوْمِي اتَّخَذُوا هٰذَا الْقُرْاٰنَ مَهْجُورًا30
रसूल कहेगा, "ऐ मेरे रब! निस्संदेह मेरी क़ौम के लोगों ने इस क़ुरआन को व्यर्थ बकवास की चीज़ ठहरा लिया था।"
وَكَذٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا مِنَ الْمُجْرِم۪ينَۜ وَكَفٰى بِرَبِّكَ هَادِيًا وَنَص۪يرًا31
और इसी तरह हमने अपराधियों में से प्रत्यॆक नबी के लिये शत्रु बनाया। मार्गदर्शन और सहायता कॆ लिए तॊ तुम्हारा रब ही काफ़ी है।
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ الْقُرْاٰنُ جُمْلَةً وَاحِدَةًۚ كَذٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِه۪ فُؤَادَكَ وَرَتَّلْنَاهُ تَرْت۪يلًا32
और जिन लोगों ने इनकार किया उनका कहना है कि "उसपर पूरा क़ुरआन एक ही बार में क्यों नहीं उतारा?" ऐसा इसलिए किया गया ताकि हम इसके द्वारा तुम्हारे दिल को मज़बूत रखें और हमने इसे एक उचित क्रम में रखा
وَلَا يَاْتُونَكَ بِمَثَلٍ اِلَّا جِئْنَاكَ بِالْحَقِّ وَاَحْسَنَ تَفْس۪يرًاۜ33
और जब कभी भी वे तुम्हारे पास कोई आक्षेप की बात लेकर आएँगे तो हम तुम्हारे पास पक्की-सच्ची चीज़ लेकर आएँगे! इस दशा में कि वह स्पष्टीतकरण की स्पष्ट से उत्तम है
اَلَّذ۪ينَ يُحْشَرُونَ عَلٰى وُجُوهِهِمْ اِلٰى جَهَنَّمَۙ اُو۬لٰٓئِكَ شَرٌّ مَكَانًا وَاَضَلُّ سَب۪يلًا۟34
जो लोग औंधे मुँह जहन्नम की ओर ले जाए जाएँगे वही स्थान की दृष्टि से बहुत बुरे है, और मार्ग की दृष्टि से भी बहुत भटके हुए है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَا مَعَهُٓ اَخَاهُ هٰرُونَ وَز۪يرًاۚ35
हमने मूसा को किताब प्रदान की और उसके भाई हारून को सहायक के रूप में उसके साथ किया
فَقُلْنَا اذْهَبَٓا اِلَى الْقَوْمِ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَاۜ فَدَمَّرْنَاهُمْ تَدْم۪يرًاۜ36
और कहा कि "तुम दोनों उन लोगों के पास जाओ जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया है।" अन्ततः हमने उन लोगों को विनष्ट करके रख दिया
وَقَوْمَ نُوحٍ لَمَّا كَذَّبُوا الرُّسُلَ اَغْرَقْنَاهُمْ وَجَعَلْنَاهُمْ لِلنَّاسِ اٰيَةًۜ وَاَعْتَدْنَا لِلظَّالِم۪ينَ عَذَابًا اَل۪يمًاۚ37
और नूह की क़ौम को भी, जब उन्होंने रसूलों को झुठलाया तो हमने उन्हें डुबा दिया और लोगों के लिए उन्हें एक निशानी बना दिया, और उन ज़ालिमों के लिए हमने एक दुखद यातना तैयार कर रखी है
وَعَادًا وَثَمُودَا۬ وَاَصْحَابَ الرَّسِّ وَقُرُونًا بَيْنَ ذٰلِكَ كَث۪يرًا38
और आद और समूद और अर-रस्सवालों और उस बीच की बहुत-सी नस्लों को भी विनष्ट किया।
وَكُلًّا ضَرَبْنَا لَهُ الْاَمْثَالَۘ وَكُلًّا تَبَّرْنَا تَتْب۪يرًا39
प्रत्येक के लिए हमने मिसालें बयान कीं। अन्ततः प्रत्येक को हमने पूरी तरह विध्वस्त कर दिया
وَلَقَدْ اَتَوْا عَلَى الْقَرْيَةِ الَّت۪ٓي اُمْطِرَتْ مَطَرَ السَّوْءِۜ اَفَلَمْ يَكُونُوا يَرَوْنَهَاۚ بَلْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ نُشُورًا40
और उस बस्ती पर से तो वे हो आए है जिसपर बुरी वर्षा बरसी; तो क्या वे उसे देखते नहीं रहे हैं? नहीं, बल्कि वे दोबारा जीवित होकर उठने की आशा ही नहीं रखते रहे है
وَاِذَا رَاَوْكَ اِنْ يَتَّخِذُونَكَ اِلَّا هُزُوًاۜ اَهٰذَا الَّذ۪ي بَعَثَ اللّٰهُ رَسُولًا41
वे जब भी तुम्हें देखते हैं तो तुम्हारा मज़ाक़ बना लेते हैं कि "क्या यही, जिसे अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है?
اِنْ كَادَ لَيُضِلُّنَا عَنْ اٰلِهَتِنَا لَوْلَٓا اَنْ صَبَرْنَا عَلَيْهَاۜ وَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ح۪ينَ يَرَوْنَ الْعَذَابَ مَنْ اَضَلُّ سَب۪يلًا42
इसने तो हमें भटकाकर हमको हमारे प्रभु-पूज्यों से फेर ही दिया होता, यदि हम उनपर मज़बूती से जम न गए होते।"
اَرَاَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ اِلٰهَهُ هَوٰيهُۜ اَفَاَنْتَ تَكُونُ عَلَيْهِ وَك۪يلًاۙ43
क्या तुमने उसको भी देखा, जिसने अपना प्रभु अपनी (तुच्छ) इच्छा को बना रखा है? तो क्या तुम उसका ज़िम्मा ले सकते हो
اَمْ تَحْسَبُ اَنَّ اَكْثَرَهُمْ يَسْمَعُونَ اَوْ يَعْقِلُونَۜ اِنْ هُمْ اِلَّا كَالْاَنْعَامِ بَلْ هُمْ اَضَلُّ سَب۪يلًا۟44
या तुम समझते हो कि उनमें अधिकतर सुनते और समझते है? वे तो बस चौपायों की तरह हैं, बल्कि उनसे भी अधिक पथभ्रष्ट!
اَلَمْ تَرَ اِلٰى رَبِّكَ كَيْفَ مَدَّ الظِّلَّۚ وَلَوْ شَٓاءَ لَجَعَلَهُ سَاكِنًاۚ ثُمَّ جَعَلْنَا الشَّمْسَ عَلَيْهِ دَل۪يلًاۙ45
क्या तुमने अपने रब को नहीं देखा कि कैसे फैलाई छाया? यदि चाहता तो उसे स्थिर रखता। फिर हमने सूर्य को उसका पता देनेवाला बनाया,
ثُمَّ قَبَضْنَاهُ اِلَيْنَا قَبْضًا يَس۪يرًا46
फिर हम उसको धीरे-धीरे अपनी ओर समेट लेते है
وَهُوَ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الَّيْلَ لِبَاسًا وَالنَّوْمَ سُبَاتًا وَجَعَلَ النَّهَارَ نُشُورًا47
वही है जिसने रात्रि को तुम्हारे लिए वस्त्र और निद्रा को सर्वथा विश्राम एवं शान्ति बनाया और दिन को जी उठने का समय बनाया
وَهُوَ الَّذ۪ٓي اَرْسَلَ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِه۪ۚ وَاَنْزَلْنَا مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً طَهُورًاۙ48
और वही है जिसने अपनी दयालुता (वर्षा) के आगे-आगे हवाओं को शुभ सूचना बनाकर भेजता है, और हम ही आकाश से स्वच्छ जल उतारते है
لِنُحْيِيَ بِه۪ بَلْدَةً مَيْتًا وَنُسْقِيَهُ مِمَّا خَلَقْنَٓا اَنْعَامًا وَاَنَاسِيَّ كَث۪يرًا49
ताकि हम उसके द्वारा निर्जीव भू-भाग को जीवन प्रदान करें और उसे अपने पैदा किए हुए बहुत-से चौपायों और मनुष्यों को पिलाएँ
وَلَقَدْ صَرَّفْنَاهُ بَيْنَهُمْ لِيَذَّكَّرُواۘ فَاَبٰٓى اَكْثَرُ النَّاسِ اِلَّا كُفُورًا50
उसे हमने उनके बीच विभिन्न ढ़ंग से पेश किया है, ताकि वे ध्यान दें। परन्तु अधिकतर लोगों ने इनकार और अकृतज्ञता के अतिरिक्त दूसरी नीति अपनाने से इनकार ही किया
وَلَوْ شِئْنَا لَبَعَثْنَا ف۪ي كُلِّ قَرْيَةٍ نَذ۪يرًاۘ51
यदि हम चाहते तो हर बस्ती में एक डरानेवाला भेज देते
فَلَا تُطِعِ الْكَافِر۪ينَ وَجَاهِدْهُمْ بِه۪ جِهَادًا كَب۪يرًا52
अतः इनकार करनेवालों की बात न मानता और इस (क़ुरआन) के द्वारा उनसे जिहाद करो, बड़ा जिहाद! (जी तोड़ कोशिश)
وَهُوَ الَّذ۪ي مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ هٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ وَهٰذَا مِلْحٌ اُجَاجٌۚ وَجَعَلَ بَيْنَهُمَا بَرْزَخًا وَحِجْرًا مَحْجُورًا53
वही है जिसने दो समुद्रों को मिलाया। यह स्वादिष्ट और मीठा है और यह खारी और कडुआ। और दोनों के बीच उसने एक परदा डाल दिया है और एक पृथक करनेवाली रोक रख दी है
وَهُوَ الَّذ۪ي خَلَقَ مِنَ الْمَٓاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًاۜ وَكَانَ رَبُّكَ قَد۪يرًا54
और वही है जिसने पानी से एक मनुष्य पैदा किया। फिर उसे वंशगत सम्बन्धों और ससुराली रिश्तेवाला बनाया। तुम्हारा रब बड़ा ही सामर्थ्यवान है
وَيَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَا لَا يَنْفَعُهُمْ وَلَا يَضُرُّهُمْۜ وَكَانَ الْكَافِرُ عَلٰى رَبِّه۪ ظَه۪يرًا55
अल्लाह से इतर वे उनको पूजते है जो न उन्हें लाभ पहुँचा सकते है और न ही उन्हें हानि पहुँचा सकते है। और ऊपर से यह भी कि इनकार करनेवाला अपने रब का विरोधी और उसके मुक़ाबले में दूसरों का सहायक बना हुआ है
وَمَٓا اَرْسَلْنَاكَ اِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذ۪يرًا56
और हमने तो तुमको शुभ-सूचना देनेवाला और सचेतकर्ता बनाकर भेजा है।
قُلْ مَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍ اِلَّا مَنْ شَٓاءَ اَنْ يَتَّخِذَ اِلٰى رَبِّه۪ سَب۪يلًا57
कह दो, "मैं इस काम पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता सिवाय इसके कि जो कोई चाहे अपने रब की ओर ले जानेवाला मार्ग अपना ले।"
وَتَوَكَّلْ عَلَى الْحَيِّ الَّذ۪ي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحْ بِحَمْدِه۪ۜ وَكَفٰى بِه۪ بِذُنُوبِ عِبَادِه۪ خَب۪يرًاۚۛ58
और उस अल्लाह पर भरोसा करो जो जीवन्त और अमर है और उसका गुणगान करो। वह अपने बन्दों के गुनाहों की ख़बर रखने के लिए काफ़ी है
اَلَّذ۪ي خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا ف۪ي سِتَّةِ اَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوٰى عَلَى الْعَرْشِۚۛ اَلرَّحْمٰنُ فَسْـَٔلْ بِه۪ خَب۪يرًا59
जिसने आकाशों और धरती को और जो कुछ उन दोनों के बीच है छह दिनों में पैदा किया, फिर सिंहासन पर विराजमान हुआ। रहमान है वह! अतः पूछो उससे जो उसकी ख़बर रखता है
وَاِذَا ق۪يلَ لَهُمُ اسْجُدُوا لِلرَّحْمٰنِ قَالُوا وَمَا الرَّحْمٰنُۗ اَنَسْجُدُ لِمَا تَاْمُرُنَا وَزَادَهُمْ نُفُورًا۟60
उन लोगों से जब कहा जाता है कि "रहमान को सजदा करो" तो वे कहते है, "और रहमान क्या होता है? क्या जिसे तू हमसे कह दे उसी को हम सजदा करने लगें?" और यह चीज़ उनकी घृणा को और बढ़ा देती है
تَبَارَكَ الَّذ۪ي جَعَلَ فِي السَّمَٓاءِ بُرُوجًا وَجَعَلَ ف۪يهَا سِرَاجًا وَقَمَرًا مُن۪يرًا61
बड़ी बरकतवाला है वह, जिसने आकाश में बुर्ज (नक्षत्र) बनाए और उसमें एक चिराग़ और एक चमकता चाँद बनाया
وَهُوَ الَّذ۪ي جَعَلَ الَّيْلَ وَالنَّهَارَ خِلْفَةً لِمَنْ اَرَادَ اَنْ يَذَّكَّرَ اَوْ اَرَادَ شُكُورًا62
और वही है जिसने रात और दिन को एक-दूसरे के पीछे आनेवाला बनाया, उस व्यक्ति के लिए (निशानी) जो चेतना चाहे या कृतज्ञ होना चाहे
وَعِبَادُ الرَّحْمٰنِ الَّذ۪ينَ يَمْشُونَ عَلَى الْاَرْضِ هَوْنًا وَاِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا63
रहमान के (प्रिय) बन्दें वहीं है जो धरती पर नम्रतापूर्वक चलते है और जब जाहिल उनके मुँह आएँ तो कह देते है, "तुमको सलाम!"
وَالَّذ۪ينَ يَب۪يتُونَ لِرَبِّهِمْ سُجَّدًا وَقِيَامًا64
जो अपने रब के आगे सजदे में और खड़े रातें गुज़ारते है;
وَالَّذ۪ينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَۗ اِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًاۗ65
जो कहते है कि "ऐ हमारे रब! जहन्नम की यातना को हमसे हटा दे।" निश्चय ही उनकी यातना चिमटकर रहनेवाली है
اِنَّهَا سَٓاءَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا66
निश्चय ही वह जगह ठहरने की दृष्टि! से भी बुरी है और स्थान की दृष्टि से भी
وَالَّذ۪ينَ اِذَٓا اَنْفَقُوا لَمْ يُسْرِفُوا وَلَمْ يَقْتُرُوا وَكَانَ بَيْنَ ذٰلِكَ قَوَامًا67
जो ख़र्च करते है तो न अपव्यय करते है और न ही तंगी से काम लेते है, बल्कि वे इनके बीच मध्यमार्ग पर रहते है
وَالَّذ۪ينَ لَا يَدْعُونَ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَ وَلَا يَقْتُلُونَ النَّفْسَ الَّت۪ي حَرَّمَ اللّٰهُ اِلَّا بِالْحَقِّ وَلَا يَزْنُونَۚ وَمَنْ يَفْعَلْ ذٰلِكَ يَلْقَ اَثَامًاۙ68
जो अल्लाह के साथ किसी दूसरे इष्ट-पूज्य को नहीं पुकारते और न नाहक़ किसी जीव को जिस (के क़त्ल) को अल्लाह ने हराम किया है, क़त्ल करते है। और न वे व्यभिचार करते है - जो कोई यह काम करे तो वह गुनाह के वबाल से दोचार होगा
يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَيَخْلُدْ ف۪يه۪ مُهَانًاۗ69
क़ियामत के दिन उसकी यातना बढ़ती चली जाएगी॥ और वह उसी में अपमानित होकर स्थायी रूप से पड़ा रहेगा
اِلَّا مَنْ تَابَ وَاٰمَنَ وَعَمِلَ عَمَلًا صَالِحًا فَاُو۬لٰٓئِكَ يُبَدِّلُ اللّٰهُ سَيِّـَٔاتِهِمْ حَسَنَاتٍۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا70
सिवाय उसके जो पलट आया और ईमान लाया और अच्छा कर्म किया, तो ऐसे लोगों की बुराइयों को अल्लाह भलाइयों से बदल देगा। और अल्लाह है भी अत्यन्त क्षमाशील, दयावान
وَمَنْ تَابَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَاِنَّهُ يَتُوبُ اِلَى اللّٰهِ مَتَابًا71
और जिसने तौबा की और अच्छा कर्म किया, तो निश्चय ही वह अल्लाह की ओर पलटता है, जैसा कि पलटने का हक़ है
وَالَّذ۪ينَ لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَۙ وَاِذَا مَرُّوا بِاللَّغْوِ مَرُّوا كِرَامًا72
जो किसी झूठ और असत्य में सम्मिलित नहीं होते और जब किसी व्यर्थ के कामों के पास से गुज़रते है, तो श्रेष्ठतापूर्वक गुज़र जाते है,
وَالَّذ۪ينَ اِذَا ذُكِّرُوا بِاٰيَاتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا73
जो ऐसे हैं कि जब उनके रब की आयतों के द्वारा उन्हें याददिहानी कराई जाती है तो उन (आयतों) पर वे अंधे और बहरे होकर नहीं गिरते।
وَالَّذ۪ينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ اَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ اَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّق۪ينَ اِمَامًا74
और जो कहते है, "ऐ हमारे रब! हमें हमारी अपनी पत्नियों और हमारी संतान से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें डर रखनेवालों का नायक बना दे।"
اُو۬لٰٓئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ ف۪يهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًاۙ75
यही वे लोग है जिन्हें, इसके बदले में कि वे जमे रहे, उच्च भवन प्राप्त होगा, तथा ज़िन्दाबाद और सलाम से उनका वहाँ स्वागत होगा
خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ حَسُنَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا76
वहाँ वे सदैव रहेंगे। बहुत ही अच्छी है वह ठहरने की जगह और स्थान;
قُلْ مَا يَعْبَؤُ۬ا بِكُمْ رَبّ۪ي لَوْلَا دُعَٓاؤُ۬كُمْۚ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًا77
कह दो, "मेरे रब को तुम्हारी कोई परवाह नहीं अगर तुम (उसको) न पुकारो। अब जबकि तुम झुठला चुके हो, तो शीघ्र ही वह चीज़ चिमट जानेवाली होगी।"
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
طٰسٓمٓۜ1
ता॰ सीन॰ मीम॰
تِلْكَ اٰيَاتُ الْكِتَابِ الْمُب۪ينِ2
ये स्पष्ट किताब की आयतें है
لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ اَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِن۪ينَ3
शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे
اِنْ نَشَاْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِمْ مِنَ السَّمَٓاءِ اٰيَةً فَظَلَّتْ اَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِع۪ينَ4
यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ
وَمَا يَاْت۪يهِمْ مِنْ ذِكْرٍ مِنَ الرَّحْمٰنِ مُحْدَثٍ اِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِض۪ينَ5
उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है
فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَاْت۪يهِمْ اَنْبٰٓؤُ۬ا مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ6
अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है
اَوَلَمْ يَرَوْا اِلَى الْاَرْضِ كَمْ اَنْبَتْنَا ف۪يهَا مِنْ كُلِّ زَوْجٍ كَر۪يمٍ7
क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है?
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ8
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟9
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
وَاِذْ نَادٰى رَبُّكَ مُوسٰٓى اَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَۙ10
और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा -
قَوْمَ فِرْعَوْنَۜ اَلَا يَتَّقُونَ11
फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते?"
قَالَ رَبِّ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اَنْ يُكَذِّبُونِۜ12
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे,
وَيَض۪يقُ صَدْر۪ي وَلَا يَنْطَلِقُ لِسَان۪ي فَاَرْسِلْ اِلٰى هٰرُونَ13
और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे
وَلَهُمْ عَلَيَّ ذَنْبٌ فَاَخَافُ اَنْ يَقْتُلُونِۚ14
और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।"
قَالَ كَلَّاۚ فَاذْهَبَا بِاٰيَاتِنَٓا اِنَّا مَعَكُمْ مُسْتَمِعُونَ15
कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है
فَاْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَٓا اِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَم۪ينَۙ16
अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है
اَنْ اَرْسِلْ مَعَنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۜ17
कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।"
قَالَ اَلَمْ نُرَبِّكَ ف۪ينَا وَل۪يدًا وَلَبِثْتَ ف۪ينَا مِنْ عُمُرِكَ سِن۪ينَ18
(फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा,
وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّت۪ي فَعَلْتَ وَاَنْتَ مِنَ الْكَافِر۪ينَ19
और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।"
قَالَ فَعَلْتُهَٓا اِذًا وَاَنَا۬ مِنَ الضَّٓالّ۪ينَۜ20
कहा, ऐसा तो मुझसे उस समय हुआ जबकि मैं चूक गया था
فَفَرَرْتُ مِنْكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ ل۪ي رَبّ۪ي حُكْمًا وَجَعَلَن۪ي مِنَ الْمُرْسَل۪ينَ21
फिर जब मुझे तुम्हारा भय हुआ तो मैं तुम्हारे यहाँ से भाग गया। फिर मेरे रब ने मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान की और मुझे रसूलों में सम्मिलित किया
وَتِلْكَ نِعْمَةٌ تَمُنُّهَا عَلَيَّ اَنْ عَبَّدْتَ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۜ22
यही वह उदार अनुग्रह है जिसका रहमान तू मुझपर जताता है कि तूने इसराईल की सन्तान को ग़ुलाम बना रखा है।"
قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ الْعَالَم۪ينَ23
फ़िरऔन ने कहा, "और यह सारे संसार का रब क्या होता है?"
قَالَ رَبُّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَاۜ اِنْ كُنْتُمْ مُوقِن۪ينَ24
उसने कहा, "आकाशों और धरती का रब और जो कुछ इन दोनों का मध्य है उसका भी, यदि तुम्हें यकीन हो।"
قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُٓ اَلَا تَسْتَمِعُونَ25
उसने अपने आस-पासवालों से कहा, "क्या तुम सुनते नहीं हो?"
قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ اٰبَٓائِكُمُ الْاَوَّل۪ينَ26
कहा, "तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादा का रब।"
قَالَ اِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذ۪ٓي اُرْسِلَ اِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ27
बोला, "निश्चय ही तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, बिलकुल ही पागल है।"
قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَاۜ اِنْ كُنْتُمْ تَعْقِلُونَ28
उसने कहा, "पूर्व और पश्चिम का रब और जो कुछ उनके बीच है उसका भी, यदि तुम कुछ बुद्धि रखते हो।"
قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ اِلٰهًا غَيْر۪ي لَاَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُون۪ينَ29
बोला, "यदि तूने मेरे सिवा किसी और को पूज्य एवं प्रभु बनाया, तो मैं तुझे बन्दी बनाकर रहूँगा।"
قَالَ اَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُب۪ينٍ30
उसने कहा, "क्या यदि मैं तेरे पास एक स्पष्ट चीज़ ले आऊँ तब भी?"
قَالَ فَاْتِ بِه۪ٓ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ31
बोलाः “अच्छा वह ले आ; यदि तू सच्चा है” ।
فَاَلْقٰى عَصَاهُ فَاِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُب۪ينٌۚ32
फिर उसने अपनी लाठी डाल दी, तो अचानक क्या देखते है कि वह एक प्रत्यक्ष अज़गर है
وَنَزَعَ يَدَهُ فَاِذَا هِيَ بَيْضَٓاءُ لِلنَّاظِر۪ينَ۟33
और उसने अपना हाथ बाहर खींचा तो फिर क्या देखते है कि वह देखनेवालों के सामने चमक रहा है
قَالَ لِلْمَلَاِ حَوْلَهُٓ اِنَّ هٰذَا لَسَاحِرٌ عَل۪يمٌۙ34
उसने अपने आस-पास के सरदारों से कहा, "निश्चय ही यह एक बड़ा ही प्रवीण जादूगर है
يُر۪يدُ اَنْ يُخْرِجَكُمْ مِنْ اَرْضِكُمْ بِسِحْرِه۪ۗ فَمَاذَا تَاْمُرُونَ35
चाहता है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारी अपनी भूमि से निकाल बाहर करें; तो अब तुम क्या कहते हो?"
قَالُٓوا اَرْجِهْ وَاَخَاهُ وَابْعَثْ فِي الْمَدَٓائِنِ حَاشِر۪ينَۙ36
उन्होंने कहा, "इसे और इसके भाई को अभी टाले रखिए, और एकत्र करनेवालों को नगरों में भेज दीजिए
يَاْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَل۪يمٍ37
कि वे प्रत्येक प्रवीण जादूगर को आपके पास ले आएँ।"
فَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِم۪يقَاتِ يَوْمٍ مَعْلُومٍۙ38
अतएव एक निश्चित दिन के नियत समय पर जादूगर एकत्र कर लिए गए
وَق۪يلَ لِلنَّاسِ هَلْ اَنْتُمْ مُجْتَمِعُونَۙ39
और लोगों से कहा गया, "क्या तुम भी एकत्र होते हो?"
لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ اِنْ كَانُوا هُمُ الْغَالِب۪ينَ40
कदाचित हम जादूगरों ही के अनुयायी रह जाएँ, यदि वे विजयी हुए
فَلَمَّا جَٓاءَ السَّحَرَةُ قَالُوا لِفِرْعَوْنَ اَئِنَّ لَنَا لَاَجْرًا اِنْ كُنَّا نَحْنُ الْغَالِب۪ينَ41
फिर जब जादूगर आए तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा, "क्या हमारे लिए कोई प्रतिदान भी है, यदि हम प्रभावी रहे?"
قَالَ نَعَمْ وَاِنَّكُمْ اِذًا لَمِنَ الْمُقَرَّب۪ينَ42
उसने कहा, "हाँ, और निश्चित ही तुम तो उस समय निकटतम लोगों में से हो जाओगे।"
قَالَ لَهُمْ مُوسٰٓى اَلْقُوا مَٓا اَنْتُمْ مُلْقُونَ43
मूसा ने उनसे कहा, "डालो, जो कुछ तुम्हें डालना है।"
فَاَلْقَوْا حِبَالَهُمْ وَعِصِيَّهُمْ وَقَالُوا بِعِزَّةِ فِرْعَوْنَ اِنَّا لَنَحْنُ الْغَالِبُونَ44
तब उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ डाल दी और बोले, "फ़िरऔन के प्रताप से हम ही विजयी रहेंगे।"
فَاَلْقٰى مُوسٰى عَصَاهُ فَاِذَا هِيَ تَلْقَفُ مَا يَاْفِكُونَۚ45
फिर मूसा ने अपनी लाठी फेकी तो क्या देखते है कि वह उसे स्वाँग को, जो वे रचाते है, निगलती जा रही है
فَاُلْقِيَ السَّحَرَةُ سَاجِد۪ينَۙ46
इसपर जादूगर सजदे में गिर पड़े
قَالُٓوا اٰمَنَّا بِرَبِّ الْعَالَم۪ينَۙ47
वे बोल उठे, "हम सारे संसार के रब पर ईमान ले आए -
رَبِّ مُوسٰى وَهٰرُونَ48
मूसा और हारून के रब पर!"
قَالَ اٰمَنْتُمْ لَهُ قَبْلَ اَنْ اٰذَنَ لَكُمْۚ اِنَّهُ لَكَب۪يرُكُمُ الَّذ۪ي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَۚ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَۜ لَاُقَطِّعَنَّ اَيْدِيَكُمْ وَاَرْجُلَكُمْ مِنْ خِلَافٍ وَلَاُصَلِّبَنَّكُمْ اَجْمَع۪ينَ49
उसने कहा, "तुमने उसको मान लिया, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति देता। निश्चय ही वह तुम सबका प्रमुख है, जिसने तुमको जादू सिखाया है। अच्छा, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हुआ जाता है! मैं तुम्हारे हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और तुम सभी को सूली पर चढ़ा दूँगा।"
قَالُوا لَا ضَيْرَۘ اِنَّٓا اِلٰى رَبِّنَا مُنْقَلِبُونَۚ50
उन्होंने कहा, "कुछ हरज नहीं; हम तो अपने रब ही की ओर पलटकर जानेवाले है
اِنَّا نَطْمَعُ اَنْ يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَٓا اَنْ كُنَّٓا اَوَّلَ الْمُؤْمِن۪ينَۜ۟51
हमें तो इसी की लालसा है कि हमारा रब हमारी ख़ताओं को क्षमा कर दें, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाए।"
وَاَوْحَيْنَٓا اِلٰى مُوسٰٓى اَنْ اَسْرِ بِعِبَاد۪ٓي اِنَّكُمْ مُتَّبَعُونَ52
हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "मेरे बन्दों को लेकर रातों-रात निकल जा। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा।"
فَاَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِي الْمَدَٓائِنِ حَاشِر۪ينَۚ53
इसपर फ़िरऔन ने एकत्र करनेवालों को नगर में भेजा
اِنَّ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَل۪يلُونَۙ54
कि "यह गिरे-पड़े थोड़े लोगों का एक गिरोह है,
وَاِنَّهُمْ لَنَا لَغَٓائِظُونَۙ55
और ये हमें क्रुद्ध कर रहे है।
وَاِنَّا لَجَم۪يعٌ حَاذِرُونَۜ56
और हम चौकन्ना रहनेवाले लोग है।"
فَاَخْرَجْنَاهُمْ مِنْ جَنَّاتٍ وَعُيُونٍۙ57
इस प्रकार हम उन्हें बाग़ों और स्रोतों
وَكُنُوزٍ وَمَقَامٍ كَر۪يمٍۙ58
और ख़जानों और अच्छे स्थान से निकाल लाए
كَذٰلِكَۜ وَاَوْرَثْنَاهَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۚ59
ऐसा ही हम करते है और इनका वारिस हमने इसराईल की सन्तान को बना दिया
فَاَتْبَعُوهُمْ مُشْرِق۪ينَ60
सुबह-तड़के उन्होंने उनका पीछा किया
فَلَمَّا تَرَٓاءَ الْجَمْعَانِ قَالَ اَصْحَابُ مُوسٰٓى اِنَّا لَمُدْرَكُونَۚ61
फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया तो मूसा के साथियों ने कहा, "हम तो पकड़े गए!"
قَالَ كَلَّاۚ اِنَّ مَعِيَ رَبّ۪ي سَيَهْد۪ينِ62
उसने कहा, "कदापि नहीं, मेरे साथ मेरा रब है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।"
فَاَوْحَيْنَٓا اِلٰى مُوسٰٓى اَنِ اضْرِبْ بِعَصَاكَ الْبَحْرَۜ فَانْفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظ۪يمِۚ63
तब हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "अपनी लाठी सागर पर मार।"
وَاَزْلَفْنَا ثَمَّ الْاٰخَر۪ينَۚ64
और हम दूसरों को भी निकट ले आए
وَاَنْجَيْنَا مُوسٰى وَمَنْ مَعَهُٓ اَجْمَع۪ينَۚ65
हमने मूसा को और उन सबको जो उसके साथ थे, बचा लिया
ثُمَّ اَغْرَقْنَا الْاٰخَر۪ينَۜ66
और दूसरों को डूबो दिया
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ67
निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟68
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَاَ اِبْرٰه۪يمَۢ69
और उन्हें इबराहीम का वृत्तान्त सुनाओ,
اِذْ قَالَ لِاَب۪يهِ وَقَوْمِه۪ مَا تَعْبُدُونَ70
जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौंम के लोगों से कहा, "तुम क्या पूजते हो?"
قَالُوا نَعْبُدُ اَصْنَامًا فَنَظَلُّ لَهَا عَاكِف۪ينَ71
उन्होंने कहा, "हम बुतों की पूजा करते है, हम तो उन्हीं की सेवा में लगे रहेंगे।"
قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ اِذْ تَدْعُونَۙ72
उसने कहा, "क्या ये तुम्हारी सुनते है, जब तुम पुकारते हो,
اَوْ يَنْفَعُونَكُمْ اَوْ يَضُرُّونَ73
या ये तुम्हें कुछ लाभ या हानि पहुँचाते है?"
قَالُوا بَلْ وَجَدْنَٓا اٰبَٓاءَنَا كَذٰلِكَ يَفْعَلُونَ74
उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हमने तो अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते पाया है।"
قَالَ اَفَرَاَيْتُمْ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَۙ75
उसने कहा, "क्या तुमने उनपर विचार भी किया कि जिन्हें तुम पूजते हो,
اَنْتُمْ وَاٰبَٓاؤُ۬كُمُ الْاَقْدَمُونَ76
तुम और तुम्हारे पहले के बाप-दादा?
فَاِنَّهُمْ عَدُوٌّ ل۪ٓي اِلَّا رَبَّ الْعَالَم۪ينَۙ77
वे सब तो मेरे शत्रु है, सिवाय सारे संसार के रब के,
اَلَّذ۪ي خَلَقَن۪ي فَهُوَ يَهْد۪ينِۙ78
जिसने मुझे पैदा किया और फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है
وَالَّذ۪ي هُوَ يُطْعِمُن۪ي وَيَسْق۪ينِۙ79
और वही है जो मुझे खिलाता और पिलाता है
وَاِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْف۪ينِۖ80
और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है
وَالَّذ۪ي يُم۪يتُن۪ي ثُمَّ يُحْي۪ينِۙ81
और वही है जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा
وَالَّذ۪ٓي اَطْمَعُ اَنْ يَغْفِرَ ل۪ي خَط۪ٓيـَٔت۪ي يَوْمَ الدّ۪ينِۜ82
और वही है जिससे मुझे इसकी आकांक्षा है कि बदला दिए जाने के दिन वह मेरी ख़ता माफ़ कर देगा
رَبِّ هَبْ ل۪ي حُكْمًا وَاَلْحِقْن۪ي بِالصَّالِح۪ينَۙ83
ऐ मेरे रब! मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान कर और मुझे योग्य लोगों के साथ मिला।
وَاجْعَلْ ل۪ي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْاٰخِر۪ينَۙ84
और बाद के आनेवालों में से मुझे सच्ची ख़्याति प्रदान कर
وَاجْعَلْن۪ي مِنْ وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّع۪يمِۙ85
और मुझे नेमत भरी जन्नत के वारिसों में सम्मिलित कर
وَاغْفِرْ لِاَب۪ٓي اِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّٓالّ۪ينَۙ86
और मेरे बाप को क्षमा कर दे। निश्चय ही वह पथभ्रष्ट लोगों में से है
وَلَا تُخْزِن۪ي يَوْمَ يُبْعَثُونَۙ87
और मुझे उस दिन रुसवा न कर, जब लोग जीवित करके उठाए जाएँगे।
يَوْمَ لَا يَنْفَعُ مَالٌ وَلَا بَنُونَۙ88
जिस दिन न माल काम आएगा और न औलाद,
اِلَّا مَنْ اَتَى اللّٰهَ بِقَلْبٍ سَل۪يمٍۜ89
सिवाय इसके कि कोई भला-चंगा दिल लिए हुए अल्लाह के पास आया हो।"
وَاُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّق۪ينَۙ90
और डर रखनेवालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी
وَبُرِّزَتِ الْجَح۪يمُ لِلْغَاو۪ينَۙ91
और भडकती आग पथभ्रष्टि लोगों के लिए प्रकट कर दी जाएगी
وَق۪يلَ لَهُمْ اَيْنَ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَۙ92
और उनसे कहा जाएगा, "कहाँ है वे जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते रहे हो?
مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ هَلْ يَنْصُرُونَكُمْ اَوْ يَنْتَصِرُونَۜ93
क्या वे तुम्हारी कुछ सहायता कर रहे है या अपना ही बचाव कर सकते है?"
فَكُبْكِبُوا ف۪يهَا هُمْ وَالْغَاوُ۫نَۙ94
फिर वे उसमें औंधे झोक दिए जाएँगे, वे और बहके हुए लोग
وَجُنُودُ اِبْل۪يسَ اَجْمَعُونَۜ95
और इबलीस की सेनाएँ, सबके सब।
قَالُوا وَهُمْ ف۪يهَا يَخْتَصِمُونَۙ96
वे वहाँ आपस में झगड़ते हुए कहेंगे,
تَاللّٰهِ اِنْ كُنَّا لَف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍۙ97
"अल्लाह की क़सम! निश्चय ही हम खुली गुमराही में थे
اِذْ نُسَوّ۪يكُمْ بِرَبِّ الْعَالَم۪ينَ98
जबकि हम तुम्हें सारे संसार के रब के बराबर ठहरा रहे थे
وَمَٓا اَضَلَّنَٓا اِلَّا الْمُجْرِمُونَ99
और हमें तो बस उन अपराधियों ने ही पथभ्रष्ट किया
فَمَا لَنَا مِنْ شَافِع۪ينَۙ100
अब न हमारा कोई सिफ़ारिशी है,
وَلَا صَد۪يقٍ حَم۪يمٍ101
और न घनिष्ट मित्र
فَلَوْ اَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ102
क्या ही अच्छा होता कि हमें एक बार फिर पलटना होता, तो हम मोमिनों में से हो जाते!"
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ103
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकरतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟104
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍۨ الْمُرْسَل۪ينَۚ105
नूह की क़ौम ने रसूलों को झुठलाया;
اِذْ قَالَ لَهُمْ اَخُوهُمْ نُوحٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ106
जबकि उनसे उनके भाई नूह ने कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ107
निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ108
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरा कहा मानो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۚ109
मैं इस काम के बदले तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۜ110
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो।"
قَالُٓوا اَنُؤْمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الْاَرْذَلُونَۜ111
उन्होंने कहा, "क्या हम तेरी बात मान लें, जबकि तेरे पीछे तो अत्यन्त नीच लोग चल रहे है?"
قَالَ وَمَا عِلْم۪ي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَۚ112
उसने कहा, "मुझे क्या मालूम कि वे क्या करते रहे है?
اِنْ حِسَابُهُمْ اِلَّا عَلٰى رَبّ۪ي لَوْ تَشْعُرُونَۚ113
उनका हिसाब तो बस मेरे रब के ज़िम्मे है। क्या ही अच्छा होता कि तुममें चेतना होती।
وَمَٓا اَنَا۬ بِطَارِدِ الْمُؤْمِن۪ينَۚ114
और मैं ईमानवालों को धुत्कारनेवाला नहीं हूँ।
اِنْ اَنَا۬ اِلَّا نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌۜ115
मैं तो बस स्पष्ट रूप से एक सावधान करनेवाला हूँ।"
قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُوم۪ينَۜ116
उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया ऐ नूह, तो तू संगसार होकर रहेगा।"
قَالَ رَبِّ اِنَّ قَوْم۪ي كَذَّبُونِۚ117
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम के लोगों ने तो मुझे झुठला दिया
فَافْتَحْ بَيْن۪ي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّن۪ي وَمَنْ مَعِيَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ118
अब मेरे और उनके बीच दो टूक फ़ैसला कर दे और मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ है, उन्हें बचा ले!"
فَاَنْجَيْنَاهُ وَمَنْ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِۚ119
अतः हमने उसे और जो उसके साथ भरी हुई नौका में थे बचा लिया
ثُمَّ اَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاق۪ينَۜ120
और उसके पश्चात शेष लोगों को डूबो दिया
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ121
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟122
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
كَذَّبَتْ عَادٌۨ الْمُرْسَل۪ينَۚ123
आद ने रसूलों को झूठलाया
اِذْ قَالَ لَهُمْ اَخُوهُمْ هُودٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ124
जबकि उनके भाई हूद ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ125
मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ126
अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा मानो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ127
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़ि्म्मे है।
اَتَبْنُونَ بِكُلِّ ر۪يعٍ اٰيَةً تَعْبَثُونَۙ128
क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे?
وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَۚ129
और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है?
وَاِذَا بَطَشْتُمْ بَطَشْتُمْ جَبَّار۪ينَۚ130
और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो!
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ131
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَاتَّقُوا الَّذ۪ٓي اَمَدَّكُمْ بِمَا تَعْلَمُونَۚ132
उसका डर रखो जिसने तुम्हें वे चीज़े पहुँचाई जिनको तुम जानते हो
اَمَدَّكُمْ بِاَنْعَامٍ وَبَن۪ينَۙ133
उसने तुम्हारी सहायता की चौपायों और बेटों से,
وَجَنَّاتٍ وَعُيُونٍۚ134
और बाग़ो और स्रोतो से
اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍۜ135
निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
قَالُوا سَوَٓاءٌ عَلَيْنَٓا اَوَعَظْتَ اَمْ لَمْ تَكُنْ مِنَ الْوَاعِظ۪ينَۙ136
उन्होंने कहा, "हमारे लिए बराबर है चाहे तुम नसीहत करो या नसीहत करने वाले न बनो।
اِنْ هٰذَٓا اِلَّا خُلُقُ الْاَوَّل۪ينَۙ137
यह तो बस पहले लोगों की पुरानी आदत है
وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّب۪ينَۚ138
और हमें कदापि यातना न दी जाएगी।"
فَكَذَّبُوهُ فَاَهْلَكْنَاهُمْۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ139
अन्ततः उन्होंने उन्हें झुठला दिया जो हमने उनको विनष्ट कर दिया। बेशक इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟140
और बेशक तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَل۪ينَۚ141
समूद ने रसूलों को झुठलाया,
اِذْ قَالَ لَهُمْ اَخُوهُمْ صَالِحٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ142
जबकि उसके भाई सालेह ने उससे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ143
निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ144
अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी बात मानो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ145
मैं इस काम पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
اَتُتْرَكُونَ ف۪ي مَا هٰهُنَٓا اٰمِن۪ينَۙ146
क्या तुम यहाँ जो कुछ है उसके बीच, निश्चिन्त छोड़ दिए जाओगे,
ف۪ي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍۙ147
बाग़ों और स्रोतों
وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَض۪يمٌۚ148
और खेतों और उन खजूरों में जिनके गुच्छे तरो ताज़ा और गुँथे हुए है?
وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِه۪ينَۚ149
तुम पहाड़ों को काट-काटकर इतराते हुए घर बनाते हो?
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ150
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَلَا تُط۪يعُٓوا اَمْرَ الْمُسْرِف۪ينَۙ151
और उन हद से गुज़र जानेवालों की आज्ञा का पालन न करो,
اَلَّذ۪ينَ يُفْسِدُونَ فِي الْاَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ152
जो धरती में बिगाड़ पैदा करते है, और सुधार का काम नहीं करते।"
قَالُٓوا اِنَّمَٓا اَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّر۪ينَۚ153
उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है।
مَٓا اَنْتَ اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَاۚ فَاْتِ بِاٰيَةٍ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ154
तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है। यदि तू सच्चा है, तो कोई निशानी ले आ।"
قَالَ هٰذِه۪ نَاقَةٌ لَهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَعْلُومٍۚ155
उसने कहा, "यह ऊँटनी है। एक दिन पानी पीने की बारी इसकी है और एक नियत दिन की बारी पानी लेने की तुम्हारी है
وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُٓوءٍ فَيَاْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ156
तकलीफ़ पहुँचाने के लिए इसे हाथ न लगाना, अन्यथा एक बड़े दिन की यातना तुम्हें आ लेगी।"
فَعَقَرُوهَا فَاَصْبَحُوا نَادِم۪ينَۙ157
किन्तु उन्होंने उसकी कूचें काट दी। फिर पछताते रह गए
فَاَخَذَهُمُ الْعَذَابُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ158
अन्ततः यातना ने उन्हें आ दबोचा। निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟159
और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयाशील है
كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍۨ الْمُرْسَل۪ينَۚ160
लूत की क़ौम के लोगों ने रसूलों को झुठलाया;
اِذْ قَالَ لَهُمْ اَخُوهُمْ لُوطٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ161
जबकि उनके भाई लूत ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ162
मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ163
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ164
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता, मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
اَتَاْتُونَ الذُّكْرَانَ مِنَ الْعَالَم۪ينَۙ165
क्या सारे संसारवालों में से तुम ही ऐसे हो जो पुरुषों के पास जाते हो,
وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِنْ اَزْوَاجِكُمْۜ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ166
और अपनी पत्नियों को, जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा किया, छोड़ देते हो? इतना ही नहीं, बल्कि तुम हद से आगे बढ़े हुए लोग हो।"
قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا لُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمُخْرَج۪ينَ167
उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया, ऐ लतू! तो तू अवश्य ही निकाल बाहर किया जाएगा।"
قَالَ اِنّ۪ي لِعَمَلِكُمْ مِنَ الْقَال۪ينَۜ168
उसने कहा, "मैं तुम्हारे कर्म से अत्यन्त विरक्त हूँ।
رَبِّ نَجِّن۪ي وَاَهْل۪ي مِمَّا يَعْمَلُونَ169
ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे लोगों को, जो कुछ ये करते है उसके परिणाम से, बचा ले।"
فَنَجَّيْنَاهُ وَاَهْلَهُٓ اَجْمَع۪ينَۙ170
अन्ततः हमने उसे और उसके सारे लोगों को बचा लिया;
اِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِر۪ينَۚ171
सिवाय एक बुढ़िया के जो पीछे रह जानेवालों में थी
ثُمَّ دَمَّرْنَا الْاٰخَر۪ينَۚ172
फिर शेष दूसरे लोगों को हमने विनष्ट कर दिया।
وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ مَطَرًاۚ فَسَٓاءَ مَطَرُ الْمُنْذَر۪ينَ173
और हमने उनपर एक बरसात बरसाई। और यह चेताए हुए लोगों की बहुत ही बुरी वर्षा थी
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ174
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟175
और निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
كَذَّبَ اَصْحَابُ لْـَٔيْكَةِ الْمُرْسَل۪ينَۚ176
अल-ऐकावालों ने रसूलों को झुठलाया
اِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ اَلَا تَتَّقُونَۚ177
जबकि शुऐब ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?
اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ178
मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ
فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُونِۚ179
अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो
وَمَٓا اَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ اَجْرٍۚ اِنْ اَجْرِيَ اِلَّا عَلٰى رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ180
मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है
اَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِر۪ينَۚ181
तुम पूरा-पूरा पैमाना भरो और घाटा न दो
وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَق۪يمِۚ182
और ठीक तराज़ू से तौलो
وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ اَشْيَٓاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْاَرْضِ مُفْسِد۪ينَۚ183
और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो और धरती में बिगाड़ और फ़साद मचाते मत फिरो
وَاتَّقُوا الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ وَالْجِبِلَّةَ الْاَوَّل۪ينَۜ184
उसका डर रखो जिसने तुम्हें और पिछली नस्लों को पैदा किया हैं।"
قَالُٓوا اِنَّمَٓا اَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّر۪ينَۙ185
उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है
وَمَٓا اَنْتَ اِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَا وَاِنْ نَظُنُّكَ لَمِنَ الْكَاذِب۪ينَۚ186
और तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है और हम तो तुझे झूठा समझते है
فَاَسْقِطْ عَلَيْنَا كِسَفًا مِنَ السَّمَٓاءِ اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَۜ187
फिर तू हमपर आकाश को कोई टुकड़ा गिरा दे, यदि तू सच्चा है।"
قَالَ رَبّ۪ٓي اَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ188
उसने कहा, " मेरा रब भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो।"
فَكَذَّبُوهُ فَاَخَذَهُمْ عَذَابُ يَوْمِ الظُّلَّةِۜ اِنَّهُ كَانَ عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ189
किन्तु उन्होंने उसे झुठला दिया। फिर छायावाले दिन की यातना ने आ लिया। निश्चय ही वह एक बड़े दिन की यातना थी
اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةًۜ وَمَا كَانَ اَكْثَرُهُمْ مُؤْمِن۪ينَ190
निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
وَاِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَز۪يزُ الرَّح۪يمُ۟191
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
وَاِنَّهُ لَتَنْز۪يلُ رَبِّ الْعَالَم۪ينَۜ192
निश्चय ही यह (क़ुरआन) सारे संसार के रब की अवतरित की हुई चीज़ है
نَزَلَ بِهِ الرُّوحُ الْاَم۪ينُۙ193
इसको लेकर तुम्हारे हृदय पर एक विश्वसनीय आत्मा उतरी है,
عَلٰى قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ الْمُنْذِر۪ينَۙ194
ताकि तुम सावधान करनेवाले हो
بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُب۪ينٍۜ195
स्पष्ट अरबी भाषा में
وَاِنَّهُ لَف۪ي زُبُرِ الْاَوَّل۪ينَ196
और निस्संदेह यह पिछले लोगों की किताबों में भी मौजूद है
اَوَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ اٰيَةً اَنْ يَعْلَمَهُ عُلَمٰٓؤُ۬ا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَۜ197
क्या यह उनके लिए कोई निशानी नहीं है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते है?
وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلٰى بَعْضِ الْاَعْجَم۪ينَۙ198
यदि हम इसे ग़ैर अरबी भाषी पर भी उतारते,
فَقَرَاَهُ عَلَيْهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ مُؤْمِن۪ينَۜ199
और वह इसे उन्हें पढ़कर सुनाता तब भी वे इसे माननेवाले न होते
كَذٰلِكَ سَلَكْنَاهُ ف۪ي قُلُوبِ الْمُجْرِم۪ينَۜ200
इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के दिलों में पैठाया है
لَا يُؤْمِنُونَ بِه۪ حَتّٰى يَرَوُا الْعَذَابَ الْاَل۪يمَۙ201
वे इसपर ईमान लाने को नहीं, जब तक कि दुखद यातना न देख लें
فَيَاْتِيَهُمْ بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَۙ202
फिर जब वह अचानक उनपर आ जाएगी और उन्हें ख़बर भी न होगी,
فَيَقُولُوا هَلْ نَحْنُ مُنْظَرُونَۜ203
तब वे कहेंगे, "क्या हमें कुछ मुहलत मिल सकती है?"
اَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ204
तो क्या वे लोग हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे है?
اَفَرَاَيْتَ اِنْ مَتَّعْنَاهُمْ سِن۪ينَۙ205
क्या तुमने कुछ विचार किया? यदि हम उन्हें कुछ वर्षों तक सुख भोगने दें;
ثُمَّ جَٓاءَهُمْ مَا كَانُوا يُوعَدُونَۙ206
फिर उनपर वह चीज़ आ जाए, जिससे उन्हें डराया जाता रहा है;
مَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يُمَتَّعُونَۜ207
तो जो सुख उन्हें मिला होगा वह उनके कुछ काम न आएगा
وَمَٓا اَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ اِلَّا لَهَا مُنْذِرُونَۗۛ208
हमने किसी बस्ती को भी इसके बिना विनष्ट नहीं किया कि उसके लिए सचेत करनेवाले याददिहानी के लिए मौजूद रहे हैं।
ذِكْرٰى۠ۛ وَمَا كُنَّا ظَالِم۪ينَ209
हम कोई ज़ालिम नहीं है
وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاط۪ينُ210
इसे शैतान लेकर नहीं उतरे हैं।
وَمَا يَنْبَغ۪ي لَهُمْ وَمَا يَسْتَط۪يعُونَۜ211
न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है
اِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَۜ212
वे तो इसके सुनने से भी दूर रखे गए है
فَلَا تَدْعُ مَعَ اللّٰهِ اِلٰهًا اٰخَرَ فَتَكُونَ مِنَ الْمُعَذَّب۪ينَۚ213
अतः अल्लाह के साथ दूसरे इष्ट-पूज्य को न पुकारना, अन्यथा तुम्हें भी यातना दी जाएगी
وَاَنْذِرْ عَش۪يرَتَكَ الْاَقْرَب۪ينَۙ214
और अपने निकटतम नातेदारों को सचेत करो
وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَۚ215
और जो ईमानवाले तुम्हारे अनुयायी हो गए है, उनके लिए अपनी भुजाएँ बिछाए रखो
فَاِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ اِنّ۪ي بَر۪ٓيءٌ مِمَّا تَعْمَلُونَۚ216
किन्तु यदि वे तुम्हारी अवज्ञा करें तो कह दो, "जो कुछ तुम करते हो, उसकी ज़िम्मेदारी से मं1 बरी हूँ।"
وَتَوَكَّلْ عَلَى الْعَز۪يزِ الرَّح۪يمِۙ217
और उस प्रभुत्वशाली और दया करनेवाले पर भरोसा रखो
اَلَّذ۪ي يَرٰيكَ ح۪ينَ تَقُومُۙ218
जो तुम्हें देख रहा होता है, जब तुम खड़े होते हो
وَتَقَلُّبَكَ فِي السَّاجِد۪ينَ219
और सजदा करनेवालों में तुम्हारे चलत-फिरत को भी वह देखता है
اِنَّهُ هُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ220
निस्संदेह वह भली-भाँति सुनता-जानता है
هَلْ اُنَبِّئُكُمْ عَلٰى مَنْ تَنَزَّلُ الشَّيَاط۪ينُۜ221
क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान किसपर उतरते है?
تَنَزَّلُ عَلٰى كُلِّ اَفَّاكٍ اَث۪يمٍۙ222
वे प्रत्येक ढोंग रचनेवाले गुनाहगार पर उतरते है
يُلْقُونَ السَّمْعَ وَاَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَۜ223
वे कान लगाते है और उनमें से अधिकतर झूठे होते है
وَالشُّعَرَٓاءُ يَتَّبِعُهُمُ الْغَاوُ۫نَۜ224
रहे कवि, तो उनके पीछे बहके हुए लोग ही चला करते है।-
اَلَمْ تَرَ اَنَّهُمْ ف۪ي كُلِّ وَادٍ يَه۪يمُونَۙ225
क्या तुमने देखा नहीं कि वे हर घाटी में बहके फिरते हैं,
وَاَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَۙ226
और कहते वह है जो करते नहीं? -
اِلَّا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَذَكَرُوا اللّٰهَ كَث۪يرًا وَانْتَصَرُوا مِنْ بَعْدِ مَا ظُلِمُواۜ وَسَيَعْلَمُ الَّذ۪ينَ ظَلَمُٓوا اَيَّ مُنْقَلَبٍ يَنْقَلِبُونَ227
वे नहीं जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और अल्लाह को अधिक .याद किया। औऱ इसके बाद कि उनपर ज़ुल्म किया गया तो उन्होंने उसका प्रतिकार किया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा कि वे किस जगह पलटते हैं
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
طٰسٓ۠ تِلْكَ اٰيَاتُ الْقُرْاٰنِ وَكِتَابٍ مُب۪ينٍۙ1
ता॰ सीन॰। ये आयतें है क़ुरआन और एक स्पष्ट किताब की
هُدًى وَبُشْرٰى لِلْمُؤْمِن۪ينَۙ2
मार्गदर्शन है और शुभ-सूचना उन ईमानवालों के लिए,
اَلَّذ۪ينَ يُق۪يمُونَ الصَّلٰوةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ3
जो नमाज़ का आयोजन करते है और ज़कात देते है और वही है जो आख़िरत पर विश्वास रखते है
اِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ اَعْمَالَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَۜ4
रहे वे लोग जो आख़िरत को नहीं मानते, उनके लिए हमने उनकी करतूतों को शोभायमान बना दिया है। अतः वे भटकते फिरते है
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ لَهُمْ سُٓوءُ الْعَذَابِ وَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ هُمُ الْاَخْسَرُونَ5
वही लोग है, जिनके लिए बुरी यातना है और वही है जो आख़िरत में अत्यन्त घाटे में रहेंगे
وَاِنَّكَ لَتُلَقَّى الْقُرْاٰنَ مِنْ لَدُنْ حَك۪يمٍ عَل۪يمٍ6
निश्चय ही तुम यह क़ुरआन एक बड़े तत्वदर्शी, ज्ञानवान (प्रभु) की ओर से पा रहे हो
اِذْ قَالَ مُوسٰى لِاَهْلِه۪ٓ اِنّ۪ٓي اٰنَسْتُ نَارًاۜ سَاٰت۪يكُمْ مِنْهَا بِخَبَرٍ اَوْ اٰت۪يكُمْ بِشِهَابٍ قَبَسٍ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ7
याद करो जब मूसा ने अपने घरवालों से कहा कि "मैंने एक आग-सी देखी है। मैं अभी वहाँ से तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आता हूँ या तुम्हारे पास कोई दहकता अंगार लाता हूँ, ताकि तुम तापो।"
فَلَمَّا جَٓاءَهَا نُودِيَ اَنْ بُورِكَ مَنْ فِي النَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَاۜ وَسُبْحَانَ اللّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ8
फिर जब वह उसके पास पहुँचा तो उसे आवाज़ आई कि "मुबारक है वह जो इस आग में है और जो इसके आस-पास है। महान और उच्च है अल्लाह, सारे संसार का रब!
يَا مُوسٰٓى اِنَّهُٓ اَنَا۬ اللّٰهُ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُۙ9
ऐ मूसा! वह तो मैं अल्लाह हूँ, अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी!
وَاَلْقِ عَصَاكَۜ فَلَمَّا رَاٰهَا تَهْتَزُّ كَاَنَّهَا جَٓانٌّ وَلّٰى مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْۜ يَا مُوسٰى لَا تَخَفْ اِنّ۪ي لَا يَخَافُ لَدَيَّ الْمُرْسَلُونَۗ10
तू अपनी लाठी डाल दे।" जब मूसा ने देखा कि वह बल खा रहा है जैसे वह कोई साँप हो, तो वह पीठ फेरकर भागा और पीछे मुड़कर न देखा। "ऐ मूसा! डर मत। निस्संदेह रसूल मेरे पास डरा नहीं करते,
اِلَّا مَنْ ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًا بَعْدَ سُٓوءٍ فَاِنّ۪ي غَفُورٌ رَح۪يمٌ11
सिवाय उसके जिसने कोई ज़्यादती की हो। फिर बुराई के पश्चात उसे भलाई से बदल दिया, तो मैं भी बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान हूँ
وَاَدْخِلْ يَدَكَ ف۪ي جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَٓاءَ مِنْ غَيْرِ سُٓوءٍ ف۪ي تِسْعِ اٰيَاتٍ اِلٰى فِرْعَوْنَ وَقَوْمِه۪ۜ اِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِق۪ينَ12
अपना हाथ गिरेबान में डाल। वह बिना किसी ख़राबी के उज्जवल चमकता निकलेगा। ये नौ निशानियों में से है फ़िरऔन और उसकी क़ौम की ओर भेजने के लिए। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग है।"
فَلَمَّا جَٓاءَتْهُمْ اٰيَاتُنَا مُبْصِرَةً قَالُوا هٰذَا سِحْرٌ مُب۪ينٌۚ13
किन्तु जब आँखें खोल देनेवाली हमारी निशानियाँ उनके पास आई तो उन्होंने कहा, "यह तो खुला हुआ जादू है।"
وَجَحَدُوا بِهَا وَاسْتَيْقَنَتْهَٓا اَنْفُسُهُمْ ظُلْمًا وَعُلُوًّاۜ فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِد۪ينَ۟14
उन्होंने ज़ुल्म और सरकशी से उनका इनकार कर दिया, हालाँकि उनके जी को उनका विश्वास हो चुका था। अब देख लो इन बिगाड़ पैदा करनेवालों का क्या परिणाम हुआ?
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا دَاوُ۫دَ وَسُلَيْمٰنَ عِلْمًاۚ وَقَالَا الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي فَضَّلَنَا عَلٰى كَث۪يرٍ مِنْ عِبَادِهِ الْمُؤْمِن۪ينَ15
हमने दाऊद और सुलैमान को बड़ा ज्ञान प्रदान किया था, (उन्होंने उसके महत्व को जाना) और उन दोनों ने कहा, "सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें अपने बहुत-से ईमानवाले बन्दों के मुक़ाबले में श्रेष्ठता प्रदान की।"
وَوَرِثَ سُلَيْمٰنُ دَاوُ۫دَ وَقَالَ يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ عُلِّمْنَا مَنْطِقَ الطَّيْرِ وَاُو۫ت۪ينَا مِنْ كُلِّ شَيْءٍۜ اِنَّ هٰذَا لَهُوَ الْفَضْلُ الْمُب۪ينُ16
दाऊद का उत्तराधिकारी सुलैमान हुआ औऱ उसने कहा, "ऐ लोगों! हमें पक्षियों की बोली सिखाई गई है और हमें हर चीज़ दी गई है। निस्संदेह वह स्पष्ट बड़ाई है।"
وَحُشِرَ لِسُلَيْمٰنَ جُنُودُهُ مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ وَالطَّيْرِ فَهُمْ يُوزَعُونَ17
सुलैमान के लिए जिन्न और मनुष्य और पक्षियों मे से उसकी सेनाएँ एकत्र कर गई फिर उनकी दर्जाबन्दी की जा रही थी
حَتّٰٓى اِذَٓا اَتَوْا عَلٰى وَادِ النَّمْلِۙ قَالَتْ نَمْلَةٌ يَٓا اَيُّهَا النَّمْلُ ادْخُلُوا مَسَاكِنَكُمْۚ لَا يَحْطِمَنَّكُمْ سُلَيْمٰنُ وَجُنُودُهُۙ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ18
यहाँ तक कि जब वे चींटियों की घाटी में पहुँचे तो एक चींटी ने कहा, "ऐ चींटियों! अपने घरों में प्रवेश कर जाओ। कहीं सुलैमान और उसकी सेनाएँ तुम्हें कुचल न डालें और उन्हें एहसास भी न हो।"
فَتَبَسَّمَ ضَاحِكًا مِنْ قَوْلِهَا وَقَالَ رَبِّ اَوْزِعْن۪ٓي اَنْ اَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّت۪ٓي اَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلٰى وَالِدَيَّ وَاَنْ اَعْمَلَ صَالِحًا تَرْضٰيهُ وَاَدْخِلْن۪ي بِرَحْمَتِكَ ف۪ي عِبَادِكَ الصَّالِح۪ينَ19
तो वह उसकी बात पर प्रसन्न होकर मुस्कराया और कहा, "मेरे रब! मुझे संभाले रख कि मैं तेरी उस कृपा पर कृतज्ञता दिखाता रहूँ जो तूने मुझपर और मेरे माँ-बाप पर की है। और यह कि अच्छा कर्म करूँ जो तुझे पसन्द आए और अपनी दयालुता से मुझे अपने अच्छे बन्दों में दाखिल कर।"
وَتَفَقَّدَ الطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِيَ لَٓا اَرَى الْهُدْهُدَۘ اَمْ كَانَ مِنَ الْغَٓائِب۪ينَ20
उसने पक्षियों की जाँच-पड़ताल की तो कहा, "क्या बात है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा हूँ, (वह यहीं कहीं है) या ग़ायब हो गया है?
لَاُعَذِّبَنَّهُ عَذَابًا شَد۪يدًا اَوْ لَا۬اَذْبَحَنَّهُٓ اَوْ لَيَاْتِيَنّ۪ي بِسُلْطَانٍ مُب۪ينٍ21
मैं उसे कठोर दंड दूँगा या उसे ज़बह ही कर डालूँगा या फिर वह मेरे सामने कोई स्पष्ट॥ कारण प्रस्तुत करे।"
فَمَكَثَ غَيْرَ بَع۪يدٍ فَقَالَ اَحَطْتُ بِمَا لَمْ تُحِطْ بِه۪ وَجِئْتُكَ مِنْ سَبَاٍ بِنَبَاٍ يَق۪ينٍ22
फिर कुछ अधिक देर नहीं ठहरा कि उसने आकर कहा, "मैंने वह जानकारी प्राप्त की है जो आपको मालूम नहीं है। मैं सबा से आपके पास एक विश्वसनीय सूचना लेकर आया हूँ
اِنّ۪ي وَجَدْتُ امْرَاَةً تَمْلِكُهُمْ وَاُو۫تِيَتْ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ وَلَهَا عَرْشٌ عَظ۪يمٌ23
मैंने एक स्त्री को उनपर शासन करते पाया है। उसे हर चीज़ प्राप्त है औऱ उसका एक बड़ा सिंहासन है
وَجَدْتُهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ اَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّب۪يلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَۙ24
मैंने उसे और उसकी क़ौम के लोगों को अल्लाह से इतर सूर्य को सजदा करते हुए पाया। शैतान ने उनके कर्मों को उनके लिए शोभायमान बना दिया है और उन्हें मार्ग से रोक दिया है - अतः वे सीधा मार्ग नहीं पा रहे है। -
اَلَّا يَسْجُدُوا لِلّٰهِ الَّذ۪ي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ25
खि अल्लाह को सजदा न करें जो आकाशों और धरती की छिपी चीज़ें निकालता है, और जानता है जो कुछ भी तुम छिपाते हो और जो कुछ प्रकट करते हो
اَللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظ۪يمِ26
अल्लाह कि उसके सिवा कोई इष्ट -पूज्य नहीं, वह महान सिंहासन का रब है।"
قَالَ سَنَنْظُرُ اَصَدَقْتَ اَمْ كُنْتَ مِنَ الْكَاذِب۪ينَ27
उसने कहा, "अभी हम देख लेते है कि तूने सच कहा या तू झूठा है
اِذْهَبْ بِكِتَاب۪ي هٰذَا فَاَلْقِهْ اِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَانْظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ28
मेरा यह पत्र लेकर जा, और इसे उन लोगों की ओर डाल दे। फिर उनके पास से अलग हटकर देख कि वे क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करते है।"
قَالَتْ يَٓا اَيُّهَا الْمَلَؤُ۬ا اِنّ۪ٓي اُلْقِيَ اِلَيَّ كِتَابٌ كَر۪يمٌ29
वह बोली, "ऐ सरदारों! मेरी ओर एक प्रतिष्ठित पत्र डाला गया है
اِنَّهُ مِنْ سُلَيْمٰنَ وَاِنَّهُ بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّح۪يمِۙ30
वह सुलैमान की ओर से है और वह यह है कि अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यन्त दयावान है
اَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَاْتُون۪ي مُسْلِم۪ينَ۟31
यह कि मेरे मुक़ाबले में सरकशी न करो और आज्ञाकारी बनकर मेरे पास आओ।"
قَالَتْ يَٓا اَيُّهَا الْمَلَؤُ۬ا اَفْتُون۪ي ف۪ٓي اَمْر۪يۚ مَا كُنْتُ قَاطِعَةً اَمْرًا حَتّٰى تَشْهَدُونِ32
उसने कहा, "ऐ सरदारों! मेरे मामलें में मुझे परामर्श दो। मैं किसी मामले का फ़ैसला नहीं करती, जब तक कि तुम मेरे पास मौजूद न हो।"
قَالُوا نَحْنُ اُو۬لُوا قُوَّةٍ وَاُو۬لُوا بَاْسٍ شَد۪يدٍ وَالْاَمْرُ اِلَيْكِ فَانْظُر۪ي مَاذَا تَاْمُر۪ينَ33
उन्होंने कहा, "हम शक्तिशाली है और हमें बड़ी युद्ध-क्षमता प्राप्त है। आगे मामले का अधिकार आपको है, अतः आप देख लें कि आपको क्या आदेश देना है।"
قَالَتْ اِنَّ الْمُلُوكَ اِذَا دَخَلُوا قَرْيَةً اَفْسَدُوهَا وَجَعَلُٓوا اَعِزَّةَ اَهْلِهَٓا اَذِلَّةًۚ وَكَذٰلِكَ يَفْعَلُونَ34
उसने कहा, "सम्राट जब किसी बस्ती में प्रवेश करते है, तो उसे ख़राब कर देते है और वहाँ के प्रभावशाली लोगों को अपमानित करके रहते है। और वे ऐसा ही करेंगे
وَاِنّ۪ي مُرْسِلَةٌ اِلَيْهِمْ بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةٌ بِمَ يَرْجِعُ الْمُرْسَلُونَ35
मैं उनके पास एक उपहार भेजती हूँ; फिर देखती हूँ कि दूत क्या उत्तर लेकर लौटते है।"
فَلَمَّا جَٓاءَ سُلَيْمٰنَ قَالَ اَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍۘ فَمَٓا اٰتٰينِيَ اللّٰهُ خَيْرٌ مِمَّٓا اٰتٰيكُمْۚ بَلْ اَنْتُمْ بِهَدِيَّتِكُمْ تَفْرَحُونَ36
फिर जब वह सुलैमान के पास पहुँचा तो उसने (सुलैमान ने) कहा, "क्या तुम माल से मेरी सहायता करोगे, तो जो कुछ अल्लाह ने मुझे दिया है वह उससे कहीं उत्तम है, जो उसने तुम्हें दिया है? बल्कि तुम्ही लोग हो जो अपने उपहार से प्रसन्न होते हो!
اِرْجِعْ اِلَيْهِمْ فَلَنَاْتِيَنَّهُمْ بِجُنُودٍ لَا قِبَلَ لَهُمْ بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُمْ مِنْهَٓا اَذِلَّةً وَهُمْ صَاغِرُونَ37
उनके पास वापस जाओ। हम उनपर ऐसी सेनाएँ लेकर आएँगे, जिनका मुक़ाबला वे न कर सकेंगे और हम उन्हें अपमानित करके वहाँ से निकाल देंगे कि वे पस्त होकर रहेंगे।"
قَالَ يَٓا اَيُّهَا الْمَلَؤُ۬ا اَيُّكُمْ يَاْت۪ين۪ي بِعَرْشِهَا قَبْلَ اَنْ يَاْتُون۪ي مُسْلِم۪ينَ38
उसने (सुलैमान ने) कहा, "ऐ सरदारो! तुममें कौन उसका सिंहासन लेकर मेरे पास आता है, इससे पहले कि वे लोग आज्ञाकारी होकर मेरे पास आएँ?"
قَالَ عِفْر۪يتٌ مِنَ الْجِنِّ اَنَا۬ اٰت۪يكَ بِه۪ قَبْلَ اَنْ تَقُومَ مِنْ مَقَامِكَۚ وَاِنّ۪ي عَلَيْهِ لَقَوِيٌّ اَم۪ينٌ39
जिन्नों में से एक बलिष्ठ निर्भीक ने कहा, "मैं उसे आपके पास ले आऊँगा। इससे पहले कि आप अपने स्थान से उठे। मुझे इसकी शक्ति प्राप्त है और मैं अमानतदार भी हूँ।"
قَالَ الَّذ۪ي عِنْدَهُ عِلْمٌ مِنَ الْكِتَابِ اَنَا۬ اٰت۪يكَ بِه۪ قَبْلَ اَنْ يَرْتَدَّ اِلَيْكَ طَرْفُكَۜ فَلَمَّا رَاٰهُ مُسْتَقِرًّا عِنْدَهُ قَالَ هٰذَا مِنْ فَضْلِ رَبّ۪ي۠ لِيَبْلُوَن۪ٓي ءَاَشْكُرُ اَمْ اَكْفُرُۜ وَمَنْ شَكَرَ فَاِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ رَبّ۪ي غَنِيٌّ كَر۪يمٌ40
जिस व्यक्ति के पास किताब का ज्ञान था, उसने कहा, "मैं आपकी पलक झपकने से पहले उसे आपके पास लाए देता हूँ।" फिर जब उसने उसे अपने पास रखा हुआ देखा तो कहा, "यह मेरे रब का उदार अनुग्रह है, ताकि वह मेरी परीक्षा करे कि मैं कृतज्ञता दिखाता हूँ या कृतघ्न बनता हूँ। जो कृतज्ञता दिखलाता है तो वह अपने लिए ही कृतज्ञता दिखलाता है और वह जिसने कृतघ्नता दिखाई, तो मेरा रब निश्चय ही निस्पृह, बड़ा उदार है।"
قَالَ نَكِّرُوا لَهَا عَرْشَهَا نَنْظُرْ اَتَهْتَد۪ٓي اَمْ تَكُونُ مِنَ الَّذ۪ينَ لَا يَهْتَدُونَ41
उसने कहा, "उसके पास उसके सिंहासन का रूप बदल दो। देंखे वह वास्तविकता को पा लेती है या उन लोगों में से होकर रह जाती है, जो वास्तविकता को पा लेती है या उन लोगों में से होकर जाती है, जो वास्तविकता को पा लेती है या उन लोगों में से होकर रह जाती है, जो वास्तविकता को नहीं पाते।"
فَلَمَّا جَٓاءَتْ ق۪يلَ اَهٰكَذَا عَرْشُكِۜ قَالَتْ كَاَنَّهُ هُوَۚ وَاُو۫ت۪ينَا الْعِلْمَ مِنْ قَبْلِهَا وَكُنَّا مُسْلِم۪ينَ42
जब वह आई तो कहा गया, "क्या तुम्हारा सिंहासन ऐसा ही है?" उसने कहा, "यह तो जैसे वही है, और हमें तो इससे पहले ही ज्ञान प्राप्त हो चुका था; और हम आज्ञाकारी हो गए थे।"
وَصَدَّهَا مَا كَانَتْ تَعْبُدُ مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ اِنَّهَا كَانَتْ مِنْ قَوْمٍ كَافِر۪ينَ43
अल्लाह से हटकर वह दूसरे को पूजती थी। इसी चीज़ ने उसे रोक रखा था। निस्संदेह वह एक इनकार करनेवाली क़ौम में से थी
ق۪يلَ لَهَا ادْخُلِي الصَّرْحَۚ فَلَمَّا رَاَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةً وَكَشَفَتْ عَنْ سَاقَيْهَاۜ قَالَ اِنَّهُ صَرْحٌ مُمَرَّدٌ مِنْ قَوَار۪يرَۜ قَالَتْ رَبِّ اِنّ۪ي ظَلَمْتُ نَفْس۪ي وَاَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمٰنَ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ۟44
उससे कहा गया कि "महल में प्रवेश करो।" तो जब उसने उसे देखा तो उसने उसको गहरा पानी समझा और उसने अपनी दोनों पिंडलियाँ खोल दी। उसने कहा, "यह तो शीशे से निर्मित महल है।" बोली, "ऐ मेरे रब! निश्चय ही मैंने अपने आपपर ज़ुल्म किया। अब मैंने सुलैमान के साथ अपने आपको अल्लाह के समर्पित कर दिया, जो सारे संसार का रब है।"
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَٓا اِلٰى ثَمُودَ اَخَاهُمْ صَالِحًا اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ فَاِذَا هُمْ فَر۪يقَانِ يَخْتَصِمُونَ45
और समूद की ओर हमने उनके भाई सालेह को भेजा कि "अल्लाह की बन्दगी करो।" तो क्या देखते है कि वे दो गिरोह होकर आपस में झगड़ने लगे
قَالَ يَا قَوْمِ لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِۚ لَوْلَا تَسْتَغْفِرُونَ اللّٰهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ46
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों, तुम भलाई से पहले बुराई के लिए क्यों जल्दी मचा रहे हो? तुम अल्लाह से क्षमा याचना क्यों नहीं करते? कदाचित तुमपर दया की जाए।"
قَالُوا اطَّيَّرْنَا بِكَ وَبِمَنْ مَعَكَۜ قَالَ طَٓائِرُكُمْ عِنْدَ اللّٰهِ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ تُفْتَنُونَ47
उन्होंने कहा, "हमने तुम्हें और तुम्हारे साथवालों को अपशकुन पाया है।" उसने कहा, "तुम्हारा शकुन-अपशकुन तो अल्लाह के पास है, बल्कि बात यह है कि तुम लोग आज़माए जा रहे हो।"
وَكَانَ فِي الْمَد۪ينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍ يُفْسِدُونَ فِي الْاَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ48
नगर में नौ जत्थेदार थे जो धरती में बिगाड़ पैदा करते थे, सुधार का काम नहीं करते थे
قَالُوا تَقَاسَمُوا بِاللّٰهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَاَهْلَهُ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّه۪ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ اَهْلِه۪ وَاِنَّا لَصَادِقُونَ49
वे आपस में अल्लाह की क़समें खाकर बोले, "हम अवश्य उसपर और उसके घरवालों पर रात को छापा मारेंगे। फिर उसके वली (परिजन) से कह देंगे कि हम उसके घरवालों के विनाश के अवसर पर मौजूद न थे। और हम बिलकुल सच्चे है।"
وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ50
वे एक चाल चले और हमने भी एक चाल चली और उन्हें ख़बर तक न हुई
فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْۙ اَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ اَجْمَع۪ينَ51
अब देख लो, उनकी चाल का कैसा परिणाम हुआ! हमने उन्हें और उनकी क़ौम - सबको विनष्ट करके रख दिया
فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُواۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَةً لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ52
अब ये उनके घर उनके ज़ुल्म के कारण उजडें पड़े हुए है। निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है उन लोगों के लिए जो जानना चाहें
وَاَنْجَيْنَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ53
और हमने उन लोगों को बचा लिया, जो ईमान लाए और डर रखते थे
وَلُوطًا اِذْ قَالَ لِقَوْمِه۪ٓ اَتَاْتُونَ الْفَاحِشَةَ وَاَنْتُمْ تُبْصِرُونَ54
और लूत को भी भेजा, जब उसने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "क्या तुम आँखों देखते हुए अश्लील कर्म करते हो?
اَئِنَّكُمْ لَتَاْتُونَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِنْ دُونِ النِّسَٓاءِۜ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ55
क्या तुम स्त्रियों को छोड़कर अपनी काम-तृप्ति के लिए पुरुषों के पास जाते हो? बल्कि बात यह है कि तुम बड़े ही जाहिल लोग हो।"