24. जुज़ - कुरान पढ़ें

24. जुज़
39 · अज़-ज़ुमर
فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ كَذَبَ عَلَى اللّٰهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدْقِ اِذْ جَٓاءَهُۜ اَلَيْسَ ف۪ي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِلْكَافِر۪ينَ32
फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जिसने झूठ घड़कर अल्लाह पर थोपा और सत्य को झूठला दिया जब वह उसके पास आया। क्या जहन्नम में इनकार करनेवालों का ठिकाना नहीं हैं?
وَالَّذ۪ي جَٓاءَ بِالصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِه۪ٓ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ33
और जो व्यक्ति सच्चाई लेकर आया और उसने उसकी पुष्टि की, ऐसे ही लोग डर रखते है
لَهُمْ مَا يَشَٓاؤُ۫نَ عِنْدَ رَبِّهِمْۜ ذٰلِكَ جَزٰٓؤُا الْمُحْسِن۪ينَۚ34
उनके लिए उनके रब के पास वह सब कुछ है, जो वे चाहेंगे। यह है उत्तमकारों का बदला
لِيُكَفِّرَ اللّٰهُ عَنْهُمْ اَسْوَاَ الَّذ۪ي عَمِلُوا وَيَجْزِيَهُمْ اَجْرَهُمْ بِاَحْسَنِ الَّذ۪ي كَانُوا يَعْمَلُونَ35
ताकि जो निकृष्टतम कर्म उन्होंने किए अल्लाह उन (के बुरे प्रभाव) को उनसे दूर कर दे। औऱ जो उत्तम कर्म वे करते रहे उसका उन्हें बदला प्रदान करे
اَلَيْسَ اللّٰهُ بِكَافٍ عَبْدَهُۜ وَيُخَوِّفُونَكَ بِالَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍۚ36
क्या अल्लाह अपने बन्दे के लिए काफ़ी नहीं है, यद्यपि वे तुम्हें उनसे डराते है, जो उसके सिवा (उन्होंने अपने सहायक बना रखे) है? अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नही
وَمَنْ يَهْدِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ مُضِلٍّۜ اَلَيْسَ اللّٰهُ بِعَز۪يزٍ ذِي انْتِقَامٍ37
और जिसे अल्लाह मार्ग दिखाए उसे गुमराह करनेवाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेनेवाला नहीं है?
وَلَئِنْ سَاَلْتَهُمْ مَنْ خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللّٰهُۜ قُلْ اَفَرَاَيْتُمْ مَا تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اِنْ اَرَادَنِيَ اللّٰهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَاشِفَاتُ ضُرِّه۪ٓ اَوْ اَرَادَن۪ي بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَاتُ رَحْمَتِه۪ۜ قُلْ حَسْبِيَ اللّٰهُۜ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُونَ38
यदि तुम उनसे पूछो कि "आकाशों और धरती को किसने पैदा किया?" को वे अवश्य कहेंगे, "अल्लाह ने।" कहो, "तुम्हारा क्या विचार है? यदि अल्लाह मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचानी चाहे तो क्या अल्लाह से हटकर जिनको तुम पुकारते हो वे उसकी पहुँचाई हुई तकलीफ़ को दूर कर सकते है? या वह मुझपर कोई दयालुता दर्शानी चाहे तो क्या वे उसकी दयालुता को रोक सकते है?" कह दो, "मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। भरोसा करनेवाले उसी पर भरोसा करते है।"
قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلٰى مَكَانَتِكُمْ اِنّ۪ي عَامِلٌۚ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۙ39
कह दो, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह काम करो। मैं (अपनी जगह) काम करता हूँ। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे
مَنْ يَاْت۪يهِ عَذَابٌ يُخْز۪يهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُق۪يمٌ40
कि किस पर वह यातना आती है जो उसे रुसवा कर देगी और किसपर अटल यातना उतरती है।"
اِنَّٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ لِلنَّاسِ بِالْحَقِّۚ فَمَنِ اهْتَدٰى فَلِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ ضَلَّ فَاِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَاۚ وَمَٓا اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِوَك۪يلٍ۟41
निश्चय ही हमने लोगों के लिए हक़ के साथ तुमपर किताब अवतरित की है। अतः जिसने सीधा मार्ग ग्रहण किया तो अपने ही लिए, और जो भटका, तो वह भटककर अपने ही को हानि पहुँचाता है। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो
اَللّٰهُ يَتَوَفَّى الْاَنْفُسَ ح۪ينَ مَوْتِهَا وَالَّت۪ي لَمْ تَمُتْ ف۪ي مَنَامِهَاۚ فَيُمْسِكُ الَّت۪ي قَضٰى عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَيُرْسِلُ الْاُخْرٰٓى اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّىۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ42
अल्लाह ही प्राणों को उनकी मृत्यु के समय ग्रस्त कर लेता है और जिसकी मृत्यु नहीं आई उसे उसकी निद्रा की अवस्था में (ग्रस्त कर लेता है) । फिर जिसकी मृत्यु का फ़ैसला कर दिया है उसे रोक रखता है। और दूसरों को एक नियत समय तक के लिए छोड़ देता है। निश्चय ही इसमें कितनी ही निशानियाँ है सोच-विचार करनेवालों के लिए
اَمِ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ شُفَعَٓاءَۜ قُلْ اَوَلَوْ كَانُوا لَا يَمْلِكُونَ شَيْـًٔا وَلَا يَعْقِلُونَ43
(क्या उनके उपास्य प्रभुता में साझीदार है) या उन्होंने अल्लाह से हटकर दूसरों को सिफ़ारिशी बना रखा है? कहो, "क्या यद्यपि वे किसी चीज़ का अधिकार न रखते हों और न कुछ समझते ही हो तब भी?"
قُلْ لِلّٰهِ الشَّفَاعَةُ جَم۪يعًاۜ لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ ثُمَّ اِلَيْهِ تُرْجَعُونَ44
कहो, "सिफ़ारिश तो सारी की सारी अल्लाह के अधिकार में है। आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।"
وَاِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَحْدَهُ اشْمَاَزَّتْ قُلُوبُ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِۚ وَاِذَا ذُكِرَ الَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ٓ اِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ45
अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल भिंचने लगते है, किन्तु जब उसके सिवा दूसरों का ज़िक्र होता है तो क्या देखते है कि वे खुशी से खिले जा रहे है
قُلِ اللّٰهُمَّ فَاطِرَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ اَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ46
कहो, "ऐ अल्लाह, आकाशो और धरती को पैदा करनेवाले; परोक्ष और प्रत्यक्ष के जाननेवाले! तू ही अपने बन्दों के बीच उस चीज़ का फ़ैसला करेगा, जिसमें वे विभेद कर रहे है।"
وَلَوْ اَنَّ لِلَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لَافْتَدَوْا بِه۪ مِنْ سُٓوءِ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَبَدَا لَهُمْ مِنَ اللّٰهِ مَا لَمْ يَكُونُوا يَحْتَسِبُونَ47
जिन लोगों ने ज़ुल्म किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उसके साथ उतना ही और भी, तो वे क़ियामत के दिन बुरी यातना से बचने के लिए वह सब फ़िदया (प्राण-मुक्ति के बदले) में दे डाले। बात यह है कि अल्लाह की ओर से उनके सामने वह कुछ आ जाएगा जिसका वे गुमान तक न करते थे
وَبَدَا لَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُوا وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ48
और जो कुछ उन्होंने कमाया उसकी बुराइयाँ उनपर प्रकट हो जाएँगी। और वही चीज़ उन्हें घेर लेगी जिसकी वे हँसी उड़ाया करते थे
فَاِذَا مَسَّ الْاِنْسَانَ ضُرٌّ دَعَانَاۘ ثُمَّ اِذَا خَوَّلْنَاهُ نِعْمَةً مِنَّاۙ قَالَ اِنَّمَٓا اُو۫ت۪يتُهُ عَلٰى عِلْمٍۜ بَلْ هِيَ فِتْنَةٌ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ49
अतः जब मनुष्य को कोई तकलीफ़ पहुँचती है तो वह हमें पुकारने लगता है, फिर जब हमारी ओर से उसपर कोई अनुकम्पा होती है तो कहता है, "यह तो मुझे ज्ञान के कारण प्राप्त हुआ।" नहीं, बल्कि यह तो एक परीक्षा है, किन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं
قَدْ قَالَهَا الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ50
यही बात वे लोग भी कह चुके है, जो उनसे पहले गुज़रे है। किन्तु जो कुछ कमाई वे करते है, वह उनके कुछ काम न आई
فَاَصَابَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواۜ وَالَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مِنْ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ سَيُص۪يبُهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا كَسَبُواۙ وَمَا هُمْ بِمُعْجِز۪ينَ51
फिर जो कुछ उन्होंने कमाया, उसकी बुराइयाँ उनपर आ पड़ी और इनमें से भी जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उनपर भी जो कुछ उन्होंने कमाया उसकी बुराइयाँ जल्द ही आ पड़ेगी। और वे काबू से बाहर निकलनेवाले नहीं
اَوَلَمْ يَعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ۟52
क्या उन्हें मालूम नहीं कि अल्लाह जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है? निस्संदेह इसमें उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ है जो ईमान लाएँ
قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذ۪ينَ اَسْرَفُوا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِنْ رَحْمَةِ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ يَغْفِرُ الذُّنُوبَ جَم۪يعًاۜ اِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُ53
कह दो, "ऐ मेरे बन्दो, जिन्होंने अपने आप पर ज्यादती की है, अल्लाह की दयालुता से निराश न हो। निस्संदेह अल्लाह सारे ही गुनाहों का क्षमा कर देता है। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
وَاَن۪يبُٓوا اِلٰى رَبِّكُمْ وَاَسْلِمُوا لَهُ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَاْتِيَكُمُ الْعَذَابُ ثُمَّ لَا تُنْصَرُونَ54
रुजू हो अपने रब की ओर और उसके आज्ञाकारी बन जाओ, इससे पहले कि तुमपर यातना आ जाए। फिर तुम्हारी सहायता न की जाएगी
وَاتَّبِعُٓوا اَحْسَنَ مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَاْتِيَكُمُ الْعَذَابُ بَغْتَةً وَاَنْتُمْ لَا تَشْعُرُونَۙ55
और अनुसर्ण करो उस सर्वोत्तम चीज़ का जो तुम्हारे रब की ओर से अवतरित हुई है, इससे पहले कि तुम पर अचानक यातना आ जाए और तुम्हें पता भी न हो।"
اَنْ تَقُولَ نَفْسٌ يَا حَسْرَتٰى عَلٰى مَا فَرَّطْتُ ف۪ي جَنْبِ اللّٰهِ وَاِنْ كُنْتُ لَمِنَ السَّاخِر۪ينَۙ56
कहीं ऐसा न हो कि कोई व्यक्ति कहने लगे, "हाय, अफ़सोस उसपर! जो कोताही अल्लाह के हक़ में मैंने की। और मैं तो परिहास करनेवालों मं ही सम्मिलित रहा।"
اَوْ تَقُولَ لَوْ اَنَّ اللّٰهَ هَدٰين۪ي لَكُنْتُ مِنَ الْمُتَّق۪ينَۙ57
या, कहने लगे कि "यदि अल्लाह मुझे मार्ग दिखाता तो अवश्य ही मैं डर रखनेवालों में से होता।"
اَوْ تَقُولَ ح۪ينَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ اَنَّ ل۪ي كَرَّةً فَاَكُونَ مِنَ الْمُحْسِن۪ينَ58
या, जब वह यातना देखे तो कहने लगे, "काश! मुझे एक बार फिर लौटकर जाना हो, तो मैं उत्तमकारों में सम्मिलित हो जाऊँ।"
بَلٰى قَدْ جَٓاءَتْكَ اٰيَات۪ي فَكَذَّبْتَ بِهَا وَاسْتَكْبَرْتَ وَكُنْتَ مِنَ الْكَافِر۪ينَ59
"क्यों नहीं, मेरी आयतें तेरे पास आ चुकी थीं, किन्तु तूने उनको झूठलाया और घमंड किया और इनकार करनेवालों में सम्मिलित रहा
وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِ تَرَى الَّذ۪ينَ كَذَبُوا عَلَى اللّٰهِ وُجُوهُهُمْ مُسْوَدَّةٌۜ اَلَيْسَ ف۪ي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِلْمُتَكَبِّر۪ينَ60
और क़ियामत के दिन तुम उन लोगों को देखोगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ घड़कर थोपा है कि उनके चेहरे स्याह है। क्या अहंकारियों का ठिकाना जहन्नम में नहीं हैं?"
وَيُنَجِّي اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا بِمَفَازَتِهِمْۘ لَا يَمَسُّهُمُ السُّٓوءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ61
इसके विपरीत अल्लाह उन लोगों को जिन्होंने डर रखा उन्हें उनकी सफलता के साथ मुक्ति प्रदान करेगा। न तो उन्हें कोई अनिष्ट् छू सकेगा और न वे शोकाकुल होंगे
اَللّٰهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍۘ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ وَك۪يلٌ62
अल्लाह हर चीज़ का स्रष्टा है और वही हर चीज़ का ज़िम्मा लेता है
لَهُ مَقَال۪يدُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ۟63
उसी के पास आकाशों और धरती की कुँजियाँ है। और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही है जो घाटे में है
قُلْ اَفَغَيْرَ اللّٰهِ تَاْمُرُٓونّ۪ٓي اَعْبُدُ اَيُّهَا الْجَاهِلُونَ64
कहो, "क्या फिर भी तुम मुझसे कहते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की बन्दगी करूँ, ऐ अज्ञानियों?"
وَلَقَدْ اُو۫حِيَ اِلَيْكَ وَاِلَى الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكَۚ لَئِنْ اَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ65
तुम्हारी ओर और जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनकी ओर भी वह्यस की जा चुकी है कि "यदि तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा किया-धरा अनिवार्यतः अकारथ जाएगा और तुम अवश्य ही घाटे में पड़नेवालों में से हो जाओगे।"
بَلِ اللّٰهَ فَاعْبُدْ وَكُنْ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ66
नहीं, बल्कि अल्लाह ही की बन्दगी करो और कृतज्ञता दिखानेवालों में से हो जाओ
وَمَا قَدَرُوا اللّٰهَ حَقَّ قَدْرِه۪ۗ وَالْاَرْضُ جَم۪يعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَالسَّمٰوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَم۪ينِه۪ۜ سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ67
उन्होंने अल्लाह की क़द्र न जानी, जैसी क़द्र उसकी जाननी चाहिए थी। हालाँकि क़ियामत के दिन सारी की सारी धरती उसकी मुट्ठी में होगी और आकाश उसके दाएँ हाथ में लिपटे हुए होंगे। महान और उच्च है वह उससे, जो वे साझी ठहराते है
وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَمَنْ فِي الْاَرْضِ اِلَّا مَنْ شَٓاءَ اللّٰهُۚ ثُمَّ نُفِخَ ف۪يهِ اُخْرٰى فَاِذَا هُمْ قِيَامٌ يَنْظُرُونَ68
और सूर (नरसिंघा) फूँका जाएगा, तो जो कोई आकाशों और जो कोई धरती में होगा वह अचेत हो जाएगा सिवाय उसके जिसको अल्लाह चाहे। फिर उसे दूबारा फूँका जाएगा, तो क्या देखेगे कि सहसा वे खड़े देख रहे है
وَاَشْرَقَتِ الْاَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ الْكِتَابُ وَج۪ٓيءَ بِالنَّبِيّ۪نَ وَالشُّهَدَٓاءِ وَقُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ69
और धरती रब के प्रकाश से जगमगा उठेगी, और किताब रखी जाएगी और नबियों और गवाहों को लाया जाएगा और लोगों के बीच हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उनपर कोई ज़ुल्म न होगा
وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَا عَمِلَتْ وَهُوَ اَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ۟70
और प्रत्येक व्यक्ति को उसका किया भरपूर दिया जाएगा। और वह भली-भाँति जानता है, जो कुछ वे करते है
وَس۪يقَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اِلٰى جَهَنَّمَ زُمَرًاۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاؤُ۫هَا فُتِحَتْ اَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَٓا اَلَمْ يَاْتِكُمْ رُسُلٌ مِنْكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ اٰيَاتِ رَبِّكُمْ وَيُنْذِرُونَكُمْ لِقَٓاءَ يَوْمِكُمْ هٰذَاۜ قَالُوا بَلٰى وَلٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ الْعَذَابِ عَلَى الْكَافِر۪ينَ71
जिन लोगों ने इनकार किया, वे गिरोह के गिरोह जहन्नम की ओर ले जाए जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेगे तो उसके द्वार खोल दिए जाएँगे और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, "क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे जो तुम्हें तुम्हारे रब की आयतें सुनाते रहे हों और तुम्हें इस दिन की मुलाक़ात से सचेत करते रहे हों?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं (वे तो आए थे) ।" किन्तु इनकार करनेवालों पर यातना की बात सत्यापित होकर रही
ق۪يلَ ادْخُلُٓوا اَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۚ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّر۪ينَ72
कहा जाएगा, "जहन्नम के द्वारों में प्रवेश करो। उसमें सदैव रहने के लिए।" तो बहुत ही बुरा ठिकाना है अहंकारियों का!
وَس۪يقَ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ اِلَى الْجَنَّةِ زُمَرًاۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاؤُ۫هَا وَفُتِحَتْ اَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا سَلَامٌ عَلَيْكُمْ طِبْتُمْ فَادْخُلُوهَا خَالِد۪ينَ73
और जो लोग अपने रब का डर रखते थे, वे गिरोह के गिरोह जन्नत की ओर ले जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेंगे इस हाल में कि उसके द्वार खुले होंगे। और उसके प्रहरी उनसे कहेंगे, "सलाम हो तुमपर! बहुत अच्छे रहे! अतः इसमें प्रवेश करो सदैव रहने के लिए तो (उनकी ख़ुशियों का क्या हाल होगा!)
وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي صَدَقَنَا وَعْدَهُ وَاَوْرَثَنَا الْاَرْضَ نَتَبَوَّاُ مِنَ الْجَنَّةِ حَيْثُ نَشَٓاءُۚ فَنِعْمَ اَجْرُ الْعَامِل۪ينَ74
और वे कहेंगे, "प्रशंसा अल्लाह के लिए, जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया, और हमें इस भूमि का वारिस बनाया कि हम जन्नत में जहाँ चाहें वहाँ रहें-बसे।" अतः क्या ही अच्छा प्रतिदान है कर्म करनेवालों का!-
وَتَرَى الْمَلٰٓئِكَةَ حَٓافّ۪ينَ مِنْ حَوْلِ الْعَرْشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْۚ وَقُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْحَقِّ وَق۪يلَ الْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ75
और तुम फ़रिश्तों को देखोगे कि वे सिंहासन के गिर्द घेरा बाँधे हुए, अपने रब का गुणगान कर रहे है। और लोगों के बीच ठीक-ठीक फ़ैसला कर दिया जाएगा और कहा जाएगा, "सारी प्रशंसा अल्लाह, सारे संसार के रब, के लिए है।"
40 · ग़ाफिर
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓۜ1
हा॰ मीम॰
تَنْز۪يلُ الْكِتَابِ مِنَ اللّٰهِ الْعَز۪يزِ الْعَل۪يمِۙ2
इस किताब का अवतरण प्रभुत्वशाली, सर्वज्ञ अल्लाह की ओर से है,
غَافِرِ الذَّنْبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَد۪يدِ الْعِقَابِ ذِي الطَّوْلِۜ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ اِلَيْهِ الْمَص۪يرُ3
जो गुनाह क्षमा करनेवाला, तौबा क़बूल करनेवाला, कठोर दंड देनेवाला, शक्तिमान है। उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अन्ततः उसी की ओर जाना है
مَا يُجَادِلُ ف۪ٓي اٰيَاتِ اللّٰهِ اِلَّا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِي الْبِلَادِ4
अल्लाह की आयतों के बारे में बस वही लोग झगड़ते हैं जिन्होंने इनकार किया, तो नगरों में उसकी चलत-फिरत तुम्हें धोखे में न डाले
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَالْاَحْزَابُ مِنْ بَعْدِهِمْۖ وَهَمَّتْ كُلُّ اُمَّةٍ بِرَسُولِهِمْ لِيَاْخُذُوهُ وَجَادَلُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ فَاَخَذْتُهُمْ۠ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ5
उनसे पहले नूह की क़ौम ने और उनके पश्चात दूसरों गिरोहों ने भी झुठलाया और हर समुदाय के लोगों ने अपने रसूलों के बारे में इरादा किया कि उन्हें पकड़ लें और वे सत्य का सहारा लेकर झगडे, ताकि उसके द्वारा सत्य को उखाड़ दें। अन्ततः मैंने उन्हें पकड़ लिया। तौ कैसी रही मेरी सज़ा!
وَكَذٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنَّهُمْ اَصْحَابُ النَّارِۢ6
और (जैसे दुनिया में सज़ा मिली) उसी प्रकार तेरे रब की यह बात भी उन लोगों पर सत्यापित हो गई है, जिन्होंने इनकार किया कि वे आग में पड़नेवाले है;
اَلَّذ۪ينَ يَحْمِلُونَ الْعَرْشَ وَمَنْ حَوْلَهُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيُؤْمِنُونَ بِه۪ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُواۚ رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذ۪ينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَب۪يلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَح۪يمِ7
जो सिंहासन को उठाए हुए है और जो उसके चतुर्दिक हैं, अपने रब का गुणगान करते है और उस पर ईमान रखते है और उन लोगों के लिए क्षमा की प्रार्थना करते है जो ईमान लाए कि "ऐ हमारे रब! तू हर चीज़ को व्याप्त है। अतः जिन लोगों ने तौबा की और तेरे मार्ग का अनुसरण किया, उन्हें क्षमा कर दे और भड़कती हुई आग की यातना से बचा लें
رَبَّنَا وَاَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍۨ الَّت۪ي وَعَدْتَهُمْ وَمَنْ صَلَحَ مِنْ اٰبَٓائِهِمْ وَاَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْۜ اِنَّكَ اَنْتَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُۚ8
ऐ हमारे रब! और उन्हें सदैव रहने के बागों में दाख़िल कर जिनका तूने उनसे वादा किया है और उनके बाप-दादा और उनकी पत्नि यों और उनकी सन्ततियों में से जो योग्य हुए उन्हें भी। निस्संदेह तू प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है
وَقِهِمُ السَّيِّـَٔاتِۜ وَمَنْ تَقِ السَّيِّـَٔاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُۜ وَذٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُ۟9
और उन्हें अनिष्टों से बचा। जिसे उस दिन तूने अनिष्टों से बचा लिया, तो निश्चय ही उसपर तूने दया की। और वही बड़ी सफलता है।"
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا يُنَادَوْنَ لَمَقْتُ اللّٰهِ اَكْبَرُ مِنْ مَقْتِكُمْ اَنْفُسَكُمْ اِذْ تُدْعَوْنَ اِلَى الْا۪يمَانِ فَتَكْفُرُونَ10
निश्चय ही जिन लोगों ने इनकार किया उन्हें पुकारकर कहा जाएगा कि "अपने आपसे जो तुम्हें विद्वेष एवं क्रोध है, तुम्हारे प्रति अल्लाह का क्रोध एवं द्वेष उससे कहीं बढकर है कि जब तुम्हें ईमान की ओर बुलाया जाता था तो तुम इनकार करते थे।"
قَالُوا رَبَّنَٓا اَمَتَّنَا اثْنَتَيْنِ وَاَحْيَيْتَنَا اثْنَتَيْنِ فَاعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلْ اِلٰى خُرُوجٍ مِنْ سَب۪يلٍ11
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! तूने हमें दो बार मृत रखा और दो बार जीवन प्रदान किया। अब हमने अपने गुनाहों को स्वीकार किया, तो क्या अब (यहाँ से) निकलने का भी कोई मार्ग है?"
ذٰلِكُمْ بِاَنَّهُٓ اِذَا دُعِيَ اللّٰهُ وَحْدَهُ كَفَرْتُمْۚ وَاِنْ يُشْرَكْ بِه۪ تُؤْمِنُواۜ فَالْحُكْمُ لِلّٰهِ الْعَلِيِّ الْكَب۪يرِ12
वह (बुरा परिणाम) तो इसलिए सामने आएगा कि जब अकेला अल्लाह को पुकारा जाता है तो तुम इनकार करते हो। किन्तु यदि उसके साथ साझी ठहराया जाए तो तुम मान लेते हो। तो अब फ़ैसला तो अल्लाह ही के हाथ में है, जो सर्वोच्च बड़ा महान है। -
هُوَ الَّذ۪ي يُر۪يكُمْ اٰيَاتِه۪ وَيُنَزِّلُ لَكُمْ مِنَ السَّمَٓاءِ رِزْقًاۜ وَمَا يَتَذَكَّرُ اِلَّا مَنْ يُن۪يبُ13
वही है जो तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है और तुम्हारे लिए आकाश से रोज़ी उतारता है, किन्तु याददिहानी तो बस वही हासिल करता है जो (उसकी ओर) रुजू करे
فَادْعُوا اللّٰهَ مُخْلِص۪ينَ لَهُ الدّ۪ينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ14
अतः तुम अल्लाह ही को, धर्म को उसी के लिए विशुद्ध करते हुए, पुकारो, यद्यपि इनकार करनेवालों को अप्रिय ही लगे। -
رَف۪يعُ الدَّرَجَاتِ ذُو الْعَرْشِۚ يُلْقِي الرُّوحَ مِنْ اَمْرِه۪ عَلٰى مَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ لِيُنْذِرَ يَوْمَ التَّلَاقِۙ15
वह ऊँचे दर्जोवाला, सिंहासनवाला है, अपने बन्दों में से जिसपर चाहता है, अपने हुक्म में से जिसपर चाहता है, अपने हुक्म से रूह उतारता है, ताकि वह मुलाक़ात के दिन से सावधान कर दे
يَوْمَ هُمْ بَارِزُونَۚ لَا يَخْفٰى عَلَى اللّٰهِ مِنْهُمْ شَيْءٌۜ لِمَنِ الْمُلْكُ الْيَوْمَۜ لِلّٰهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ16
जिस दिन वे खुले रूप में सामने उपस्थित होंगे, उनकी कोई चीज़ अल्लाह से छिपी न रहेगी, "आज किसकी बादशाही है?" "अल्लाह की, जो अकेला सबपर क़ाबू रखनेवाला है।"
اَلْيَوْمَ تُجْزٰى كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْۜ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَۜ اِنَّ اللّٰهَ سَر۪يعُ الْحِسَابِ17
आज प्रत्येक व्यक्ति को उसकी कमाई का बदला दिया जाएगा। आज कोई ज़ुल्म न होगा। निश्चय ही अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज है
وَاَنْذِرْهُمْ يَوْمَ الْاٰزِفَةِ اِذِ الْقُلُوبُ لَدَى الْحَنَاجِرِ كَاظِم۪ينَۜ مَا لِلظَّالِم۪ينَ مِنْ حَم۪يمٍ وَلَا شَف۪يعٍ يُطَاعُۜ18
(उन्हें अल्लाह की ओर बुलाओ) और उन्हें निकट आ जानेवाले (क़ियामत के) दिन से सावधान कर दो, जबकि उर (हृदय) कंठ को आ लगे होंगे और वे दबा रहे होंगे। ज़ालिमों का न कोई घनिष्ट मित्र होगा और न ऐसा सिफ़ारिशी जिसकी बात मानी जाए
يَعْلَمُ خَٓائِنَةَ الْاَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ19
वह निगाहों की चोरी तक को जानता है और उसे भी जो सीने छिपा रहे होते है
وَاللّٰهُ يَقْض۪ي بِالْحَقِّۜ وَالَّذ۪ينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِه۪ لَا يَقْضُونَ بِشَيْءٍۜ اِنَّ اللّٰهَ هُوَ السَّم۪يعُ الْبَص۪يرُ۟20
अल्लाह ठीक-ठीक फ़ैसला कर देगा। रहे वे लोग जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पुकारते हैं, वे किसी चीज़ का भी फ़ैसला करनेवाले नहीं। निस्संदेह अल्लाह ही है जो सुनता, देखता है
اَوَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَيَنْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذ۪ينَ كَانُوا مِنْ قَبْلِهِمْۜ كَانُوا هُمْ اَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَاٰثَارًا فِي الْاَرْضِ فَاَخَذَهُمُ اللّٰهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُمْ مِنَ اللّٰهِ مِنْ وَاقٍ21
क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ, जो उनसे पहले गुज़र चुके है? वे शक्ति और धरती में अपने चिन्हों की दृष्टि\ से उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे, फिर उनके गुनाहों के कारण अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया। और अल्लाह से उन्हें बचानेवाला कोई न हुआ
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ كَانَتْ تَاْت۪يهِمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَكَفَرُوا فَاَخَذَهُمُ اللّٰهُۜ اِنَّهُ قَوِيٌّ شَد۪يدُ الْعِقَابِ22
वह (बुरा परिणाम) तो इसलिए सामने आया कि उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आते रहे, किन्तु उन्होंने इनकार किया। अन्ततः अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया। निश्चय ही वह बड़ी शक्तिवाला, सज़ा देने में अत्याधिक कठोर है
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مُوسٰى بِاٰيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُب۪ينٍۙ23
और हमने मूसा को भी अपनी निशानियों और स्पष्ट प्रमाण के साथ
اِلٰى فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَقَارُونَ فَقَالُوا سَاحِرٌ كَذَّابٌ24
फ़िरऔन औऱ हामान और क़ारून की ओर भेजा था, किन्तु उन्होंने कहा, "यह तो जादूगर है, बड़ा झूठा!"
فَلَمَّا جَٓاءَهُمْ بِالْحَقِّ مِنْ عِنْدِنَا قَالُوا اقْتُلُٓوا اَبْنَٓاءَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَعَهُ وَاسْتَحْيُوا نِسَٓاءَهُمْۜ وَمَا كَيْدُ الْكَافِر۪ينَ اِلَّا ف۪ي ضَلَالٍ25
फिर जब वह उनके सामने हमारे पास से सत्य लेकर आया तो उन्होंने कहा, "जो लोग ईमान लेकर उसके साथ है, उनके बेटों को मार डालो औऱ उनकी स्त्रियों को जीवित छोड़ दो।" किन्तु इनकार करनेवालों की चाल तो भटकने ही के लिए होती है
وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُون۪ٓي اَقْتُلْ مُوسٰى وَلْيَدْعُ رَبَّهُۚ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اَنْ يُبَدِّلَ د۪ينَكُمْ اَوْ اَنْ يُظْهِرَ فِي الْاَرْضِ الْفَسَادَ26
फ़िरऔन ने कहा, "मुझे छोड़ो, मैं मूसा को मार डालूँ और उसे चाहिए कि वह अपने रब को (अपनी सहायता के लिए) पुकारे। मुझे डर है कि ऐसा न हो कि वह तुम्हारे धर्म को बदल डाले या यह कि वह देश में बिगाड़ पैदा करे।"
وَقَالَ مُوسٰٓى اِنّ۪ي عُذْتُ بِرَبّ۪ي وَرَبِّكُمْ مِنْ كُلِّ مُتَكَبِّرٍ لَا يُؤْمِنُ بِيَوْمِ الْحِسَابِ۟27
मूसा ने कहा, "मैंने हर अहंकारी के मुक़ाबले में, जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं रखता, अपने रब और तुम्हारे रब की शरण ले ली है।"
وَقَالَ رَجُلٌ مُؤْمِنٌۗ مِنْ اٰلِ فِرْعَوْنَ يَكْتُمُ ا۪يمَانَهُٓ اَتَقْتُلُونَ رَجُلًا اَنْ يَقُولَ رَبِّيَ اللّٰهُ وَقَدْ جَٓاءَكُمْ بِالْبَيِّنَاتِ مِنْ رَبِّكُمْۜ وَاِنْ يَكُ كَاذِبًا فَعَلَيْهِ كَذِبُهُۚ وَاِنْ يَكُ صَادِقًا يُصِبْكُمْ بَعْضُ الَّذ۪ي يَعِدُكُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْد۪ي مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ كَذَّابٌ28
फ़िरऔन के लोगों में से एक ईमानवाले व्यक्ति ने, जो अपने ईमान को छिपा रहा था, कहा, "क्या तुम एक ऐसे व्यक्ति को इसलिए मार डालोगे कि वह कहता है कि मेरा रब अल्लाह है और वह तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से खुले प्रमाण भी लेकर आया है? यदि वह झूठा है तो उसके झूठ का वबाल उसी पर पड़ेगा। किन्तु यदि वह सच्चा है तो जिस चीज़ की वह तुम्हें धमकी दे रहा है, उसमें से कुछ न कुछ तो तुमपर पड़कर रहेगा। निश्चय ही अल्लाह उसको मार्ग नहीं दिखाता जो मर्यादाहीन, बड़ा झूठा हो
يَا قَوْمِ لَكُمُ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ظَاهِر۪ينَ فِي الْاَرْضِۘ فَمَنْ يَنْصُرُنَا مِنْ بَاْسِ اللّٰهِ اِنْ جَٓاءَنَاۜ قَالَ فِرْعَوْنُ مَٓا اُر۪يكُمْ اِلَّا مَٓا اَرٰى وَمَٓا اَهْد۪يكُمْ اِلَّا سَب۪يلَ الرَّشَادِ29
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! आज तुम्हारी बादशाही है। धरती में प्रभावी हो। किन्तु अल्लाह की यातना के मुक़ाबले में कौन हमारी सहायता करेगा, यदि वह हम पर आ जाए?" फ़िरऔन ने कहा, "मैं तो तुम्हें बस वही दिखा रहा हूँ जो मैं स्वयं देख रहा हूँ और मैं तुम्हें बस ठीक रास्ता दिखा रहा हूँ, जो बुद्धिसंगत भी है।"
وَقَالَ الَّذ۪ٓي اٰمَنَ يَا قَوْمِ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ مِثْلَ يَوْمِ الْاَحْزَابِۙ30
उस व्यक्ति ने, जो ईमान ला चुका था, कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझे भय है कि तुमपर (विनाश का) ऐसा दिन न आ पड़े, जैसा दूसरे विगत समुदायों पर आ पड़ा था।
مِثْلَ دَاْبِ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَالَّذ۪ينَ مِنْ بَعْدِهِمْۜ وَمَا اللّٰهُ يُر۪يدُ ظُلْمًا لِلْعِبَادِ31
जैसे नूह की क़ौम और आद और समूद और उनके पश्चात्वर्ती लोगों का हाल हुआ। अल्लाह तो ऐसा नहीं कि बन्दों पर कोई ज़ुल्म करना चाहे
وَيَا قَوْمِ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِۙ32
और ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझे तुम्हारे बारे में चीख़-पुकार के दिन का भय है,
يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِر۪ينَۚ مَا لَكُمْ مِنَ اللّٰهِ مِنْ عَاصِمٍۚ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ33
जिस दिन तुम पीठ फेरकर भागोगे, तुम्हें अल्लाह से बचानेवाला कोई न होगा - और जिसे अल्लाह ही भटका दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नहीं। -
وَلَقَدْ جَٓاءَكُمْ يُوسُفُ مِنْ قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ ف۪ي شَكٍّ مِمَّا جَٓاءَكُمْ بِه۪ۜ حَتّٰٓى اِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَنْ يَبْعَثَ اللّٰهُ مِنْ بَعْدِه۪ رَسُولًاۜ كَذٰلِكَ يُضِلُّ اللّٰهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُرْتَابٌۚ34
हमने पहले भी तुम्हारे पास यूसुफ़ खुले प्रमाण लेकर आ चुके है, किन्तु जो कुछ वे लेकर तुम्हारे पास आए थे, उसके बारे में तुम बराबर सन्देह में पड़े रहे, यहाँ तक कि जब उनकी मृत्यु हो गई तो तुम कहने लगे, "अल्लाह उनके पश्चात कदापि कोई रसूल न भेजेगा।" इसी प्रकार अल्लाह उसे गुमराही में डाल देता है जो मर्यादाहीन, सन्देहों में पड़नेवाला हो। -
اَلَّذ۪ينَ يُجَادِلُونَ ف۪ٓي اٰيَاتِ اللّٰهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ اَتٰيهُمْۜ كَبُرَ مَقْتًا عِنْدَ اللّٰهِ وَعِنْدَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۜ كَذٰلِكَ يَطْبَعُ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ35
ऐसे लोगो को (गुमराही में डालता है) जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते है, बिना इसके कि उनके पास कोई प्रमाण आया हो, अल्लाह की दृष्टि) में और उन लोगों की दृष्टि में जो ईमान लाए यह (बात) अत्यन्त अप्रिय है। इसी प्रकार अल्लाह हर अहंकारी, निर्दय- अत्याचारी के दिल पर मुहर लगा देता है। -
وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ ل۪ي صَرْحًا لَعَلّ۪ٓي اَبْلُغُ الْاَسْبَابَۙ36
फ़िरऔन ने कहा, "ऐ हामान! मेरे एक उच्च भवन बना, ताकि मैं साधनों तक पहुँच सकूँ,
اَسْبَابَ السَّمٰوَاتِ فَاَطَّلِعَ اِلٰٓى اِلٰهِ مُوسٰى وَاِنّ۪ي لَاَظُنُّهُ كَاذِبًاۜ وَكَذٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُٓوءُ عَمَلِه۪ وَصُدَّ عَنِ السَّب۪يلِۜ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ اِلَّا ف۪ي تَبَابٍ۟37
आकाशों को साधनों (और क्षत्रों) तक। फिर मूसा के पूज्य को झाँककर देखूँ। मैं तो उसे झूठा ही समझता हूँ।" इस प्रकार फ़िरऔन को लिए उसका दुष्कर्म सुहाना बना दिया गया और उसे मार्ग से रोक दिया गया। फ़िरऔन की चाल तो बस तबाही के सिलसिले में रही
وَقَالَ الَّذ۪ٓي اٰمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ اَهْدِكُمْ سَب۪يلَ الرَّشَادِۚ38
उस व्यक्ति ने, जो ईमान लाया था, कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हे भलाई का ठीक रास्ता दिखाऊँगा
يَا قَوْمِ اِنَّمَا هٰذِهِ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌۘ وَاِنَّ الْاٰخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ39
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह सांसारिक जीवन तो बस अस्थायी उपभोग है। निश्चय ही स्थायी रूप से ठहरनेका घर तो आख़िरत ही है
مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزٰٓى اِلَّا مِثْلَهَاۚ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِنْ ذَكَرٍ اَوْ اُنْثٰى وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَاُو۬لٰٓئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ ف۪يهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ40
जिस किसी ने बुराई की तो उसे वैसा ही बदला मिलेगा, किन्तु जिस किसी ने अच्छा कर्म किया, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, किन्तु हो वह मोमिन, तो ऐसे लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे। वहाँ उन्हें बेहिसाब दिया जाएगा
وَيَا قَوْمِ مَا ل۪ٓي اَدْعُوكُمْ اِلَى النَّجٰوةِ وَتَدْعُونَن۪ٓي اِلَى النَّارِۜ41
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह मेरे साथ क्या मामला है कि मैं तो तुम्हें मुक्ति की ओर बुलाता हूँ और तुम मुझे आग की ओर बुला रहे हो?
تَدْعُونَن۪ي لِاَكْفُرَ بِاللّٰهِ وَاُشْرِكَ بِه۪ مَا لَيْسَ ل۪ي بِه۪ عِلْمٌۘ وَاَنَا۬ اَدْعُوكُمْ اِلَى الْعَز۪يزِ الْغَفَّارِ42
तुम मुझे बुला रहे हो कि मैं अल्लाह के साथ कुफ़्र करूँ और उसके साथ उसे साझी ठहराऊँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं, जबकि मैं तुम्हें बुला रहा हूँ उसकी ओर जो प्रभुत्वशाली, अत्यन्त क्षमाशील है
لَا جَرَمَ اَنَّمَا تَدْعُونَن۪ٓي اِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْاٰخِرَةِ وَاَنَّ مَرَدَّنَٓا اِلَى اللّٰهِ وَاَنَّ الْمُسْرِف۪ينَ هُمْ اَصْحَابُ النَّارِ43
निस्संदेह तुम मुझे जिसकी ओर बुलाते हो उसके लिए न संसार में आमंत्रण है और न आख़िरत (परलोक) में और यह की हमें लौटना भी अल्लाह ही की ओर है और यह कि जो मर्यादाही है, वही आग (में पड़नेवाले) वाले है
فَسَتَذْكُرُونَ مَٓا اَقُولُ لَكُمْۜ وَاُفَوِّضُ اَمْر۪ٓي اِلَى اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ بَص۪يرٌ بِالْعِبَادِ44
अतः शीघ्र ही तुम याद करोगे, जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ। मैं तो अपना मामला अल्लाह को सौंपता हूँ। निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि सब बन्दों पर है
فَوَقٰيهُ اللّٰهُ سَيِّـَٔاتِ مَا مَكَرُوا وَحَاقَ بِاٰلِ فِرْعَوْنَ سُٓوءُ الْعَذَابِۚ45
अन्ततः जो चाल वे चल रहे थे, उसकी बुराइयों से अल्लाह ने उसे बचा लिया और फ़िरऔनियों को बुरी यातना ने आ घेरा;
اَلنَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّاۚ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ۠ اَدْخِلُٓوا اٰلَ فِرْعَوْنَ اَشَدَّ الْعَذَابِ46
अर्थात आग ने; जिसके सामने वे प्रातःकाल और सायंकाल पेश किए जाते है। और जिन दिन क़ियामत की घड़ी घटित होगी (कहा जाएगा), "फ़िरऔन के लोगों को निकृष्ट तम यातना में प्रविष्टी कराओ!"
وَاِذْ يَتَحَٓاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفٰٓؤُ۬ا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُٓوا اِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ اَنْتُمْ مُغْنُونَ عَنَّا نَص۪يبًا مِنَ النَّارِ47
और सोचो जबकि वे आग के भीतर एक-दूसरे से झगड़ रहे होंगे, तो कमज़ोर लोग उन लोगों से, जो बड़े बनते थे, कहेंगे, "हम तो तुम्हारे पीछे चलनेवाले थे। अब क्या तुम हमपर से आग का कुछ भाग हटा सकते हो?"
قَالَ الَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُٓوا اِنَّا كُلٌّ ف۪يهَٓا اِنَّ اللّٰهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ48
वे लोग, जो बड़े बनते थे, कहेंगे, "हममें से प्रत्येक इसी में पड़ा है। निश्चय ही अल्लाह बन्दों के बीच फ़ैसला कर चुका।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِنَ الْعَذَابِ49
जो लोग आग में होंगे वे जहन्नम के प्रहरियों से कहेंगे कि "अपने रब को पुकारो कि वह हमपर से एक दिन यातना कुछ हल्की कर दे!"
قَالُٓوا اَوَلَمْ تَكُ تَاْت۪يكُمْ رُسُلُكُمْ بِالْبَيِّنَاتِۜ قَالُوا بَلٰىۜ قَالُوا فَادْعُواۚ وَمَا دُعٰٓؤُا الْكَافِر۪ينَ اِلَّا ف۪ي ضَلَالٍ۟50
वे कहेंगे, "क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल खुले प्रमाण लेकर नहीं आते रहे?" कहेंगे, "क्यों नहीं!" वे कहेंगे, "फिर तो तुम्ही पुकारो।" किन्तु इनकार करनेवालों की पुकार तो बस भटककर ही रह जाती है
اِنَّا لَنَنْصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْاَشْهَادُۙ51
निश्चय ही हम अपने रसूलों की और उन लोगों की जो ईमान लाए अवश्य सहायता करते है, सांसारिक जीवन में भी और उस दिन भी, जबकि गवाह खड़े होंगे
يَوْمَ لَا يَنْفَعُ الظَّالِم۪ينَ مَعْذِرَتُهُمْ وَلَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُٓوءُ الدَّارِ52
जिस दिन ज़ालिमों को उनका उज्र (सफ़ाई पेश करना) कुछ भी लाभ न पहुँचाएगा, बल्कि उनके लिए तो लानत है और उनके लिए बुरा घर है
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسَى الْهُدٰى وَاَوْرَثْنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ الْكِتَابَۙ53
मूसा को भी हम मार्ग दिखा चुके है, और इसराईल की सन्तान को हमने किताब का उत्ताराधिकारी बनाया,
هُدًى وَذِكْرٰى لِاُو۬لِي الْاَلْبَابِ54
जो बुद्धि और समझवालों के लिए मार्गदर्शन और अनुस्मृति थी
فَاصْبِرْ اِنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنْبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْاِبْكَارِ55
अतः धैर्य से काम लो। निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है और अपने क़सूर की क्षमा चाहो और संध्या समय और प्रातः की घड़ियों में अपने रब की प्रशंसा की तसबीह करो
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُجَادِلُونَ ف۪ٓي اٰيَاتِ اللّٰهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ اَتٰيهُمْۙ اِنْ ف۪ي صُدُورِهِمْ اِلَّا كِبْرٌ مَا هُمْ بِبَالِغ۪يهِۚ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِۜ اِنَّهُ هُوَ السَّم۪يعُ الْبَص۪يرُ56
जो लोग बिना किसी ऐसे प्रमाण के जो उनके पास आया हो अल्लाह की आयतों में झगड़ते है उनके सीनों में केवल अहंकार है जिसतक वे पहुँचनेवाले नहीं। अतः अल्लाह की शरण लो। निश्चय ही वह सुनता, देखता है
لَخَلْقُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ اَكْبَرُ مِنْ خَلْقِ النَّاسِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ57
निस्संदेह, आकाशों और धरती को पैदा करना लोगों को पैदा करने की अपेक्षा अधिक बड़ा (कठिन) काम है। किन्तु अधिकतर लोग नहीं जानते
وَمَا يَسْتَوِي الْاَعْمٰى وَالْبَص۪يرُ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَلَا الْمُس۪ٓيءُۜ قَل۪يلًا مَا تَتَذَكَّرُونَ58
अंधा और आँखोंवाला बराबर नहीं होते, और वे लोग भी परस्पर बराबर नहीं होते जिन्होंने ईमान लाकर अच्छे कर्म किए, और न बुरे कर्म करनेवाले ही परस्पर बराबर हो सकते है। तुम होश से काम थोड़े ही लेते हो!
اِنَّ السَّاعَةَ لَاٰتِيَةٌ لَا رَيْبَ ف۪يهَا وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ59
निश्चय ही क़ियामत की घड़ी आनेवाली है, इसमें कोई सन्देह नहीं। किन्तु अधिकतर लोग मानते नही
وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُون۪ٓي اَسْتَجِبْ لَكُمْۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَت۪ي سَيَدْخُلُونَ جَهَنَّمَ دَاخِر۪ينَ۟60
तुम्हारे रब ने कहा कि "तुम मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी प्रार्थनाएँ स्वीकार करूँगा।" जो लोग मेरी बन्दगी के मामले में घमंड से काम लेते है निश्चय ही वे शीघ्र ही अपमानित होकर जहन्नम में प्रवेश करेंगे
اَللّٰهُ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الَّيْلَ لِتَسْكُنُوا ف۪يهِ وَالنَّهَارَ مُبْصِرًاۜ اِنَّ اللّٰهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ61
अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए रात (अंधकारमय) बनाई, तुम उसमें शान्ति प्राप्त करो औऱ दिन को प्रकाशमान बनाया (ताकि उसमें दौड़-धूप करो) । निस्संदेह अल्लाह लोगों के लिए बड़ा उदार अनुग्रहवाला हैं, किन्तु अधिकतर लोग कृतज्ञता नहीं दिखाते
ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍۢ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۘ فَاَنّٰى تُؤْفَكُونَ62
वह है अल्लाह, तुम्हारा रब, हर चीज़ का पैदा करनेवाला! उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। फिर तुम कहाँ उलटे फिरे जा रहे हो?
كَذٰلِكَ يُؤْفَكُ الَّذ۪ينَ كَانُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ يَجْحَدُونَ63
इसी प्रकार वे भी उलटे फिरे जाते थे जो अल्लाह की निशानियों का इनकार करते थे
اَللّٰهُ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَرْضَ قَرَارًا وَالسَّمَٓاءَ بِنَٓاءً وَصَوَّرَكُمْ فَاَحْسَنَ صُوَرَكُمْ وَرَزَقَكُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِۜ ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْۚ فَتَبَارَكَ اللّٰهُ رَبُّ الْعَالَم۪ينَ64
अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को ठहरने का स्थान बनाया और आकाश को एक भवन के रूप में बनाया, और तुम्हें रूप दिए तो क्या ही अच्छे रूप दिए, और तुम्हें अच्छी पाक चीज़ों की रोज़ी दी। वह है अल्लाह, तुम्हारा रब। तो बड़ी बरकतवाला है अल्लाह, सारे संसार का रब
هُوَ الْحَيُّ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ فَادْعُوهُ مُخْلِص۪ينَ لَهُ الدّ۪ينَۜ اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ65
वह जीवन्त है। उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः उसी को पुकारो, धर्म को उसी के लिए विशुद्ध करके। सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो सारे संसार का रब है
قُلْ اِنّ۪ي نُه۪يتُ اَنْ اَعْبُدَ الَّذ۪ينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ لَمَّا جَٓاءَنِيَ الْبَيِّنَاتُ مِنْ رَبّ۪ي وَاُمِرْتُ اَنْ اُسْلِمَ لِرَبِّ الْعَالَم۪ينَ66
कह दो, "मुझे इससे रोक दिया गया है कि मैं उनकी बन्दगी करूँ जिन्हें अल्लाह से हटकर पुकारते हो, जबकि मेरे पास मेरे रब की ओर से खुले प्रमाण आ चुके है। मुझे तो हुक्म हुआ है कि मैं सारे संसार के रब के आगे नतमस्तक हो जाऊँ।" -
هُوَ الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ مِنْ تُرَابٍ ثُمَّ مِنْ نُطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ يُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُٓوا اَشُدَّكُمْ ثُمَّ لِتَكُونُوا شُيُوخًاۚ وَمِنْكُمْ مَنْ يُتَوَفّٰى مِنْ قَبْلُ وَلِتَبْلُغُٓوا اَجَلًا مُسَمًّى وَلَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ67
वही है जिसने तुम्हें मिट्टी से पैदा, फिर वीर्य से, फिर रक्त के लोथड़े से; फिर वह तुम्हें एक बच्चे के रूप में निकालता है, फिर (तुम्हें बढ़ाता है) ताकि अपनी प्रौढ़ता को प्राप्ति हो, फिर मुहलत देता है कि तुम बुढापे को पहुँचो - यद्यपि तुममें से कोई इससे पहले भी उठा लिया जाता है - और यह इसलिए करता है कि तुम एक नियत अवधि तक पहुँच जाओ और ऐसा इसलिए है कि तुम समझो
هُوَ الَّذ۪ي يُحْي۪ وَيُم۪يتُۚ فَاِذَا قَضٰٓى اَمْرًا فَاِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ۟68
वही है जो जीवन और मृत्यु देता है, और जब वह किसी काम का फ़ैसला करता है, तो उसके लिए बस कह देता है कि 'हो जा' तो वह हो जाता है
اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذ۪ينَ يُجَادِلُونَ ف۪ٓي اٰيَاتِ اللّٰهِۜ اَنّٰى يُصْرَفُونَۚۛ69
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जो अल्लाह की आयतों के बारे में झगड़ते है, वे कहाँ फिरे जाते हैं?
اَلَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِالْكِتَابِ وَبِمَٓا اَرْسَلْنَا بِه۪ رُسُلَنَا۠ۛ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَۙ70
जिन लोगों ने किताब को झुठलाया और उसे भी जिसके साथ हमने अपने रसूलों को भेजा था। तो शीघ्र ही उन्हें मालूम हो जाएगा
اِذِ الْاَغْلَالُ ف۪ٓي اَعْنَاقِهِمْ وَالسَّلَاسِلُۜ يُسْحَبُونَۙ71
जबकि तौक़ उनकी गरदनों में होंगे और ज़ंजीरें (उनके पैरों में)
فِي الْحَم۪يمِ ثُمَّ فِي النَّارِ يُسْجَرُونَۚ72
वे खौलते हुए पानी में घसीटे जाएँगे, फिर आग में झोंक दिए जाएँगे
ثُمَّ ق۪يلَ لَهُمْ اَيْنَ مَا كُنْتُمْ تُشْرِكُونَۙ73
फिर उनसे कहा जाएगा, "कहाँ है वे जिन्हें प्रभुत्व में साझी ठहराकर तुम अल्लाह के सिवा पूजते थे?"
مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا بَلْ لَمْ نَكُنْ نَدْعُوا مِنْ قَبْلُ شَيْـًٔاۜ كَذٰلِكَ يُضِلُّ اللّٰهُ الْكَافِر۪ينَ74
वे कहेंगे, "वे हमसे गुम होकर रह गए, बल्कि हम इससे पहले किसी चीज़ को नहीं पुकारते थे।" इसी प्रकार अल्लाह इनकार करनेवालों को भटकता छोड़ देता है
ذٰلِكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَفْرَحُونَ فِي الْاَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَبِمَا كُنْتُمْ تَمْرَحُونَۚ75
"यह इसलिए कि तुम धरती में नाहक़ मग्न थे और इसलिए कि तुम इतराते रहे हो
اُدْخُلُٓوا اَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۚ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّر۪ينَ76
प्रवेश करो जहन्नम के द्वारों में, उसमे सदैव रहने के लिए।" अतः बहुत ही बुरा ठिकाना है अहंकारियों का!
فَاصْبِرْ اِنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّۚ فَاِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذ۪ي نَعِدُهُمْ اَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَاِلَيْنَا يُرْجَعُونَ77
अतः धैर्य से काम लो। निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है। तो जिस चीज़ की हम उन्हें धमकी दे रहे है उसमें से कुछ यदि हम तुम्हें दिखा दें या हम तुम्हे उठा लें, हर हाल में उन्हें लौटना तो हमारी ही ओर है
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا رُسُلًا مِنْ قَبْلِكَ مِنْهُمْ مَنْ قَصَصْنَا عَلَيْكَ وَمِنْهُمْ مَنْ لَمْ نَقْصُصْ عَلَيْكَۜ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ اَنْ يَاْتِيَ بِاٰيَةٍ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِۚ فَاِذَا جَٓاءَ اَمْرُ اللّٰهِ قُضِيَ بِالْحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْمُبْطِلُونَ۟78
हम तुमसे पहले कितने ही रसूल भेज चुके है। उनमें से कुछ तो वे है जिनके वृत्तान्त का उल्लेख हमने तुमसे किया है और उनमें ऐसे भी है जिनके वृत्तान्त का उल्लेख हमने तुमसे नहीं किया। किसी रसूल को भी यह सामर्थ्य प्राप्त न थी कि वह अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई निशानी ले आए। फिर जब अल्लाह का आदेश आ जाता है तो ठीक-ठीक फ़ैसला कर दिया जाता है। और उस समय झूठवाले घाटे में पड़ जाते है
اَللّٰهُ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَنْعَامَ لِتَرْكَبُوا مِنْهَا وَمِنْهَا تَاْكُلُونَۘ79
अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए चौपाए बनाए ताकि उनमें से कुछ पर तुम सवारी करो और उनमें से कुछ को तुम खाते भी हो
وَلَكُمْ ف۪يهَا مَنَافِعُ وَلِتَبْلُغُوا عَلَيْهَا حَاجَةً ف۪ي صُدُورِكُمْ وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَۜ80
उनमें तुम्हारे लिए और भी फ़ायदे है - और ताकि उनके द्वारा तुम उस आवश्यकता की पूर्ति कर सको जो तुम्हारे सीनों में हो, और उनपर भी और नौकाओं पर भी सवार होते हो
وَيُر۪يكُمْ اٰيَاتِه۪ۗ فَاَيَّ اٰيَاتِ اللّٰهِ تُنْكِرُونَ81
और वह तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है। आख़िर तुम अल्लाह की कौन-सी निशानी को नहीं पहचानते?
اَفَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَيَنْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۜ كَانُٓوا اَكْثَرَ مِنْهُمْ وَاَشَدَّ قُوَّةً وَاٰثَارًا فِي الْاَرْضِ فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ82
फिर क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ, जो उनसे पहले गुज़र चुके है। वे उनसे अधिक थे और शक्ति और अपनी छोड़ी हुई निशानियों की दृष्टि से भी बढ़-चढ़कर थे। किन्तु जो कुछ वे कमाते थे, वह उनके कुछ भी काम न आया
فَلَمَّا جَٓاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِنْدَهُمْ مِنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ83
फिर जब उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए तो जो ज्ञान उनके अपने पास था वे उसी पर मग्न होते रहे और उनको उसी चीज़ ने आ घेरा जिसका वे परिहास करते थे
فَلَمَّا رَاَوْا بَاْسَنَا قَالُٓوا اٰمَنَّا بِاللّٰهِ وَحْدَهُ وَكَفَرْنَا بِمَا كُنَّا بِه۪ مُشْرِك۪ينَ84
फिर जब उन्होंने हमारी यातना देखी तो कहने लगे, "हम ईमान लाए अल्लाह पर जो अकेला है और उसका इनकार किया जिसे हम उसका साझी ठहराते थे।"
فَلَمْ يَكُ يَنْفَعُهُمْ ا۪يمَانُهُمْ لَمَّا رَاَوْا بَاْسَنَاۜ سُنَّتَ اللّٰهِ الَّت۪ي قَدْ خَلَتْ ف۪ي عِبَادِه۪ۚ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْكَافِرُونَ85
किन्तु उनका ईमान उनको कुछ भी लाभ नहीं पहुँचा सकता था जबकि उन्होंने हमारी यातना को देख लिया - यही अल्लाह की रीति है, जो उसके बन्दों में पहले से चली आई है - और उस समय इनकार करनेवाले घाटे में पड़कर रहे
41 · हामीम अस-सजदा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓۜ1
हा॰ मीम॰
تَنْز۪يلٌ مِنَ الرَّحْمٰنِ الرَّح۪يمِۚ2
यह अवतरण है बड़े कृपाशील, अत्यन्त दयावान की ओर से,
كِتَابٌ فُصِّلَتْ اٰيَاتُهُ قُرْاٰنًا عَرَبِيًّا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَۙ3
एक किताब, जिसकी आयतें खोल-खोलकर बयान हुई है; अरबी क़ुरआन के रूप में, उन लोगों के लिए जो जानना चाहें;
بَش۪يرًا وَنَذ۪يرًاۚ فَاَعْرَضَ اَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ4
शुभ सूचक एवं सचेतकर्त्ता किन्तु उनमें से अधिकतर कतरा गए तो वे सुनते ही नहीं
وَقَالُوا قُلُوبُنَا ف۪ٓي اَكِنَّةٍ مِمَّا تَدْعُونَٓا اِلَيْهِ وَف۪ٓي اٰذَانِنَا وَقْرٌ وَمِنْ بَيْنِنَا وَبَيْنِكَ حِجَابٌ فَاعْمَلْ اِنَّنَا عَامِلُونَ5
और उनका कहना है कि "जिसकी ओर तुम हमें बुलाते हो उसके लिए तो हमारे दिल आवरणों में है। और हमारे कानों में बोझ है। और हमारे और तुम्हारे बीच एक ओट है; अतः तुम अपना काम करो, हम तो अपना काम करते है।"
قُلْ اِنَّمَٓا اَنَا۬ بَشَرٌ مِثْلُكُمْ يُوحٰٓى اِلَيَّ اَنَّمَٓا اِلٰهُكُمْ اِلٰهٌ وَاحِدٌ فَاسْتَق۪يمُٓوا اِلَيْهِ وَاسْتَغْفِرُوهُۜ وَوَيْلٌ لِلْمُشْرِك۪ينَۙ6
कह दो, "मैं तो तुम्हीं जैसा मनुष्य हूँ। मेरी ओर प्रकाशना की जाती है कि तुम्हारा पूज्य-प्रभु बस अकेला पूज्य-प्रभु है। अतः तुम सीधे उसी का रुख करो और उसी से क्षमा-याचना करो - साझी ठहरानेवालों के लिए तो बड़ी तबाही है,
اَلَّذ۪ينَ لَا يُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ7
जो ज़कात नहीं देते और वही है जो आख़िरत का इनकार करते है। -
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ اَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ۟8
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, उनके लिए ऐसा बदला है जिसका क्रम टूटनेवाला नहीं।"
قُلْ اَئِنَّكُمْ لَتَكْفُرُونَ بِالَّذ۪ي خَلَقَ الْاَرْضَ ف۪ي يَوْمَيْنِ وَتَجْعَلُونَ لَهُٓ اَنْدَادًاۜ ذٰلِكَ رَبُّ الْعَالَم۪ينَۚ9
कहो, "क्या तुम उसका इनकार करते हो, जिसने धरती को दो दिनों (काल) में पैदा किया और तुम उसके समकक्ष ठहराते हो? वह तो सारे संसार का रब है
وَجَعَلَ ف۪يهَا رَوَاسِيَ مِنْ فَوْقِهَا وَبَارَكَ ف۪يهَا وَقَدَّرَ ف۪يهَٓا اَقْوَاتَهَا ف۪ٓي اَرْبَعَةِ اَيَّامٍۜ سَوَٓاءً لِلسَّٓائِل۪ينَ10
और उसने उस (धरती) में उसके ऊपर से पहाड़ जमाए और उसमें बरकत रखी और उसमें उसकी ख़ुराकों को ठीक अंदाज़े से रखा। माँग करनेवालों के लिए समान रूप से यह सब चार दिन में हुआ
ثُمَّ اسْتَوٰٓى اِلَى السَّمَٓاءِ وَهِيَ دُخَانٌ فَقَالَ لَهَا وَلِلْاَرْضِ ائْتِيَا طَوْعًا اَوْ كَرْهًاۜ قَالَتَٓا اَتَيْنَا طَٓائِع۪ينَ11
फिर उसने आकाश की ओर रुख़ किया, जबकि वह मात्र धुआँ था- और उसने उससे और धरती से कहा, 'आओ, स्वेच्छा के साथ या अनिच्छा के साथ।' उन्होंने कहा, 'हम स्वेच्छा के साथ आए।' -
فَقَضٰيهُنَّ سَبْعَ سَمٰوَاتٍ ف۪ي يَوْمَيْنِ وَاَوْحٰى ف۪ي كُلِّ سَمَٓاءٍ اَمْرَهَاۜ وَزَيَّنَّا السَّمَٓاءَ الدُّنْيَا بِمَصَاب۪يحَۗ وَحِفْظًاۜ ذٰلِكَ تَقْد۪يرُ الْعَز۪يزِ الْعَل۪يمِ12
फिर दो दिनों में उनको अर्थात सात आकाशों को बनाकर पूरा किया और प्रत्येक आकाश में उससे सम्बन्धित आदेश की प्रकाशना कर दी औऱ दुनिया के (निकटवर्ती) आकाश को हमने दीपों से सजाया (रात के यात्रियों के दिशा-निर्देश आदि के लिए) और सुरक्षित करने के उद्देश्य से। यह अत्.न्त प्रभुत्वशाली, सर्वज्ञ का ठहराया हुआ है।"
فَاِنْ اَعْرَضُوا فَقُلْ اَنْذَرْتُكُمْ صَاعِقَةً مِثْلَ صَاعِقَةِ عَادٍ وَثَمُودَۜ13
अब यदि वे लोग ध्यान में न लाएँ तो कह दो, "मैं तुम्हें उसी तरह के कड़का (वज्रवात) से डराता हूँ, जैसा कड़का आद और समूद पर हुआ था।"
اِذْ جَٓاءَتْهُمُ الرُّسُلُ مِنْ بَيْنِ اَيْد۪يهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ اَلَّا تَعْبُدُٓوا اِلَّا اللّٰهَۜ قَالُوا لَوْ شَٓاءَ رَبُّنَا لَاَنْزَلَ مَلٰٓئِكَةً فَاِنَّا بِمَٓا اُرْسِلْتُمْ بِه۪ كَافِرُونَ14
जब उनके पास रसूल उनके आगे और उनके पीछे से आए कि "अल्लाह के सिवा किसी की बन्दगी न करो।" तो उन्होंने कहा, "यदि हमारा रब चाहता तो फ़रिश्तों को उतार देता। अतः जिस चीज़ के साथ तुम्हें भेजा गया है, हम उसे नहीं मानते।"
فَاَمَّا عَادٌ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْاَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَقَالُوا مَنْ اَشَدُّ مِنَّا قُوَّةًۜ اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّ اللّٰهَ الَّذ۪ي خَلَقَهُمْ هُوَ اَشَدُّ مِنْهُمْ قُوَّةًۜ وَكَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَجْحَدُونَ15
रहे आद, तो उन्होंने नाहक़ धरती में घमंड किया और कहा, "कौन हमसे शक्ति में बढ़कर है?" क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह, जिसने उन्हें पैदा किया, वह उनसे शक्ति में बढ़कर है? वे तो हमारी आयतों का इनकार ही करते रहे
فَاَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ ر۪يحًا صَرْصَرًا ف۪ٓي اَيَّامٍ نَحِسَاتٍ لِنُذ۪يقَهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۜ وَلَعَذَابُ الْاٰخِرَةِ اَخْزٰى وَهُمْ لَا يُنْصَرُونَ16
अन्ततः हमने कुछ अशुभ दिनों में उनपर एक शीत-झंझावात चलाई, ताकि हम उन्हें सांसारिक जीवन में अपमान और रुसवाई की यातना का मज़ा चखा दें। और आख़िरत की यातना तो इससे कहीं बढ़कर रुसवा करनेवाली है। और उनको कोई सहायता भी न मिल सकेगी
وَاَمَّا ثَمُودُ فَهَدَيْنَاهُمْ فَاسْتَحَبُّوا الْعَمٰى عَلَى الْهُدٰى فَاَخَذَتْهُمْ صَاعِقَةُ الْعَذَابِ الْهُونِ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَۚ17
और रहे समूद, तो हमने उनके सामने सीधा मार्ग दिखाया, किन्तु मार्गदर्शन के मुक़ाबले में उन्होंने अन्धा रहना ही पसन्द किया। परिणामतः जो कुछ वे कमाई करते रहे थे उसके बदले में अपमानजनक यातना के कड़के ने उन्हें आ पकड़ा
وَنَجَّيْنَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ۟18
और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और डर रखते थे
وَيَوْمَ يُحْشَرُ اَعْدَٓاءُ اللّٰهِ اِلَى النَّارِ فَهُمْ يُوزَعُونَ19
और विचार करो जिस दिन अल्लाह के शत्रु आग की ओर एकत्र करके लाए जाएँगे, फिर उन्हें श्रेणियों में क्रमबद्ध किया जाएगा, यहाँ तक की जब वे उसके पास पहुँच जाएँगे
حَتّٰٓى اِذَا مَا جَٓاؤُ۫هَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَاَبْصَارُهُمْ وَجُلُودُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ20
तो उनके कान और उनकी आँखें और उनकी खालें उनके विरुद्ध उन बातों की गवाही देंगी, जो कुछ वे करते रहे होंगे
وَقَالُوا لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدْتُمْ عَلَيْنَاۜ قَالُٓوا اَنْطَقَنَا اللّٰهُ الَّذ۪ٓي اَنْطَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَهُوَ خَلَقَكُمْ اَوَّلَ مَرَّةٍ وَاِلَيْهِ تُرْجَعُونَ21
वे अपनी खालों से कहेंगे, "तुमने हमारे विरुद्ध क्यों गवाही दी?" वे कहेंगी, "हमें उसी अल्लाह ने वाक्-शक्ति प्रदान की है, जिसने प्रत्येक चीज़ को वाक्-शक्ति प्रदान की।" - उसी ने तुम्हें पहली बार पैदा किया और उसी की ओर तुम्हें लौटना है
وَمَا كُنْتُمْ تَسْتَتِرُونَ اَنْ يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَٓا اَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلٰكِنْ ظَنَنْتُمْ اَنَّ اللّٰهَ لَا يَعْلَمُ كَث۪يرًا مِمَّا تَعْمَلُونَ22
तुम इस भय से छिपते न थे कि तुम्हारे कान तुम्हारे विरुद्ध गवाही देंगे, और न इसलिए कि तुम्हारी आँखें गवाही देंगी और न इस कारण से कि तुम्हारी खाले गवाही देंगी, बल्कि तुमने तो यह समझ रखा था कि अल्लाह तुम्हारे बहुत-से कामों को जानता ही नहीं
وَذٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذ۪ي ظَنَنْتُمْ بِرَبِّكُمْ اَرْدٰيكُمْ فَاَصْبَحْتُمْ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ23
और तुम्हारे उस गुमान ने तुम्हे बरबाद किया जो तुमने अपने रब के साथ किया; अतः तुम घाटे में पड़कर रहे
فَاِنْ يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَهُمْۚ وَاِنْ يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُمْ مِنَ الْمُعْتَب۪ينَ24
अब यदि वे धैर्य दिखाएँ तब भी आग ही उनका ठिकाना है। और यदि वे किसी प्रकार (उसके) क्रोध को दूर करना चाहें, तब भी वे ऐसे नहीं कि वे राज़ी कर सकें
وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَٓاءَ فَزَيَّنُوا لَهُمْ مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ ف۪ٓي اُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِمْ مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِۚ اِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِر۪ينَ۟25
हमने उनके लिए कुछ साथी नियुक्त कर दिए थे। फिर उन्होंने उनके आगे और उनके पीछे जो कुछ था उसे सुहाना बनाकर उन्हें दिखाया। अन्ततः उनपर भी जिन्नों और मनुष्यों के उन गिरोहों के साथ फ़ैसला सत्यापित होकर रहा, जो उनसे पहले गुज़र चुके थे। निश्चय ही वे घाटा उठानेवाले थे
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَا تَسْمَعُوا لِهٰذَا الْقُرْاٰنِ وَالْغَوْا ف۪يهِ لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ26
जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने कहा, "इस क़ुरआन को सुनो ही मत और इसके बीच में शोर-गुल मचाओ, ताकि तुम प्रभावी रहो।"
فَلَنُذ۪يقَنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا عَذَابًا شَد۪يدًا وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ اَسْوَاَ الَّذ۪ي كَانُوا يَعْمَلُونَ27
अतः हम अवश्य ही उन लोगों को, जिन्होंने इनकार किया, कठोर यातना का मजा चखाएँगे, और हम अवश्य उन्हें उसका बदला देंगे, जो निकृष्टतम कर्म वे करते रहे है
ذٰلِكَ جَزَٓاءُ اَعْدَٓاءِ اللّٰهِ النَّارُۚ لَهُمْ ف۪يهَا دَارُ الْخُلْدِۜ جَزَٓاءً بِمَا كَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَجْحَدُونَ28
वह है अल्लाह के शत्रुओं का बदला - आग। उसी में उसका सदा का घर है, उसके बदले में जो वे हमारी आयतों का इनकार करते रहे
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا رَبَّنَٓا اَرِنَا الَّذَيْنِ اَضَلَّانَا مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ نَجْعَلْهُمَا تَحْتَ اَقْدَامِنَا لِيَكُونَا مِنَ الْاَسْفَل۪ينَ29
और जिन लोगों ने इनकार किया वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमें दिखा दे उन जिन्नों और मनुष्यों को, जिन्होंने हमको पथभ्रष़्ट किया कि हम उन्हें अपने पैरों तले डाल दे ताकि वे सबसे नीचे जा पड़े
اِنَّ الَّذ۪ينَ قَالُوا رَبُّنَا اللّٰهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلٰٓئِكَةُ اَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَاَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّت۪ي كُنْتُمْ تُوعَدُونَ30
जिन लोगों ने कहा कि "हमारा रब अल्लाह है।" फिर इस पर दृढ़तापूर्वक जमें रहे, उनपर फ़रिश्ते उतरते है कि "न डरो और न शोकाकुल हो, और उस जन्नत की शुभ सूचना लो जिसका तुमसे वादा किया गया है
نَحْنُ اَوْلِيَٓاؤُ۬كُمْ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَفِي الْاٰخِرَةِۚ وَلَكُمْ ف۪يهَا مَا تَشْتَه۪ٓي اَنْفُسُكُمْ وَلَكُمْ ف۪يهَا مَا تَدَّعُونَۜ31
हम सांसारिक जीवन में भी तुम्हारे सहचर मित्र है और आख़िरत में भी। और वहाँ तुम्हारे लिए वह सब कुछ है, जिसकी इच्छा तुम्हारे जी को होगी। और वहाँ तुम्हारे लिए वह सब कुछ होगा, जिसका तुम माँग करोगे
نُزُلًا مِنْ غَفُورٍ رَح۪يمٍ۟32
आतिथ्य के रूप में क्षमाशील, दयावान सत्ता की ओर से"
وَمَنْ اَحْسَنُ قَوْلًا مِمَّنْ دَعَٓا اِلَى اللّٰهِ وَعَمِلَ صَالِحًا وَقَالَ اِنَّن۪ي مِنَ الْمُسْلِم۪ينَ33
और उस व्यक्ति से बात में अच्छा कौन हो सकता है जो अल्लाह की ओर बुलाए और अच्छे कर्म करे और कहे, "निस्संदेह मैं मुस्लिम (आज्ञाकारी) हूँ?"
وَلَا تَسْتَوِي الْحَسَنَةُ وَلَا السَّيِّئَةُۜ اِدْفَعْ بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُ فَاِذَا الَّذ۪ي بَيْنَكَ وَبَيْنَهُ عَدَاوَةٌ كَاَنَّهُ وَلِيٌّ حَم۪يمٌ34
भलाई और बुराई समान नहीं है। तुम (बुरे आचरण की बुराई को) अच्छे से अच्छे आचरण के द्वारा दूर करो। फिर क्या देखोगे कि वही व्यक्ति तुम्हारे और जिसके बीच वैर पड़ा हुआ था, जैसे वह कोई घनिष्ठ मित्र है
وَمَا يُلَقّٰيهَٓا اِلَّا الَّذ۪ينَ صَبَرُواۚ وَمَا يُلَقّٰيهَٓا اِلَّا ذُو حَظٍّ عَظ۪يمٍ35
किन्तु यह चीज़ केवल उन लोगों को प्राप्त होती है जो धैर्य से काम लेते है, और यह चीज़ केवल उसको प्राप्त होती है जो बड़ा भाग्यशाली होता है
وَاِمَّا يَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِۜ اِنَّهُ هُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ36
और यदि शैतान की ओर से कोई उकसाहट तुम्हें चुभे तो अल्लाह की शरण माँग लो। निश्चय ही वह सबकुछ सुनता, जानता है
وَمِنْ اٰيَاتِهِ الَّيْلُ وَالنَّهَارُ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُۜ لَا تَسْجُدُوا لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ وَاسْجُدُوا لِلّٰهِ الَّذ۪ي خَلَقَهُنَّ اِنْ كُنْتُمْ اِيَّاهُ تَعْبُدُونَ37
रात और दिन और सूर्य और चन्द्रमा उसकी निशानियों में से है। तुम न तो सूर्य को सजदा करो और न चन्द्रमा को, बल्कि अल्लाह को सजदा करो जिसने उन्हें पैदा किया, यदि तुम उसी की बन्दगी करनेवाले हो
فَاِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذ۪ينَ عِنْدَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِالَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْـَٔمُونَ38
लेकिन यदि वे घमंड करें (और अल्लाह को याद न करें), तो जो फ़रिश्ते तुम्हारे रब के पास है वे तो रात और दिन उसकी तसबीह करते ही रहते है और वे उकताते नहीं
وَمِنْ اٰيَاتِه۪ٓ اَنَّكَ تَرَى الْاَرْضَ خَاشِعَةً فَاِذَٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَٓاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْۜ اِنَّ الَّذ۪ٓي اَحْيَاهَا لَمُحْيِ الْمَوْتٰىۜ اِنَّهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ39
और यह चीज़ भी उसकी निशानियों में से है कि तुम देखते हो कि धरती दबी पड़ी है; फिर ज्यों ही हमने उसपर पानी बरसाया कि वह फबक उठी और फूल गई। निश्चय ही जिसने उसे जीवित किया, वही मुर्दों को जीवित करनेवाला है। निस्संदेह उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُلْحِدُونَ ف۪ٓي اٰيَاتِنَا لَا يَخْفَوْنَ عَلَيْنَاۜ اَفَمَنْ يُلْقٰى فِي النَّارِ خَيْرٌ اَمْ مَنْ يَاْت۪ٓي اٰمِنًا يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ اِعْمَلُوا مَا شِئْتُمْۙ اِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ40
जो लोग हमारी आयतों में कुटिलता की नीति अपनाते है वे हमसे छिपे हुए नहीं हैं, तो क्या जो व्यक्ति आग में डाला जाए वह अच्छा है या वह जो क़ियामत के दिन निश्चिन्त होकर आएगा? जो चाहो कर लो, तुम जो कुछ करते हो वह तो उसे देख ही रहा है
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِالذِّكْرِ لَمَّا جَٓاءَهُمْۚ وَاِنَّهُ لَكِتَابٌ عَز۪يزٌۙ41
जिन लोगों ने अनुस्मृति का इनकार किया, जबकि वह उनके पास आई, हालाँकि वह एक प्रभुत्वशाली किताब है, (तो न पूछो कि उनका कितना बुरा परिणाम होगा)
لَا يَاْت۪يهِ الْبَاطِلُ مِنْ بَيْنِ يَدَيْهِ وَلَا مِنْ خَلْفِه۪ۜ تَنْز۪يلٌ مِنْ حَك۪يمٍ حَم۪يدٍ42
असत्य उस तक न उसके आगे से आ सकता है और न उसके पीछे से; अवतरण है उसकी ओर से जो अत्यन्त तत्वदर्शी, प्रशंसा के योग्य है
مَا يُقَالُ لَكَ اِلَّا مَا قَدْ ق۪يلَ لِلرُّسُلِ مِنْ قَبْلِكَۜ اِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ وَذُو عِقَابٍ اَل۪يمٍ43
तुम्हें बस वही कहा जा रहा है, जो उन रसूलों को कहा जा चुका है, जो तुमसे पहले गुज़र चुके है। निस्संदेह तुम्हारा रब बड़ा क्षमाशील है और दुखद दंड देनेवाला भी
وَلَوْ جَعَلْنَاهُ قُرْاٰنًا اَعْجَمِيًّا لَقَالُوا لَوْلَا فُصِّلَتْ اٰيَاتُهُۜ ءَاَۭۘعْجَمِيٌّ وَعَرَبِيٌّۜ قُلْ هُوَ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا هُدًى وَشِفَٓاءٌۜ وَالَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ ف۪ٓي اٰذَانِهِمْ وَقْرٌ وَهُوَ عَلَيْهِمْ عَمًىۜ اُو۬لٰٓئِكَ يُنَادَوْنَ مِنْ مَكَانٍ بَع۪يدٍ۟44
यदि हम उसे ग़ैर अरबी क़ुरआन बनाते तो वे कहते कि "उसकी आयतें क्यों नहीं (हमारी भाषा में) खोलकर बयान की गई? यह क्या कि वाणी तो ग़ैर अरबी है और व्यक्ति अरबी?" कहो, "वह उन लोगों के लिए जो ईमान लाए मार्गदर्शन और आरोग्य है, किन्तु जो लोग ईमान नहीं ला रहे है उनके कानों में बोझ है और वह (क़ुरआन) उनके लिए अन्धापन (सिद्ध हो रहा) है, वे ऐसे है जिनको किसी दूर के स्थान से पुकारा जा रहा हो।"
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ ف۪يهِۜ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْۜ وَاِنَّهُمْ لَف۪ي شَكٍّ مِنْهُ مُر۪يبٍ45
हमने मूसा को भी किताब प्रदान की थी, फिर उसमें भी विभेद किया गया। यदि तुम्हारे रब की ओर से पहले ही से एक बात निश्चित न हो चुकी होती तो उनके बीत फ़ैसला चुका दिया जाता। हालाँकि वे उसकी ओर से उलझन में डाल देनेवाले सन्देह में पड़े हुए है
مَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِنَفْسِه۪ وَمَنْ اَسَٓاءَ فَعَلَيْهَاۜ وَمَا رَبُّكَ بِظَلَّامٍ لِلْعَب۪يدِ46
जिस किसी ने अच्छा कर्म किया तो अपने ही लिए और जिस किसी ने बुराई की, तो उसका वबाल भी उसी पर पड़ेगा। वास्तव में तुम्हारा रब अपने बन्दों पर तनिक भी ज़ुल्म नहीं करता