8. जुज़ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम7 · अल-आराफ़
وَلَوْ اَنَّنَا نَزَّلْنَٓا اِلَيْهِمُ الْمَلٰٓئِكَةَ وَكَلَّمَهُمُ الْمَوْتٰى وَحَشَرْنَا عَلَيْهِمْ كُلَّ شَيْءٍ قُبُلًا مَا كَانُوا لِيُؤْمِنُٓوا اِلَّٓا اَنْ يَشَٓاءَ اللّٰهُ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ يَجْهَلُونَ111
यदि हम उनकी ओर फ़रिश्ते भी उतार देते और मुर्दें भी उनसे बातें करने लगते और प्रत्येक चीज़ उनके सामने लाकर इकट्ठा कर देते, तो भी वे ईमान न लाते, बल्कि अल्लाह ही का चाहा क्रियान्वित है। परन्तु उनमें से अधिकतर लोग अज्ञानता से काम लेते है
وَكَذٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا شَيَاط۪ينَ الْاِنْسِ وَالْجِنِّ يُوح۪ي بَعْضُهُمْ اِلٰى بَعْضٍ زُخْرُفَ الْقَوْلِ غُرُورًاۜ وَلَوْ شَٓاءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوهُ فَذَرْهُمْ وَمَا يَفْتَرُونَ112
और इसी प्रकार हमने मनुष्यों और जिन्नों में से शैतानों को प्रत्येक नबी का शत्रु बनाया, जो चिकनी-चुपड़ी बात एक-दूसरे के मन में डालकर धोखा देते थे - यदि तुम्हारा रब चाहता तो वे ऐसा न कर सकते। अब छोड़ो उन्हें और उनके मिथ्यारोपण को। -
وَلِتَصْغٰٓى اِلَيْهِ اَفْـِٔدَةُ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ وَلِيَرْضَوْهُ وَلِيَقْتَرِفُوا مَا هُمْ مُقْتَرِفُونَ113
और ताकि जो लोग परलोक को नहीं मानते, उनके दिल उसकी ओर झुकें और ताकि वे उसे पसन्द कर लें, और ताकि जो कमाई उन्हें करनी है कर लें
اَفَغَيْرَ اللّٰهِ اَبْتَغ۪ي حَكَمًا وَهُوَ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ اِلَيْكُمُ الْكِتَابَ مُفَصَّلًاۜ وَالَّذ۪ينَ اٰتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْلَمُونَ اَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِنْ رَبِّكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَر۪ينَ114
अब क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और निर्णायक ढूढूँ? हालाँकि वही है जिसने तुम्हारी ओर किताब अवतरित की है, जिसमें बातें खोल-खोलकर बता दी गई है और जिन लोगों को हमने किताब प्रदान की थी, वे भी जानते है कि यह तुम्हारे रब की ओर से हक़ के साथ अवतरित हुई है, तो तुम कदापि सन्देह में न पड़ना
وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدْقًا وَعَدْلًاۜ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِه۪ۚ وَهُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ115
तुम्हारे रब की बात सच्चाई और इनसाफ़ के साथ पूरी हुई, कोई नहीं जो उसकी बातों को बदल सकें, और वह सुनता, जानता है
وَاِنْ تُطِعْ اَكْثَرَ مَنْ فِي الْاَرْضِ يُضِلُّوكَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِۜ اِنْ يَتَّبِعُونَ اِلَّا الظَّنَّ وَاِنْ هُمْ اِلَّا يَخْرُصُونَ116
और धरती में अधिकतर लोग ऐसे है, यदि तुम उनके कहने पर चले तो वे अल्लाह के मार्ग से तुम्हें भटका देंगे। वे तो केवल अटकल के पीछे चलते है और वे निरे अटकल ही दौड़ाते है
اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ مَنْ يَضِلُّ عَنْ سَب۪يلِه۪ۚ وَهُوَ اَعْلَمُ بِالْمُهْتَد۪ينَ117
निस्संदेह तुम्हारा रब उसे भली-भाँति जानता है, जो उसके मार्ग से भटकता और वह उन्हें भी जानता है, जो सीधे मार्ग पर है
فَكُلُوا مِمَّا ذُكِرَ اسْمُ اللّٰهِ عَلَيْهِ اِنْ كُنْتُمْ بِاٰيَاتِه۪ مُؤْمِن۪ينَ118
अतः जिसपर अल्लाह का नाम लिया गया हो, उसे खाओ; यदि तुम उसकी आयतों को मानते हो
وَمَا لَكُمْ اَلَّا تَاْكُلُوا مِمَّا ذُكِرَ اسْمُ اللّٰهِ عَلَيْهِ وَقَدْ فَصَّلَ لَكُمْ مَا حَرَّمَ عَلَيْكُمْ اِلَّا مَا اضْطُرِرْتُمْ اِلَيْهِۜ وَاِنَّ كَث۪يرًا لَيُضِلُّونَ بِاَهْوَٓائِهِمْ بِغَيْرِ عِلْمٍۜ اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ بِالْمُعْتَد۪ينَ119
और क्या आपत्ति है कि तुम उसे न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम लिया गया हो, बल्कि जो कुछ चीज़े उसने तुम्हारे लिए हराम कर दी है, उनको उसने विस्तारपूर्वक तुम्हे बता दिया है। यह और बात है कि उसके लिए कभी तुम्हें विवश होना पड़े। परन्तु अधिकतर लोग तो ज्ञान के बिना केवल अपनी इच्छाओं (ग़लत विचारों) के द्वारा पथभ्रष्टो करते रहते है। निस्सन्देह तुम्हारा रब मर्यादाहीन लोगों को भली-भाँति जानता है
وَذَرُوا ظَاهِرَ الْاِثْمِ وَبَاطِنَهُۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ يَكْسِبُونَ الْاِثْمَ سَيُجْزَوْنَ بِمَا كَانُوا يَقْتَرِفُونَ120
छोड़ो खुले गुनाह को भी और छिपे को भी। निश्चय ही गुनाह कमानेवालों को उसका बदला दिया जाएगा, जिस कमाई में वे लगे रहे होंगे
وَلَا تَاْكُلُوا مِمَّا لَمْ يُذْكَرِ اسْمُ اللّٰهِ عَلَيْهِ وَاِنَّهُ لَفِسْقٌۜ وَاِنَّ الشَّيَاط۪ينَ لَيُوحُونَ اِلٰٓى اَوْلِيَٓائِهِمْ لِيُجَادِلُوكُمْۚ وَاِنْ اَطَعْتُمُوهُمْ اِنَّكُمْ لَمُشْرِكُونَ۟121
और उसे न खाओं जिसपर अल्लाह का नाम न लिया गया हो। निश्चय ही वह तो आज्ञा का उल्लंघन है। शैतान तो अपने मित्रों के दिलों में डालते है कि वे तुमसे झगड़े। यदि तुमने उनकी बात मान ली तो निश्चय ही तुम बहुदेववादी होगे
اَوَمَنْ كَانَ مَيْتًا فَاَحْيَيْنَاهُ وَجَعَلْنَا لَهُ نُورًا يَمْش۪ي بِه۪ فِي النَّاسِ كَمَنْ مَثَلُهُ فِي الظُّلُمَاتِ لَيْسَ بِخَارِجٍ مِنْهَاۜ كَذٰلِكَ زُيِّنَ لِلْكَافِر۪ينَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ122
क्या वह व्यक्ति जो पहले मुर्दा था, फिर उसे हमने जीवित किया और उसके लिए एक प्रकाश उपलब्ध किया जिसको लिए हुए वह लोगों के बीच चलता-फिरता है, उस व्यक्ति को तरह हो सकता है जो अँधेरों में पड़ा हुआ हो, उससे कदापि निकलनेवाला न हो? ऐसे ही इनकार करनेवालों के कर्म उनके लिए सुहाबने बनाए गए है
وَكَذٰلِكَ جَعَلْنَا ف۪ي كُلِّ قَرْيَةٍ اَكَابِرَ مُجْرِم۪يهَا لِيَمْكُرُوا ف۪يهَاۜ وَمَا يَمْكُرُونَ اِلَّا بِاَنْفُسِهِمْ وَمَا يَشْعُرُونَ123
और इसी प्रकार हमने प्रत्येक बस्ती में उसके बड़े-बड़े अपराधियों को लगा दिया है कि ले वहाँ चालें चले। वे अपने ही विरुद्ध चालें चलते है, किन्तु उन्हें इसका एहसास नहीं
وَاِذَا جَٓاءَتْهُمْ اٰيَةٌ قَالُوا لَنْ نُؤْمِنَ حَتّٰى نُؤْتٰى مِثْلَ مَٓا اُو۫تِيَ رُسُلُ اللّٰهِۜ اَللّٰهُ اَعْلَمُ حَيْثُ يَجْعَلُ رِسَالَتَهُۜ سَيُص۪يبُ الَّذ۪ينَ اَجْرَمُوا صَغَارٌ عِنْدَ اللّٰهِ وَعَذَابٌ شَد۪يدٌ بِمَا كَانُوا يَمْكُرُونَ124
और जब उनके पास कोई आयत (निशानी) आता है, तो वे कहते है, "हम कदापि नहीं मानेंगे, जब तक कि वैसी ही चीज़ हमें न दी जाए जो अल्लाह के रसूलों को दी गई हैं।" अल्लाह भली-भाँति उस (के औचित्य) को जानता है, जिसमें वह अपनी पैग़म्बरी रखता है। अपराधियों को शीघ्र ही अल्लाह के यहाँ बड़े अपमान और कठोर यातना का सामना करना पड़ेगा, उस चाल के कारण जो वे चलते रहे है
فَمَنْ يُرِدِ اللّٰهُ اَنْ يَهْدِيَهُ يَشْرَحْ صَدْرَهُ لِلْاِسْلَامِۚ وَمَنْ يُرِدْ اَنْ يُضِلَّهُ يَجْعَلْ صَدْرَهُ ضَيِّقًا حَرَجًا كَاَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِي السَّمَٓاءِۜ كَذٰلِكَ يَجْعَلُ اللّٰهُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ125
अतः (वास्तविकता यह है कि) जिसे अल्लाह सीधे मार्ग पर लाना चाहता है, उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है। और जिसे गुमराही में पड़ा रहने देता चाहता है, उसके सीने को तंग और भिंचा हुआ कर देता है; मानो वह आकाश में चढ़ रहा है। इस तरह अल्लाह उन लोगों पर गन्दगी डाल देता है, जो ईमान नहीं लाते
وَهٰذَا صِرَاطُ رَبِّكَ مُسْتَق۪يمًاۜ قَدْ فَصَّلْنَا الْاٰيَاتِ لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ126
और यह तुम्हारे रब का रास्ता है, बिल्कुल सीधा। हमने निशानियाँ, ध्यान देनेवालों के लिए खोल-खोलकर बयान कर दी है
لَهُمْ دَارُ السَّلَامِ عِنْدَ رَبِّهِمْ وَهُوَ وَلِيُّهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ127
उनके लिए उनके रब के यहाँ सलामती का घर है और वह उनका संरक्षक मित्र है, उन कामों के कारण जो वे करते रहे है
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَم۪يعًاۚ يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ قَدِ اسْتَكْثَرْتُمْ مِنَ الْاِنْسِۚ وَقَالَ اَوْلِيَٓاؤُ۬هُمْ مِنَ الْاِنْسِ رَبَّنَا اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ وَبَلَغْنَٓا اَجَلَنَا الَّذ۪ٓي اَجَّلْتَ لَنَاۜ قَالَ النَّارُ مَثْوٰيكُمْ خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اِلَّا مَا شَٓاءَ اللّٰهُۜ اِنَّ رَبَّكَ حَك۪يمٌ عَل۪يمٌ128
और उस दिन को याद करो, जब वह उन सबको घेरकर इकट्ठा करेगा, (कहेगा), "ऐ जिन्नों के गिरोह! तुमने तो मनुष्यों पर ख़ूब हाथ साफ किया।" और मनुष्यों में से जो उनके साथी रहे होंगे, कहेंग, "ऐ हमारे रब! हमने आपस में एक-दूसरे से लाभ उठाया और अपने उस नियत समय को पहुँच गए, जो तूने हमारे लिए ठहराया था।" वह कहेगा, "आग (नरक) तुम्हारा ठिकाना है, उसमें तुम्हें सदैव रहना है।" अल्लाह का चाहा ही क्रियान्वित है। निश्चय ही तुम्हारा रब तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
وَكَذٰلِكَ نُوَلّ۪ي بَعْضَ الظَّالِم۪ينَ بَعْضًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ۟129
इसी प्रकार हम अत्याचारियों को एक-दूसरे के लिए (नरक का) साथी बना देंगे, उस कमाई के कारण जो वे करते रहे थे
يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ اَلَمْ يَاْتِكُمْ رُسُلٌ مِنْكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ اٰيَات۪ي وَيُنْذِرُونَكُمْ لِقَٓاءَ يَوْمِكُمْ هٰذَاۜ قَالُوا شَهِدْنَا عَلٰٓى اَنْفُسِنَا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ اَنَّهُمْ كَانُوا كَافِر۪ينَ130
"ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे, जो तुम्हें मेरी आयतें सुनाते और इस दिन के पेश आने से तुम्हें डराते थे?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं! (रसूल तो आए थे) हम स्वयं अपने विरुद्ध गवाह है।" उन्हें तो सांसारिक जीवन ने धोखे में रखा। मगर अब वे स्वयं अपने विरुद्ध गवाही देने लगे कि वे इनकार करनेवाले थे
ذٰلِكَ اَنْ لَمْ يَكُنْ رَبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرٰى بِظُلْمٍ وَاَهْلُهَا غَافِلُونَ131
यह जान लो कि तुम्हारा रब ज़ुल्म करके बस्तियों को विनष्ट करनेवाला न था, जबकि उनके निवासी बेसुध रहे हों
وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِمَّا عَمِلُواۜ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ132
सभी के दर्जें उनके कर्मों के अनुसार है। और जो कुछ वे करते है, उससे तुम्हारा रब अनभिज्ञ नहीं है
وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِۜ اِنْ يَشَاْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِنْ بَعْدِكُمْ مَا يَشَٓاءُ كَمَٓا اَنْشَاَكُمْ مِنْ ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ اٰخَر۪ينَۜ133
तुम्हारा रब निस्पृह, दयावान है। यदि वह चाहे तो तुम्हें (दुनिया से) ले जाए और तुम्हारे स्थान पर जिसको चाहे तुम्हारे बाद ले आए, जिस प्रकार उसने तुम्हें कुछ और लोगों की सन्तति से उठाया है
اِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَاٰتٍۙ وَمَٓا اَنْتُمْ بِمُعْجِز۪ينَ134
जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जाता है, उसे अवश्य आना है और तुममें उसे मात करने की सामर्थ्य नहीं
قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلٰى مَكَانَتِكُمْ اِنّ۪ي عَامِلٌۚ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۙ مَنْ تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِۜ اِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ135
कह दो, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह कर्म करते रहो, मैं भी अपनी जगह कर्मशील हूँ। शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि घर (लोक-परलोक) का परिणाम किसके हित में होता है। निश्चय ही अत्याचारी सफल नहीं होते।"
وَجَعَلُوا لِلّٰهِ مِمَّا ذَرَاَ مِنَ الْحَرْثِ وَالْاَنْعَامِ نَص۪يبًا فَقَالُوا هٰذَا لِلّٰهِ بِزَعْمِهِمْ وَهٰذَا لِشُرَكَٓائِنَاۚ فَمَا كَانَ لِشُرَكَٓائِهِمْ فَلَا يَصِلُ اِلَى اللّٰهِۚ وَمَا كَانَ لِلّٰهِ فَهُوَ يَصِلُ اِلٰى شُرَكَٓائِهِمْۜ سَٓاءَ مَا يَحْكُمُونَ136
उन्होंने अल्लाह के लिए स्वयं उसी की पैदा की हुई खेती और चौपायों में से एक भाग निश्चित किया है और अपने ख़याल से कहते है, "यह किस्सा अल्लाह का है और यह हमारे ठहराए हुए साझीदारों का है।" फिर जो उनके साझीदारों का (हिस्सा) है, वह अल्लाह को नहीं पहुँचता, परन्तु जो अल्लाह का है, वह उनके साझीदारों को पहुँच जाता है। कितना बुरा है, जो फ़ैसला वे करते है!
وَكَذٰلِكَ زَيَّنَ لِكَث۪يرٍ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ قَتْلَ اَوْلَادِهِمْ شُرَكَٓاؤُ۬هُمْ لِيُرْدُوهُمْ وَلِيَلْبِسُوا عَلَيْهِمْ د۪ينَهُمْۜ وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَا فَعَلُوهُ فَذَرْهُمْ وَمَا يَفْتَرُونَ137
इसी प्रकार बहुत-से बहुदेववादियों के लिए उनके लिए साझीदारों ने उनकी अपनी सन्तान की हत्या को सुहाना बना दिया है, ताकि उन्हें विनष्ट कर दें और उनके लिए उनके धर्म को संदिग्ध बना दें। यदि अल्लाह चाहता तो वे ऐसा न करते; तो छोड़ दो उन्हें और उनके झूठ घड़ने को
وَقَالُوا هٰذِه۪ٓ اَنْعَامٌ وَحَرْثٌ حِجْرٌۘ لَا يَطْعَمُهَٓا اِلَّا مَنْ نَشَٓاءُ بِزَعْمِهِمْ وَاَنْعَامٌ حُرِّمَتْ ظُهُورُهَا وَاَنْعَامٌ لَا يَذْكُرُونَ اسْمَ اللّٰهِ عَلَيْهَا افْتِرَٓاءً عَلَيْهِۜ سَيَجْز۪يهِمْ بِمَا كَانُوا يَفْتَرُونَ138
और वे कहते है, "ये जानवर और खेती वर्जित और सुरक्षित है। इन्हें तो केवल वही खा सकता है, जिसे हम चाहें।" - ऐसा वे स्वयं अपने ख़याल से कहते है - और कुछ चौपाए ऐसे है, जिनकी पीठों को (सवारी के लिए) हराम ठहरा लिया है और कुछ जानवर ऐसे है जिनपर अल्लाह का नाम नहीं लेते। यह यह उन्होंने अल्लाह पर झूठ घड़ा है, और वह शीघ्र ही उन्हें उनके झूठ घड़ने का बदला देगा
وَقَالُوا مَا ف۪ي بُطُونِ هٰذِهِ الْاَنْعَامِ خَالِصَةٌ لِذُكُورِنَا وَمُحَرَّمٌ عَلٰٓى اَزْوَاجِنَاۚ وَاِنْ يَكُنْ مَيْتَةً فَهُمْ ف۪يهِ شُرَكَٓاءُۜ سَيَجْز۪يهِمْ وَصْفَهُمْۜ اِنَّهُ حَك۪يمٌ عَل۪يمٌ139
और वे कहते है, "जो कुछ इन जानवरों के पेट में है वह बिल्कुल हमारे पुरुषों ही के लिए है और वह हमारी पत्नियों के लिए वर्जित है। परन्तु यदि वह मुर्दा हो, तो वे सब उसमें शरीक है।" शीघ्र ही वह उन्हें उनके ऐसा कहने का बदला देगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
قَدْ خَسِرَ الَّذ۪ينَ قَتَلُٓوا اَوْلَادَهُمْ سَفَهًا بِغَيْرِ عِلْمٍ وَحَرَّمُوا مَا رَزَقَهُمُ اللّٰهُ افْتِرَٓاءً عَلَى اللّٰهِۜ قَدْ ضَلُّوا وَمَا كَانُوا مُهْتَد۪ينَ۟140
वे लोग कुछ जाने-बूझे बिना घाटे में रहे, जिन्होंने मूर्खता के कारण अपनी सन्तान की हत्या की और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें प्रदान किया था, उसे अल्लाह पर झूठ घड़कर हराम ठहरा दिया। वास्तव में वे भटक गए और वे सीधा मार्ग पानेवाले न हुए
وَهُوَ الَّذ۪ٓي اَنْشَاَ جَنَّاتٍ مَعْرُوشَاتٍ وَغَيْرَ مَعْرُوشَاتٍ وَالنَّخْلَ وَالزَّرْعَ مُخْتَلِفًا اُكُلُهُ وَالزَّيْتُونَ وَالرُّمَّانَ مُتَشَابِهًا وَغَيْرَ مُتَشَابِهٍۜ كُلُوا مِنْ ثَمَرِه۪ٓ اِذَٓا اَثْمَرَ وَاٰتُوا حَقَّهُ يَوْمَ حَصَادِه۪ۘ وَلَا تُسْرِفُواۜ اِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْرِف۪ينَۙ141
और वही है जिसने बाग़ पैदा किए; कुछ जालियों पर चढ़ाए जाते है और कुछ नहीं चढ़ाए जाते और खजूर और खेती भी जिनकी पैदावार विभिन्न प्रकार की होती है, और ज़ैतून और अनार जो एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी है और नहीं भी मिलते है। जब वह फल दे, तो उसका फल खाओ और उसका हक़ अदा करो जो उस (फ़सल) की कटाई के दिन वाजिब होता है। और हद से आगे न बढ़ो, क्योंकि वह हद से आगे बढ़नेवालों को पसन्द नहीं करता
وَمِنَ الْاَنْعَامِ حَمُولَةً وَفَرْشًاۜ كُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللّٰهُ وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِۜ اِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُب۪ينٌۙ142
और चौपायों में से कुछ बोझ उठानेवाले बड़े और कुछ छोटे जानवर पैदा किए। अल्लाह ने जो कुछ तुम्हें दिया है, उसमें से खाओ और शैतान के क़दमों पर न चलो। निश्चय ही वह तुम्हारा खुला हुआ शत्रु है
ثَمَانِيَةَ اَزْوَاجٍۚ مِنَ الضَّاْنِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْمَعْزِ اثْنَيْنِۜ قُلْ آٰلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ اَمِ الْاُنْثَيَيْنِ اَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ اَرْحَامُ الْاُنْثَيَيْنِۜ نَبِّؤُ۫ن۪ي بِعِلْمٍ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَۙ143
आठ नर-मादा पैदा किए - दो भेड़ की जाति से और दो बकरी की जाति से - कहो, "क्या उसने दोनों नर हराम किए है या दोनों मादा को? या उसको जो इन दोनों मादा के पेट में हो? किसी ज्ञान के आधार पर मुझे बताओ, यदि तुम सच्चे हो।"
وَمِنَ الْاِبِلِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْبَقَرِ اثْنَيْنِۜ قُلْ آٰلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ اَمِ الْاُنْثَيَيْنِ اَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ اَرْحَامُ الْاُنْثَيَيْنِۜ اَمْ كُنْتُمْ شُهَدَٓاءَ اِذْ وَصّٰيكُمُ اللّٰهُ بِهٰذَاۚ فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا لِيُضِلَّ النَّاسَ بِغَيْرِ عِلْمٍۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَ۟144
और दो ऊँट की जाति से और दो गाय की जाति से, कहो, "क्या उसने दोनों नर हराम किए है या दोनों मादा को? या उसको जो इन दोनों मादा के पेट में हो? या, तुम उपस्थित थे, जब अल्लाह ने तुम्हें इसका आदेश दिया था? फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा जो लोगों को पथभ्रष्ट करने के लिए अज्ञानता-पूर्वक अल्लाह पर झूठ घड़े? निश्चय ही, अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।"
قُلْ لَٓا اَجِدُ ف۪ي مَٓا اُو۫حِيَ اِلَيَّ مُحَرَّمًا عَلٰى طَاعِمٍ يَطْعَمُهُٓ اِلَّٓا اَنْ يَكُونَ مَيْتَةً اَوْ دَمًا مَسْفُوحًا اَوْ لَحْمَ خِنْز۪يرٍ فَاِنَّهُ رِجْسٌ اَوْ فِسْقًا اُهِلَّ لِغَيْرِ اللّٰهِ بِه۪ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَاِنَّ رَبَّكَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ145
कह दो, "जो कुछ मेरी ओर प्रकाशना की गई है, उसमें तो मैं नहीं पाता कि किसी खानेवाले पर उसका कोई खाना हराम किया गया हो, सिवाय इसके लिए वह मुरदार हो, यह बहता हुआ रक्त हो या ,सुअर का मांस हो - कि वह निश्चय ही नापाक है - या वह चीज़ जो मर्यादा से हटी हुई हो, जिसपर अल्लाह के अतिरिक्त किसी और का नाम लिया गया हो। इसपर भी जो बहुत विवश और लाचार हो जाए; परन्तु वह अवज्ञाकारी न हो और न हद से आगे बढ़नेवाला हो, तो निश्चय ही तुम्हारा रब अत्यन्त क्षमाशील, दयाबान है।"
وَعَلَى الَّذ۪ينَ هَادُوا حَرَّمْنَا كُلَّ ذ۪ي ظُفُرٍۚ وَمِنَ الْبَقَرِ وَالْغَنَمِ حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ شُحُومَهُمَٓا اِلَّا مَا حَمَلَتْ ظُهُورُهُمَٓا اَوِ الْحَوَايَٓا اَوْ مَا اخْتَلَطَ بِعَظْمٍۜ ذٰلِكَ جَزَيْنَاهُمْ بِبَغْيِهِمْۘ وَاِنَّا لَصَادِقُونَ146
और उन लोगों के लिए जो यहूदी हुए हमने नाख़ूनवाला जानवर हराम किया और गाय और बकरी में से इन दोनों की चरबियाँ उनके लिए हराम कर दी थीं, सिवाय उस (चर्बी) के जो उन दोनों की पीठों या आँखों से लगी हुई या हड़्डी से मिली हुई हो। यह बात ध्यान में रखो। हमने उन्हें उनकी सरकशी का बदला दिया था और निश्चय ही हम सच्चे है
فَاِنْ كَذَّبُوكَ فَقُلْ رَبُّكُمْ ذُو رَحْمَةٍ وَاسِعَةٍۚ وَلَا يُرَدُّ بَاْسُهُ عَنِ الْقَوْمِ الْمُجْرِم۪ينَ147
फिर यदि वे तुम्हें झुठलाएँ तो कह दो, "तुम्हारा रब व्यापक दयालुतावाला है और अपराधियों से उसकी यातना नहीं फिरती।"
سَيَقُولُ الَّذ۪ينَ اَشْرَكُوا لَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَٓا اَشْرَكْنَا وَلَٓا اٰبَٓاؤُ۬نَا وَلَا حَرَّمْنَا مِنْ شَيْءٍۜ كَذٰلِكَ كَذَّبَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ حَتّٰى ذَاقُوا بَاْسَنَاۜ قُلْ هَلْ عِنْدَكُمْ مِنْ عِلْمٍ فَتُخْرِجُوهُ لَنَاۜ اِنْ تَتَّبِعُونَ اِلَّا الظَّنَّ وَاِنْ اَنْتُمْ اِلَّا تَخْرُصُونَ148
बहुदेववादी कहेंगे, "यदि अल्लाह चाहता तो न हम साझीदार ठहराते और न हमारे पूर्वज ही; और न हम किसी चीज़ को (बिना अल्लाह के आदेश के) हराम ठहराते।" ऐसे ही उनसे पहले के लोगों ने भी झुठलाया था, यहाँ तक की उन्हें हमारी यातना का मज़ा चखना पड़ा। कहो, "क्या तुम्हारे पास कोई ज्ञान है कि उसे हमारे पास पेश करो? तुम लोग केवल गुमान पर चलते हो और निरे अटकल से काम लेते हो।"
قُلْ فَلِلّٰهِ الْحُجَّةُ الْبَالِغَةُۚ فَلَوْ شَٓاءَ لَهَدٰيكُمْ اَجْمَع۪ينَ149
कह दो, "पूर्ण तर्क तो अल्लाह ही का है। अतः यदि वह चाहता तो तुम सबको सीधा मार्ग दिखा देता।"
قُلْ هَلُمَّ شُهَدَٓاءَكُمُ الَّذ۪ينَ يَشْهَدُونَ اَنَّ اللّٰهَ حَرَّمَ هٰذَاۚ فَاِنْ شَهِدُوا فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْۚ وَلَا تَتَّبِعْ اَهْوَٓاءَ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَالَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ وَهُمْ بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ۟150
कह दो, "अपने उन गवाहों को लाओ, जो इसकी गवाही दें कि अल्लाह ने इसे हराम किया है।" फिर यदि वे गवाही दें तो तुम उनके साथ गवाही न देना, औऱ उन लोगों की इच्छाओं का अनुसरण न करना जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और जो आख़िरत को नहीं मानते और (जिनका) हाल यह है कि वे दूसरो को अपने रब के समकक्ष ठहराते है
قُلْ تَعَالَوْا اَتْلُ مَا حَرَّمَ رَبُّكُمْ عَلَيْكُمْ اَلَّا تُشْرِكُوا بِه۪ شَيْـًٔاۜ وَبِالْوَالِدَيْنِ اِحْسَانًاۚ وَلَا تَقْتُلُٓوا اَوْلَادَكُمْ مِنْ اِمْلَاقٍۜ نَحْنُ نَرْزُقُكُمْ وَاِيَّاهُمْۚ وَلَا تَقْرَبُوا الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَۚ وَلَا تَقْتُلُوا النَّفْسَ الَّت۪ي حَرَّمَ اللّٰهُ اِلَّا بِالْحَقِّۜ ذٰلِكُمْ وَصّٰيكُمْ بِه۪ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ151
कह दो, "आओ, मैं तुम्हें सुनाऊँ कि तुम्हारे रब ने तुम्हारे ऊपर क्या पाबन्दियाँ लगाई है: यह कि किसी चीज़ को उसका साझीदार न ठहराओ और माँ-बाप के साथ सद्व्य वहार करो और निर्धनता के कारण अपनी सन्तान की हत्या न करो; हम तुम्हें भी रोज़ी देते है और उन्हें भी। और अश्लील बातों के निकट न जाओ, चाहे वे खुली हुई हों या छिपी हुई हो। और किसी जीव की, जिसे अल्लाह ने आदरणीय ठहराया है, हत्या न करो। यह और बात है कि हक़ के लिए ऐसा करना पड़े। ये बाते है, जिनकी ताकीद उसने तुम्हें की है, शायद कि तुम बुद्धि से काम लो।
وَلَا تَقْرَبُوا مَالَ الْيَت۪يمِ اِلَّا بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُ حَتّٰى يَبْلُغَ اَشُدَّهُۚ وَاَوْفُوا الْكَيْلَ وَالْم۪يزَانَ بِالْقِسْطِۚ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا اِلَّا وُسْعَهَا وَاِذَا قُلْتُمْ فَاعْدِلُوا وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبٰىۚ وَبِعَهْدِ اللّٰهِ اَوْفُواۜ ذٰلِكُمْ وَصّٰيكُمْ بِه۪ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَۙ152
"और अनाथ के धन को हाथ न लगाओ, किन्तु ऐसे तरीक़े से जो उत्तम हो, यहाँ तक कि वह अपनी युवावस्था को पहुँच जाए। और इनसाफ़ के साथ पूरा-पूरा नापो और तौलो। हम किसी व्यक्ति पर उसी काम की ज़िम्मेदारी का बोझ डालते हैं जो उसकी सामर्थ्य में हो। और जब बात कहो, तो न्याय की कहो, चाहे मामला अपने नातेदार ही का क्यों न हो, और अल्लाह की प्रतिज्ञा को पूरा करो। ये बातें हैं, जिनकी उसने तुम्हें ताकीद की है। आशा है तुम ध्यान रखोगे
وَاَنَّ هٰذَا صِرَاط۪ي مُسْتَق۪يمًا فَاتَّبِعُوهُۚ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَب۪يلِه۪ۜ ذٰلِكُمْ وَصّٰيكُمْ بِه۪ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ153
और यह कि यही मेरा सीधा मार्ग है, तो तुम इसी पर चलो और दूसरे मार्गों पर न चलो कि वे तुम्हें उसके मार्ग से हटाकर इधर-उधर कर देंगे। यह वह बात है जिसकी उसने तुम्हें ताकीद की है, ताकि तुम (पथभ्रष्ट ता से) बचो
ثُمَّ اٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ تَمَامًا عَلَى الَّذ۪ٓي اَحْسَنَ وَتَفْص۪يلًا لِكُلِّ شَيْءٍ وَهُدًى وَرَحْمَةً لَعَلَّهُمْ بِلِقَٓاءِ رَبِّهِمْ يُؤْمِنُونَ۟154
फिर (देखो) हमने मूसा को किताब दी थी, (धर्म को) पूर्णता प्रदान करने के लिए, जिसे उसने उत्तम रीति से ग्रहण किया था; और हर चीज़ को स्पष्ट रूप से बयान करने, मार्गदर्शन देने और दया करने के लिए, ताकि वे लोग अपने रब से मिलने पर ईमान लाएँ
وَهٰذَا كِتَابٌ اَنْزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ فَاتَّبِعُوهُ وَاتَّقُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَۙ155
और यह किताब भी हमने उतारी है, जो बरकतवाली है; तो तुम इसका अनुसरण करो और डर रखो, ताकि तुमपर दया की जाए,
اَنْ تَقُولُٓوا اِنَّمَٓا اُنْزِلَ الْكِتَابُ عَلٰى طَٓائِفَتَيْنِ مِنْ قَبْلِنَاۖ وَاِنْ كُنَّا عَنْ دِرَاسَتِهِمْ لَغَافِل۪ينَۙ156
कि कहीं ऐसा न हो कि तुम कहने लगो, "किताब तो केवल हमसे पहले के दो गिरोहों पर उतारी गई थी और हमें तो उनके पढ़ने-पढ़ाने की ख़बर तक न थी।"
اَوْ تَقُولُوا لَوْ اَنَّٓا اُنْزِلَ عَلَيْنَا الْكِتَابُ لَكُنَّٓا اَهْدٰى مِنْهُمْۚ فَقَدْ جَٓاءَكُمْ بَيِّنَةٌ مِنْ رَبِّكُمْ وَهُدًى وَرَحْمَةٌۚ فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ كَذَّبَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَصَدَفَ عَنْهَاۜ سَنَجْزِي الَّذ۪ينَ يَصْدِفُونَ عَنْ اٰيَاتِنَا سُٓوءَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يَصْدِفُونَ157
या यह कहने लगो, "यदि हमपर किताब उतारी गई होती तो हम उनसे बढकर सीधे मार्ग पर होते।" तो अब तुम्हारे पास रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण, मार्गदर्शन और दयालुता आ चुकी है। अब उससे बढ़कर अत्याचारी कौन होगा जो अल्लाह की आयतों को झुठलाए और दूसरों को उनसे फेरे? जो लोग हमारी आयतों से रोकते हैं, उन्हें हम इस रोकने के कारण जल्द बुरी यातना देंगे
هَلْ يَنْظُرُونَ اِلَّٓا اَنْ تَاْتِيَهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُ اَوْ يَاْتِيَ رَبُّكَ اَوْ يَاْتِيَ بَعْضُ اٰيَاتِ رَبِّكَۜ يَوْمَ يَاْت۪ي بَعْضُ اٰيَاتِ رَبِّكَ لَا يَنْفَعُ نَفْسًا ا۪يمَانُهَا لَمْ تَكُنْ اٰمَنَتْ مِنْ قَبْلُ اَوْ كَسَبَتْ ف۪ٓي ا۪يمَانِهَا خَيْرًاۜ قُلِ انْتَظِرُٓوا اِنَّا مُنْتَظِرُونَ158
क्या ये लोग केवल इसी की प्रतीक्षा कर रहे है कि उनके पास फ़रिश्ते आ जाएँ या स्वयं तुम्हारा रब की कोई निशानी आ जाएगी, फिर किसी ऐसे व्यक्ति को उसका ईमान कुछ लाभ न पहुँचाएगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई न कमाई हो। कह दो, ?"तुम भी प्रतीक्षा करो, हम भी प्रतीक्षा करते है।"
اِنَّ الَّذ۪ينَ فَرَّقُوا د۪ينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا لَسْتَ مِنْهُمْ ف۪ي شَيْءٍۜ اِنَّمَٓا اَمْرُهُمْ اِلَى اللّٰهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُمْ بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ159
जिन लोगों ने अपने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और स्वयं गिरोहों में बँट गए, तुम्हारा उनसे कोई सम्बन्ध नहीं। उनका मामला तो बस अल्लाह के हवाले है। फिर वह उन्हें बता देगा जो कुछ वे किया करते थे
مَنْ جَٓاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ اَمْثَالِهَاۚ وَمَنْ جَٓاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزٰٓى اِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ160
जो कोई अच्छा चरित्र लेकर आएगा उसे उसका दस गुना बदला मिलेगा और जो व्यक्ति बुरा चरित्र लेकर आएगा, उसे उसका बस उतना ही बदला मिलेगा, उनके साथ कोई अन्याय न होगा
قُلْ اِنَّن۪ي هَدٰين۪ي رَبّ۪ٓي اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍۚ د۪ينًا قِيَمًا مِلَّةَ اِبْرٰه۪يمَ حَن۪يفًاۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ161
कहो, "मेरे रब ने मुझे सीधा मार्ग दिखा दिया है, बिल्कुल ठीक धर्म, इबराहीम के पंथ की ओर जो सबसे कटकर एक (अल्लाह) का हो गया था और वह बहुदेववादियों में से न था।"
قُلْ اِنَّ صَلَات۪ي وَنُسُك۪ي وَمَحْيَايَ وَمَمَات۪ي لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَۙ162
कहो, "मेरी नमाज़ और मेरी क़ुरबानी और मेरा जीना और मेरा मरना सब अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का रब है
لَا شَر۪يكَ لَهُۚ وَبِذٰلِكَ اُمِرْتُ وَاَنَا۬ اَوَّلُ الْمُسْلِم۪ينَ163
"उसका कोई साझी नहीं है। मुझे तो इसी का आदेश मिला है और सबसे पहला मुस्लिम (आज्ञाकारी) मैं हूँ।"
قُلْ اَغَيْرَ اللّٰهِ اَبْغ۪ي رَبًّا وَهُوَ رَبُّ كُلِّ شَيْءٍۜ وَلَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ اِلَّا عَلَيْهَاۚ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ اُخْرٰىۚ ثُمَّ اِلٰى رَبِّكُمْ مَرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ164
कहो, "क्या मैं अल्लाह से भिन्न कोई और रब ढूढूँ, जबकि हर चीज़ का रब वही है!" और यह कि प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ कमाता है, उसका फल वही भोगेगा; कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। फिर तुम्हें अपने रब की ओर लौटकर जाना है। उस समय वह तुम्हें बता देगा, जिसमें परस्पर तुम्हारा मतभेद और झगड़ा था
وَهُوَ الَّذ۪ي جَعَلَكُمْ خَلَٓائِفَ الْاَرْضِ وَرَفَعَ بَعْضَكُمْ فَوْقَ بَعْضٍ دَرَجَاتٍ لِيَبْلُوَكُمْ ف۪ي مَٓا اٰتٰيكُمْۜ اِنَّ رَبَّكَ سَر۪يعُ الْعِقَابِۘ وَاِنَّهُ لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ165
वही है जिसने तुम्हें धरती में धरती में ख़लीफ़ा (अधिकारी, उत्ताराधिकारी) बनाया और तुममें से कुछ लोगों के दर्जे कुछ लोगों की अपेक्षा ऊँचे रखे, ताकि जो कुछ उसने तुमको दिया है उसमें वह तम्हारी ले। निस्संदेह तुम्हारा रब जल्द सज़ा देनेवाला है। और निश्चय ही वही बड़ा क्षमाशील, दयावान है
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓمٓصٓۜ1
अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ साद॰
كِتَابٌ اُنْزِلَ اِلَيْكَ فَلَا يَكُنْ ف۪ي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِنْهُ لِتُنْذِرَ بِه۪ وَذِكْرٰى لِلْمُؤْمِن۪ينَ2
यह एक किताब है, जो तुम्हारी ओर उतारी गई है - अतः इससे तुम्हारे सीने में कोई तंगी न हो - ताकि तुम इसके द्वारा सचेत करो और यह ईमानवालों के लिए एक प्रबोधन है;
اِتَّبِعُوا مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَۜ قَل۪يلًا مَا تَذَكَّرُونَ3
जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है, उस पर चलो और उसे छोड़कर दूसरे संरक्षक मित्रों का अनुसरण न करो। तुम लोग नसीहत थोड़े ही मानते हो
وَكَمْ مِنْ قَرْيَةٍ اَهْلَكْنَاهَا فَجَٓاءَهَا بَاْسُنَا بَيَاتًا اَوْ هُمْ قَٓائِلُونَ4
कितनी ही बस्तियाँ थीं, जिन्हें हमने विनष्टम कर दिया। उनपर हमारी यातना रात को सोते समय आ पहुँची या (दिन-दहाड़) आई, जबकि वे दोपहर में विश्राम कर रहे थे
فَمَا كَانَ دَعْوٰيهُمْ اِذْ جَٓاءَهُمْ بَاْسُنَٓا اِلَّٓا اَنْ قَالُٓوا اِنَّا كُنَّا ظَالِم۪ينَ5
जब उनपर यातना आ गई तो इसके सिवा उनके मुँह से कुछ न निकला कि वे पुकार उठे, "वास्तव में हम अत्याचारी थे।"
فَلَنَسْـَٔلَنَّ الَّذ۪ينَ اُرْسِلَ اِلَيْهِمْ وَلَنَسْـَٔلَنَّ الْمُرْسَل۪ينَۙ6
अतः हम उन लोगों से अवश्य पूछेंगे, जिनके पास रसूल भेजे गए थे, और हम रसूलों से भी अवश्य पूछेंगे
فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِمْ بِعِلْمٍ وَمَا كُنَّا غَٓائِب۪ينَ7
फिर हम पूरे ज्ञान के साथ उनके सामने सब बयान कर देंगे। हम कही ग़ायब नहीं थे
وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍۨ الْحَقُّۚ فَمَنْ ثَقُلَتْ مَوَاز۪ينُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ8
और बिल्कुल पक्का-सच्चा वज़न उसी दिन होगा। अतः जिनके कर्म वज़न में भारी होंगे, वही सफलता प्राप्त करेंगे
وَمَنْ خَفَّتْ مَوَاز۪ينُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ بِمَا كَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَظْلِمُونَ9
और वे लोग जिनके कर्म वज़न में हलके होंगे, तो वही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला, क्योंकि वे हमारी आयतों का इनकार औऱ अपने ऊपर अत्याचार करते रहे
وَلَقَدْ مَكَّنَّاكُمْ فِي الْاَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ ف۪يهَا مَعَايِشَۜ قَل۪يلًا مَا تَشْكُرُونَ۟10
और हमने धरती में तुम्हें अधिकार दिया और उसमें तुम्हारे लिए जीवन-सामग्री रखी। तुम कृतज्ञता थोड़े ही दिखाते हो
وَلَقَدْ خَلَقْنَاكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَاكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلٰٓئِكَةِ اسْجُدُوا لِاٰدَمَۗ فَسَجَدُٓوا اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ لَمْ يَكُنْ مِنَ السَّاجِد۪ينَ11
हमने तुम्हें पैदा करने का निश्चय किया; फिर तुम्हारा रूप बनाया; फिर हमने फ़रिश्तों से कहो, "आदम को सजदा करो।" तो उन्होंने सजदा किया, सिवाय इबलीस के। वह (इबलीस) सदजा करनेवालों में से न हुआ
قَالَ مَا مَنَعَكَ اَلَّا تَسْجُدَ اِذْ اَمَرْتُكَۜ قَالَ اَنَا۬ خَيْرٌ مِنْهُۚ خَلَقْتَن۪ي مِنْ نَارٍ وَخَلَقْتَهُ مِنْ ط۪ينٍ12
कहा, "तुझे किसने सजका करने से रोका, जबकि मैंने तुझे आदेश दिया था?" बोला, "मैं उससे अच्छा हूँ। तूने मुझे अग्नि से बनाया और उसे मिट्टी से बनाया।"
قَالَ فَاهْبِطْ مِنْهَا فَمَا يَكُونُ لَكَ اَنْ تَتَكَبَّرَ ف۪يهَا فَاخْرُجْ اِنَّكَ مِنَ الصَّاغِر۪ينَ13
कहा, "उतर जा यहाँ से! तुझे कोई हक़ नहीं है कि यहाँ घमंड करे, तो अब निकल जा; निश्चय ही तू अपमानित है।"
قَالَ اَنْظِرْن۪ٓي اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُونَ14
बोला, "मुझे एक दिन तक मुहल्लत दे, जबकि लोग उठाए जाएँगे।"
قَالَ اِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَر۪ينَ15
कहा, "निस्संदेह तुझे मुहल्लत है।"
قَالَ فَبِمَٓا اَغْوَيْتَن۪ي لَاَقْعُدَنَّ لَهُمْ صِرَاطَكَ الْمُسْتَق۪يمَۙ16
बोला, "अच्छा, इस कारण कि तूने मुझे गुमराही में डाला है, मैं भी तेरे सीधे मार्ग पर उनके लिए घात में अवश्य बैठूँगा
ثُمَّ لَاٰتِيَنَّهُمْ مِنْ بَيْنِ اَيْد۪يهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ اَيْمَانِهِمْ وَعَنْ شَمَٓائِلِهِمْۜ وَلَا تَجِدُ اَكْثَرَهُمْ شَاكِر۪ينَ17
"फिर उनके आगे और उनके पीछे और उनके दाएँ और उनके बाएँ से उनके पास आऊँगा। और तू उनमें अधिकतर को कृतज्ञ न पाएगा।"
قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْؤُ۫مًا مَدْحُورًاۜ لَمَنْ تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَاَمْلَـَٔنَّ جَهَنَّمَ مِنْكُمْ اَجْمَع۪ينَ18
कहा, "निकल जा यहाँ से! निन्दित ठुकराया हुआ। उनमें से जिस किसी ने भी तेरा अनुसरण किया, मैं अवश्य तुम सबसे जहन्नम को भर दूँगा।"
وَيَٓا اٰدَمُ اسْكُنْ اَنْتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِم۪ينَ19
और "ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों जन्नत में रहो-बसो, फिर जहाँ से चाहो खाओ, लेकिन इस वृक्ष के निकट न जाना, अन्यथा अत्याचारियों में से हो जाओगे।"
فَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُ۫رِيَ عَنْهُمَا مِنْ سَوْاٰتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهٰيكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هٰذِهِ الشَّجَرَةِ اِلَّٓا اَنْ تَكُونَا مَلَكَيْنِ اَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِد۪ينَ20
फिर शैतान ने दोनों को बहकाया, ताकि उनकी शर्मगाहों को, जो उन दोनों से छिपी थीं, उन दोनों के सामने खोल दे। और उसने (इबलीस ने) कहा, "तुम्हारे रब ने तुम दोनों को जो इस वृक्ष से रोका है, तो केवल इसलिए कि ऐसा न हो कि तुम कहीं फ़रिश्ते हो जाओ या कही ऐसा न हो कि तुम्हें अमरता प्राप्त हो जाए।"
وَقَاسَمَهُمَٓا اِنّ۪ي لَكُمَا لَمِنَ النَّاصِح۪ينَۙ21
और उसने उन दोनों के आगे क़समें खाई कि "निश्चय ही मैं तुम दोनों का हितैषी हूँ।"
فَدَلّٰيهُمَا بِغُرُورٍۚ فَلَمَّا ذَاقَا الشَّجَرَةَ بَدَتْ لَهُمَا سَوْاٰتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِنْ وَرَقِ الْجَنَّةِۜ وَنَادٰيهُمَا رَبُّهُمَٓا اَلَمْ اَنْهَكُمَا عَنْ تِلْكُمَا الشَّجَرَةِ وَاَقُلْ لَكُمَٓا اِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمَا عَدُوٌّ مُب۪ينٌ22
इस प्रकार धोखा देकर उसने उन दोनों को झुका लिया। अन्ततः जब उन्होंने उस वृक्ष का स्वाद लिया, तो उनकी शर्मगाहे एक-दूसरे के सामने खुल गए और वे अपने ऊपर बाग़ के पत्ते जोड़-जोड़कर रखने लगे। तब उनके रब ने उन्हें पुकारा, "क्या मैंने तुम दोनों को इस वृक्ष से रोका नहीं था और तुमसे कहा नहीं था कि शैतान तुम्हारा खुला शत्रु है?"
قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَٓا اَنْفُسَنَا وَاِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ23
दोनों बोले, "हमारे रब! हमने अपने आप पर अत्याचार किया। अब यदि तूने हमें क्षमा न किया और हम पर दया न दर्शाई, फिर तो हम घाटा उठानेवालों में से होंगे।"
قَالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّۚ وَلَكُمْ فِي الْاَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ اِلٰى ح۪ينٍ24
कहा, "उतर जाओ! तुम परस्पर एक-दूसरे के शत्रु हो और एक अवधि कर तुम्हारे लिए धरती में ठिकाना और जीवन-सामग्री है।"
قَالَ ف۪يهَا تَحْيَوْنَ وَف۪يهَا تَمُوتُونَ وَمِنْهَا تُخْرَجُونَ۟25
कहा, "वहीं तुम्हें जीना और वहीं तुम्हें मरना है और उसी में से तुमको निकाला जाएगा।"
يَا بَن۪ٓي اٰدَمَ قَدْ اَنْزَلْنَا عَلَيْكُمْ لِبَاسًا يُوَار۪ي سَوْاٰتِكُمْ وَر۪يشًا۠ وَلِبَاسُ التَّقْوٰى ذٰلِكَ خَيْرٌۜ ذٰلِكَ مِنْ اٰيَاتِ اللّٰهِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ26
ऐ आदम की सन्तान! हमने तुम्हारे लिए वस्त्र उतारा है कि तुम्हारी शर्मगाहों को छुपाए और रक्षा और शोभा का साधन हो। और धर्मपरायणता का वस्त्र - वह तो सबसे उत्तम है, यह अल्लाह की निशानियों में से है, ताकि वे ध्यान दें
يَا بَن۪ٓي اٰدَمَ لَا يَفْتِنَنَّكُمُ الشَّيْطَانُ كَمَٓا اَخْرَجَ اَبَوَيْكُمْ مِنَ الْجَنَّةِ يَنْزِعُ عَنْهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوْاٰتِهِمَاۜ اِنَّهُ يَرٰيكُمْ هُوَ وَقَب۪يلُهُ مِنْ حَيْثُ لَا تَرَوْنَهُمْۜ اِنَّا جَعَلْنَا الشَّيَاط۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ لِلَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ27
ऐ आदम की सन्तान! कहीं शैतान तुम्हें बहकावे में न डाल दे, जिस प्रकार उसने तुम्हारे माँ-बाप को जन्नत से निकलवा दिया था; उनके वस्त्र उनपर से उतरवा दिए थे, ताकि उनकी शर्मगाहें एक-दूसरे के सामने खोल दे। निस्सदेह वह और उसका गिरोह उस स्थान से तुम्हें देखता है, जहाँ से तुम उन्हें नहीं देखते। हमने तो शैतानों को उन लोगों का मित्र बना दिया है, जो ईमान नहीं रखते
وَاِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً قَالُوا وَجَدْنَا عَلَيْهَٓا اٰبَٓاءَنَا وَاللّٰهُ اَمَرَنَا بِهَاۜ قُلْ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَاْمُرُ بِالْفَحْشَٓاءِۜ اَتَقُولُونَ عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ28
और उनका हाल यह है कि जब वे लोग कोई अश्लील कर्म करते है तो कहते है कि "हमने अपने बाप-दादा को इसी तरीक़े पर पाया है और अल्लाह ही ने हमें इसका आदेश दिया है।" कह दो, "अल्लाह कभी अश्लील बातों का आदेश नहीं दिया करता। क्या अल्लाह पर थोपकर ऐसी बात कहते हो, जिसका तुम्हें ज्ञान नहीं?"
قُلْ اَمَرَ رَبّ۪ي بِالْقِسْطِ۠ وَاَق۪يمُوا وُجُوهَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَادْعُوهُ مُخْلِص۪ينَ لَهُ الدّ۪ينَۜ كَمَا بَدَاَكُمْ تَعُودُونَۜ29
कह दो, "मेरे रब ने तो न्याय का आदेश दिया है और यह कि इबादत के प्रत्येक अवसर पर अपना रुख़ ठीक रखो और निरे उसी के भक्त एवं आज्ञाकारी बनकर उसे पुकारो। जैसे उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, वैसे ही तुम फिर पैदा होगे।"
فَر۪يقًا هَدٰى وَفَر۪يقًا حَقَّ عَلَيْهِمُ الضَّلَالَةُۜ اِنَّهُمُ اتَّخَذُوا الشَّيَاط۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَيَحْسَبُونَ اَنَّهُمْ مُهْتَدُونَ30
एक गिरोह को उसने मार्ग दिखाया। परन्तु दूसरा गिरोह ऐसा है, जिसके लोगों पर गुमराही चिपककर रह गई। निश्चय ही उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को अपने मित्र बनाए और समझते यह है कि वे सीधे मार्ग पर हैं
يَا بَن۪ٓي اٰدَمَ خُذُوا ز۪ينَتَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَكُلُوا وَاشْرَبُوا وَلَا تُسْرِفُواۚ اِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْرِف۪ينَ۟31
ऐ आदम की सन्तान! इबादत के प्रत्येक अवसर पर शोभा धारण करो; खाओ और पियो, परन्तु हद से आगे न बढ़ो। निश्चय ही, वह हद से आगे बदनेवालों को पसन्द नहीं करता
قُلْ مَنْ حَرَّمَ ز۪ينَةَ اللّٰهِ الَّت۪ٓي اَخْرَجَ لِعِبَادِه۪ وَالطَّيِّبَاتِ مِنَ الرِّزْقِۜ قُلْ هِيَ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا خَالِصَةً يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ كَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الْاٰيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ32
कहो, "अल्लाह की उस शोभा को जिसे उसने अपने बन्दों के लिए उत्पन्न किया है औऱ आजीविका की पवित्र, अच्छी चीज़ो को किसने हराम कर दिया?" कह दो, "यह सांसारिक जीवन में भी ईमानवालों के लिए हैं; क़ियामत के दिन तो ये केवल उन्हीं के लिए होंगी। इसी प्रकार हम आयतों को उन लोगों के लिए सविस्तार बयान करते है, जो जानना चाहे।"
قُلْ اِنَّمَا حَرَّمَ رَبِّيَ الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَالْاِثْمَ وَالْبَغْيَ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَاَنْ تُشْرِكُوا بِاللّٰهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِه۪ سُلْطَانًا وَاَنْ تَقُولُوا عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ33
कह दो, "मेरे रब ने केवल अश्लील कर्मों को हराम किया है - जो उनमें से प्रकट हो उन्हें भी और जो छिपे हो उन्हें भी - और हक़ मारना, नाहक़ ज़्यादती और इस बात को कि तुम अल्लाह का साझीदार ठहराओ, जिसके लिए उसने कोई प्रमाण नहीं उतारा और इस बात को भी कि तुम अल्लाह पर थोपकर ऐसी बात कहो जिसका तुम्हें ज्ञान न हो।"
وَلِكُلِّ اُمَّةٍ اَجَلٌۚ فَاِذَا جَٓاءَ اَجَلُهُمْ لَا يَسْتَاْخِرُونَ سَاعَةً وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ34
प्रत्येक समुदाय के लिए एक नियत अवधि है। फिर जब उसका नियत समय आ जाता है, तो एक घड़ी भर न पीछे हट सकते है और न आगे बढ़ सकते है
يَا بَن۪ٓي اٰدَمَ اِمَّا يَاْتِيَنَّكُمْ رُسُلٌ مِنْكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ اٰيَات۪يۙ فَمَنِ اتَّقٰى وَاَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ35
ऐ आदम की सन्तान! यदि तुम्हारे पास तुम्हीं में से कोई रसूल आएँ; तुम्हें मेरी आयतें सुनाएँ, तो जिसने डर रखा और सुधार कर लिया तो ऐसे लोगों के लिए न कोई भय होगा और न वे शोकाकुल होंगे
وَالَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَٓا اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ36
रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और उनके मुक़ाबले में अकड़ दिखाई; वही आगवाले हैं, जिसमें वे सदैव रहेंगे
فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا اَوْ كَذَّبَ بِاٰيَاتِه۪ۜ اُو۬لٰٓئِكَ يَنَالُهُمْ نَص۪يبُهُمْ مِنَ الْكِتَابِۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاءَتْهُمْ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوْنَهُمْۙ قَالُٓوا اَيْنَ مَا كُنْتُمْ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا وَشَهِدُوا عَلٰٓى اَنْفُسِهِمْ اَنَّهُمْ كَانُوا كَافِر۪ينَ37
अब उससे बढ़कर अत्याचारी कौन है, जिसने अल्लाह पर मिथ्यारोपण किया या उसकी आयतों को झुठलाया? ऐसे लोगों को उनके लिए लिखा हुआ हिस्सा पहुँचता रहेगा, यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) उनके प्राण ग्रस्त करने के लिए उनके पास आएँगे तो कहेंगे, "कहाँ हैं, वे जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते थे?" कहेंगे, "वे तो हमसे गुम हो गए।" और वे स्वयं अपने विरुद्ध गवाही देंगे कि वास्तव में वे इनकार करनेवाले थे
قَالَ ادْخُلُوا ف۪ٓي اُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِكُمْ مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ فِي النَّارِۜ كُلَّمَا دَخَلَتْ اُمَّةٌ لَعَنَتْ اُخْتَهَاۜ حَتّٰٓى اِذَا ادَّارَكُوا ف۪يهَا جَم۪يعًاۙ قَالَتْ اُخْرٰيهُمْ لِاُو۫لٰيهُمْ رَبَّنَا هٰٓؤُ۬لَٓاءِ اَضَلُّونَا فَاٰتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِنَ النَّارِۜ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلٰكِنْ لَا تَعْلَمُونَ38
वह कहेगा, "जिन्न और इनसान के जो गिरोह तुमसे पहले गुज़रे हैं, उन्हीं के साथ सम्मिलित होकर तुम भी आग में प्रवेश करो।" जब भी कोई जमाअत प्रवेश करेगी, तो वह अपनी बहन पर लानत करेगी, यहाँ तक कि जब सब उसमें रल-मिल जाएँगे तो उनमें से बाद में आनेवाले अपने से पहलेवाले के विषय में कहेंगे, "हमारे रब! हमें इन्हीं लोगों ने गुमराह किया था; तो तू इन्हें आग की दोहरी यातना दे।" वह कहेगा, "हरेक के लिए दोहरी ही है। किन्तु तुम नहीं जानते।"
وَقَالَتْ اُو۫لٰيهُمْ لِاُخْرٰيهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِنْ فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنْتُمْ تَكْسِبُونَ۟39
और उनमें से पहले आनेवाले अपने से बाद में आनेवालों से कहेंगे, "फिर हमारे मुक़ावाले में तुम्हें कोई श्रेष्ठता प्राप्त नहीं, तो जैसी कुछ कमाई तुम करते रहे हो, उसके बदले में तुम यातना का मज़ा चखो!"
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ اَبْوَابُ السَّمَٓاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتّٰى يَلِجَ الْجَمَلُ ف۪ي سَمِّ الْخِيَاطِۜ وَكَذٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِم۪ينَ40
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनके मुक़ाबले में अकड़ दिखाई, उनके लिए आकाश के द्वार नहीं खोले जाएँगे और न वे जन्नत में प्रवेश करेंग जब तक कि ऊँट सुई के नाके में से न गुज़र जाए। हम अपराधियों को ऐसा ही बदला देते है
لَهُمْ مِنْ جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِنْ فَوْقِهِمْ غَوَاشٍۜ وَكَذٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِم۪ينَ41
उनके लिए बिछौना जहन्नम का होगा और ओढ़ना भी उसी का। अत्याचारियों को हम ऐसा ही बदला देते है
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا اِلَّا وُسْعَهَاۘ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَنَّةِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ42
इसके विपरित जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए - हम किसी पर उसकी सामर्थ्य से बढ़कर बोझ नहीं डालते - वही लोग जन्नतवाले है। वे उसमें सदैव रहेंगे
وَنَزَعْنَا مَا ف۪ي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهِمُ الْاَنْهَارُۚ وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي هَدٰينَا لِهٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَٓا اَنْ هَدٰينَا اللّٰهُۚ لَقَدْ جَٓاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّۜ وَنُودُٓوا اَنْ تِلْكُمُ الْجَنَّةُ اُو۫رِثْتُمُوهَا بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ43
उनके सीनों में एक-दूसरे के प्रति जो रंजिश होगी, उसे हम दूर कर देंगे; उनके नीचें नहरें बह रही होंगी और वे कहेंगे, "प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने इसकी ओर हमारा मार्गदर्शन किया। और यदि अल्लाह हमारा मार्गदर्शन न करतो तो हम कदापि मार्ग नहीं पा सकते थे। हमारे रब के रसूल निस्संदेह सत्य लेकर आए थे।" और उन्हें आवाज़ दी जाएगी, "यह जन्नत है, जिसके तुम वारिस बनाए गए। उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे थे।"
وَنَادٰٓى اَصْحَابُ الْجَنَّةِ اَصْحَابَ النَّارِ اَنْ قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّا فَهَلْ وَجَدْتُمْ مَا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقًّاۜ قَالُوا نَعَمْۚ فَاَذَّنَ مُؤَذِّنٌ بَيْنَهُمْ اَنْ لَعْنَةُ اللّٰهِ عَلَى الظَّالِم۪ينَ الظَّالِم۪ينَۙ44
जन्नतवाले आगवालों को पुकारेंगे, "हमसे हमारे रब ने जो वादा किया था, उसे हमने सच पाया। तो क्या तुमसे तुम्हारे रब ने जो वादा कर रखा था, तुमने भी उसे सच पाया?" वे कहेंगे, "हाँ।" इतने में एक पुकारनेवाला उनके बीच पुकारेगा, "अल्लाह की फिटकार है अत्याचारियों पर।"
اَلَّذ۪ينَ يَصُدُّونَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًاۚ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ كَافِرُونَۜ45
जो अल्लाह के मार्ग से रोकते और उसे टेढ़ा करना चाहते है और जो आख़िरत का इनकार करते है,
وَبَيْنَهُمَا حِجَابٌۚ وَعَلَى الْاَعْرَافِ رِجَالٌ يَعْرِفُونَ كُلًّا بِس۪يمٰيهُمْۚ وَنَادَوْا اَصْحَابَ الْجَنَّةِ اَنْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَ46
और इन दोनों के मध्य एक ओट होगी। और ऊँचाइयों पर कुछ लोग होंगे जो प्रत्येक को उसके लक्षणों से पहचानते होंगे, और जन्नतवालों से पुकारकर कहेंगे, "तुम पर सलाम है।" वे अभी जन्नत में प्रविष्ट तो नहीं हुए होंगे, यद्यपि वे आस लगाए होंगे
وَاِذَا صُرِفَتْ اَبْصَارُهُمْ تِلْقَٓاءَ اَصْحَابِ النَّارِۙ قَالُوا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ۟47
और जब उनकी निगाहें आगवालों की ओर फिरेंगी, तो कहेंगे, "हमारे रब, हमें अत्याचारी लोगों में न सम्मिलित न करना।"
وَنَادٰٓى اَصْحَابُ الْاَعْرَافِ رِجَالًا يَعْرِفُونَهُمْ بِس۪يمٰيهُمْ قَالُوا مَٓا اَغْنٰى عَنْكُمْ جَمْعُكُمْ وَمَا كُنْتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ48
और ये ऊँचाइयोंवाले कुछ ऐसे लोगों से, जिन्हें ये उनके लक्षणों से पहचानते हैं, कहेंगे, "तुम्हारे जत्थे तो तुम्हारे कुछ काम न आए और न तुम्हारा अकड़ते रहना ही।
اَهٰٓؤُ۬لَٓاءِ الَّذ۪ينَ اَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ اللّٰهُ بِرَحْمَةٍۜ اُدْخُلُوا الْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَٓا اَنْتُمْ تَحْزَنُونَ49
"क्या ये वही हैं ना, जिनके विषय में तुम क़समें खाते थे कि अल्लाह उनपर अपनी दया-दृष्टि न करेगा।" "जन्नत में प्रवेश करो, तुम्हारे लिए न कोई भय है और न तुम्हें कोई शोक होगा।"
وَنَادٰٓى اَصْحَابُ النَّارِ اَصْحَابَ الْجَنَّةِ اَنْ اَف۪يضُوا عَلَيْنَا مِنَ الْمَٓاءِ اَوْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اللّٰهُۜ قَالُٓوا اِنَّ اللّٰهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى الْكَافِر۪ينَۙ50
आगवाले जन्नतवालों को पुकारेंगे कि ,"थोड़ा पानी हमपर बहा दो, या उन चीज़ों में से कुछ दे दो जो अल्लाह ने तुम्हें दी हैं।" वे कहेंगे, "अल्लाह ने तो ये दोनों चीज़ें इनकार करनेवालों के लिए वर्जित कर दी है।"
اَلَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا د۪ينَهُمْ لَهْوًا وَلَعِبًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَاۚ فَالْيَوْمَ نَنْسٰيهُمْ كَمَا نَسُوا لِقَٓاءَ يَوْمِهِمْ هٰذَاۙ وَمَا كَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَجْحَدُونَ51
उनके लिए जिन्होंने अपना धर्म खेल-तमाशा ठहराया और जिन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल दिया, तो आज हम भी उन्हें भुला देंगे, जिस प्रकार वे अपने इस दिन की मुलाक़ात को भूले रहे और हमारी आयतों का इनकार करते रहे
وَلَقَدْ جِئْنَاهُمْ بِكِتَابٍ فَصَّلْنَاهُ عَلٰى عِلْمٍ هُدًى وَرَحْمَةً لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ52
और निश्चय ही हम उनके पास एक ऐसी किताब ले आए है, जिसे हमने ज्ञान के आधार पर विस्तृत किया है, जो ईमान लानेवालों के लिए मार्गदर्शन और दयालुता है
هَلْ يَنْظُرُونَ اِلَّا تَاْو۪يلَهُۜ يَوْمَ يَاْت۪ي تَاْو۪يلُهُ يَقُولُ الَّذ۪ينَ نَسُوهُ مِنْ قَبْلُ قَدْ جَٓاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّۚ فَهَلْ لَنَا مِنْ شُفَعَٓاءَ فَيَشْفَعُوا لَنَٓا اَوْ نُرَدُّ فَنَعْمَلَ غَيْرَ الَّذ۪ي كُنَّا نَعْمَلُۜ قَدْ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَفْتَرُونَ۟53
क्या वे लोग केवल इसी की प्रतीक्षा में है कि उसकी वास्तविकता और परिणाम प्रकट हो जाए? जिस दिन उसकी वास्तविकता सामने आ जाएगी, तो वे लोग इससे पहले उसे भूले हुए थे, बोल उठेंगे, "वास्तव में, हमारे रब के रसूल सत्य लेकर आए थे। तो क्या हमारे कुछ सिफ़ारिशी है, जो हमारी सिफ़ारिश कर दें या हमें वापस भेज दिया जाए कि जो कुछ हम करते थे उससे भिन्न कर्म करें?" उन्होंने अपने आपको घाटे में डाल दिया और जो कुछ वे झूठ घढ़ते थे, वे सब उनसे गुम होकर रह गए
اِنَّ رَبَّكُمُ اللّٰهُ الَّذ۪ي خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ ف۪ي سِتَّةِ اَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوٰى عَلَى الْعَرْشِ يُغْشِي الَّيْلَ النَّهَارَ يَطْلُبُهُ حَث۪يثًاۙ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ وَالنُّجُومَ مُسَخَّرَاتٍ بِاَمْرِه۪ۜ اَلَا لَهُ الْخَلْقُ وَالْاَمْرُۜ تَبَارَكَ اللّٰهُ رَبُّ الْعَالَم۪ينَ54
निस्संदेह तुम्हारा रब वही अल्लाह है, जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया - फिर राजसिंहासन पर विराजमान हुआ। वह रात को दिन पर ढाँकता है जो तेज़ी से उसका पीछा करने में सक्रिय है। और सूर्य, चन्द्रमा और तारे भी बनाए, इस प्रकार कि वे उसके आदेश से काम में लगे हुए है। सावधान रहो, उसी की सृष्टि है और उसी का आदेश है। अल्लाह सारे संसार का रब, बड़ी बरकतवाला है
اُدْعُوا رَبَّكُمْ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةًۜ اِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَد۪ينَۚ55
अपने रब को गिड़गिड़ाकर और चुपके-चुपके पुकारो। निश्चय ही वह हद से आगे बढ़नेवालों को पसन्द नहीं करता
وَلَا تُفْسِدُوا فِي الْاَرْضِ بَعْدَ اِصْلَاحِهَا وَادْعُوهُ خَوْفًا وَطَمَعًاۜ اِنَّ رَحْمَتَ اللّٰهِ قَر۪يبٌ مِنَ الْمُحْسِن۪ينَ56
और धरती में उसके सुधार के पश्चात बिगाड़ न पैदा करो। भय और आशा के साथ उसे पुकारो। निश्चय ही, अल्लाह की दयालुता सत्कर्मी लोगों के निकट है
وَهُوَ الَّذ۪ي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِه۪ۜ حَتّٰٓى اِذَٓا اَقَلَّتْ سَحَابًا ثِقَالًا سُقْنَاهُ لِبَلَدٍ مَيِّتٍ فَاَنْزَلْنَا بِهِ الْمَٓاءَ فَاَخْرَجْنَا بِه۪ مِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِۜ كَذٰلِكَ نُخْرِجُ الْمَوْتٰى لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ57
और वही है जो अपनी दयालुता से पहले शुभ सूचना देने को हवाएँ भेजता है, यहाँ तक कि जब वे बोझल बादल को उठा लेती है तो हम उसे किसी निर्जीव भूमि की ओर चला देते है, फिर उससे पानी बरसाते है, फिर उससे हर तरह के फल निकालते है। इसी प्रकार हम मुर्दों को मृत अवस्था से निकालेगे - ताकि तुम्हें ध्यान हो
وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِاِذْنِ رَبِّه۪ۚ وَالَّذ۪ي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ اِلَّا نَكِدًاۜ كَذٰلِكَ نُصَرِّفُ الْاٰيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ۟58
और अच्छी भूमि के पेड़-पौधे उसके रब के आदेश से निकलते है और जो भूमि ख़राब हो गई है तो उससे निकम्मी पैदावार के अतिरिक्त कुछ नहीं निकलता। इसी प्रकार हम निशानियों को उन लोगों के लिए तरह-तरह से बयान करते है, जो कृतज्ञता दिखानेवाले है
لَقَدْ اَرْسَلْنَا نُوحًا اِلٰى قَوْمِه۪ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ59
हमने नूह को उसकी क़ौम के लोगों की ओर भेजा, तो उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। मैं तुम्हारे लिए एक बड़े दिन का यातना से डरता हूँ।"
قَالَ الْمَلَاُ مِنْ قَوْمِه۪ٓ اِنَّا لَنَرٰيكَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ60
उसकी क़ौम के सरदारों ने कहा, "हम तो तुम्हें खुली गुमराही में पड़ा देख रहे है।"
قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ ب۪ي ضَلَالَةٌ وَلٰكِنّ۪ي رَسُولٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ61
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! किसी गुमराही का मुझसे सम्बन्ध नहीं, बल्कि मैं सारे संसार के रब का एक रसूल हूँ। -
اُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبّ۪ي وَاَنْصَحُ لَكُمْ وَاَعْلَمُ مِنَ اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ62
"अपने रब के सन्देश पहुँचता हूँ और तुम्हारा हित चाहता हूँ, और मैं अल्लाह की ओर से वह कुछ जानता हूँ, जो तुम नहीं जानते।"
اَوَعَجِبْتُمْ اَنْ جَٓاءَكُمْ ذِكْرٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَلٰى رَجُلٍ مِنْكُمْ لِيُنْذِرَكُمْ وَلِتَتَّقُوا وَلَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ63
क्या (तुमने मुझे झूठा समझा) और तुम्हें इस पार आश्चर्य हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हीं में से एक आदमी के द्वारा तुम्हारे रब की नसीहत आई? ताकि वह तुम्हें सचेत कर दे और ताकि तुम डर रखने लगो और शायद कि तुमपर दया की जाए
فَكَذَّبُوهُ فَاَنْجَيْنَاهُ وَالَّذ۪ينَ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ وَاَغْرَقْنَا الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَاۜ اِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا عَم۪ينَ۟64
किन्तु उन्होंने झुठला दिया। अन्ततः हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ एक नौका में थे, बचा लिया और जिन लोगों ने हमारी आयतों को ग़लत समझा, उन्हें हमने डूबो दिया। निश्चय ही वे अन्धे लोग थे
وَاِلٰى عَادٍ اَخَاهُمْ هُودًاۜ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ اَفَلَا تَتَّقُونَ65
और आद की ओर उनके भाई हूद को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो, उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या (इसे सोचकर) तुम डरते नहीं?"
قَالَ الْمَلَاُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ قَوْمِه۪ٓ اِنَّا لَنَرٰيكَ ف۪ي سَفَاهَةٍ وَاِنَّا لَنَظُنُّكَ مِنَ الْكَاذِب۪ينَ66
उसकी क़ौम के इनकार करनेवाले सरदारों ने कहा, "वास्तव में, हम तो देखते है कि तुम बुद्धिहीनता में ग्रस्त हो और हम तो तुम्हें झूठा समझते है।"
قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ ب۪ي سَفَاهَةٌ وَلٰكِنّ۪ي رَسُولٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ67
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मैं बुद्धिहीनता में कदापि ग्रस्त नहीं हूँ। परन्तु मैं सारे संसार के रब का रसूल हूँ।-
اُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبّ۪ي وَاَنَا۬ لَكُمْ نَاصِحٌ اَم۪ينٌ68
"तुम्हें अपने रब के संदेश पहुँचता हूँ और मैं तुम्हारा विश्वस्त हितैषी हूँ
اَوَعَجِبْتُمْ اَنْ جَٓاءَكُمْ ذِكْرٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَلٰى رَجُلٍ مِنْكُمْ لِيُنْذِرَكُمْۜ وَاذْكُرُٓوا اِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَٓاءَ مِنْ بَعْدِ قَوْمِ نُوحٍ وَزَادَكُمْ فِي الْخَلْقِ بَصْۣطَةًۚ فَاذْكُرُٓوا اٰلَٓاءَ اللّٰهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ69
"क्या (तुमने मुझे झूठा समझा) और तुम्हें इसपर आश्चर्य हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हीं में से एक आदमी के द्वारा तुम्हारे रब की नसीहत आई, ताकि वह तुम्हें सचेत करे? और याद करो, जब उसने नूह की क़ौम के पश्चात तुम्हें उसका उत्तराधिकारी बनाया और शारीरिक दृष्टि से भी तुम्हें अधिक विशालता प्रदान की। अतः अल्लाह की सामर्थ्य के चमत्कारो को याद करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो।"
قَالُٓوا اَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اللّٰهَ وَحْدَهُ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ اٰبَٓاؤُ۬نَاۚ فَاْتِنَا بِمَا تَعِدُنَٓا اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ70
वे बोले, "क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि अकेले अल्लाह की हम बन्दगी करें और जिनको हमारे बाप-दादा पूजते रहे है, उन्हें छोड़ दें? अच्छा, तो जिसकी तुम हमें धमकी देते हो, उसे हमपर ले आओ, यदि तुम सच्चे हो।"
قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْ رِجْسٌ وَغَضَبٌۜ اَتُجَادِلُونَن۪ي ف۪ٓي اَسْمَٓاءٍ سَمَّيْتُمُوهَٓا اَنْتُمْ وَاٰبَٓاؤُ۬كُمْ مَا نَزَّلَ اللّٰهُ بِهَا مِنْ سُلْطَانٍۜ فَانْتَظِرُٓوا اِنّ۪ي مَعَكُمْ مِنَ الْمُنْتَظِر۪ينَ71
उसने कहा, "तुम पर तो तुम्हारे रब की ओर से नापाकी थोप दी गई है और प्रकोप टूट पड़ा है। क्या तुम मुझसे उन नामों के लिए झगड़ते हो जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख छोड़े है, जिनके लिए अल्लाह ने कोई प्रमाण नहीं उतारा? अच्छा, तो तुम भी प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।"
فَاَنْجَيْنَاهُ وَالَّذ۪ينَ مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِنَّا وَقَطَعْنَا دَابِرَ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَمَا كَانُوا مُؤْمِن۪ينَ۟72
फिर हमने अपनी दयालुता से उसको और जो लोग उसके साथ थे उन्हें बचा लिया और उन लोगों की जड़ काट दी, जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया था और ईमानवाले न थे
وَاِلٰى ثَمُودَ اَخَاهُمْ صَالِحًاۢ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ قَدْ جَٓاءَتْكُمْ بَيِّنَةٌ مِنْ رَبِّكُمْۜ هٰذِه۪ نَاقَةُ اللّٰهِ لَكُمْ اٰيَةً فَذَرُوهَا تَاْكُلْ ف۪ٓي اَرْضِ اللّٰهِ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُٓوءٍ فَيَاْخُذَكُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ73
और समूद की ओर उनके भाई सालेह को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। यह अल्लाह की ऊँटनी तुम्हारे लिए एक निशानी है। अतः इसे छोड़ दो कि अल्लाह की धरती में खाए। और तकलीफ़ पहुँचाने के लिए इसे हाथ न लगाना, अन्यथा तुम्हें एक दुखद यातना आ लेगी।-
وَاذْكُرُٓوا اِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَٓاءَ مِنْ بَعْدِ عَادٍ وَبَوَّاَكُمْ فِي الْاَرْضِ تَتَّخِذُونَ مِنْ سُهُولِهَا قُصُورًا وَتَنْحِتُونَ الْجِبَالَ بُيُوتًاۚ فَاذْكُرُٓوا اٰلَٓاءَ اللّٰهِ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْاَرْضِ مُفْسِد۪ينَ74
और याद करो जब अल्लाह ने आद के पश्चात तुम्हें उसका उत्तराधिकारी बनाया और धरती में तुम्हें ठिकाना प्रदान किया। तुम उसके समतल मैदानों में महल बनाते हो और पहाड़ो को काट-छाँट कर भवनों का रूप देते हो। अतः अल्लाह की सामर्थ्य के चमत्कारों को याद करो और धरती में बिगाड़ पैदा करते न फिरो।"
قَالَ الْمَلَاُ الَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُوا مِنْ قَوْمِه۪ لِلَّذ۪ينَ اسْتُضْعِفُوا لِمَنْ اٰمَنَ مِنْهُمْ اَتَعْلَمُونَ اَنَّ صَالِحًا مُرْسَلٌ مِنْ رَبِّه۪ۜ قَالُٓوا اِنَّا بِمَٓا اُرْسِلَ بِه۪ مُؤْمِنُونَ75
उसकी क़ौम के सरदार, जो बड़े बने हुए थे, उन कमज़ोर लोगों से, जो उनमें ईमान लाए थे, कहने लगे, "क्या तुम जानते हो कि सालेह अपने रब का भेजा हुआ (पैग़म्बर) है?" उन्होंने कहा, "निस्संदेह जिस चीज़ के साथ वह भेजा गया है, हम उसपर ईमान रखते है।"
قَالَ الَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُٓوا اِنَّا بِالَّذ۪ٓي اٰمَنْتُمْ بِه۪ كَافِرُونَ76
उन घमंड करनेवालों ने कहा, "जिस चीज़ पर तुम ईमान लाए हो, हम तो उसको नहीं मानते।"
فَعَقَرُوا النَّاقَةَ وَعَتَوْا عَنْ اَمْرِ رَبِّهِمْ وَقَالُوا يَا صَالِحُ ائْتِنَا بِمَا تَعِدُنَٓا اِنْ كُنْتَ مِنَ الْمُرْسَل۪ينَ77
फिर उन्होंने उस ऊँटनी की कूचें काट दीं और अपने रब के आदेश की अवहेलना की और बोले, "ऐ सालेह! हमें तू जिस चीज़ की धमकी देता है, उसे हमपर ले आ, यदि तू वास्तव में रसूलों में से है।"
فَاَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَاَصْبَحُوا ف۪ي دَارِهِمْ جَاثِم۪ينَ78
अन्ततः एक हिला मारनेवाली आपदा ने उन्हें आ लिया और वे अपने घरों में आँधे पड़े रह गए
فَتَوَلّٰى عَنْهُمْ وَقَالَ يَا قَوْمِ لَقَدْ اَبْلَغْتُكُمْ رِسَالَةَ رَبّ۪ي وَنَصَحْتُ لَكُمْ وَلٰكِنْ لَا تُحِبُّونَ النَّاصِح۪ينَ79
फिर वह यह कहता हुआ उनके यहाँ से फिरा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! मैं तो तुम्हें अपने रब का संदेश पहुँचा चुका और मैंने तुम्हारा हित चाहा। परन्तु तुम्हें अपने हितैषी पसन्द ही नहीं आते।"
وَلُوطًا اِذْ قَالَ لِقَوْمِه۪ٓ اَتَاْتُونَ الْفَاحِشَةَ مَا سَبَقَكُمْ بِهَا مِنْ اَحَدٍ مِنَ الْعَالَم۪ينَ80
और हमने लूत को भेजा। जब उसने अपनी क़ौम से कहा, "क्या तुम वह प्रत्यक्ष अश्लील कर्म करते हो, जिसे दुनिया में तुमसे पहले किसी ने नहीं किया?"
اِنَّكُمْ لَتَاْتُونَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِنْ دُونِ النِّسَٓاءِۜ بَلْ اَنْتُمْ قَوْمٌ مُسْرِفُونَ81
तुम स्त्रियों को छोड़कर मर्दों से कामेच्छा पूरी करते हो, बल्कि तुम नितान्त मर्यादाहीन लोग हो
وَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِه۪ٓ اِلَّٓا اَنْ قَالُٓوا اَخْرِجُوهُمْ مِنْ قَرْيَتِكُمْۚ اِنَّهُمْ اُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ82
उसकी क़ौम के लोगों का उत्तर इसके अतिरिक्त और कुछ न था कि वे बोले, "निकालो, उन लोगों को अपनी बस्ती से। ये ऐसे लोग है जो बड़े पाक-साफ़ है!"
فَاَنْجَيْنَاهُ وَاَهْلَهُٓ اِلَّا امْرَاَتَهُۘ كَانَتْ مِنَ الْغَابِر۪ينَ83
फिर हमने उसे और उसके लोगों को छुटकारा दिया, सिवाय उसकी स्त्री के कि वह पीछे रह जानेवालों में से थी
وَاَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ مَطَرًاۜ فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِم۪ينَ۟84
और हमने उनपर एक बरसात बरसाई, तो देखो अपराधियों का कैसा परिणाम हुआ
وَاِلٰى مَدْيَنَ اَخَاهُمْ شُعَيْبًاۜ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ قَدْ جَٓاءَتْكُمْ بَيِّنَةٌ مِنْ رَبِّكُمْ فَاَوْفُوا الْكَيْلَ وَالْم۪يزَانَ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ اَشْيَٓاءَهُمْ وَلَا تُفْسِدُوا فِي الْاَرْضِ بَعْدَ اِصْلَاحِهَاۜ ذٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَۚ85
और मदयनवालों की ओर हमने उनके भाई शुऐब को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। तो तुम नाप और तौल पूरी-पूरी करो, और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो, और धरती में उसकी सुधार के पश्चात बिगाड़ पैदा न करो। यही तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम ईमानवाले हो
وَلَا تَقْعُدُوا بِكُلِّ صِرَاطٍ تُوعِدُونَ وَتَصُدُّونَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ مَنْ اٰمَنَ بِه۪ وَتَبْغُونَهَا عِوَجًاۚ وَاذْكُرُٓوا اِذْ كُنْتُمْ قَل۪يلًا فَكَثَّرَكُمْۖ وَانْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِد۪ينَ86
"और प्रत्येक मार्ग पर इसलिए न बैठो कि धमकियाँ दो और उस व्यक्ति को अल्लाह के मार्ग से रोकने लगो जो उसपर ईमान रखता हो और न उस मार्ग को टेढ़ा करने में लग जाओ। याद करो, वह समय जब तुम थोड़े थे, फिर उसने तुम्हें अधिक कर दिया। और देखो, बिगाड़ पैदा करनेवालो का कैसा परिणाम हुआ
وَاِنْ كَانَ طَٓائِفَةٌ مِنْكُمْ اٰمَنُوا بِالَّذ۪ٓي اُرْسِلْتُ بِه۪ وَطَٓائِفَةٌ لَمْ يُؤْمِنُوا فَاصْبِرُوا حَتّٰى يَحْكُمَ اللّٰهُ بَيْنَنَاۚ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِم۪ينَ87
"और यदि तुममें एक गिरोह ऐसा है, जो उसपर ईमान लाया है, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ और एक गिरोह ऐसा है, जो उसपर ईमान लाया है, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ और एक गिरोह ईमान नहीं लाया, तो धैर्य से काम लो, यहाँ तक कि अल्लाह हमारे बीच फ़ैसला कर दे। और वह सबसे अच्छा फ़ैसला करनेवाला है।"