10. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

10. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَالَّذ۪ينَ هَادُوا وَالنَّصَارٰى وَالصَّابِـ۪ٔينَ مَنْ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُمْ اَجْرُهُمْ عِنْدَ رَبِّهِمْۖ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ62
निस्संदेह, ईमानवाले और जो यहूदी हुए और ईसाई और साबिई, जो भी अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाया और अच्छा कर्म किया तो ऐसे लोगों का उनके अपने रब के पास (अच्छा) बदला है, उनको न तो कोई भय होगा और न वे शोकाकुल होंगे -
وَاِذْ اَخَذْنَا م۪يثَاقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ الطُّورَۜ خُذُوا مَٓا اٰتَيْنَاكُمْ بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا ف۪يهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ63
और याद करो जब हमने इस हाल में कि तूर पर्वत को तुम्हारे ऊपर ऊँचा कर रखा था, तुमसे दृढ़ वचन लिया था, "जो चीज़ हमने तुम्हें दी हैं उसे मजबूती के साथ पकड़ो और जो कुछ उसमें हैं उसे याद रखो ताकि तुम बच सको।"
ثُمَّ تَوَلَّيْتُمْ مِنْ بَعْدِ ذٰلِكَۚ فَلَوْلَا فَضْلُ اللّٰهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ لَكُنْتُمْ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ64
फिर इसके पश्चात भी तुम फिर गए, तो यदि अल्लाह की कृपा और उसकी दयालुता तुम पर न होती, तो तुम घाटे में पड़ गए होते
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ الَّذ۪ينَ اعْتَدَوْا مِنْكُمْ فِي السَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِـ۪ٔينَۚ65
और तुम उन लोगों के विषय में तो जानते ही हो जिन्होंने तुममें से 'सब्त' के दिन के मामले में मर्यादा का उल्लंघन किया था, तो हमने उनसे कह दिया, "बन्दर हो जाओ, धिक्कारे और फिटकारे हुए!"
فَجَعَلْنَاهَا نَكَالًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةً لِلْمُتَّق۪ينَ66
फिर हमने इसे सामनेवालों और बाद के लोगों के लिए शिक्षा-सामग्री और डर रखनेवालों के लिए नसीहत बनाकर छोड़ा
وَاِذْ قَالَ مُوسٰى لِقَوْمِه۪ٓ اِنَّ اللّٰهَ يَاْمُرُكُمْ اَنْ تَذْبَحُوا بَقَرَةًۜ قَالُٓوا اَتَتَّخِذُنَا هُزُوًاۜ قَالَ اَعُوذُ بِاللّٰهِ اَنْ اَكُونَ مِنَ الْجَاهِل۪ينَ67
और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा, "निश्चय ही अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि एक गाय जब्ह करो।" कहने लगे, "क्या तुम हमसे परिहास करते हो?" उसने कहा, "मैं इससे अल्लाह की पनाह माँगता हूँ कि जाहिल बनूँ।"
قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّنْ لَنَا مَا هِيَۜ قَالَ اِنَّهُ يَقُولُ اِنَّهَا بَقَرَةٌ لَا فَارِضٌ وَلَا بِكْرٌۜ عَوَانٌ بَيْنَ ذٰلِكَۜ فَافْعَلُوا مَا تُؤْمَرُونَ68
बोले, "हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हम पर स्पष्टा कर दे कि वह गाय कौन-सी है?" उसने कहा, "वह कहता है कि वह ऐसी गाय है जो न बूढ़ी है, न बछिया, इनके बीच की रास है; तो जो तुम्हें हुक्म दिया जा रहा है, करो।"
قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّنْ لَنَا مَا لَوْنُهَاۜ قَالَ اِنَّهُ يَقُولُ اِنَّهَا بَقَرَةٌ صَفْرَٓاءُۙ فَاقِعٌ لَوْنُهَا تَسُرُّ النَّاظِر۪ينَ69
कहने लगे, "हमारे लिए अपने रब से निवेदन करो कि वह हमें बता दे कि उसका रंग कैसा है?" कहा, "वह कहता है कि वह गाय सुनहरी है, गहरे चटकीले रंग की कि देखनेवालों को प्रसन्न कर देती है।"