101. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
4 · अन-निसा
اَلَّذ۪ينَ يَتَرَبَّصُونَ بِكُمْۚ فَاِنْ كَانَ لَكُمْ فَتْحٌ مِنَ اللّٰهِ قَالُٓوا اَلَمْ نَكُنْ مَعَكُمْۘ وَاِنْ كَانَ لِلْكَافِر۪ينَ نَص۪يبٌۙ قَالُٓوا اَلَمْ نَسْتَحْوِذْ عَلَيْكُمْ وَنَمْنَعْكُمْ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَۜ فَاللّٰهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَلَنْ يَجْعَلَ اللّٰهُ لِلْكَافِر۪ينَ عَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ سَب۪يلًا۟141
जो तुम्हारे मामले में प्रतीक्षा करते है, यदि अल्लाह की ओर से तुम्हारी विजय़ हुई तो कहते है, "क्या हम तुम्हार साथ न थे?" और यदि विधर्मियों के हाथ कुछ लगा तो कहते है, "क्या हमने तुम्हें घेर नहीं लिया था और ईमानवालों से बचाया नहीं?" अतः अल्लाह क़ियामत के दिन तुम्हारे बीच फ़ैसला कर देगा, और अल्लाह विधर्मियों को ईमानवालों के मुक़ाबले में कोई राह नहीं देगा
اِنَّ الْمُنَافِق۪ينَ يُخَادِعُونَ اللّٰهَ وَهُوَ خَادِعُهُمْۚ وَاِذَا قَامُٓوا اِلَى الصَّلٰوةِ قَامُوا كُسَالٰىۙ يُرَٓاؤُ۫نَ النَّاسَ وَلَا يَذْكُرُونَ اللّٰهَ اِلَّا قَل۪يلًاۘ142
कपटाचारी अल्लाह के साथ धोखबाज़ी कर रहे है, हालाँकि उसी ने उन्हें धोखे में डाल रखा है। जब वे नमाज़ के लिए खड़े होते है तो कसमसाते हुए, लोगों को दिखाने के लिए खड़े होते है। और अल्लाह को थोड़े ही याद करते है
مُذَبْذَب۪ينَ بَيْنَ ذٰلِكَۗ لَٓا اِلٰى هٰٓؤُ۬لَٓاءِ وَلَٓا اِلٰى هٰٓؤُ۬لَٓاءِۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَلَنْ تَجِدَ لَهُ سَب۪يلًا143
इसी के बीच डाँवाडोल हो रहे है, न इन (ईमानवालों) की तरफ़ के है, न इन (इनकार करनेवालों) की तरफ़ के। जिसे अल्लाह भटका दे, उसके लिए तो तुम कोई राह नहीं पा सकते
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْكَافِر۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُونِ الْمُؤْمِن۪ينَۜ اَتُر۪يدُونَ اَنْ تَجْعَلُوا لِلّٰهِ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًا مُب۪ينًا144
ऐ ईमान लानेवालो! ईमानवालों से हटकर इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। क्या तुम चाहते हो कि अल्लाह का स्पष्टा तर्क अपने विरुद्ध जुटाओ?
اِنَّ الْمُنَافِق۪ينَ فِي الدَّرْكِ الْاَسْفَلِ مِنَ النَّارِۚ وَلَنْ تَجِدَ لَهُمْ نَص۪يرًاۙ145
निस्संदेह कपटाचारी आग (जहन्नम) के सबसे निचले खंड में होंगे, और तुम कदापि उनका कोई सहायक न पाओगे
اِلَّا الَّذ۪ينَ تَابُوا وَاَصْلَحُوا وَاعْتَصَمُوا بِاللّٰهِ وَاَخْلَصُوا د۪ينَهُمْ لِلّٰهِ فَاُو۬لٰٓئِكَ مَعَ الْمُؤْمِن۪ينَۜ وَسَوْفَ يُؤْتِ اللّٰهُ الْمُؤْمِن۪ينَ اَجْرًا عَظ۪يمًا146
उन लोगों की बात और है जिन्होंने तौबा कर ली और अपने को सुधार लिया और अल्लाह को मज़बूती से पकड़ लिया और अपने दीन (धर्म) में अल्लाह ही के हो रहे। ऐसे लोग ईमानवालों के साथ है और अल्लाह ईमानवालों को शीघ्र ही बड़ा प्रतिदान प्रदान करेगा
مَا يَفْعَلُ اللّٰهُ بِعَذَابِكُمْ اِنْ شَكَرْتُمْ وَاٰمَنْتُمْۜ وَكَانَ اللّٰهُ شَاكِرًا عَل۪يمًا147
अल्लाह को तुम्हें यातना देकर क्या करना है, यदि तुम कृतज्ञता दिखलाओ और ईमान लाओ? अल्लाह गुणग्राहक, सब कुछ जाननेवाला है