103. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

103. पृष्ठ
4 · अन-निसा
فَبِمَا نَقْضِهِمْ م۪يثَاقَهُمْ وَكُفْرِهِمْ بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَقَتْلِهِمُ الْاَنْبِيَٓاءَ بِغَيْرِ حَقٍّ وَقَوْلِهِمْ قُلُوبُنَا غُلْفٌۜ بَلْ طَبَعَ اللّٰهُ عَلَيْهَا بِكُفْرِهِمْ فَلَا يُؤْمِنُونَ اِلَّا قَل۪يلًاۖ155
फिर उनके अपने वचन भंग करने और अल्लाह की आयतों का इनकार करने के कारण और नबियों को नाहक़ क़त्ल करने और उनके यह कहने के कारण कि "हमारे हृदय आवरणों में सुरक्षित है" - नहीं, बल्कि वास्तव में उनके इनकार के कारण अल्लाह ने उनके दिलों पर ठप्पा लगा दिया है। तो ये ईमान थोड़े ही लाते है
وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلٰى مَرْيَمَ بُهْتَانًا عَظ۪يمًاۙ156
और उनके इनकार के कारण और मरयम के ख़िलाफ ऐसी बात करने पर जो एक बड़ा लांछन था -
وَقَوْلِهِمْ اِنَّا قَتَلْنَا الْمَس۪يحَ ع۪يسَى ابْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ اللّٰهِۚ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلٰكِنْ شُبِّهَ لَهُمْۜ وَاِنَّ الَّذ۪ينَ اخْتَلَفُوا ف۪يهِ لَف۪ي شَكٍّ مِنْهُۜ مَا لَهُمْ بِه۪ مِنْ عِلْمٍ اِلَّا اتِّبَاعَ الظَّنِّۚ وَمَا قَتَلُوهُ يَق۪ينًاۙ157
और उनके इस कथन के कारण कि हमने मरयम के बेटे ईसा मसीह, अल्लाह के रसूल, को क़त्ल कर डाला - हालाँकि न तो इन्होंने उसे क़त्ल किया और न उसे सूली पर चढाया, बल्कि मामला उनके लिए संदिग्ध हो गया। और जो लोग इसमें विभेद कर रहे है, निश्चय ही वे इस मामले में सन्देह में थे। अटकल पर चलने के अतिरिक्त उनके पास कोई ज्ञान न था। निश्चय ही उन्होंने उसे (ईसा को) क़त्ल नहीं किया,
بَلْ رَفَعَهُ اللّٰهُ اِلَيْهِۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَز۪يزًا حَك۪يمًا158
बल्कि उसे अल्लाह ने अपनी ओर उठा लिया। और अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَاِنْ مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ اِلَّا لَيُؤْمِنَنَّ بِه۪ قَبْلَ مَوْتِه۪ۚ وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَه۪يدًاۚ159
किताबवालों में से कोई ऐसा न होगा, जो उसकी मृत्यु से पहले उसपर ईमान न ले आए। वह क़ियामत के दिन उनपर गवाह होगा
فَبِظُلْمٍ مِنَ الَّذ۪ينَ هَادُوا حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ طَيِّبَاتٍ اُحِلَّتْ لَهُمْ وَبِصَدِّهِمْ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ كَث۪يرًاۙ160
सारांश यह कि यहूदियों के अत्याचार के कारण हमने बहुत-सी अच्छी पाक चीज़े उनपर हराम कर दी, जो उनके लिए हलाल थी और उनके प्रायः अल्लाह के मार्ग से रोकने के कारण;
وَاَخْذِهِمُ الرِّبٰوا وَقَدْ نُهُوا عَنْهُ وَاَكْلِهِمْ اَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِۜ وَاَعْتَدْنَا لِلْكَافِر۪ينَ مِنْهُمْ عَذَابًا اَل۪يمًا161
और उनके ब्याज लेने के कारण, जबकि उन्हें इससे रोका गया था। और उनके अवैध रूप से लोगों के माल खाने के कारण ऐसा किया गया और हमने उनमें से जिन लोगों ने इनकार किया उनके लिए दुखद यातना तैयार कर रखी है
لٰكِنِ الرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ مِنْهُمْ وَالْمُؤْمِنُونَ يُؤْمِنُونَ بِمَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكَ وَمَٓا اُنْزِلَ مِنْ قَبْلِكَ وَالْمُق۪يم۪ينَ الصَّلٰوةَ وَالْمُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَالْمُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۜ اُو۬لٰٓئِكَ سَنُؤْت۪يهِمْ اَجْرًا عَظ۪يمًا۟162
परन्तु उनमें से जो लोग ज्ञान में पक्के है और ईमानवाले हैं, वे उस पर ईमान रखते है जो तुम्हारी ओर उतारा गया है और जो तुमसे पहले उतारा गया था, और जो विशेष रूप से नमाज़ क़ायम करते है, ज़कात देते और अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखते है। यही लोग है जिन्हें हम शीघ्र ही बड़ी प्रतिदान प्रदान करेंगे