104. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

104. पृष्ठ
4 · अन-निसा
اِنَّٓا اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ كَمَٓا اَوْحَيْنَٓا اِلٰى نُوحٍ وَالنَّبِيّ۪نَ مِنْ بَعْدِه۪ۚ وَاَوْحَيْنَٓا اِلٰٓى اِبْرٰه۪يمَ وَاِسْمٰع۪يلَ وَاِسْحٰقَ وَيَعْقُوبَ وَالْاَسْبَاطِ وَع۪يسٰى وَاَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهٰرُونَ وَسُلَيْمٰنَۚ وَاٰتَيْنَا دَاوُ۫دَ زَبُورًاۚ163
हमने तुम्हारी ओर उसी प्रकार वह्यड की है जिस प्रकार नूह और उसके बाद के नबियों की ओर वह्यु की। और हमने इबराहीम, इसमाईल, इसहाक़ और याक़ूब और उसकी सन्तान और ईसा और अय्यूब और यूनुस और हारून और सुलैमान की ओर भी वह्यक की। और हमने दाउद को ज़बूर प्रदान किया
وَرُسُلًا قَدْ قَصَصْنَاهُمْ عَلَيْكَ مِنْ قَبْلُ وَرُسُلًا لَمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَۜ وَكَلَّمَ اللّٰهُ مُوسٰى تَكْل۪يمًاۚ164
और कितने ही रसूल हुए जिनका वृतान्त पहले हम तुमसे बयान कर चुके है और कितने ही ऐसे रसूल हुए जिनका वृतान्त हमने तुमसे बयान नहीं किया। और मूसा से अल्लाह ने बातचीत की, जिस प्रकार बातचीत की जाती है
رُسُلًا مُبَشِّر۪ينَ وَمُنْذِر۪ينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى اللّٰهِ حُجَّةٌ بَعْدَ الرُّسُلِۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَز۪يزًا حَك۪يمًا165
रसूल शुभ समाचार देनेवाले और सचेत करनेवाले बनाकर भेजे गए है, ताकि रसूलों के पश्चात लोगों के पास अल्लाह के मुक़ाबले में (अपने निर्दोष होने का) कोई तर्क न रहे। अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
لٰكِنِ اللّٰهُ يَشْهَدُ بِمَٓا اَنْزَلَ اِلَيْكَ اَنْزَلَهُ بِعِلْمِه۪ۚ وَالْمَلٰٓئِكَةُ يَشْهَدُونَۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ شَه۪يدًا166
परन्तु अल्लाह गवाही देता है कि उसके द्वारा जो उसने तुम्हारी ओर उतारा है कि उसे उसने अपने ज्ञान के साथ उतारा है और फ़रिश्ते भी गवाही देते है, यद्यपि अल्लाह का गवाह होना ही काफ़ी है
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ قَدْ ضَلُّوا ضَلَالًا بَع۪يدًا167
निश्चय ही, जिन लोगों ने इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका, वे भटककर बहुत दूर जा पड़े
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَظَلَمُوا لَمْ يَكُنِ اللّٰهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَر۪يقًاۙ168
जिन लोगों ने इनकार किया और ज़ुल्म पर उतर आए, उन्हें अल्लाह कदापि क्षमा नहीं करेगा और न उन्हें कोई मार्ग दिखाएगा
اِلَّا طَر۪يقَ جَهَنَّمَ خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۜ وَكَانَ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرًا169
सिवाय जहन्नम के मार्ग के, जिसमें वे सदैव पड़े रहेंगे। और यह अल्लाह के लिए बहुत-ही सहज बात है
يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَٓاءَكُمُ الرَّسُولُ بِالْحَقِّ مِنْ رَبِّكُمْ فَاٰمِنُوا خَيْرًا لَكُمْۜ وَاِنْ تَكْفُرُوا فَاِنَّ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَل۪يمًا حَك۪يمًا170
ऐ लोगों! रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से सत्य लेकर आ गया है। अतः तुम उस भलाई को मानो जो तुम्हारे लिए जुटाई गई। और यदि तुम इनकार करते हो तो आकाशों और धरती में जो कुछ है, वह अल्लाह ही का है। और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है