106. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

106. पृष्ठ
4 · अन-निसा
يَسْتَفْتُونَكَۜ قُلِ اللّٰهُ يُفْت۪يكُمْ فِي الْكَلَالَةِۜ اِنِ امْرُؤٌا هَلَكَ لَيْسَ لَهُ وَلَدٌ وَلَهُٓ اُخْتٌ فَلَهَا نِصْفُ مَا تَرَكَۚ وَهُوَ يَرِثُهَٓا اِنْ لَمْ يَكُنْ لَهَا وَلَدٌۜ فَاِنْ كَانَتَا اثْنَتَيْنِ فَلَهُمَا الثُّلُثَانِ مِمَّا تَرَكَۜ وَاِنْ كَانُٓوا اِخْوَةً رِجَالًا وَنِسَٓاءً فَلِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ الْاُنْثَيَيْنِۜ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمْ اَنْ تَضِلُّواۜ وَاللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ176
वे तुमसे आदेश मालूम करना चाहते है। कह दो, "अल्लाह तुम्हें ऐसे व्यक्ति के विषय में, जिसका कोई वारिस न हो, आदेश देता है - यदि किसी पुरुष की मृत्यु हो जाए जिसकी कोई सन्तान न हो, परन्तु उसकी एक बहन हो, तो जो कुछ उसने छोड़ा है उसका आधा हिस्सा उस बहन का होगा। और भाई बहन का वारिस होगा, यदि उस (बहन) की कोई सन्तान न हो। और यदि (वारिस) दो बहनें हो, तो जो कुछ उसने छोड़ा है, उसमें से उनके लिए दो-तिहाई होगा। और यदि कई भाई-बहन (वारिस) हो तो एक पुरुष को हिस्सा दो स्त्रियों के बराबर होगा।" अल्लाह तुम्हारे लिए आदेशों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम न भटको। और अल्लाह को हर चीज का पूरा ज्ञान है
5 · अल-माइदा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَوْفُوا بِالْعُقُودِۜ اُحِلَّتْ لَكُمْ بَه۪يمَةُ الْاَنْعَامِ اِلَّا مَا يُتْلٰى عَلَيْكُمْ غَيْرَ مُحِلِّي الصَّيْدِ وَاَنْتُمْ حُرُمٌۜ اِنَّ اللّٰهَ يَحْكُمُ مَا يُر۪يدُ1
ऐ ईमान लानेवालो! प्रतिबन्धों (प्रतिज्ञाओं, समझौतों आदि) का पूर्ण रूप से पालन करो। तुम्हारे लिए चौपायों की जाति के जानवर हलाल हैं सिवाय उनके जो तुम्हें बताए जा रहें हैं; लेकिन जब तुम इहराम की दशा में हो तो शिकार को हलाल न समझना। निस्संदेह अल्लाह जो चाहते है, आदेश देता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تُحِلُّوا شَعَٓائِرَ اللّٰهِ وَلَا الشَّهْرَ الْحَرَامَ وَلَا الْهَدْيَ وَلَا الْقَلَٓائِدَ وَلَٓا آٰمّ۪ينَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِنْ رَبِّهِمْ وَرِضْوَانًاۜ وَاِذَا حَلَلْتُمْ فَاصْطَادُواۜ وَلَا يَجْرِمَنَّكُمْ شَنَاٰنُ قَوْمٍ اَنْ صَدُّوكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ اَنْ تَعْتَدُواۢ وَتَعَاوَنُوا عَلَى الْبِرِّ وَالتَّقْوٰىۖ وَلَا تَعَاوَنُوا عَلَى الْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعِقَابِ2
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह की निशानियों का अनादर न करो; न आदर के महीनों का, न क़ुरबानी के जानवरों का और न जानवरों का जिनका गरदनों में पट्टे पड़े हो और न उन लोगों का जो अपने रब के अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता की चाह में प्रतिष्ठित गृह (काबा) को जाते हो। और जब इहराम की दशा से बाहर हो जाओ तो शिकार करो। और ऐसा न हो कि एक गिरोह की शत्रुता, जिसने तुम्हारे लिए प्रतिष्ठित घर का रास्ता बन्द कर दिया था, तुम्हें इस बात पर उभार दे कि तुम ज़्यादती करने लगो। हक़ अदा करने और ईश-भय के काम में तुम एक-दूसरे का सहयोग करो और हक़ मारने और ज़्यादती के काम में एक-दूसरे का सहयोग न करो। अल्लाह का डर रखो; निश्चय ही अल्लाह बड़ा कठोर दंड देनेवाला है