107. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
5 · अल-माइदा
حُرِّمَتْ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةُ وَالدَّمُ وَلَحْمُ الْخِنْز۪يرِ وَمَٓا اُهِلَّ لِغَيْرِ اللّٰهِ بِه۪ وَالْمُنْخَنِقَةُ وَالْمَوْقُوذَةُ وَالْمُتَرَدِّيَةُ وَالنَّط۪يحَةُ وَمَٓا اَكَلَ السَّبُعُ اِلَّا مَا ذَكَّيْتُمْ وَمَا ذُبِحَ عَلَى النُّصُبِ وَاَنْ تَسْتَقْسِمُوا بِالْاَزْلَامِۜ ذٰلِكُمْ فِسْقٌۜ اَلْيَوْمَ يَئِسَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ د۪ينِكُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْنِۜ اَلْيَوْمَ اَكْمَلْتُ لَكُمْ د۪ينَكُمْ وَاَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَت۪ي وَرَض۪يتُ لَكُمُ الْاِسْلَامَ د۪ينًاۜ فَمَنِ اضْطُرَّ ف۪ي مَخْمَصَةٍ غَيْرَ مُتَجَانِفٍ لِاِثْمٍۙ فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ3
तुम्हारे लिए हराम हुआ मुर्दार रक्त, सूअर का मांस और वह जानवर जिसपर अल्लाह के अतिरिक्त किसी और का नाम लिया गया हो और वह जो घुटकर या चोट खाकर या ऊँचाई से गिरकर या सींग लगने से मरा हो या जिसे किसी हिंसक पशु ने फाड़ खाया हो - सिवाय उसके जिसे तुमने ज़बह कर लिया हो - और वह किसी थान पर ज़बह कियी गया हो। और यह भी (तुम्हारे लिए हराम हैं) कि तीरो के द्वारा किस्मत मालूम करो। यह आज्ञा का उल्लंघन है - आज इनकार करनेवाले तुम्हारे धर्म की ओर से निराश हो चुके हैं तो तुम उनसे न डरो, बल्कि मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे धर्म को पूर्ण कर दिया और तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दी और मैंने तुम्हारे धर्म के रूप में इस्लाम को पसन्द किया - तो जो कोई भूख से विवश हो जाए, परन्तु गुनाह की ओर उसका झुकाव न हो, तो निश्चय ही अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है
يَسْـَٔلُونَكَ مَاذَٓا اُحِلَّ لَهُمْۜ قُلْ اُحِلَّ لَكُمُ الطَّيِّبَاتُۙ وَمَا عَلَّمْتُمْ مِنَ الْجَوَارِحِ مُكَلِّب۪ينَ تُعَلِّمُونَهُنَّ مِمَّا عَلَّمَكُمُ اللّٰهُۘ فَكُلُوا مِمَّٓا اَمْسَكْنَ عَلَيْكُمْ وَاذْكُرُوا اسْمَ اللّٰهِ عَلَيْهِۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ سَر۪يعُ الْحِسَابِ4
वे तुमसे पूछते है कि "उनके लिए क्या हलाल है?" कह दो, "तुम्हारे लिए सारी अच्छी स्वच्छ चीज़ें हलाल है और जिन शिकारी जानवरों को तुमने सधे हुए शिकारी जानवर के रूप में सधा रखा हो - जिनको जैस अल्लाह ने तुम्हें सिखाया हैं, सिखाते हो - वे जिस शिकार को तुम्हारे लिए पकड़े रखे, उसको खाओ और उसपर अल्लाह का नाम लो। और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह जल्द हिसाब लेनेवाला है।"
اَلْيَوْمَ اُحِلَّ لَكُمُ الطَّيِّبَاتُۜ وَطَعَامُ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ حِلٌّ لَكُمْۖ وَطَعَامُكُمْ حِلٌّ لَهُمْۘ وَالْمُحْصَنَاتُ مِنَ الْمُؤْمِنَاتِ وَالْمُحْصَنَاتُ مِنَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكُمْ اِذَٓا اٰتَيْتُمُوهُنَّ اُجُورَهُنَّ مُحْصِن۪ينَ غَيْرَ مُسَافِح۪ينَ وَلَا مُتَّخِذ۪ٓي اَخْدَانٍۜ وَمَنْ يَكْفُرْ بِالْا۪يمَانِ فَقَدْ حَبِطَ عَمَلُهُۘ وَهُوَ فِي الْاٰخِرَةِ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ۟5
आज तुम्हारे लिए अच्छी स्वच्छ चीज़ें हलाल कर दी गई और जिन्हें किताब दी गई उनका भोजन भी तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा भोजन उनके लिए हलाल है और शरीफ़ और स्वतंत्र ईमानवाली स्त्रियाँ भी जो तुमसे पहले के किताबवालों में से हो, जबकि तुम उनका हक़ (मेहर) देकर उन्हें निकाह में लाओ। न तो यह काम स्वछन्द कामतृप्ति के लिए हो और न चोरी-छिपे याराना करने को। और जिस किसी ने ईमान से इनकार किया, उसका सारा किया-धरा अकारथ गया और वह आख़िरत में भी घाटे में रहेगा