112. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

112. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
قَالُوا يَا مُوسٰٓى اِنَّا لَنْ نَدْخُلَهَٓا اَبَدًا مَا دَامُوا ف۪يهَا فَاذْهَبْ اَنْتَ وَرَبُّكَ فَقَاتِلَٓا اِنَّا هٰهُنَا قَاعِدُونَ24
उन्होंने कहा, "ऐ मूसा! जब तक वे लोग वहाँ है, हम तो कदापि नहीं जाएँगे। ऐसा ही है तो जाओ तुम और तुम्हारा रब, और दोनों लड़ो। हम तो यहीं बैठे रहेंगे।"
قَالَ رَبِّ اِنّ۪ي لَٓا اَمْلِكُ اِلَّا نَفْس۪ي وَاَخ۪ي فَافْرُقْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ الْقَوْمِ الْفَاسِق۪ينَ25
उसने कहा, "मेरे रब! मेरा स्वयं अपने और अपने भाई के अतिरिक्त किसी पर अधिकार नहीं है। अतः तू हमारे और इन अवज्ञाकारी लोगों के बीच अलगाव पैदा कर दे।"
قَالَ فَاِنَّهَا مُحَرَّمَةٌ عَلَيْهِمْ اَرْبَع۪ينَ سَنَةًۚ يَت۪يهُونَ فِي الْاَرْضِ فَلَا تَاْسَ عَلَى الْقَوْمِ الْفَاسِق۪ينَ۟26
कहा, "अच्छा तो अब यह भूमि चालीस वर्ष कर इनके लिए वर्जित है। ये धरती में मारे-मारे फिरेंगे तो तुम इन अवज्ञाकारी लोगों के प्रति शोक न करो"
وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَاَ ابْنَيْ اٰدَمَ بِالْحَقِّۢ اِذْ قَرَّبَا قُرْبَانًا فَتُقُبِّلَ مِنْ اَحَدِهِمَا وَلَمْ يُتَقَبَّلْ مِنَ الْاٰخَرِۜ قَالَ لَاَقْتُلَنَّكَۜ قَالَ اِنَّمَا يَتَقَبَّلُ اللّٰهُ مِنَ الْمُتَّق۪ينَ27
और इन्हें आदम के दो बेटों का सच्चा वृतान्त सुना दो। जब दोनों ने क़ुरबानी की, तो उनमें से एक की क़ुरबानी स्वीकृत हुई और दूसरे की स्वीकृत न हुई। उसने कहा, "मै तुझे अवश्य मार डालूँगा।" दूसरे न कहा, "अल्लाह तो उन्हीं की (क़ुरबानी) स्वीकृत करता है, जो डर रखनेवाले है।
لَئِنْ بَسَطْتَ اِلَيَّ يَدَكَ لِتَقْتُلَن۪ي مَٓا اَنَا۬ بِبَاسِطٍ يَدِيَ اِلَيْكَ لِاَقْتُلَكَۚ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اللّٰهَ رَبَّ الْعَالَم۪ينَ28
"यदि तू मेरी हत्या करने के लिए मेरी ओर हाथ बढ़ाएगा तो मैं तेरी हत्या करने के लिए तेरी ओर अपना हाथ नहीं बढ़ाऊँगा। मैं तो अल्लाह से डरता हूँ, जो सारे संसार का रब है
اِنّ۪ٓي اُر۪يدُ اَنْ تَبُٓواَ بِاِثْم۪ي وَاِثْمِكَ فَتَكُونَ مِنْ اَصْحَابِ النَّارِۚ وَذٰلِكَ جَزٰٓؤُا الظَّالِم۪ينَۚ29
"मैं तो चाहता हूँ कि मेरा गुनाह और अपना गुनाह तू ही अपने सिर ले ले, फिर आग (जहन्नम) में पड़नेवालों में से एक हो जाए, और वही अत्याचारियों का बदला है।"
فَطَوَّعَتْ لَهُ نَفْسُهُ قَتْلَ اَخ۪يهِ فَقَتَلَهُ فَاَصْبَحَ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ30
अन्ततः उसके जी ने उस अपने भाई की हत्या के लिए उद्यत कर दिया, तो उसने उसकी हत्या कर डाली और घाटे में पड़ गया
فَبَعَثَ اللّٰهُ غُرَابًا يَبْحَثُ فِي الْاَرْضِ لِيُرِيَهُ كَيْفَ يُوَار۪ي سَوْاَةَ اَخ۪يهِۜ قَالَ يَا وَيْلَتٰٓى اَعَجَزْتُ اَنْ اَكُونَ مِثْلَ هٰذَا الْغُرَابِ فَاُوَارِيَ سَوْاَةَ اَخ۪يۚ فَاَصْبَحَ مِنَ النَّادِم۪ينَۚۛ31
तब अल्लाह ने एक कौआ भेजा जो भूमि कुरेदने लगा, ताकि उसे दिखा दे कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। कहने लगा, "अफ़सोस मुझ पर! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई का शव छिपा देता?" फिर वह लज्जित हुआ