113. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

113. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
مِنْ اَجْلِ ذٰلِكَۚۛ كَتَبْنَا عَلٰى بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ اَنَّهُ مَنْ قَتَلَ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ اَوْ فَسَادٍ فِي الْاَرْضِ فَكَاَنَّمَا قَتَلَ النَّاسَ جَم۪يعًاۜ وَمَنْ اَحْيَاهَا فَكَاَنَّمَٓا اَحْيَا النَّاسَ جَم۪يعًاۜ وَلَقَدْ جَٓاءَتْهُمْ رُسُلُنَا بِالْبَيِّنَاتِۘ ثُمَّ اِنَّ كَث۪يرًا مِنْهُمْ بَعْدَ ذٰلِكَ فِي الْاَرْضِ لَمُسْرِفُونَ32
इसी कारण हमने इसराईल का सन्तान के लिए लिख दिया था कि जिसने किसी व्यक्ति को किसी के ख़ून का बदला लेने या धरती में फ़साद फैलाने के अतिरिक्त किसी और कारण से मार डाला तो मानो उसने सारे ही इनसानों की हत्या कर डाली। और जिसने उसे जीवन प्रदान किया, उसने मानो सारे इनसानों को जीवन दान किया। उसने पास हमारे रसूल स्पष्टि प्रमाण ला चुके हैं, फिर भी उनमें बहुत-से लोग धरती में ज़्यादतियाँ करनेवाले ही हैं
اِنَّمَا جَزٰٓؤُا الَّذ۪ينَ يُحَارِبُونَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ وَيَسْعَوْنَ فِي الْاَرْضِ فَسَادًا اَنْ يُقَتَّلُٓوا اَوْ يُصَلَّبُٓوا اَوْ تُقَطَّعَ اَيْد۪يهِمْ وَاَرْجُلُهُمْ مِنْ خِلَافٍ اَوْ يُنْفَوْا مِنَ الْاَرْضِۜ ذٰلِكَ لَهُمْ خِزْيٌ فِي الدُّنْيَا وَلَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ عَذَابٌ عَظ۪يمٌۙ33
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते है और धरती के लिए बिगाड़ पैदा करने के लिए दौड़-धूप करते है, उनका बदला तो बस यही है कि बुरी तरह से क़त्ल किए जाए या सूली पर चढ़ाए जाएँ या उनके हाथ-पाँव विपरीत दिशाओं में काट डाले जाएँ या उन्हें देश से निष्कासित कर दिया जाए। यह अपमान और तिरस्कार उनके लिए दुनिया में है और आख़िरत में उनके लिए बड़ी यातना है
اِلَّا الَّذ۪ينَ تَابُوا مِنْ قَبْلِ اَنْ تَقْدِرُوا عَلَيْهِمْۚ فَاعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ۟34
किन्तु जो लोग, इससे पहले कि तुम्हें उनपर अधिकार प्राप्त हो, पलट आएँ (अर्थात तौबा कर लें) तो ऐसी दशा में तुम्हें मालूम होना चाहिए कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ وَابْتَغُٓوا اِلَيْهِ الْوَس۪يلَةَ وَجَاهِدُوا ف۪ي سَب۪يلِه۪ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ35
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो और उसका सामीप्य प्राप्त करो और उसके मार्ग में जी-तोड़ संघर्ष करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوْ اَنَّ لَهُمْ مَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لِيَفْتَدُوا بِه۪ مِنْ عَذَابِ يَوْمِ الْقِيٰمَةِ مَا تُقُبِّلَ مِنْهُمْۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ36
जिन लोगों ने इनकार किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो सारी धरती में है और उतना ही उसके साथ भी हो कि वह उसे देकर क़ियामत के दिन की यातना से बच जाएँ; तब भी उनकी ओर से यह सब दी जानेवाली वस्तुएँ स्वीकार न की जाएँगी। उनके लिए दुखद यातना ही है