114. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
5 · अल-माइदा
يُر۪يدُونَ اَنْ يَخْرُجُوا مِنَ النَّارِ وَمَا هُمْ بِخَارِج۪ينَ مِنْهَاۘ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُق۪يمٌ37
वे चाहेंगे कि आग (जहन्नम) से निकल जाएँ, परन्तु वे उससे न निकल सकेंगे। उनके लिए चिरस्थायी यातना है
وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُٓوا اَيْدِيَهُمَا جَزَٓاءً بِمَا كَسَبَا نَكَالًا مِنَ اللّٰهِۜ وَاللّٰهُ عَز۪يزٌ حَك۪يمٌ38
और चोर चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों के हाथ काट दो। यह उनकी कमाई का बदला है और अल्लाह की ओर से शिक्षाप्रद दंड। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
فَمَنْ تَابَ مِنْ بَعْدِ ظُلْمِه۪ وَاَصْلَحَ فَاِنَّ اللّٰهَ يَتُوبُ عَلَيْهِۜ اِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ39
फिर जो व्यक्ति अत्याचार करने के बाद पलट आए और अपने को सुधार ले, तो निश्चय ही वह अल्लाह की कृपा का पात्र होगा। निस्संदेह, अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
اَلَمْ تَعْلَمْ اَنَّ اللّٰهَ لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ يُعَذِّبُ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَغْفِرُ لِمَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ40
क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह ही आकाशों और धरती के राज्य का अधिकारी है? वह जिसे चाहे यातना दे और जिसे चाहे क्षमा कर दे। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
يَٓا اَيُّهَا الرَّسُولُ لَا يَحْزُنْكَ الَّذ۪ينَ يُسَارِعُونَ فِي الْكُفْرِ مِنَ الَّذ۪ينَ قَالُٓوا اٰمَنَّا بِاَفْوَاهِهِمْ وَلَمْ تُؤْمِنْ قُلُوبُهُمْۚ وَمِنَ الَّذ۪ينَ هَادُوا سَمَّاعُونَ لِلْكَذِبِ سَمَّاعُونَ لِقَوْمٍ اٰخَر۪ينَۙ لَمْ يَاْتُوكَۜ يُحَرِّفُونَ الْكَلِمَ مِنْ بَعْدِ مَوَاضِعِه۪ۚ يَقُولُونَ اِنْ اُو۫ت۪يتُمْ هٰذَا فَخُذُوهُ وَاِنْ لَمْ تُؤْتَوْهُ فَاحْذَرُواۜ وَمَنْ يُرِدِ اللّٰهُ فِتْنَتَهُ فَلَنْ تَمْلِكَ لَهُ مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔاۜ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ لَمْ يُرِدِ اللّٰهُ اَنْ يُطَهِّرَ قُلُوبَهُمْۜ لَهُمْ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ وَلَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ عَذَابٌ عَظ۪يمٌ41
ऐ रसूल! जो लोग अधर्म के मार्ग में दौड़ते है, उनके कारण तुम दुखी न होना; वे जिन्होंने अपने मुँह से कहा कि "हम ईमान ले आए," किन्तु उनके दिल ईमान नहीं लाए; और वे जो यहूदी हैं, वे झूठ के लिए कान लगाते हैं और उन दूसरे लोगों की भली-भाँति सुनते है, जो तुम्हारे पास नहीं आए, शब्दों को उनका स्थान निश्चित होने के बाद भी उनके स्थान से हटा देते है। कहते है, "यदि तुम्हें यह (आदेश) मिले, तो इसे स्वीकार करना और यदि न मिले तो बचना।" जिसे अल्लाह ही आपदा में डालना चाहे उसके लिए अल्लाह के यहाँ तुम्हारी कुछ भी नहीं चल सकती। ये वही लोग है जिनके दिलों को अल्लाह ने स्वच्छ करना नहीं चाहा। उनके लिए संसार में भी अपमान और तिरस्कार है और आख़िरत में भी बड़ी यातना है