116. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

116. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
وَقَفَّيْنَا عَلٰٓى اٰثَارِهِمْ بِع۪يسَى ابْنِ مَرْيَمَ مُصَدِّقًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ التَّوْرٰيةِۖ وَاٰتَيْنَاهُ الْاِنْج۪يلَ ف۪يهِ هُدًى وَنُورٌۙ وَمُصَدِّقًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ التَّوْرٰيةِ وَهُدًى وَمَوْعِظَةً لِلْمُتَّق۪ينَ46
और उनके पीछ उन्हीं के पद-चिन्हों पर हमने मरयम के बेटे ईसा को भेजा जो पहले से उसके सामने मौजूद किताब 'तौरात' की पुष्टि करनेवाला था। और हमने उसे इनजील प्रदान की, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश था। और वह अपनी पूर्ववर्ती किताब तौरात की पुष्टि करनेवाली थी, और वह डर रखनेवालों के लिए मार्गदर्शन और नसीहत थी
وَلْيَحْكُمْ اَهْلُ الْاِنْج۪يلِ بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ ف۪يهِۜ وَمَنْ لَمْ يَحْكُمْ بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ47
अतः इनजील वालों को चाहिए कि उस विधान के अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उस इनजील में उतारा है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करें, जो अल्लाह ने उतारा है, तो ऐसे ही लोग उल्लंघनकारी है
وَاَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ مُصَدِّقًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ مِنَ الْكِتَابِ وَمُهَيْمِنًا عَلَيْهِ فَاحْكُمْ بَيْنَهُمْ بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ وَلَا تَتَّبِعْ اَهْوَٓاءَهُمْ عَمَّا جَٓاءَكَ مِنَ الْحَقِّۜ لِكُلٍّ جَعَلْنَا مِنْكُمْ شِرْعَةً وَمِنْهَاجًاۜ وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ لَجَعَلَكُمْ اُمَّةً وَاحِدَةً وَلٰكِنْ لِيَبْلُوَكُمْ ف۪ي مَٓا اٰتٰيكُمْ فَاسْتَبِقُوا الْخَيْرَاتِۜ اِلَى اللّٰهِ مَرْجِعُكُمْ جَم۪يعًا فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَۙ48
और हमने तुम्हारी ओर यह किताब हक़ के साथ उतारी है, जो उस किताब की पुष्टि करती है जो उसके पहले से मौजूद है और उसकी संरक्षक है। अतः लोगों के बीच तुम मामलों में वही फ़ैसला करना जो अल्लाह ने उतारा है और जो सत्य तुम्हारे पास आ चुका है उसे छोड़कर उनकी इच्छाओं का पालन न करना। हमने तुममें से प्रत्येक के लिए एक ही घाट (शरीअत) और एक ही मार्ग निश्चित किया है। यदि अल्लाह चाहता तो तुम सबको एक समुदाय बना देता। परन्तु जो कुछ उसने तुम्हें दिया है, उसमें वह तुम्हारी परीक्षा करना चाहता है। अतः भलाई के कामों में एक-दूसरे से आगे बढ़ो। तुम सबको अल्लाह ही की ओर लौटना है। फिर वह तुम्हें बता देगा, जिसमें तुम विभेद करते रहे हो
وَاَنِ احْكُمْ بَيْنَهُمْ بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ وَلَا تَتَّبِعْ اَهْوَٓاءَهُمْ وَاحْذَرْهُمْ اَنْ يَفْتِنُوكَ عَنْ بَعْضِ مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ اِلَيْكَۜ فَاِنْ تَوَلَّوْا فَاعْلَمْ اَنَّمَا يُر۪يدُ اللّٰهُ اَنْ يُص۪يبَهُمْ بِبَعْضِ ذُنُوبِهِمْۜ وَاِنَّ كَث۪يرًا مِنَ النَّاسِ لَفَاسِقُونَ49
और यह कि तुम उनके बीच वही फ़ैसला करो जो अल्लाह ने उतारा है और उनकी इच्छाओं का पालन न करो और उनसे बचते रहो कि कहीं ऐसा न हो कि वे तुम्हें फ़रेब में डालकर जो कुछ अल्लाह ने तुम्हारी ओर उतारा है उसके किसी भाग से वे तुम्हें हटा दें। फिर यदि वे मुँह मोड़े तो जान लो कि अल्लाह ही उनके गुनाहों के कारण उन्हें संकट में डालना चाहता है। निश्चय ही अधिकांश लोग उल्लंघनकारी है
اَفَحُكْمَ الْجَاهِلِيَّةِ يَبْغُونَۜ وَمَنْ اَحْسَنُ مِنَ اللّٰهِ حُكْمًا لِقَوْمٍ يُوقِنُونَ۟50
अब क्या वे अज्ञान का फ़ैसला चाहते है? तो विश्वास करनेवाले लोगों के लिए अल्लाह से अच्छा फ़ैसला करनेवाला कौन हो सकता है?