117. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
5 · अल-माइदा
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْيَهُودَ وَالنَّصَارٰٓى اَوْلِيَٓاءَۢ بَعْضُهُمْ اَوْلِيَٓاءُ بَعْضٍۜ وَمَنْ يَتَوَلَّهُمْ مِنْكُمْ فَاِنَّهُ مِنْهُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَ51
ऐ ईमान लानेवालो! तुम यहूदियों और ईसाइयों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाओ। वे (तुम्हारे विरुद्ध) परस्पर एक-दूसरे के मित्र है। तुममें से जो कोई उनको अपना मित्र बनाएगा, वह उन्हीं लोगों में से होगा। निस्संदेह अल्लाह अत्याचारियों को मार्ग नहीं दिखाता
فَتَرَى الَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ يُسَارِعُونَ ف۪يهِمْ يَقُولُونَ نَخْشٰٓى اَنْ تُص۪يبَنَا دَٓائِرَةٌۜ فَعَسَى اللّٰهُ اَنْ يَاْتِيَ بِالْفَتْحِ اَوْ اَمْرٍ مِنْ عِنْدِه۪ فَيُصْبِحُوا عَلٰى مَٓا اَسَرُّوا ف۪ٓي اَنْفُسِهِمْ نَادِم۪ينَۜ52
तो तुम देखते हो कि जिन लोगों के दिलों में रोग है, वे उनके यहाँ जाकर उनके बीच दौड़-धूप कर रहे है। वे कहते है, "हमें भय है कि कहीं हम किसी संकट में न ग्रस्त हो जाएँ।" तो सम्भव है कि जल्द ही अल्लाह (तुम्हे) विजय प्रदान करे या उसकी ओर से कोई और बात प्रकट हो। फिर तो ये लोग जो कुछ अपने जी में छिपाए हुए है, उसपर लज्जित होंगे
وَيَقُولُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَهٰٓؤُ۬لَٓاءِ الَّذ۪ينَ اَقْسَمُوا بِاللّٰهِ جَهْدَ اَيْمَانِهِمْۙ اِنَّهُمْ لَمَعَكُمْۜ حَبِطَتْ اَعْمَالُهُمْ فَاَصْبَحُوا خَاسِر۪ينَ53
उस समय ईमानवाले कहेंगे, "क्या ये वही लोग है जो अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाकर विश्वास दिलाते थे कि हम तुम्हारे साथ है?" इनका किया-धरा सब अकारथ गया और ये घाटे में पड़कर रहे
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مَنْ يَرْتَدَّ مِنْكُمْ عَنْ د۪ينِه۪ فَسَوْفَ يَاْتِي اللّٰهُ بِقَوْمٍ يُحِبُّهُمْ وَيُحِبُّونَهُٓ اَذِلَّةٍ عَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ اَعِزَّةٍ عَلَى الْكَافِر۪ينَۘ يُجَاهِدُونَ ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ وَلَا يَخَافُونَ لَوْمَةَ لَٓائِمٍۜ ذٰلِكَ فَضْلُ اللّٰهِ يُؤْت۪يهِ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَل۪يمٌ54
ऐ ईमान लानेवालो! तुममें से जो कोई अपने धर्म से फिरेगा तो अल्लाह जल्द ही ऐसे लोगों को लाएगा जिनसे उसे प्रेम होगा और जो उससे प्रेम करेंगे। वे ईमानवालों के प्रति नरम और अविश्वासियों के प्रति कठोर होंगे। अल्लाह की राह में जी-तोड़ कोशिश करेंगे और किसी भर्त्सना करनेवाले की भर्त्सना से न डरेंगे। यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़ी समाईवाला, सर्वज्ञ है
اِنَّمَا وَلِيُّكُمُ اللّٰهُ وَرَسُولُهُ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا الَّذ۪ينَ يُق۪يمُونَ الصَّلٰوةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَهُمْ رَاكِعُونَ55
तुम्हारे मित्र को केवल अल्लाह और उसका रसूल और वे ईमानवाले है; जो विनम्रता के साथ नमाज़ क़ायम करते है और ज़कात देते है
وَمَنْ يَتَوَلَّ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا فَاِنَّ حِزْبَ اللّٰهِ هُمُ الْغَالِبُونَ۟56
अब जो कोई अल्लाह और उसके रसूल और ईमानवालों को अपना मित्र बनाए, तो निश्चय ही अल्लाह का गिरोह प्रभावी होकर रहेगा
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا د۪ينَكُمْ هُزُوًا وَلَعِبًا مِنَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَالْكُفَّارَ اَوْلِيَٓاءَۚ وَاتَّقُوا اللّٰهَ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ57
ऐ ईमान लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो