118. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

118. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
وَاِذَا نَادَيْتُمْ اِلَى الصَّلٰوةِ اتَّخَذُوهَا هُزُوًا وَلَعِبًاۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَوْمٌ لَا يَعْقِلُونَ58
जब तुम नमाज़ के लिए पुकारते हो तो वे उसे हँसी और खेल बना लेते है। इसका कारण यह है कि वे बुद्धिहीन लोग है
قُلْ يَٓا اَهْلَ الْكِتَابِ هَلْ تَنْقِمُونَ مِنَّٓا اِلَّٓا اَنْ اٰمَنَّا بِاللّٰهِ وَمَٓا اُنْزِلَ اِلَيْنَا وَمَٓا اُنْزِلَ مِنْ قَبْلُۙ وَاَنَّ اَكْثَرَكُمْ فَاسِقُونَ59
कहो, "ऐ किताबवालों! क्या इसके सिवा हमारी कोई और बात तुम्हें बुरी लगती है कि हम अल्लाह और उस चीज़ पर ईमान लाए, जो हमारी ओर उतारी गई, और जो पहले उतारी जा चुकी है? और यह कि तुममें से अधिकांश लोग अवज्ञाकारी है।"
قُلْ هَلْ اُنَبِّئُكُمْ بِشَرٍّ مِنْ ذٰلِكَ مَثُوبَةً عِنْدَ اللّٰهِۜ مَنْ لَعَنَهُ اللّٰهُ وَغَضِبَ عَلَيْهِ وَجَعَلَ مِنْهُمُ الْقِرَدَةَ وَالْخَنَازِيرَ وَعَبَدَ الطَّاغُوتَۜ اُو۬لٰٓئِكَ شَرٌّ مَكَانًا وَاَضَلُّ عَنْ سَوَٓاءِ السَّب۪يلِ60
कहो, "क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि अल्लाह के यहाँ परिणाम की स्पष्ट से इससे भी बुरी नीति क्या है? कौन गिरोह है जिसपर अल्लाह की फिटकार पड़ी और जिसपर अल्लाह का प्रकोप हुआ और जिसमें से उसने बन्दर और सूअर बनाए और जिसने बढ़े हुए फ़सादी (ताग़ूत) की बन्दगी की, वे लोग (तुमसे भी) निकृष्ट दर्जे के थे। और वे (तुमसे भी अधिक) सीधे मार्ग से भटके हुए थे।"
وَاِذَا جَٓاؤُ۫كُمْ قَالُٓوا اٰمَنَّا وَقَدْ دَخَلُوا بِالْكُفْرِ وَهُمْ قَدْ خَرَجُوا بِه۪ۜ وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِمَا كَانُوا يَكْتُمُونَ61
जब वे (यहूदी) तुम लोगों के पास आते है तो कहते है, "हम ईमान ले आए।" हालाँकि वे इनकार के साथ आए थे और उसी के साथ चले गए। अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ वे छिपाते है
وَتَرٰى كَث۪يرًا مِنْهُمْ يُسَارِعُونَ فِي الْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَاَكْلِهِمُ السُّحْتَۜ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ62
तुम देखते हो कि उनमें से बहुतेरे लोग हक़ मारने, ज़्यादती करने और हरामख़ोरी में बड़ी तेज़ी दिखाते है। निश्चय ही बहुत ही बुरा है, जो वे कर रहे है
لَوْلَا يَنْهٰيهُمُ الرَّبَّانِيُّونَ وَالْاَحْبَارُ عَنْ قَوْلِهِمُ الْاِثْمَ وَاَكْلِهِمُ السُّحْتَۜ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَصْنَعُونَ63
उनके सन्त और धर्मज्ञाता उन्हें गुनाह की बात बकने और हराम खाने से क्यों नहीं रोकते? निश्चय ही बहुत बुरा है जो काम वे कर रहे है
وَقَالَتِ الْيَهُودُ يَدُ اللّٰهِ مَغْلُولَةٌۜ غُلَّتْ اَيْد۪يهِمْ وَلُعِنُوا بِمَا قَالُواۢ بَلْ يَدَاهُ مَبْسُوطَتَانِۙ يُنْفِقُ كَيْفَ يَشَٓاءُۜ وَلَيَز۪يدَنَّ كَث۪يرًا مِنْهُمْ مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ طُغْيَانًا وَكُفْرًاۜ وَاَلْقَيْنَا بَيْنَهُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَٓاءَ اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِۜ كُلَّمَٓا اَوْقَدُوا نَارًا لِلْحَرْبِ اَطْفَاَهَا اللّٰهُۙ وَيَسْعَوْنَ فِي الْاَرْضِ فَسَادًاۜ وَاللّٰهُ لَا يُحِبُّ الْمُفْسِد۪ينَ64
और यहूदी कहते है, "अल्लाह का हाथ बँध गया है।" उन्हीं के हाथ-बँधे है, और फिटकार है उनपर, उस बकबास के कारण जो वे करते है, बल्कि उसके दोनो हाथ तो खुले हुए है। वह जिस तरह चाहता है, ख़र्च करता है। जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर उतारा गया है, उससे अवश्य ही उनके अधिकतर लोगों की सरकशी और इनकार ही में अभिवृद्धि होगी। और हमने उनके बीच क़ियामत तक के लिए शत्रुता और द्वेष डाल दिया है। वे जब भी युद्ध की आग भड़काते है, अल्लाह उसे बुझा देता है। वे धरती में बिगाड़ फैलाने के लिए प्रयास कर रहे है, हालाँकि अल्लाह बिगाड़ फैलानेवालों को पसन्द नहीं करता