119. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

119. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
وَلَوْ اَنَّ اَهْلَ الْكِتَابِ اٰمَنُوا وَاتَّقَوْا لَكَفَّرْنَا عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَلَاَدْخَلْنَاهُمْ جَنَّاتِ النَّع۪يمِ65
और यदि किताबवाले ईमान लाते और (अल्लाह का) डर रखते तो हम उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर देते और उन्हें नेमत भरी जन्नतों में दाख़िल कर देते
وَلَوْ اَنَّهُمْ اَقَامُوا التَّوْرٰيةَ وَالْاِنْج۪يلَ وَمَٓا اُنْزِلَ اِلَيْهِمْ مِنْ رَبِّهِمْ لَاَكَلُوا مِنْ فَوْقِهِمْ وَمِنْ تَحْتِ اَرْجُلِهِمْۜ مِنْهُمْ اُمَّةٌ مُقْتَصِدَةٌۜ وَكَث۪يرٌ مِنْهُمْ سَٓاءَ مَا يَعْمَلُونَ۟66
और यदि वे तौरात और इनजील को और जो कुछ उनके रब की ओर से उनकी ओर उतारा गया है, उसे क़ायम रखते, तो उन्हें अपने ऊपर से भी खाने को मिलता और अपने पाँव के नीचे से भी। उनमें से एक गिरोह सीधे मार्ग पर चलनेवाला भी है, किन्तु उनमें से अधिकतर ऐसे है कि जो भी करते है बुरा होता है
يَٓا اَيُّهَا الرَّسُولُ بَلِّغْ مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَۜ وَاِنْ لَمْ تَفْعَلْ فَمَا بَلَّغْتَ رِسَالَتَهُۜ وَاللّٰهُ يَعْصِمُكَ مِنَ النَّاسِۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِر۪ينَ67
ऐ रसूल! तुम्हारे रब की ओर से तुम पर जो कुछ उतारा गया है, उसे पहुँचा दो। यदि ऐसा न किया तो तुमने उसका सन्देश नहीं पहुँचाया। अल्लाह तुम्हें लोगों (की बुराइयों) से बचाएगा। निश्चय ही अल्लाह इनकार करनेवाले लोगों को मार्ग नहीं दिखाता
قُلْ يَٓا اَهْلَ الْكِتَابِ لَسْتُمْ عَلٰى شَيْءٍ حَتّٰى تُق۪يمُوا التَّوْرٰيةَ وَالْاِنْج۪يلَ وَمَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْۜ وَلَيَز۪يدَنَّ كَث۪يرًا مِنْهُمْ مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ طُغْيَانًا وَكُفْرًاۚ فَلَا تَاْسَ عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِر۪ينَ68
कह दो, ॅ"ऐ किताबवालो! तुम किसी भी चीज़ पर नहीं हो, जब तक कि तौरात और इनजील को और जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है, उसे क़ायम न रखो।" किन्तु (ऐ नबी!) तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर जो कुछ अवतरित हुआ है, वह अवश्य ही उनमें से बहुतों की सरकशी और इनकार में अभिवृद्धि करनेवाला है। अतः तुम इनकार करनेवाले लोगों की दशा पर दुखी न होना
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَالَّذ۪ينَ هَادُوا وَالصَّابِؤُ۫نَ وَالنَّصَارٰى مَنْ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ69
निस्संदेह वे लोग जो ईमान लाए है और जो यहूदी हुए है और साबई और ईसाई, उनमें से जो कोई भी अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे तो ऐसे लोगों को न तो कोई डर होगा और न वे शोकाकुल होंगे
لَقَدْ اَخَذْنَا م۪يثَاقَ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ وَاَرْسَلْنَٓا اِلَيْهِمْ رُسُلًاۜ كُلَّمَا جَٓاءَهُمْ رَسُولٌ بِمَا لَا تَهْوٰٓى اَنْفُسُهُمْۙ فَر۪يقًا كَذَّبُوا وَفَر۪يقًا يَقْتُلُونَ70
हमने इसराईल की सन्तान से दृढ़ वचन लिया और उनकी ओर रसूल भेजे। उनके पास जब भी कोई रसूल वह कुछ लेकर आया जो उन्हें पसन्द न था, तो कितनों को तो उन्होंने झुठलाया और कितनों की हत्या करने लगे