12. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

12. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
اَوَلَا يَعْلَمُونَ اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ77
क्या वे जानते नहीं कि अल्लाह वह सब कुछ जानता है, जो कुछ वे छिपाते और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं?
وَمِنْهُمْ اُمِّيُّونَ لَا يَعْلَمُونَ الْكِتَابَ اِلَّٓا اَمَانِيَّ وَاِنْ هُمْ اِلَّا يَظُنُّونَ78
और उनमें सामान्य बेपढ़े भी हैं जिन्हें किताब का ज्ञान नहीं है, बस कुछ कामनाओं एवं आशाओं को धर्म जानते हैं, और वे तो बस अटकल से काम लेते हैं
فَوَيْلٌ لِلَّذ۪ينَ يَكْتُبُونَ الْكِتَابَ بِاَيْد۪يهِمْ ثُمَّ يَقُولُونَ هٰذَا مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ لِيَشْتَرُوا بِه۪ ثَمَنًا قَل۪يلًاۜ فَوَيْلٌ لَهُمْ مِمَّا كَتَبَتْ اَيْد۪يهِمْ وَوَيْلٌ لَهُمْ مِمَّا يَكْسِبُونَ79
तो विनाश और तबाही है उन लोगों के लिए जो अपने हाथों से किताब लिखते हैं फिर कहते हैं, "यह अल्लाह की ओर से है", ताकि उसके द्वारा थोड़ा मूल्य प्राप्त कर लें। तो तबाही है उनके हाथों ने लिखा और तबाही है उनके लिए उसके कारण जो वे कमा रहे हैं
وَقَالُوا لَنْ تَمَسَّنَا النَّارُ اِلَّٓا اَيَّامًا مَعْدُودَةًۜ قُلْ اَتَّخَذْتُمْ عِنْدَ اللّٰهِ عَهْدًا فَلَنْ يُخْلِفَ اللّٰهُ عَهْدَهُٓ اَمْ تَقُولُونَ عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ80
वे कहते है, "जहन्नम की आग हमें नहीं छू सकती, हाँ, कुछ गिने-चुने दिनों की बात और है।" कहो, "क्या तुमने अल्लाह से कोई वचन ले रखा है? फिर तो अल्लाह कदापि अपने वचन के विरुद्ध नहीं जा सकता? या तुम अल्लाह के ज़िम्मे डालकर ऐसी बात कहते हो जिसका तुम्हें ज्ञान नहीं?
بَلٰى مَنْ كَسَبَ سَيِّئَةً وَاَحَاطَتْ بِه۪ خَط۪ٓيـَٔتُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ81
क्यों नहीं; जिसने भी कोई बदी कमाई और उसकी खताकारी ने उसे अपने घरे में ले लिया, तो ऐसे ही लोग आग (जहन्नम) में पड़नेवाले है; वे उसी में सदैव रहेंगे
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَنَّةِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ۟82
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वही जन्नतवाले हैं, वे सदैव उसी में रहेंगे।"
وَاِذْ اَخَذْنَا م۪يثَاقَ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ لَا تَعْبُدُونَ اِلَّا اللّٰهَ وَبِالْوَالِدَيْنِ اِحْسَانًا وَذِي الْقُرْبٰى وَالْيَتَامٰى وَالْمَسَاك۪ينِ وَقُولُوا لِلنَّاسِ حُسْنًا وَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَۜ ثُمَّ تَوَلَّيْتُمْ اِلَّا قَل۪يلًا مِنْكُمْ وَاَنْتُمْ مُعْرِضُونَ83
और याद करो जब इसराईल की सन्तान से हमने वचन लिया, "अल्लाह के अतिरिक्त किसी की बन्दगी न करोगे; और माँ-बाप के साथ और नातेदारों के साथ और अनाथों और मुहताजों के साथ अच्छा व्यवहार करोगे; और यह कि लोगों से भली बात कहो और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो।" तो तुम फिर गए, बस तुममें से बचे थोड़े ही, और तुम उपेक्षा की नीति ही अपनाए रहे