122. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

122. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
وَاِذَا سَمِعُوا مَٓا اُنْزِلَ اِلَى الرَّسُولِ تَرٰٓى اَعْيُنَهُمْ تَف۪يضُ مِنَ الدَّمْعِ مِمَّا عَرَفُوا مِنَ الْحَقِّۚ يَقُولُونَ رَبَّنَٓا اٰمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِد۪ينَ83
जब वे उसे सुनते है जो रसूल पर अवतरित हुआ तो तुम देखते हो कि उनकी आँखे आँसुओ से छलकने लगती है। इसका कारण यह है कि उन्होंने सत्य को पहचान लिया। वे कहते हैं, "हमारे रब! हम ईमान ले आए। अतएव तू हमारा नाम गवाही देनेवालों में लिख ले
وَمَا لَنَا لَا نُؤْمِنُ بِاللّٰهِ وَمَا جَٓاءَنَا مِنَ الْحَقِّۙ وَنَطْمَعُ اَنْ يُدْخِلَنَا رَبُّنَا مَعَ الْقَوْمِ الصَّالِح۪ينَ84
"और हम अल्लाह पर और जो सत्य हमारे पास पहुँचा है उसपर ईमान क्यों न लाएँ, जबकि हमें आशा है कि हमारा रब हमें अच्छे लोगों के साथ (जन्नत में) प्रविष्ट, करेगा।"
فَاَثَابَهُمُ اللّٰهُ بِمَا قَالُوا جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ وَذٰلِكَ جَزَٓاءُ الْمُحْسِن۪ينَ85
फिर अल्लाह ने उनके इस कथन के कारण उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके नीचे नहरें बहती है, जिनमें वे सदैव रहेंगे। और यही सत्कर्मी लोगो का बदला है
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَٓا اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَح۪يمِ۟86
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वे भड़कती आग (में पड़ने) वाले है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تُحَرِّمُوا طَيِّبَاتِ مَٓا اَحَلَّ اللّٰهُ لَكُمْ وَلَا تَعْتَدُواۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَد۪ينَ87
ऐ ईमान लानेवालो! जो अच्छी पाक चीज़े अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की है, उन्हें हराम न कर लो और हद से आगे न बढ़ो। निश्चय ही अल्लाह को वे लोग प्रिय नहीं है, जो हद से आगे बढ़ते है
وَكُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللّٰهُ حَلَالًا طَيِّبًاۖ وَاتَّقُوا اللّٰهَ الَّذ۪ٓي اَنْتُمْ بِه۪ مُؤْمِنُونَ88
जो कुछ अल्लाह ने हलाल और पाक रोज़ी तुम्हें ही है, उसे खाओ और अल्लाह का डर रखो, जिसपर तुम ईमान लाए हो
لَا يُؤَاخِذُكُمُ اللّٰهُ بِاللَّغْوِ ف۪ٓي اَيْمَانِكُمْ وَلٰكِنْ يُؤَاخِذُكُمْ بِمَا عَقَّدْتُمُ الْاَيْمَانَۚ فَكَفَّارَتُهُٓ اِطْعَامُ عَشَرَةِ مَسَاك۪ينَ مِنْ اَوْسَطِ مَا تُطْعِمُونَ اَهْل۪يكُمْ اَوْ كِسْوَتُهُمْ اَوْ تَحْر۪يرُ رَقَبَةٍۜ فَمَنْ لَمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلٰثَةِ اَيَّامٍۜ ذٰلِكَ كَفَّارَةُ اَيْمَانِكُمْ اِذَا حَلَفْتُمْۜ وَاحْفَظُٓوا اَيْمَانَكُمْۜ كَذٰلِكَ يُبَيِّنُ اللّٰهُ لَكُمْ اٰيَاتِه۪ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ89
तुम्हारी उन क़समों पर अल्लाह तुम्हें नहीं पकड़ता जो यूँ ही असावधानी से ज़बान से निकल जाती है। परन्तु जो तुमने पक्की क़समें खाई हों, उनपर वह तुम्हें पकड़ेगा। तो इसका प्रायश्चित दस मुहताजों को औसत दर्जें का खाना खिला देना है, जो तुम अपने बाल-बच्चों को खिलाते हो या फिर उन्हें कपड़े पहनाना या एक ग़ुलाम आज़ाद करना होगा। और जिसे इसकी सामर्थ्य न हो, तो उसे तीन दिन के रोज़े रखने होंगे। यह तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है, जबकि तुम क़सम खा बैठो। तुम अपनी क़समों की हिफ़ाजत किया करो। इस प्रकार अल्लाह अपनी आयतें तुम्हारे सामने खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम कृतज्ञता दिखलाओ