123. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
5 · अल-माइदा
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْاَنْصَابُ وَالْاَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ90
ऐ ईमान लानेवालो! ये शराब और जुआ और देवस्थान और पाँसे तो गन्दे शैतानी काम है। अतः तुम इनसे अलग रहो, ताकि तुम सफल हो
اِنَّمَا يُر۪يدُ الشَّيْطَانُ اَنْ يُوقِعَ بَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةَ وَالْبَغْضَٓاءَ فِي الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ وَيَصُدَّكُمْ عَنْ ذِكْرِ اللّٰهِ وَعَنِ الصَّلٰوةِۚ فَهَلْ اَنْتُمْ مُنْتَهُونَ91
शैतान तो बस यही चाहता है कि शराब और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और द्वेष पैदा कर दे और तुम्हें अल्लाह की याद से और नमाज़ से रोक दे, तो क्या तुम बाज़ न आओगे?
وَاَط۪يعُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُوا الرَّسُولَ وَاحْذَرُواۚ فَاِنْ تَوَلَّيْتُمْ فَاعْلَمُٓوا اَنَّمَا عَلٰى رَسُولِنَا الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ92
अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का पालन करो और बचते रहो, किन्तु यदि तुमने मुँह मोड़ा तो जान लो कि हमारे रसूल पर केवल स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है
لَيْسَ عَلَى الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جُنَاحٌ ف۪يمَا طَعِمُٓوا اِذَا مَا اتَّقَوْا وَاٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ثُمَّ اتَّقَوْا وَاٰمَنُوا ثُمَّ اتَّقَوْا وَاَحْسَنُواۜ وَاللّٰهُ يُحِبُّ الْمُحْسِن۪ينَ۟93
जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे पहले जो कुछ खा-पी चुके उसके लिए उनपर कोई गुनाह नहीं; जबकि वे डर रखें और ईमान पर क़ायम रहें और अच्छे कर्म करें। फिर डर रखें और ईमान लाए, फिर डर रखे और अच्छे से अच्छा कर्म करें। अल्लाह सत्कर्मियों से प्रेम करता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَيَبْلُوَنَّكُمُ اللّٰهُ بِشَيْءٍ مِنَ الصَّيْدِ تَنَالُهُٓ اَيْد۪يكُمْ وَرِمَاحُكُمْ لِيَعْلَمَ اللّٰهُ مَنْ يَخَافُهُ بِالْغَيْبِۚ فَمَنِ اعْتَدٰى بَعْدَ ذٰلِكَ فَلَهُ عَذَابٌ اَل۪يمٌ94
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह उस शिकार के द्वारा तुम्हारी अवश्य परीक्षा लेगा जिस तक तुम्हारे हाथ और नेज़े पहुँच सकें, ताकि अल्लाह यह जान ले कि उससे बिन देखे कौन डरता है। फिर इसके पश्चात जिसने ज़्यादती की, उसके लिए दुखद यातना है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَقْتُلُوا الصَّيْدَ وَاَنْتُمْ حُرُمٌۜ وَمَنْ قَتَلَهُ مِنْكُمْ مُتَعَمِّدًا فَجَزَٓاءٌ مِثْلُ مَا قَتَلَ مِنَ النَّعَمِ يَحْكُمُ بِه۪ ذَوَا عَدْلٍ مِنْكُمْ هَدْيًا بَالِغَ الْكَعْبَةِ اَوْ كَفَّارَةٌ طَعَامُ مَسَاك۪ينَ اَوْ عَدْلُ ذٰلِكَ صِيَامًا لِيَذُوقَ وَبَالَ اَمْرِه۪ۜ عَفَا اللّٰهُ عَمَّا سَلَفَۜ وَمَنْ عَادَ فَيَنْتَقِمُ اللّٰهُ مِنْهُۜ وَاللّٰهُ عَز۪يزٌ ذُو انْتِقَامٍ95
ऐ ईमान लानेवालो! इहराम की हालत में तुम शिकार न मारो। तुम में जो कोई जान-बूझकर उसे मारे, तो उसने जो जानवर मारा हो, चौपायों में से उसी जैसा एक जानवर - जिसका फ़ैसला तुम्हारे दो न्यायप्रिय व्यक्ति कर दें - काबा पहुँचाकर क़ुरबान किया जाए, या प्रायश्चित के रूप में मुहताजों को भोजन कराना होगा या उसके बराबर रोज़े रखने होंगे, ताकि वह अपने किए का मज़ा चख ले। जो पहले हो चुका उसे अल्लाह ने क्षमा कर दिया; परन्तु जिस किसी ने फिर ऐसा किया तो अल्लाह उससे बदला लेगा। अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेनेवाला है