124. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

124. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
اُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ الْبَحْرِ وَطَعَامُهُ مَتَاعًا لَكُمْ وَلِلسَّيَّارَةِۚ وَحُرِّمَ عَلَيْكُمْ صَيْدُ الْبَرِّ مَا دُمْتُمْ حُرُمًاۜ وَاتَّقُوا اللّٰهَ الَّذ۪ٓي اِلَيْهِ تُحْشَرُونَ96
तुम्हारे लिए जल की शिकार और उसका खाना हलाल है कि तुम उससे फ़ायदा उठाओ और मुसाफ़िर भी। किन्तु थलीय शिकार जब तक तुम इहराम में हो, तुमपर हराम है। और अल्लाह से डरते रहो, जिसकी ओर तुम इकट्ठा होगे
جَعَلَ اللّٰهُ الْكَعْبَةَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ قِيَامًا لِلنَّاسِ وَالشَّهْرَ الْحَرَامَ وَالْهَدْيَ وَالْقَلَٓائِدَۜ ذٰلِكَ لِتَعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِ وَاَنَّ اللّٰهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ97
अल्लाह ने आदरणीय घर काबा को लोगों के लिए क़ायम रहने का साधन बनाया और आदरणीय महीनों और क़ुरबानी के जानबरों और उन जानवरों को भी जिनके गले में पट्टे बँधे हो, यह इसलिए कि तुम जान लो कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। और यह कि अल्लाह हर चीज़ से अवगत है
اِعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعِقَابِ وَاَنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌۜ98
जान लो अल्लाह कठोर दड देनेवाला है और यह कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है
مَا عَلَى الرَّسُولِ اِلَّا الْبَلَاغُۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ99
रसूल पर (सन्देश) पहुँचा देने के अतिरिक्त और कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह तो जानता है, जो कुछ तुम प्रकट करते हो और जो कुछ तुम छिपाते हो
قُلْ لَا يَسْتَوِي الْخَب۪يثُ وَالطَّيِّبُ وَلَوْ اَعْجَبَكَ كَثْرَةُ الْخَب۪يثِۚ فَاتَّقُوا اللّٰهَ يَٓا اُو۬لِي الْاَلْبَابِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ۟100
कह दो, "बुरी चीज़ और अच्छी चीज़ समान नहीं होती, चाहे बुरी चीज़ों की बहुतायत तुम्हें प्रिय ही क्यों न लगे।" अतः ऐ बुद्धि और समझवालों! अल्लाह का डर रखो, ताकि तुम सफल हो सको
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَسْـَٔلُوا عَنْ اَشْيَٓاءَ اِنْ تُبْدَ لَكُمْ تَسُؤْكُمْۚ وَاِنْ تَسْـَٔلُوا عَنْهَا ح۪ينَ يُنَزَّلُ الْقُرْاٰنُ تُبْدَ لَكُمْۜ عَفَا اللّٰهُ عَنْهَاۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ حَل۪يمٌ101
ऐ ईमान लानेवालो! ऐसी चीज़ों के विषय में न पूछो कि वे यदि तुम पर स्पष्ट कर दी जाएँ, तो तुम्हें बूरी लगें। यदि तुम उन्हें ऐसे समय में पूछोगे, जबकि क़ुरआन अवतरित हो रहा है, तो वे तुमपर स्पष्ट कर दी जाएँगी। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया। अल्लाह बहुत क्षमा करनेवाला, सहनशील है
قَدْ سَاَلَهَا قَوْمٌ مِنْ قَبْلِكُمْ ثُمَّ اَصْبَحُوا بِهَا كَافِر۪ينَ102
तुमसे पहले कुछ लोग इस तरह के प्रश्न कर चुके हैं, फिर वे उसके कारण इनकार करनेवाले हो गए
مَا جَعَلَ اللّٰهُ مِنْ بَح۪يرَةٍ وَلَا سَٓائِبَةٍ وَلَا وَص۪يلَةٍ وَلَا حَامٍۙ وَلٰكِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا يَفْتَرُونَ عَلَى اللّٰهِ الْكَذِبَۜ وَاَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ103
अल्लाह ने न कोई 'बहीरा' ठहराया है और न 'सायबा' और न 'वसीला' और न 'हाम', परन्तु इनकार करनेवाले अल्लाह पर झूठ का आरोपण करते है और उनमें अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते