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126. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
يَوْمَ يَجْمَعُ اللّٰهُ الرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَٓا اُجِبْتُمْۜ قَالُوا لَا عِلْمَ لَنَاۜ اِنَّكَ اَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ109
जिस दिन अल्लाह रसूलों को इकट्ठा करेगा, फिर कहेगा, "तुम्हें क्या जवाब मिला?" वे कहेंगे, "हमें कुछ नहीं मालूम। तू ही छिपी बातों को जानता है।"
اِذْ قَالَ اللّٰهُ يَا ع۪يسَى ابْنَ مَرْيَمَ اذْكُرْ نِعْمَت۪ي عَلَيْكَ وَعَلٰى وَالِدَتِكَۢ اِذْ اَيَّدْتُكَ بِرُوحِ الْقُدُسِ تُكَلِّمُ النَّاسَ فِي الْمَهْدِ وَكَهْلًاۚ وَاِذْ عَلَّمْتُكَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَالتَّوْرٰيةَ وَالْاِنْج۪يلَۚ وَاِذْ تَخْلُقُ مِنَ الطّ۪ينِ كَهَيْـَٔةِ الطَّيْرِ بِاِذْن۪ي فَتَنْفُخُ ف۪يهَا فَتَكُونُ طَيْرًا بِاِذْن۪ي وَتُبْرِئُ الْاَكْمَهَ وَالْاَبْرَصَ بِاِذْن۪يۚ وَاِذْ تُخْرِجُ الْمَوْتٰى بِاِذْن۪يۚ وَاِذْ كَفَفْتُ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ عَنْكَ اِذْ جِئْتَهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ اِنْ هٰذَٓا اِلَّا سِحْرٌ مُب۪ينٌ110
जब अल्लाह कहेगा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! मेरे उस अनुग्रह को याद करो जो तुमपर और तुम्हारी माँ पर हुआ है। जब मैंने पवित्र आत्मा से तुम्हें शक्ति प्रदान की; तुम पालने में भी लोगों से बात करते थे और बड़ी अवस्था को पहुँचकर भी। और याद करो, जबकि मैंने तुम्हें किताब और हिकमत और तौरात और इनजील की शिक्षा दी थी। और याद करो जब तुम मेरे आदेश से मिट्टी से पक्षी का प्रारूपण करते थे; फिर उसमें फूँक मारते थे, तो वह मेरे आदेश से उड़नेवाली बन जाती थी। और तुम मेरे आदेश से मुर्दों को जीवित निकाल खड़ा करते थे। और याद करो जबकि मैंने तुमसे इसराइलियों को रोके रखा, जबकि तुम उनके पास खुली-खुली निशानियाँ लेकर पहुँचे थे, तो उनमें से जो इनकार करनेवाले थे, उन्होंने कहा, यह तो बस खुला जादू है।"
وَاِذْ اَوْحَيْتُ اِلَى الْحَوَارِيّ۪نَ اَنْ اٰمِنُوا ب۪ي وَبِرَسُول۪يۚ قَالُٓوا اٰمَنَّا وَاشْهَدْ بِاَنَّنَا مُسْلِمُونَ111
और याद करो, जब मैंने हबारियों (साथियों और शागिर्दों) के दिल में डाला कि "मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ," तो उन्होंने कहा, "हम ईमान लाए और तुम गवाह रहो कि हम मुस्लिम है।"
اِذْ قَالَ الْحَوَارِيُّونَ يَا ع۪يسَى ابْنَ مَرْيَمَ هَلْ يَسْتَط۪يعُ رَبُّكَ اَنْ يُنَزِّلَ عَلَيْنَا مَٓائِدَةً مِنَ السَّمَٓاءِۜ قَالَ اتَّقُوا اللّٰهَ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ112
और याद करो जब हवारियों ने कहा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! क्या तुम्हारा रब आकाश से खाने से भरा भाल उतार सकता है?" कहा, "अल्लाह से डरो, यदि तुम ईमानवाले हो।"
قَالُوا نُر۪يدُ اَنْ نَاْكُلَ مِنْهَا وَتَطْمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعْلَمَ اَنْ قَدْ صَدَقْتَنَا وَنَكُونَ عَلَيْهَا مِنَ الشَّاهِد۪ينَ113
वे बोले, "हम चाहते हैं कि उनमें से खाएँ और हमारे हृदय सन्तुष्ट हो और हमें मालूम हो जाए कि तूने हमने सच कहा और हम उसपर गवाह रहें।"