127. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

127. पृष्ठ
5 · अल-माइदा
قَالَ ع۪يسَى ابْنُ مَرْيَمَ اللّٰهُمَّ رَبَّنَٓا اَنْزِلْ عَلَيْنَا مَٓائِدَةً مِنَ السَّمَٓاءِ تَكُونُ لَنَا ع۪يدًا لِاَوَّلِنَا وَاٰخِرِنَا وَاٰيَةً مِنْكَۚ وَارْزُقْنَا وَاَنْتَ خَيْرُ الرَّازِق۪ينَ114
मरयम के बेटे ईसा ने कहा, "ऐ अल्लाह, हमारे रब! हमपर आकाश से खाने से भरा खाल उतार, जो हमारे लिए और हमारे अंगलों और हमारे पिछलों के लिए ख़ुशी का कारण बने और तेरी ओर से एक निशानी हो, और हमें आहार प्रदान कर। तू सबसे अच्छा प्रदान करनेवाला है।"
قَالَ اللّٰهُ اِنّ۪ي مُنَزِّلُهَا عَلَيْكُمْۚ فَمَنْ يَكْفُرْ بَعْدُ مِنْكُمْ فَاِنّ۪ٓي اُعَذِّبُهُ عَذَابًا لَٓا اُعَذِّبُهُٓ اَحَدًا مِنَ الْعَالَم۪ينَ۟115
अल्लाह ने कहा, "मैं उसे तुमपर उतारूँगा, फिर उसके पश्चात तुममें से जो कोई इनकार करेगा तो मैं अवश्य उसे ऐसी यातना दूँगा जो सम्पूर्ण संसार में किसी को न दूँगा।"
وَاِذْ قَالَ اللّٰهُ يَا ع۪يسَى ابْنَ مَرْيَمَ ءَاَنْتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ اتَّخِذُون۪ي وَاُمِّيَ اِلٰهَيْنِ مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ قَالَ سُبْحَانَكَ مَا يَكُونُ ل۪ٓي اَنْ اَقُولَ مَا لَيْسَ ل۪ي بِحَقٍّۜ اِنْ كُنْتُ قُلْتُهُ فَقَدْ عَلِمْتَهُۜ تَعْلَمُ مَا ف۪ي نَفْس۪ي وَلَٓا اَعْلَمُ مَا ف۪ي نَفْسِكَۜ اِنَّكَ اَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ116
और याद करो जब अल्लाह कहेगा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा! क्या तुमने लोगों से कहा था कि अल्लाह के अतिरिक्त दो और पूज्य मुझ और मेरी माँ को बना लो?" वह कहेगा, "महिमावान है तू! मुझसे यह नहीं हो सकता कि मैं यह बात कहूँ, जिसका मुझे कोई हक़ नहीं है। यदि मैंने यह कहा होता तो तुझे मालूम होता। तू जानता है, जो कुछ मेरे मन में है। परन्तु मैं नहीं जानता जो कुछ तेरे मन में है। निश्चय ही, तू छिपी बातों का भली-भाँति जाननेवाला है
مَا قُلْتُ لَهُمْ اِلَّا مَٓا اَمَرْتَن۪ي بِه۪ٓ اَنِ اعْبُدُوا اللّٰهَ رَبّ۪ي وَرَبَّكُمْۚ وَكُنْتُ عَلَيْهِمْ شَه۪يدًا مَا دُمْتُ ف۪يهِمْۚ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَن۪ي كُنْتَ اَنْتَ الرَّق۪يبَ عَلَيْهِمْۜ وَاَنْتَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَه۪يدٌ117
"मैंने उनसे उसके सिवा और कुछ नहीं कहा, जिसका तूने मुझे आदेश दिया था, यह कि अल्लाह की बन्दगी करो, जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब है। और जब तक मैं उनमें रहा उनकी ख़बर रखता था, फिर जब तूने मुझे उठा लिया तो फिर तू ही उनका निरीक्षक था। और तू ही हर चीज़ का साक्षी है
اِنْ تُعَذِّبْهُمْ فَاِنَّهُمْ عِبَادُكَۚ وَاِنْ تَغْفِرْ لَهُمْ فَاِنَّكَ اَنْتَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ118
"यदि तू उन्हें यातना दे तो वे तो तेरे ही बन्दे ही है और यदि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो निस्सन्देह तू अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
قَالَ اللّٰهُ هٰذَا يَوْمُ يَنْفَعُ الصَّادِق۪ينَ صِدْقُهُمْۜ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۜ رَضِيَ اللّٰهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُۜ ذٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُ119
अल्लाह कहेगा, "यह वह दिन है कि सच्चों को उनकी सच्चाई लाभ पहुँचाएगी। उनके लिए ऐसे बाग़ है, जिनके नीचे नहेर बह रही होंगी, उनमें वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे उससे राज़ी हुए। यही सबसे बड़ी सफलता है।"
لِلّٰهِ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَمَا ف۪يهِنَّۜ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ120
आकाशों और धरती और जो कुछ उनके बीच है, सबपर अल्लाह ही की बादशाही है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है