13. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
وَاِذْ اَخَذْنَا م۪يثَاقَكُمْ لَا تَسْفِكُونَ دِمَٓاءَكُمْ وَلَا تُخْرِجُونَ اَنْفُسَكُمْ مِنْ دِيَارِكُمْ ثُمَّ اَقْرَرْتُمْ وَاَنْتُمْ تَشْهَدُونَ84
और याद करो जब तुमसे वचन लिया, "अपने ख़ून न बहाओगे और न अपने लोगों को अपनी बस्तियों से निकालोगे।" फिर तुमने इक़रार किया और तुम स्वयं इसके गवाह हो
ثُمَّ اَنْتُمْ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ تَقْتُلُونَ اَنْفُسَكُمْ وَتُخْرِجُونَ فَر۪يقًا مِنْكُمْ مِنْ دِيَارِهِمْۘ تَظَاهَرُونَ عَلَيْهِمْ بِالْاِثْمِ وَالْعُدْوَانِۜ وَاِنْ يَاْتُوكُمْ اُسَارٰى تُفَادُوهُمْ وَهُوَ مُحَرَّمٌ عَلَيْكُمْ اِخْرَاجُهُمْۜ اَفَتُؤْمِنُونَ بِبَعْضِ الْكِتَابِ وَتَكْفُرُونَ بِبَعْضٍۚ فَمَا جَزَٓاءُ مَنْ يَفْعَلُ ذٰلِكَ مِنْكُمْ اِلَّا خِزْيٌ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۚ وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِ يُرَدُّونَ اِلٰٓى اَشَدِّ الْعَذَابِۜ وَمَا اللّٰهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ85
फिर तुम वही हो कि अपने लोगों की हत्या करते हो और अपने ही एक गिरोह के लोगों को उनकी बस्तियों से निकालते हो; तुम गुनाह और ज़्यादती के साथ उनके विरुद्ध एक-दूसरे के पृष्ठपोषक बन जाते हो; और यदि वे बन्दी बनकर तुम्हारे पास आते है, तो उनकी रिहाई के लिए फिद्ए (अर्थदंड) का लेन-देन करते हो जबकि उनको उनके घरों से निकालना ही तुम पर हराम था, तो क्या तुम किताब के एक हिस्से को मानते हो और एक को नहीं मानते? फिर तुममें जो ऐसा करें उसका बदला इसके सिवा और क्या हो सकता है कि सांसारिक जीवन में अपमान हो? और क़यामत के दिन ऐसे लोगों को कठोर से कठोर यातना की ओर फेर दिया जाएगा। अल्लाह उससे बेखबर नहीं है जो कुछ तुम कर रहे हो
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ اشْتَرَوُا الْحَيٰوةَ الدُّنْيَا بِالْاٰخِرَةِۘ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنْصَرُونَ۟86
यही वे लोग है जो आख़िरात के बदले सांसारिक जीवन के ख़रीदार हुए, तो न उनकी यातना हल्की की जाएगी और न उन्हें कोई सहायता पहुँच सकेगी
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَقَفَّيْنَا مِنْ بَعْدِه۪ بِالرُّسُلِ وَاٰتَيْنَا ع۪يسَى ابْنَ مَرْيَمَ الْبَيِّنَاتِ وَاَيَّدْنَاهُ بِرُوحِ الْقُدُسِۜ اَفَكُلَّمَا جَٓاءَكُمْ رَسُولٌ بِمَا لَا تَهْوٰٓى اَنْفُسُكُمُ اسْتَكْبَرْتُمْۚ فَفَر۪يقًا كَذَّبْتُمْ وَفَر۪يقًا تَقْتُلُونَ87
और हमने मूसा को किताब दी थी, और उसके पश्चात आगे-पीछे निरन्तर रसूल भेजते रहे; और मरयम के बेटे ईसा को खुली-खुली निशानियाँ प्रदान की और पवित्र-आत्मा के द्वारा उसे शक्ति प्रदान की; तो यही तो हुआ कि जब भी कोई रसूल तुम्हारे पास वह कुछ लेकर आया जो तुम्हारे जी को पसन्द न था, तो तुम अकड़ बैठे, तो एक गिरोह को तो तुमने झुठलाया और एक गिरोह को क़त्ल करते हो?
وَقَالُوا قُلُوبُنَا غُلْفٌۜ بَلْ لَعَنَهُمُ اللّٰهُ بِكُفْرِهِمْ فَقَل۪يلًا مَا يُؤْمِنُونَ88
वे कहते हैं, "हमारे दिलों पर तो प्राकृतिक आवरण चढ़े है" नहीं, बल्कि उनके इनकार के कारण अल्लाह ने उनपर लानत की है; अतः वे ईमान थोड़े ही लाएँगे