132. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

132. पृष्ठ
6 · अल-अनाम
اِنَّمَا يَسْتَج۪يبُ الَّذ۪ينَ يَسْمَعُونَۜ وَالْمَوْتٰى يَبْعَثُهُمُ اللّٰهُ ثُمَّ اِلَيْهِ يُرْجَعُونَ36
मानते हो वही लोग है जो सुनते है, रहे मुर्दे, तो अल्लाह उन्हें (क़ियामत के दिन) उठा खड़ा करेगा; फिर वे उसी के ओर पलटेंगे
وَقَالُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ اٰيَةٌ مِنْ رَبِّه۪ۜ قُلْ اِنَّ اللّٰهَ قَادِرٌ عَلٰٓى اَنْ يُنَزِّلَ اٰيَةً وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ37
वे यह भी कहते है, "उस (नबी) पर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई?" कह दो, "अल्लाह को तो इसकी सामर्थ्य प्राप्त है कि कोई निशानी उतार दे; परन्तु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।"
وَمَا مِنْ دَٓابَّةٍ فِي الْاَرْضِ وَلَا طَٓائِرٍ يَط۪يرُ بِجَنَاحَيْهِ اِلَّٓا اُمَمٌ اَمْثَالُكُمْۜ مَا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِنْ شَيْءٍ ثُمَّ اِلٰى رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ38
धरती में चलने-फिरनेवाला कोई भी प्राणी हो या अपने दो परो से उड़नवाला कोई पक्षी, ये सब तुम्हारी ही तरह के गिरोह है। हमने किताब में कोई भी चीज़ नहीं छोड़ी है। फिर वे अपने रब की ओर इकट्ठे किए जाएँगे
وَالَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا صُمٌّ وَبُكْمٌ فِي الظُّلُمَاتِۜ مَنْ يَشَاِ اللّٰهُ يُضْلِلْهُۜ وَمَنْ يَشَاْ يَجْعَلْهُ عَلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ39
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, वे बहरे और गूँगे है, अँधेरों में पड़े हुए हैं। अल्लाह जिसे चाहे भटकने दे और जिसे चाहे सीधे मार्ग पर लगा दे
قُلْ اَرَاَيْتَكُمْ اِنْ اَتٰيكُمْ عَذَابُ اللّٰهِ اَوْ اَتَتْكُمُ السَّاعَةُ اَغَيْرَ اللّٰهِ تَدْعُونَۚ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ40
कहो, "क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना आ पड़े या वह घड़ी तुम्हारे सामने आ जाए, तो क्या अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे? बोलो, यदि तुम सच्चे हो?
بَلْ اِيَّاهُ تَدْعُونَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُونَ اِلَيْهِ اِنْ شَٓاءَ وَتَنْسَوْنَ مَا تُشْرِكُونَ۟41
"बल्कि तुम उसी को पुकारते हो - फिर जिसके लिए तुम उसे पुकारते हो, वह चाहता है तो उसे दूर कर देता है - और उन्हें भूल जाते हो जिन्हें साझीदार ठहराते हो।"
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَٓا اِلٰٓى اُمَمٍ مِنْ قَبْلِكَ فَاَخَذْنَاهُمْ بِالْبَاْسَٓاءِ وَالضَّرَّٓاءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ42
तुमसे पहले कितने ही समुदायों की ओर हमने रसूल भेजे कि उन्हें तंगियों और मुसीबतों में डाला, ताकि वे विनम्र हों
فَلَوْلَٓا اِذْ جَٓاءَهُمْ بَاْسُنَا تَضَرَّعُوا وَلٰكِنْ قَسَتْ قُلُوبُهُمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ43
जब हमारी ओर से उनपर सख्ती आई तो फिर क्यों न विनम्र हुए? परन्तु उनके हृदय तो कठोर हो गए थे और जो कुछ वे करते थे शैतान ने उसे उनके लिए मोहक बना दिया
فَلَمَّا نَسُوا مَا ذُكِّرُوا بِه۪ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ اَبْوَابَ كُلِّ شَيْءٍۜ حَتّٰٓى اِذَا فَرِحُوا بِمَٓا اُو۫تُٓوا اَخَذْنَاهُمْ بَغْتَةً فَاِذَا هُمْ مُبْلِسُونَ44
फिर जब उसे उन्होंने भुला दिया जो उन्हें याद दिलाई गई थी, तो हमने उनपर हर चीज़ के दरवाज़े खोल दिए; यहाँ तक कि जो कुछ उन्हें मिला था, जब वे उसमें मग्न हो गए तो अचानक हमने उन्हें पकड़ लिया, तो क्या देखते है कि वे बिल्कुल निराश होकर रह गए