134. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम
وَكَذٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لِيَقُولُٓوا اَهٰٓؤُ۬لَٓاءِ مَنَّ اللّٰهُ عَلَيْهِمْ مِنْ بَيْنِنَاۜ اَلَيْسَ اللّٰهُ بِاَعْلَمَ بِالشَّاكِر۪ينَ53
और इसी प्रकार हमने इनमें से एक को दूसरे के द्वारा आज़माइश में डाला, ताकि वे कहें, "क्या यही वे लोग है, जिनपर अल्लाह न हममें से चुनकर एहसान किया है ?" - क्या अल्लाह कृतज्ञ लोगों से भली-भाँति परिचित नहीं है?
وَاِذَا جَٓاءَكَ الَّذ۪ينَ يُؤْمِنُونَ بِاٰيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلٰى نَفْسِهِ الرَّحْمَةَۙ اَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنْكُمْ سُٓوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِنْ بَعْدِه۪ وَاَصْلَحَ فَاَنَّهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ54
और जब तुम्हारे पास वे लोग आएँ, जो हमारी आयतों को मानते है, तो कहो, "सलाम हो तुमपर! तुम्हारे रब ने दयालुता को अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है कि तुममें से जो कोई नासमझी से कोई बुराई कर बैठे, फिर उसके बाद पलट आए और अपना सुधार कर तो यह है वह बड़ा क्षमाशील, दयावान है।"
وَكَذٰلِكَ نُفَصِّلُ الْاٰيَاتِ وَلِتَسْتَب۪ينَ سَب۪يلُ الْمُجْرِم۪ينَ۟55
इसी प्रकार हम अपनी आयतें खोल-खोलकर बयान करते है (ताकि तुम हर ज़रूरी बात जान लो) और इसलिए कि अपराधियों का मार्ग स्पष्ट हो जाए
قُلْ اِنّ۪ي نُه۪يتُ اَنْ اَعْبُدَ الَّذ۪ينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِۜ قُلْ لَٓا اَتَّبِعُ اَهْوَٓاءَكُمْۙ قَدْ ضَلَلْتُ اِذًا وَمَٓا اَنَا۬ مِنَ الْمُهْتَد۪ينَ56
कह दो, "तुम लोग अल्लाह से हटकर जिन्हें पुकारते हो, उनकी बन्दगी करने से मुझे रोका गया है।" कहो, "मैं तुम्हारी इच्छाओं का अनुपालन नहीं करता, क्योंकि तब तो मैं मार्ग से भटक गया और मार्ग पानेवालों में से न रहा।"
قُلْ اِنّ۪ي عَلٰى بَيِّنَةٍ مِنْ رَبّ۪ي وَكَذَّبْتُمْ بِه۪ۜ مَا عِنْد۪ي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِه۪ۜ اِنِ الْحُكْمُ اِلَّا لِلّٰهِۜ يَقُصُّ الْحَقَّ وَهُوَ خَيْرُ الْفَاصِل۪ينَ57
कह दो, "मैं अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर क़ायम हूँ और तुमने उसे झुठला दिया है। जिस चीज़ के लिए तुम जल्दी मचा रहे हो, वह कोई मेरे पास तो नहीं है। निर्णय का सारा अधिकार अल्लाह ही को है, वही सच्ची बात बयान करता है और वही सबसे अच्छा निर्णायक है।"
قُلْ لَوْ اَنَّ عِنْد۪ي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِه۪ لَقُضِيَ الْاَمْرُ بَيْن۪ي وَبَيْنَكُمْۜ وَاللّٰهُ اَعْلَمُ بِالظَّالِم۪ينَ58
कह दो, "जिस चीज़ की तुम्हें जल्दी पड़ी हुई है, यदि कहीं वह चीज़ मेरे पास होती तो मेरे और तुम्हारे बीच कभी का फ़ैसला हो चुका होता। और अल्लाह अत्याचारियों को भली-भाती जानता है।"
وَعِنْدَهُ مَفَاتِحُ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَٓا اِلَّا هُوَۜ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِۜ وَمَا تَسْقُطُ مِنْ وَرَقَةٍ اِلَّا يَعْلَمُهَا وَلَا حَبَّةٍ ف۪ي ظُلُمَاتِ الْاَرْضِ وَلَا رَطْبٍ وَلَا يَابِسٍ اِلَّا ف۪ي كِتَابٍ مُب۪ينٍ59
उसी के पास परोक्ष की कुंजियाँ है, जिन्हें उसके सिवा कोई नहीं जानता। जल और थल में जो कुछ है, उसे वह जानता है। और जो पत्ता भी गिरता है, उसे वह निश्चय ही जानता है। और धरती के अँधेरों में कोई दाना हो और कोई भी आर्द्र (गीली) और शुष्क (सूखी) चीज़ हो, निश्चय ही एक स्पष्ट किताब में मौजूद है