135. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम
وَهُوَ الَّذ۪ي يَتَوَفّٰيكُمْ بِالَّيْلِ وَيَعْلَمُ مَا جَرَحْتُمْ بِالنَّهَارِ ثُمَّ يَبْعَثُكُمْ ف۪يهِ لِيُقْضٰٓى اَجَلٌ مُسَمًّىۚ ثُمَّ اِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ ثُمَّ يُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ۟60
और वही है जो रात को तुम्हें मौत देता है और दिन में जो कुछ तुमने किया उसे जानता है। फिर वह इसलिए तुम्हें उठाता है, ताकि निश्चित अवधि पूरा हो जाए; फिर उसी की ओर तुम्हें लौटना है, फिर वह तुम्हें बता देगा जो कुछ तुम करते रहे हो
وَهُوَ الْقَاهِرُ فَوْقَ عِبَادِه۪ وَيُرْسِلُ عَلَيْكُمْ حَفَظَةًۜ حَتّٰٓى اِذَا جَٓاءَ اَحَدَكُمُ الْمَوْتُ تَوَفَّتْهُ رُسُلُنَا وَهُمْ لَا يُفَرِّطُونَ61
और वही अपने बन्दों पर पूरा-पूरा क़ाबू रखनेवाला है और वह तुमपर निगरानी करनेवाले को नियुक्त करके भेजता है, यहाँ तक कि जब तुममें से किसी की मृत्यु आ जाती है, जो हमारे भेजे हुए कार्यकर्त्ता उसे अपने क़ब्ज़े में कर लेते है और वे कोई कोताही नहीं करते
ثُمَّ رُدُّٓوا اِلَى اللّٰهِ مَوْلٰيهُمُ الْحَقِّۜ اَلَا لَهُ الْحُكْمُ وَهُوَ اَسْرَعُ الْحَاسِب۪ينَ62
फिर सब अल्लाह की ओर, जो उसका वास्तविक स्वामी है, लौट जाएँगे। जान लो, निर्णय का अधिकार उसी को है और वह बहुत जल्द हिसाब लेनेवाला है
قُلْ مَنْ يُنَجّ۪يكُمْ مِنْ ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ تَدْعُونَهُ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةًۚ لَئِنْ اَنْجٰينَا مِنْ هٰذِه۪ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ63
कहो, "कौन है जो थल और जल के अँधेरो से तुम्हे छुटकारा देता है, जिसे तुम गिड़गिड़ाते हुए और चुपके-चुपके पुकारने लगते हो कि यदि हमें इससे बचा लिया तो हम अवश्य की कृतज्ञ हो जाएँगे?"
قُلِ اللّٰهُ يُنَجّ۪يكُمْ مِنْهَا وَمِنْ كُلِّ كَرْبٍ ثُمَّ اَنْتُمْ تُشْرِكُونَ64
कहो, "अल्लाह तुम्हें इनसे और हरके बेचैनी और पीड़ा से छुटकारा देता है, लेकिन फिर तुम उसका साझीदार ठहराने लगते हो।"
قُلْ هُوَ الْقَادِرُ عَلٰٓى اَنْ يَبْعَثَ عَلَيْكُمْ عَذَابًا مِنْ فَوْقِكُمْ اَوْ مِنْ تَحْتِ اَرْجُلِكُمْ اَوْ يَلْبِسَكُمْ شِيَعًا وَيُذ۪يقَ بَعْضَكُمْ بَاْسَ بَعْضٍۜ اُنْظُرْ كَيْفَ نُصَرِّفُ الْاٰيَاتِ لَعَلَّهُمْ يَفْقَهُونَ65
कहो, "वह इसकी सामर्थ्य रखता है कि तुमपर तुम्हारे ऊपर से या तुम्हारे पैरों के नीचे से कोई यातना भेज दे या तुम्हें टोलियों में बाँटकर परस्पर भिड़ा दे और एक को दूसरे की लड़ाई का मज़ा चखाए।" देखो, हम आयतों को कैसे, तरह-तरह से, बयान करते है, ताकि वे समझे
وَكَذَّبَ بِه۪ قَوْمُكَ وَهُوَ الْحَقُّۜ قُلْ لَسْتُ عَلَيْكُمْ بِوَك۪يلٍۜ66
तुम्हारी क़ौम ने तो उसे झुठला दिया, हालाँकि वह सत्य है। कह दो, मैं "तुमपर कोई संरक्षक नियुक्त नहीं हूँ
لِكُلِّ نَبَاٍ مُسْتَقَرٌّۘ وَسَوْفَ تَعْلَمُونَ67
"हर ख़बर का एक निश्चित समय है और शीघ्र ही तुम्हें ज्ञात हो जाएगा।"
وَاِذَا رَاَيْتَ الَّذ۪ينَ يَخُوضُونَ ف۪ٓي اٰيَاتِنَا فَاَعْرِضْ عَنْهُمْ حَتّٰى يَخُوضُوا ف۪ي حَد۪يثٍ غَيْرِه۪ۜ وَاِمَّا يُنْسِيَنَّكَ الشَّيْطَانُ فَلَا تَقْعُدْ بَعْدَ الذِّكْرٰى مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ68
और जब तुम उन लोगों को देखो, जो हमारी आयतों पर नुक्ताचीनी करने में लगे हुए है, तो उनसे मुँह फेर लो, ताकि वे किसी दूसरी बात में लग जाएँ। और यदि कभी शैतान तुम्हें भुलावे में डाल दे, तो याद आ जाने के बाद उन अत्याचारियों के पास न बैठो