137. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम
وَاِذْ قَالَ اِبْرٰه۪يمُ لِاَب۪يهِ اٰزَرَ اَتَتَّخِذُ اَصْنَامًا اٰلِهَةًۚ اِنّ۪ٓي اَرٰيكَ وَقَوْمَكَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ74
और याद करो, जब इबराहीम ने अपने बाप आज़र से कहा था, "क्या तुम मूर्तियों को पूज्य बनाते हो? मैं तो तुम्हें और तुम्हारी क़ौम को खुली गुमराही में पड़ा देख रहा हूँ।"
وَكَذٰلِكَ نُر۪ٓي اِبْرٰه۪يمَ مَلَكُوتَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَلِيَكُونَ مِنَ الْمُوقِن۪ينَ75
और इस प्रकार हम इबराहीम को आकाशों और धरती का राज्य दिखाने लगे (ताकि उसके ज्ञान का विस्तार हो) और इसलिए कि उसे विश्वास हो
فَلَمَّا جَنَّ عَلَيْهِ الَّيْلُ رَاٰ كَوْكَبًاۚ قَالَ هٰذَا رَبّ۪يۚ فَلَمَّٓا اَفَلَ قَالَ لَٓا اُحِبُّ الْاٰفِل۪ينَ76
अतएवः जब रात उसपर छा गई, तो उसने एक तारा देखा। उसने कहा, "इसे मेरा रब ठहराते हो!" फिर जब वह छिप गया तो बोला, "छिप जानेवालों से मैं प्रेम नहीं करता।"
فَلَمَّا رَاَ الْقَمَرَ بَازِغًا قَالَ هٰذَا رَبّ۪يۚ فَلَمَّٓا اَفَلَ قَالَ لَئِنْ لَمْ يَهْدِن۪ي رَبّ۪ي لَاَكُونَنَّ مِنَ الْقَوْمِ الضَّٓالّ۪ينَ77
फिर जब उसने चाँद को चमकता हुआ देखा, तो कहा, "इसको मेरा रब ठहराते हो!" फिर जब वह छिप गया, तो कहा, "यदि मेरा रब मुझे मार्ग न दिखाता तो मैं भी पथभ्रष्ट! लोगों में सम्मिलित हो जाता।"
فَلَمَّا رَاَ الشَّمْسَ بَازِغَةً قَالَ هٰذَا رَبّ۪ي هٰذَٓا اَكْبَرُۚ فَلَمَّٓا اَفَلَتْ قَالَ يَا قَوْمِ اِنّ۪ي بَر۪ٓيءٌ مِمَّا تُشْرِكُونَ78
फिर जब उसने सूर्य को चमकता हुआ देखा, तो कहा, "इसे मेरा रब ठहराते हो! यह तो बहुत बड़ा है।" फिर जब वह भी छिप गया, तो कहा, "ऐ मेरी क़ौन के लोगो! मैं विरक्त हूँ उनसे जिनको तुम साझी ठहराते हो
اِنّ۪ي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذ۪ي فَطَرَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ حَن۪يفًا وَمَٓا اَنَا۬ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَۚ79
"मैंने तो एकाग्र होकर अपना मुख उसकी ओर कर लिया है, जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया। और मैं साझी ठहरानेवालों में से नहीं।"
وَحَٓاجَّهُ قَوْمُهُۜ قَالَ اَتُحَٓاجُّٓونّ۪ي فِي اللّٰهِ وَقَدْ هَدٰينِۜ وَلَٓا اَخَافُ مَا تُشْرِكُونَ بِه۪ٓ اِلَّٓا اَنْ يَشَٓاءَ رَبّ۪ي شَيْـًٔاۜ وَسِعَ رَبّ۪ي كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًاۜ اَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ80
उसकी क़ौम के लोग उससे झगड़ने लगे। उसने कहा, "क्या तुम मुझसे अल्लाह के विषय में झगड़ते हो? जबकि उसने मुझे मार्ग दिखा दिया है। मैं उनसे नहीं डरता, जिन्हें तुम उसका सहभागी ठहराते हो, बल्कि मेरा रब जो कुछ चाहता है वही पूरा होकर रहता है। प्रत्येक वस्तु मेरे रब की ज्ञान-परिधि के भीतर है। फिर क्या तुम चेतोगे नहीं?
وَكَيْفَ اَخَافُ مَٓا اَشْرَكْتُمْ وَلَا تَخَافُونَ اَنَّكُمْ اَشْرَكْتُمْ بِاللّٰهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِه۪ عَلَيْكُمْ سُلْطَانًاۜ فَاَيُّ الْفَر۪يقَيْنِ اَحَقُّ بِالْاَمْنِۚ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَۢ81
"और मैं तुम्हारे ठहराए हुए साझीदारो से कैसे डरूँ, जबकि तुम इस बात से नहीं डरते कि तुमने उसे अल्लाह का सहभागी उस चीज़ को ठहराया है, जिसका उसने तुमपर कोई प्रमाण अवतरित नहीं किया? अब दोनों फ़रीकों में से कौन अधिक निश्चिन्त रहने का अधिकारी है? बताओ यदि तुम जानते हो