139. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

139. पृष्ठ
6 · अल-अनाम
وَمَا قَدَرُوا اللّٰهَ حَقَّ قَدْرِه۪ٓ اِذْ قَالُوا مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ عَلٰى بَشَرٍ مِنْ شَيْءٍۜ قُلْ مَنْ اَنْزَلَ الْكِتَابَ الَّذ۪ي جَٓاءَ بِه۪ مُوسٰى نُورًا وَهُدًى لِلنَّاسِ تَجْعَلُونَهُ قَرَاط۪يسَ تُبْدُونَهَا وَتُخْفُونَ كَث۪يرًاۚ وَعُلِّمْتُمْ مَا لَمْ تَعْلَمُٓوا اَنْتُمْ وَلَٓا اٰبَٓاؤُ۬كُمْۜ قُلِ اللّٰهُۙ ثُمَّ ذَرْهُمْ ف۪ي خَوْضِهِمْ يَلْعَبُونَ91
उन्होंने अल्लाह की क़द्र न जानी, जैसी उसकी क़द्र जाननी चाहिए थी, जबकि उन्होंने कहा, "अल्लाह ने किसी मनुष्य पर कुछ अवतरित ही नहीं किया है।" कहो, "फिर यह किताब किसने अवतरित की, जो मूसा लोगों के लिए प्रकाश और मार्गदर्शन के रूप में लाया था, जिसे तुम पन्ना-पन्ना करके रखते हो? उन्हें दिखाते भी हो, परन्तु बहुत-सा छिपा जाते हो। और तुम्हें वह ज्ञान दिया गया, जिसे न तुम जानते थे और न तुम्हारे बाप-दादा ही।" कह दो, "अल्लाह ही ने," फिर उन्हें छोड़ो कि वे अपनी नुक्ताचीनियों से खेलते रहें
وَهٰذَا كِتَابٌ اَنْزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُصَدِّقُ الَّذ۪ي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنْذِرَ اُمَّ الْقُرٰى وَمَنْ حَوْلَهَاۜ وَالَّذ۪ينَ يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِه۪ وَهُمْ عَلٰى صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ92
यह किताब है जिसे हमने उतारा है; बरकतवाली है; अपने से पहले की पुष्टि में है (ताकि तुम शुभ-सूचना दो) और ताकि तुम केन्द्रीय बस्ती (मक्का) और उसके चतुर्दिक बसनेवाले लोगों को सचेत करो और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते है, वे इसपर भी ईमान लाते है। और वे अपनी नमाज़ की रक्षा करते है
وَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرٰى عَلَى اللّٰهِ كَذِبًا اَوْ قَالَ اُو۫حِيَ اِلَيَّ وَلَمْ يُوحَ اِلَيْهِ شَيْءٌ وَمَنْ قَالَ سَاُنْزِلُ مِثْلَ مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُۜ وَلَوْ تَرٰٓى اِذِ الظَّالِمُونَ ف۪ي غَمَرَاتِ الْمَوْتِ وَالْمَلٰٓئِكَةُ بَاسِطُٓوا اَيْد۪يهِمْۚ اَخْرِجُٓوا اَنْفُسَكُمْۜ اَلْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ الْهُونِ بِمَا كُنْتُمْ تَقُولُونَ عَلَى اللّٰهِ غَيْرَ الْحَقِّ وَكُنْتُمْ عَنْ اٰيَاتِه۪ تَسْتَكْبِرُونَ93
और उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर मिथ्यारोपण करे या यह कहे कि "मेरी ओर प्रकाशना (वह्य,) की गई है," हालाँकि उसकी ओर भी प्रकाशना न की गई हो। और वह व्यक्ति से (बढ़कर अत्याचारी कौन होगा) जो यह कहे कि "मैं भी ऐसी चीज़ उतार दूँगा, जैसी अल्लाह ने उतारी है।" और यदि तुम देख सकते, तुम अत्याचारी मृत्यु-यातनाओं में होते है और फ़रिश्ते अपने हाथ बढ़ा रहे होते है कि "निकालो अपने प्राण! आज तुम्हें अपमानजनक यातना दी जाएगी, क्योंकि तुम अल्लाह के प्रति झूठ बका करते थे और उसकी आयतों के मुक़ाबले में अकड़ते थे।"
وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَادٰى كَمَا خَلَقْنَاكُمْ اَوَّلَ مَرَّةٍ وَتَرَكْتُمْ مَا خَوَّلْنَاكُمْ وَرَٓاءَ ظُهُورِكُمْۚ وَمَا نَرٰى مَعَكُمْ شُفَعَٓاءَكُمُ الَّذ۪ينَ زَعَمْتُمْ اَنَّهُمْ ف۪يكُمْ شُرَكٰٓؤُ۬اۜ لَقَدْ تَقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنْكُمْ مَا كُنْتُمْ تَزْعُمُونَ۟94
और निश्चय ही तुम उसी प्रकार एक-एक करके हमारे पास आ गए, जिस प्रकार हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था। और जो कुछ हमने तुम्हें दे रखा था, उसे अपने पीछे छोड़ आए और हम तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफ़ारिशियों को भी नहीं देख रहे हैं, जिनके विषय में तुम दावे से कहते थे, "वे तुम्हारे मामले में शरीक है।" तुम्हारे पारस्परिक सम्बन्ध टूट चुके है और वे सब तुमसे गुम होकर रह गए, जो दावे तुम किया करते थे