14. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

14. पृष्ठ
2 · अल-बक़रा
وَلَمَّا جَٓاءَهُمْ كِتَابٌ مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ مُصَدِّقٌ لِمَا مَعَهُمْۙ وَكَانُوا مِنْ قَبْلُ يَسْتَفْتِحُونَ عَلَى الَّذ۪ينَ كَفَرُواۚ فَلَمَّا جَٓاءَهُمْ مَا عَرَفُوا كَفَرُوا بِه۪ۘ فَلَعْنَةُ اللّٰهِ عَلَى الْكَافِر۪ينَ89
और जब उनके पास एक किताब अल्लाह की ओर से आई है जो उसकी पुष्टि करती है जो उनके पास मौजूद है - और इससे पहले तो वे न माननेवाले लोगों पर विजय पाने के इच्छुक रहे है - फिर जब वह चीज़ उनके पास आ गई जिसे वे पहचान भी गए हैं, तो उसका इनकार कर बैठे; तो अल्लाह की फिटकार इनकार करने वालों पर!
بِئْسَمَا اشْتَرَوْا بِه۪ٓ اَنْفُسَهُمْ اَنْ يَكْفُرُوا بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ بَغْيًا اَنْ يُنَزِّلَ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِه۪ عَلٰى مَنْ يَشَٓاءُ مِنْ عِبَادِه۪ۚ فَبَٓاؤُ۫ بِغَضَبٍ عَلٰى غَضَبٍۜ وَلِلْكَافِر۪ينَ عَذَابٌ مُه۪ينٌ90
क्या ही बुरी चीज़ है जिसके बदले उन्होंने अपनी जानों का सौदा किया, अर्थात जो कुछ अल्लाह ने उतारा है उसे सरकशी और इस अप्रियता के कारण नहीं मानते कि अल्लाह अपना फ़ज़्ल (कृपा) अपने बन्दों में से जिसपर चाहता है क्यों उतारता है, अतः वे प्रकोप पर प्रकोप के अधिकारी हो गए है। और ऐसे इनकार करनेवालों के लिए अपमानजनक यातना है
وَاِذَا ق۪يلَ لَهُمْ اٰمِنُوا بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ قَالُوا نُؤْمِنُ بِمَٓا اُنْزِلَ عَلَيْنَا وَيَكْفُرُونَ بِمَا وَرَٓاءَهُ وَهُوَ الْحَقُّ مُصَدِّقًا لِمَا مَعَهُمْۜ قُلْ فَلِمَ تَقْتُلُونَ اَنْبِيَٓاءَ اللّٰهِ مِنْ قَبْلُ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ91
जब उनसे कहा जाता है, "अल्लाह ने जो कुछ उतारा है उस पर ईमान लाओ", तो कहते है, "हम तो उसपर ईमान रखते है जो हम पर उतरा है," और उसे मानने से इनकार करते हैं जो उसके पीछे है, जबकि वही सत्य है, उसकी पुष्टि करता है जो उसके पास है। कहो, "अच्छा तो इससे पहले अल्लाह के पैग़म्बरों की हत्या क्यों करते रहे हो, यदि तुम ईमानवाले हो?"
وَلَقَدْ جَٓاءَكُمْ مُوسٰى بِالْبَيِّنَاتِ ثُمَّ اتَّخَذْتُمُ الْعِجْلَ مِنْ بَعْدِه۪ وَاَنْتُمْ ظَالِمُونَ92
तुम्हारे पास मूसा खुली-खुली निशानियाँ लेकर आया, फिर भी उसके बाद तुम ज़ालिम बनकर बछड़े को देवता बना बैठे
وَاِذْ اَخَذْنَا م۪يثَاقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ الطُّورَۜ خُذُوا مَٓا اٰتَيْنَاكُمْ بِقُوَّةٍ وَاسْمَعُواۜ قَالُوا سَمِعْنَا وَعَصَيْنَا وَاُشْرِبُوا ف۪ي قُلُوبِهِمُ الْعِجْلَ بِكُفْرِهِمْۜ قُلْ بِئْسَمَا يَاْمُرُكُمْ بِه۪ٓ ا۪يمَانُكُمْ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ93
कहो, "यदि अल्लाह के निकट आख़िरत का घर सारे इनसानों को छोड़कर केवल तुम्हारे ही लिए है, फिर तो मृत्यु की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।"