141. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम
ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبُّكُمْۚ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ فَاعْبُدُوهُۚ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ وَك۪يلٌ102
वही अल्लाह तुम्हारा रब; उसके सिवा कोई पूज्य नहीं; हर चीज़ का स्रष्टा है; अतः तुम उसी की बन्दगी करो। वही हर चीज़ का ज़िम्मेदार है
لَا تُدْرِكُهُ الْاَبْصَارُۘ وَهُوَ يُدْرِكُ الْاَبْصَارَۚ وَهُوَ اللَّط۪يفُ الْخَب۪يرُ103
निगाहें उसे नहीं पा सकतीं, बल्कि वही निगाहों को पा लेता है। वह अत्यन्त सूक्ष्म (एवं सूक्ष्मदर्शी) ख़बर रखनेवाला है
قَدْ جَٓاءَكُمْ بَصَٓائِرُ مِنْ رَبِّكُمْۚ فَمَنْ اَبْصَرَ فَلِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ عَمِيَ فَعَلَيْهَاۜ وَمَٓا اَنَا۬ عَلَيْكُمْ بِحَف۪يظٍ104
तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से आँख खोल देनेवाले प्रमाण आ चुके है; तो जिस किसी ने देखा, अपना ही भला किया और जो अंधा बना रहा, तो वह अपने ही को हानि पहुँचाएगा। और मैं तुमपर कोई नियुक्त रखवाला नहीं हूँ
وَكَذٰلِكَ نُصَرِّفُ الْاٰيَاتِ وَلِيَقُولُوا دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ105
और इसी प्रकार हम अपनी आयतें विभिन्न ढंग से बयान करते है (कि वे सुने) और इसलिए कि वे कह लें, "(ऐ मुहम्मद!) तुमनेकहीं से पढ़-पढ़ा लिया है।" और इसलिए भी कि हम उनके लिए जो जानना चाहें, सत्य को स्पष्ट कर दें
اِتَّبِعْ مَٓا اُو۫حِيَ اِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَۚ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۚ وَاَعْرِضْ عَنِ الْمُشْرِك۪ينَ106
तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी तरफ़ जो वह्यो की गई है, उसी का अनुसरण किए जाओ, उसके सिवा कोई पूज्य नहीं और बहुदेववादियों (की कुनीति) पर ध्यान न दो
وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَٓا اَشْرَكُواۜ وَمَا جَعَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَف۪يظًاۚ وَمَٓا اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِوَك۪يلٍ107
यदि अल्लाह चाहता तो वे (उसका) साझी न ठहराते। तुम्हें हमने उनपर कोई नियुक्त संरक्षक तो नहीं बनाया है और न तुम उनके कोई ज़िम्मेदार ही हो
وَلَا تَسُبُّوا الَّذ۪ينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ فَيَسُبُّوا اللّٰهَ عَدْوًا بِغَيْرِ عِلْمٍۜ كَذٰلِكَ زَيَّنَّا لِكُلِّ اُمَّةٍ عَمَلَهُمْ ثُمَّ اِلٰى رَبِّهِمْ مَرْجِعُهُمْ فَيُنَبِّئُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ108
अल्लाह के सिवा जिन्हें ये पुकारते है, तुम उनके प्रति अपशब्द का प्रयोग न करो। ऐसा न हो कि वे हद से आगे बढ़कर अज्ञान वश अल्लाह के प्रति अपशब्द का प्रयोग करने लगें। इसी प्रकार हमने हर गिरोह के लिए उसके कर्म को सुहावना बना दिया है। फिर उन्हें अपने रब की ही ओर लौटना है। उस समय वह उन्हें बता देगा. जो कुछ वे करते रहे होंगे
وَاَقْسَمُوا بِاللّٰهِ جَهْدَ اَيْمَانِهِمْ لَئِنْ جَٓاءَتْهُمْ اٰيَةٌ لَيُؤْمِنُنَّ بِهَاۜ قُلْ اِنَّمَا الْاٰيَاتُ عِنْدَ اللّٰهِ وَمَا يُشْعِرُكُمْۙ اَنَّهَٓا اِذَا جَٓاءَتْ لَا يُؤْمِنُونَ109
वे लोग तो अल्लाह की कड़ी-कड़ी क़समें खाते है कि यदि उनके पास कोई निशानी आ जाए, तो उसपर वे अवश्य ईमान लाएँगे। कह दो, "निशानियाँ तो अल्लाह ही के पास है।" और तुम्हें क्या पता कि जब वे आ जाएँगी तो भी वे ईमान नहीं लाएँगे
وَنُقَلِّبُ اَفْـِٔدَتَهُمْ وَاَبْصَارَهُمْ كَمَا لَمْ يُؤْمِنُوا بِه۪ٓ اَوَّلَ مَرَّةٍ وَنَذَرُهُمْ ف۪ي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ۟110
और हम उनके दिलों और निगाहों को फेर देंगे, जिस प्रकार वे पहली बार ईमान नहीं लाए थे। और हम उन्हें छोड़ देंगे कि वे अपनी सरकशी में भटकते रहें