142. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम
وَلَوْ اَنَّنَا نَزَّلْنَٓا اِلَيْهِمُ الْمَلٰٓئِكَةَ وَكَلَّمَهُمُ الْمَوْتٰى وَحَشَرْنَا عَلَيْهِمْ كُلَّ شَيْءٍ قُبُلًا مَا كَانُوا لِيُؤْمِنُٓوا اِلَّٓا اَنْ يَشَٓاءَ اللّٰهُ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ يَجْهَلُونَ111
यदि हम उनकी ओर फ़रिश्ते भी उतार देते और मुर्दें भी उनसे बातें करने लगते और प्रत्येक चीज़ उनके सामने लाकर इकट्ठा कर देते, तो भी वे ईमान न लाते, बल्कि अल्लाह ही का चाहा क्रियान्वित है। परन्तु उनमें से अधिकतर लोग अज्ञानता से काम लेते है
وَكَذٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا شَيَاط۪ينَ الْاِنْسِ وَالْجِنِّ يُوح۪ي بَعْضُهُمْ اِلٰى بَعْضٍ زُخْرُفَ الْقَوْلِ غُرُورًاۜ وَلَوْ شَٓاءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوهُ فَذَرْهُمْ وَمَا يَفْتَرُونَ112
और इसी प्रकार हमने मनुष्यों और जिन्नों में से शैतानों को प्रत्येक नबी का शत्रु बनाया, जो चिकनी-चुपड़ी बात एक-दूसरे के मन में डालकर धोखा देते थे - यदि तुम्हारा रब चाहता तो वे ऐसा न कर सकते। अब छोड़ो उन्हें और उनके मिथ्यारोपण को। -
وَلِتَصْغٰٓى اِلَيْهِ اَفْـِٔدَةُ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ وَلِيَرْضَوْهُ وَلِيَقْتَرِفُوا مَا هُمْ مُقْتَرِفُونَ113
और ताकि जो लोग परलोक को नहीं मानते, उनके दिल उसकी ओर झुकें और ताकि वे उसे पसन्द कर लें, और ताकि जो कमाई उन्हें करनी है कर लें
اَفَغَيْرَ اللّٰهِ اَبْتَغ۪ي حَكَمًا وَهُوَ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ اِلَيْكُمُ الْكِتَابَ مُفَصَّلًاۜ وَالَّذ۪ينَ اٰتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْلَمُونَ اَنَّهُ مُنَزَّلٌ مِنْ رَبِّكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَر۪ينَ114
अब क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और निर्णायक ढूढूँ? हालाँकि वही है जिसने तुम्हारी ओर किताब अवतरित की है, जिसमें बातें खोल-खोलकर बता दी गई है और जिन लोगों को हमने किताब प्रदान की थी, वे भी जानते है कि यह तुम्हारे रब की ओर से हक़ के साथ अवतरित हुई है, तो तुम कदापि सन्देह में न पड़ना
وَتَمَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدْقًا وَعَدْلًاۜ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِه۪ۚ وَهُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ115
तुम्हारे रब की बात सच्चाई और इनसाफ़ के साथ पूरी हुई, कोई नहीं जो उसकी बातों को बदल सकें, और वह सुनता, जानता है
وَاِنْ تُطِعْ اَكْثَرَ مَنْ فِي الْاَرْضِ يُضِلُّوكَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِۜ اِنْ يَتَّبِعُونَ اِلَّا الظَّنَّ وَاِنْ هُمْ اِلَّا يَخْرُصُونَ116
और धरती में अधिकतर लोग ऐसे है, यदि तुम उनके कहने पर चले तो वे अल्लाह के मार्ग से तुम्हें भटका देंगे। वे तो केवल अटकल के पीछे चलते है और वे निरे अटकल ही दौड़ाते है
اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ مَنْ يَضِلُّ عَنْ سَب۪يلِه۪ۚ وَهُوَ اَعْلَمُ بِالْمُهْتَد۪ينَ117
निस्संदेह तुम्हारा रब उसे भली-भाँति जानता है, जो उसके मार्ग से भटकता और वह उन्हें भी जानता है, जो सीधे मार्ग पर है
فَكُلُوا مِمَّا ذُكِرَ اسْمُ اللّٰهِ عَلَيْهِ اِنْ كُنْتُمْ بِاٰيَاتِه۪ مُؤْمِن۪ينَ118
अतः जिसपर अल्लाह का नाम लिया गया हो, उसे खाओ; यदि तुम उसकी आयतों को मानते हो