145. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

145. पृष्ठ
6 · अल-अनाम
وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِمَّا عَمِلُواۜ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ132
सभी के दर्जें उनके कर्मों के अनुसार है। और जो कुछ वे करते है, उससे तुम्हारा रब अनभिज्ञ नहीं है
وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِۜ اِنْ يَشَاْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِنْ بَعْدِكُمْ مَا يَشَٓاءُ كَمَٓا اَنْشَاَكُمْ مِنْ ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ اٰخَر۪ينَۜ133
तुम्हारा रब निस्पृह, दयावान है। यदि वह चाहे तो तुम्हें (दुनिया से) ले जाए और तुम्हारे स्थान पर जिसको चाहे तुम्हारे बाद ले आए, जिस प्रकार उसने तुम्हें कुछ और लोगों की सन्तति से उठाया है
اِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَاٰتٍۙ وَمَٓا اَنْتُمْ بِمُعْجِز۪ينَ134
जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जाता है, उसे अवश्य आना है और तुममें उसे मात करने की सामर्थ्य नहीं
قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلٰى مَكَانَتِكُمْ اِنّ۪ي عَامِلٌۚ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۙ مَنْ تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِۜ اِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ135
कह दो, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह कर्म करते रहो, मैं भी अपनी जगह कर्मशील हूँ। शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि घर (लोक-परलोक) का परिणाम किसके हित में होता है। निश्चय ही अत्याचारी सफल नहीं होते।"
وَجَعَلُوا لِلّٰهِ مِمَّا ذَرَاَ مِنَ الْحَرْثِ وَالْاَنْعَامِ نَص۪يبًا فَقَالُوا هٰذَا لِلّٰهِ بِزَعْمِهِمْ وَهٰذَا لِشُرَكَٓائِنَاۚ فَمَا كَانَ لِشُرَكَٓائِهِمْ فَلَا يَصِلُ اِلَى اللّٰهِۚ وَمَا كَانَ لِلّٰهِ فَهُوَ يَصِلُ اِلٰى شُرَكَٓائِهِمْۜ سَٓاءَ مَا يَحْكُمُونَ136
उन्होंने अल्लाह के लिए स्वयं उसी की पैदा की हुई खेती और चौपायों में से एक भाग निश्चित किया है और अपने ख़याल से कहते है, "यह किस्सा अल्लाह का है और यह हमारे ठहराए हुए साझीदारों का है।" फिर जो उनके साझीदारों का (हिस्सा) है, वह अल्लाह को नहीं पहुँचता, परन्तु जो अल्लाह का है, वह उनके साझीदारों को पहुँच जाता है। कितना बुरा है, जो फ़ैसला वे करते है!
وَكَذٰلِكَ زَيَّنَ لِكَث۪يرٍ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ قَتْلَ اَوْلَادِهِمْ شُرَكَٓاؤُ۬هُمْ لِيُرْدُوهُمْ وَلِيَلْبِسُوا عَلَيْهِمْ د۪ينَهُمْۜ وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ مَا فَعَلُوهُ فَذَرْهُمْ وَمَا يَفْتَرُونَ137
इसी प्रकार बहुत-से बहुदेववादियों के लिए उनके लिए साझीदारों ने उनकी अपनी सन्तान की हत्या को सुहाना बना दिया है, ताकि उन्हें विनष्ट कर दें और उनके लिए उनके धर्म को संदिग्ध बना दें। यदि अल्लाह चाहता तो वे ऐसा न करते; तो छोड़ दो उन्हें और उनके झूठ घड़ने को