15. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
قُلْ اِنْ كَانَتْ لَكُمُ الدَّارُ الْاٰخِرَةُ عِنْدَ اللّٰهِ خَالِصَةً مِنْ دُونِ النَّاسِ فَتَمَنَّوُا الْمَوْتَ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ94
अपने हाथों इन्होंने जो कुछ आगे भेजा है उसके कारण वे कदापि उसकी कामना न करेंगे; अल्लाह तो ज़ालिमों को भली-भाँति जानता है
وَلَنْ يَتَمَنَّوْهُ اَبَدًا بِمَا قَدَّمَتْ اَيْد۪يهِمْۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِالظَّالِم۪ينَ95
अपने हाथों इन्होंने जो कुछ आगे भेजा है उसके कारण वे कदापि उसकी कामना न करेंगे; अल्लाह तो जालिमों को भली-भाँति जानता है
وَلَتَجِدَنَّهُمْ اَحْرَصَ النَّاسِ عَلٰى حَيٰوةٍۚ وَمِنَ الَّذ۪ينَ اَشْرَكُوا يَوَدُّ اَحَدُهُمْ لَوْ يُعَمَّرُ اَلْفَ سَنَةٍۚ وَمَا هُوَ بِمُزَحْزِحِه۪ مِنَ الْعَذَابِ اَنْ يُعَمَّرَۜ وَاللّٰهُ بَص۪يرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ۟96
तुम उन्हें सब लोगों से बढ़कर जीवन का लोभी पाओगे, यहाँ तक कि वे इस सम्बन्ध में शिर्क करनेवालो से भी बढ़े हुए है। उनका तो प्रत्येक व्यक्ति यह इच्छा रखता है कि क्या ही अच्छा होता कि उस हज़ार वर्ष की आयु मिले, जबकि यदि उसे यह आयु प्राप्त भी जाए, तो भी वह अपने आपको यातना से नहीं बचा सकता। अल्लाह देख रहा है, जो कुछ वे कर रहे है
قُلْ مَنْ كَانَ عَدُوًّا لِجِبْر۪يلَ فَاِنَّهُ نَزَّلَهُ عَلٰى قَلْبِكَ بِاِذْنِ اللّٰهِ مُصَدِّقًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهُدًى وَبُشْرٰى لِلْمُؤْمِن۪ينَ97
कहो, "जो कोई जिबरील का शत्रु हो, (तो वह अल्लाह का शत्रु है) क्योंकि उसने तो उसे अल्लाह ही के हुक्म से तम्हारे दिल पर उतारा है, जो उन (भविष्यवाणियों) के सर्वथा अनुकूल है जो उससे पहले से मौजूद हैं; और ईमानवालों के लिए मार्गदर्शन और शुभ-सूचना है
مَنْ كَانَ عَدُوًّا لِلّٰهِ وَمَلٰٓئِكَتِه۪ وَرُسُلِه۪ وَجِبْر۪يلَ وَم۪يكَالَ فَاِنَّ اللّٰهَ عَدُوٌّ لِلْكَافِر۪ينَ98
जो कोई अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों और जिबरील और मीकाईल का शत्रु हो, तो ऐसे इनकार करनेवालों का अल्लाह शत्रु है।"
وَلَقَدْ اَنْزَلْنَٓا اِلَيْكَ اٰيَاتٍ بَيِّنَاتٍۚ وَمَا يَكْفُرُ بِهَٓا اِلَّا الْفَاسِقُونَ99
और हमने तुम्हारी ओर खुली-खुली आयतें उतारी है और उनका इनकार तो बस वही लोग करते हैस जो उल्लंघनकारी हैं
اَوَكُلَّمَا عَاهَدُوا عَهْدًا نَبَذَهُ فَر۪يقٌ مِنْهُمْۜ بَلْ اَكْثَرُهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ100
क्या यह एक निश्चित नीति है कि जब कि उन्होंने कोई वचन दिया तो उनके एक गिरोह ने उसे उठा फेंका? बल्कि उनमें अधिकतर ईमान ही नहीं रखते
وَلَمَّا جَٓاءَهُمْ رَسُولٌ مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ مُصَدِّقٌ لِمَا مَعَهُمْ نَبَذَ فَر۪يقٌ مِنَ الَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَۗ كِتَابَ اللّٰهِ وَرَٓاءَ ظُهُورِهِمْ كَاَنَّهُمْ لَا يَعْلَمُونَ101
और जब उनके पास अल्लाह की ओर से एक रसूल आया, जिससे उस (भविष्यवाणी) की पुष्टि हो रही है जो उनके पास थी, तो उनके एक गिरोह ने, जिन्हें किताब मिली थी, अल्लाह की किताब को अपने पीठ पीछे डाल दिया, मानो वे कुछ जानते ही नही