150. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
6 · अल-अनाम
هَلْ يَنْظُرُونَ اِلَّٓا اَنْ تَاْتِيَهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُ اَوْ يَاْتِيَ رَبُّكَ اَوْ يَاْتِيَ بَعْضُ اٰيَاتِ رَبِّكَۜ يَوْمَ يَاْت۪ي بَعْضُ اٰيَاتِ رَبِّكَ لَا يَنْفَعُ نَفْسًا ا۪يمَانُهَا لَمْ تَكُنْ اٰمَنَتْ مِنْ قَبْلُ اَوْ كَسَبَتْ ف۪ٓي ا۪يمَانِهَا خَيْرًاۜ قُلِ انْتَظِرُٓوا اِنَّا مُنْتَظِرُونَ158
क्या ये लोग केवल इसी की प्रतीक्षा कर रहे है कि उनके पास फ़रिश्ते आ जाएँ या स्वयं तुम्हारा रब की कोई निशानी आ जाएगी, फिर किसी ऐसे व्यक्ति को उसका ईमान कुछ लाभ न पहुँचाएगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई न कमाई हो। कह दो, ?"तुम भी प्रतीक्षा करो, हम भी प्रतीक्षा करते है।"
اِنَّ الَّذ۪ينَ فَرَّقُوا د۪ينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا لَسْتَ مِنْهُمْ ف۪ي شَيْءٍۜ اِنَّمَٓا اَمْرُهُمْ اِلَى اللّٰهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُمْ بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ159
जिन लोगों ने अपने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और स्वयं गिरोहों में बँट गए, तुम्हारा उनसे कोई सम्बन्ध नहीं। उनका मामला तो बस अल्लाह के हवाले है। फिर वह उन्हें बता देगा जो कुछ वे किया करते थे
مَنْ جَٓاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ اَمْثَالِهَاۚ وَمَنْ جَٓاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلَا يُجْزٰٓى اِلَّا مِثْلَهَا وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ160
जो कोई अच्छा चरित्र लेकर आएगा उसे उसका दस गुना बदला मिलेगा और जो व्यक्ति बुरा चरित्र लेकर आएगा, उसे उसका बस उतना ही बदला मिलेगा, उनके साथ कोई अन्याय न होगा
قُلْ اِنَّن۪ي هَدٰين۪ي رَبّ۪ٓي اِلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍۚ د۪ينًا قِيَمًا مِلَّةَ اِبْرٰه۪يمَ حَن۪يفًاۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِك۪ينَ161
कहो, "मेरे रब ने मुझे सीधा मार्ग दिखा दिया है, बिल्कुल ठीक धर्म, इबराहीम के पंथ की ओर जो सबसे कटकर एक (अल्लाह) का हो गया था और वह बहुदेववादियों में से न था।"
قُلْ اِنَّ صَلَات۪ي وَنُسُك۪ي وَمَحْيَايَ وَمَمَات۪ي لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَۙ162
कहो, "मेरी नमाज़ और मेरी क़ुरबानी और मेरा जीना और मेरा मरना सब अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का रब है
لَا شَر۪يكَ لَهُۚ وَبِذٰلِكَ اُمِرْتُ وَاَنَا۬ اَوَّلُ الْمُسْلِم۪ينَ163
"उसका कोई साझी नहीं है। मुझे तो इसी का आदेश मिला है और सबसे पहला मुस्लिम (आज्ञाकारी) मैं हूँ।"
قُلْ اَغَيْرَ اللّٰهِ اَبْغ۪ي رَبًّا وَهُوَ رَبُّ كُلِّ شَيْءٍۜ وَلَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ اِلَّا عَلَيْهَاۚ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ اُخْرٰىۚ ثُمَّ اِلٰى رَبِّكُمْ مَرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ ف۪يهِ تَخْتَلِفُونَ164
कहो, "क्या मैं अल्लाह से भिन्न कोई और रब ढूढूँ, जबकि हर चीज़ का रब वही है!" और यह कि प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ कमाता है, उसका फल वही भोगेगा; कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। फिर तुम्हें अपने रब की ओर लौटकर जाना है। उस समय वह तुम्हें बता देगा, जिसमें परस्पर तुम्हारा मतभेद और झगड़ा था
وَهُوَ الَّذ۪ي جَعَلَكُمْ خَلَٓائِفَ الْاَرْضِ وَرَفَعَ بَعْضَكُمْ فَوْقَ بَعْضٍ دَرَجَاتٍ لِيَبْلُوَكُمْ ف۪ي مَٓا اٰتٰيكُمْۜ اِنَّ رَبَّكَ سَر۪يعُ الْعِقَابِۘ وَاِنَّهُ لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ165
वही है जिसने तुम्हें धरती में धरती में ख़लीफ़ा (अधिकारी, उत्ताराधिकारी) बनाया और तुममें से कुछ लोगों के दर्जे कुछ लोगों की अपेक्षा ऊँचे रखे, ताकि जो कुछ उसने तुमको दिया है उसमें वह तम्हारी ले। निस्संदेह तुम्हारा रब जल्द सज़ा देनेवाला है। और निश्चय ही वही बड़ा क्षमाशील, दयावान है