151. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓمٓصٓۜ1
अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ साद॰
كِتَابٌ اُنْزِلَ اِلَيْكَ فَلَا يَكُنْ ف۪ي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِنْهُ لِتُنْذِرَ بِه۪ وَذِكْرٰى لِلْمُؤْمِن۪ينَ2
यह एक किताब है, जो तुम्हारी ओर उतारी गई है - अतः इससे तुम्हारे सीने में कोई तंगी न हो - ताकि तुम इसके द्वारा सचेत करो और यह ईमानवालों के लिए एक प्रबोधन है;
اِتَّبِعُوا مَٓا اُنْزِلَ اِلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَۜ قَل۪يلًا مَا تَذَكَّرُونَ3
जो कुछ तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारी ओर अवतरित हुआ है, उस पर चलो और उसे छोड़कर दूसरे संरक्षक मित्रों का अनुसरण न करो। तुम लोग नसीहत थोड़े ही मानते हो
وَكَمْ مِنْ قَرْيَةٍ اَهْلَكْنَاهَا فَجَٓاءَهَا بَاْسُنَا بَيَاتًا اَوْ هُمْ قَٓائِلُونَ4
कितनी ही बस्तियाँ थीं, जिन्हें हमने विनष्टम कर दिया। उनपर हमारी यातना रात को सोते समय आ पहुँची या (दिन-दहाड़) आई, जबकि वे दोपहर में विश्राम कर रहे थे
فَمَا كَانَ دَعْوٰيهُمْ اِذْ جَٓاءَهُمْ بَاْسُنَٓا اِلَّٓا اَنْ قَالُٓوا اِنَّا كُنَّا ظَالِم۪ينَ5
जब उनपर यातना आ गई तो इसके सिवा उनके मुँह से कुछ न निकला कि वे पुकार उठे, "वास्तव में हम अत्याचारी थे।"
فَلَنَسْـَٔلَنَّ الَّذ۪ينَ اُرْسِلَ اِلَيْهِمْ وَلَنَسْـَٔلَنَّ الْمُرْسَل۪ينَۙ6
अतः हम उन लोगों से अवश्य पूछेंगे, जिनके पास रसूल भेजे गए थे, और हम रसूलों से भी अवश्य पूछेंगे
فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِمْ بِعِلْمٍ وَمَا كُنَّا غَٓائِب۪ينَ7
फिर हम पूरे ज्ञान के साथ उनके सामने सब बयान कर देंगे। हम कही ग़ायब नहीं थे
وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍۨ الْحَقُّۚ فَمَنْ ثَقُلَتْ مَوَاز۪ينُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ8
और बिल्कुल पक्का-सच्चा वज़न उसी दिन होगा। अतः जिनके कर्म वज़न में भारी होंगे, वही सफलता प्राप्त करेंगे
وَمَنْ خَفَّتْ مَوَاز۪ينُهُ فَاُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ خَسِرُٓوا اَنْفُسَهُمْ بِمَا كَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَظْلِمُونَ9
और वे लोग जिनके कर्म वज़न में हलके होंगे, तो वही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला, क्योंकि वे हमारी आयतों का इनकार औऱ अपने ऊपर अत्याचार करते रहे
وَلَقَدْ مَكَّنَّاكُمْ فِي الْاَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ ف۪يهَا مَعَايِشَۜ قَل۪يلًا مَا تَشْكُرُونَ۟10
और हमने धरती में तुम्हें अधिकार दिया और उसमें तुम्हारे लिए जीवन-सामग्री रखी। तुम कृतज्ञता थोड़े ही दिखाते हो
وَلَقَدْ خَلَقْنَاكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَاكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلٰٓئِكَةِ اسْجُدُوا لِاٰدَمَۗ فَسَجَدُٓوا اِلَّٓا اِبْل۪يسَۜ لَمْ يَكُنْ مِنَ السَّاجِد۪ينَ11
हमने तुम्हें पैदा करने का निश्चय किया; फिर तुम्हारा रूप बनाया; फिर हमने फ़रिश्तों से कहो, "आदम को सजदा करो।" तो उन्होंने सजदा किया, सिवाय इबलीस के। वह (इबलीस) सदजा करनेवालों में से न हुआ