153. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَٓا اَنْفُسَنَا وَاِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ23
दोनों बोले, "हमारे रब! हमने अपने आप पर अत्याचार किया। अब यदि तूने हमें क्षमा न किया और हम पर दया न दर्शाई, फिर तो हम घाटा उठानेवालों में से होंगे।"
قَالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّۚ وَلَكُمْ فِي الْاَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ اِلٰى ح۪ينٍ24
कहा, "उतर जाओ! तुम परस्पर एक-दूसरे के शत्रु हो और एक अवधि कर तुम्हारे लिए धरती में ठिकाना और जीवन-सामग्री है।"
قَالَ ف۪يهَا تَحْيَوْنَ وَف۪يهَا تَمُوتُونَ وَمِنْهَا تُخْرَجُونَ۟25
कहा, "वहीं तुम्हें जीना और वहीं तुम्हें मरना है और उसी में से तुमको निकाला जाएगा।"
يَا بَن۪ٓي اٰدَمَ قَدْ اَنْزَلْنَا عَلَيْكُمْ لِبَاسًا يُوَار۪ي سَوْاٰتِكُمْ وَر۪يشًا۠ وَلِبَاسُ التَّقْوٰى ذٰلِكَ خَيْرٌۜ ذٰلِكَ مِنْ اٰيَاتِ اللّٰهِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ26
ऐ आदम की सन्तान! हमने तुम्हारे लिए वस्त्र उतारा है कि तुम्हारी शर्मगाहों को छुपाए और रक्षा और शोभा का साधन हो। और धर्मपरायणता का वस्त्र - वह तो सबसे उत्तम है, यह अल्लाह की निशानियों में से है, ताकि वे ध्यान दें
يَا بَن۪ٓي اٰدَمَ لَا يَفْتِنَنَّكُمُ الشَّيْطَانُ كَمَٓا اَخْرَجَ اَبَوَيْكُمْ مِنَ الْجَنَّةِ يَنْزِعُ عَنْهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوْاٰتِهِمَاۜ اِنَّهُ يَرٰيكُمْ هُوَ وَقَب۪يلُهُ مِنْ حَيْثُ لَا تَرَوْنَهُمْۜ اِنَّا جَعَلْنَا الشَّيَاط۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ لِلَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ27
ऐ आदम की सन्तान! कहीं शैतान तुम्हें बहकावे में न डाल दे, जिस प्रकार उसने तुम्हारे माँ-बाप को जन्नत से निकलवा दिया था; उनके वस्त्र उनपर से उतरवा दिए थे, ताकि उनकी शर्मगाहें एक-दूसरे के सामने खोल दे। निस्सदेह वह और उसका गिरोह उस स्थान से तुम्हें देखता है, जहाँ से तुम उन्हें नहीं देखते। हमने तो शैतानों को उन लोगों का मित्र बना दिया है, जो ईमान नहीं रखते
وَاِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً قَالُوا وَجَدْنَا عَلَيْهَٓا اٰبَٓاءَنَا وَاللّٰهُ اَمَرَنَا بِهَاۜ قُلْ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَاْمُرُ بِالْفَحْشَٓاءِۜ اَتَقُولُونَ عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ28
और उनका हाल यह है कि जब वे लोग कोई अश्लील कर्म करते है तो कहते है कि "हमने अपने बाप-दादा को इसी तरीक़े पर पाया है और अल्लाह ही ने हमें इसका आदेश दिया है।" कह दो, "अल्लाह कभी अश्लील बातों का आदेश नहीं दिया करता। क्या अल्लाह पर थोपकर ऐसी बात कहते हो, जिसका तुम्हें ज्ञान नहीं?"
قُلْ اَمَرَ رَبّ۪ي بِالْقِسْطِ۠ وَاَق۪يمُوا وُجُوهَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَادْعُوهُ مُخْلِص۪ينَ لَهُ الدّ۪ينَۜ كَمَا بَدَاَكُمْ تَعُودُونَۜ29
कह दो, "मेरे रब ने तो न्याय का आदेश दिया है और यह कि इबादत के प्रत्येक अवसर पर अपना रुख़ ठीक रखो और निरे उसी के भक्त एवं आज्ञाकारी बनकर उसे पुकारो। जैसे उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, वैसे ही तुम फिर पैदा होगे।"
فَر۪يقًا هَدٰى وَفَر۪يقًا حَقَّ عَلَيْهِمُ الضَّلَالَةُۜ اِنَّهُمُ اتَّخَذُوا الشَّيَاط۪ينَ اَوْلِيَٓاءَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ وَيَحْسَبُونَ اَنَّهُمْ مُهْتَدُونَ30
एक गिरोह को उसने मार्ग दिखाया। परन्तु दूसरा गिरोह ऐसा है, जिसके लोगों पर गुमराही चिपककर रह गई। निश्चय ही उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को अपने मित्र बनाए और समझते यह है कि वे सीधे मार्ग पर हैं