155. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
قَالَ ادْخُلُوا ف۪ٓي اُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِكُمْ مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ فِي النَّارِۜ كُلَّمَا دَخَلَتْ اُمَّةٌ لَعَنَتْ اُخْتَهَاۜ حَتّٰٓى اِذَا ادَّارَكُوا ف۪يهَا جَم۪يعًاۙ قَالَتْ اُخْرٰيهُمْ لِاُو۫لٰيهُمْ رَبَّنَا هٰٓؤُ۬لَٓاءِ اَضَلُّونَا فَاٰتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِنَ النَّارِۜ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلٰكِنْ لَا تَعْلَمُونَ38
वह कहेगा, "जिन्न और इनसान के जो गिरोह तुमसे पहले गुज़रे हैं, उन्हीं के साथ सम्मिलित होकर तुम भी आग में प्रवेश करो।" जब भी कोई जमाअत प्रवेश करेगी, तो वह अपनी बहन पर लानत करेगी, यहाँ तक कि जब सब उसमें रल-मिल जाएँगे तो उनमें से बाद में आनेवाले अपने से पहलेवाले के विषय में कहेंगे, "हमारे रब! हमें इन्हीं लोगों ने गुमराह किया था; तो तू इन्हें आग की दोहरी यातना दे।" वह कहेगा, "हरेक के लिए दोहरी ही है। किन्तु तुम नहीं जानते।"
وَقَالَتْ اُو۫لٰيهُمْ لِاُخْرٰيهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِنْ فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنْتُمْ تَكْسِبُونَ۟39
और उनमें से पहले आनेवाले अपने से बाद में आनेवालों से कहेंगे, "फिर हमारे मुक़ावाले में तुम्हें कोई श्रेष्ठता प्राप्त नहीं, तो जैसी कुछ कमाई तुम करते रहे हो, उसके बदले में तुम यातना का मज़ा चखो!"
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ اَبْوَابُ السَّمَٓاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتّٰى يَلِجَ الْجَمَلُ ف۪ي سَمِّ الْخِيَاطِۜ وَكَذٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِم۪ينَ40
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनके मुक़ाबले में अकड़ दिखाई, उनके लिए आकाश के द्वार नहीं खोले जाएँगे और न वे जन्नत में प्रवेश करेंग जब तक कि ऊँट सुई के नाके में से न गुज़र जाए। हम अपराधियों को ऐसा ही बदला देते है
لَهُمْ مِنْ جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِنْ فَوْقِهِمْ غَوَاشٍۜ وَكَذٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِم۪ينَ41
उनके लिए बिछौना जहन्नम का होगा और ओढ़ना भी उसी का। अत्याचारियों को हम ऐसा ही बदला देते है
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا اِلَّا وُسْعَهَاۘ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَنَّةِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ42
इसके विपरित जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए - हम किसी पर उसकी सामर्थ्य से बढ़कर बोझ नहीं डालते - वही लोग जन्नतवाले है। वे उसमें सदैव रहेंगे
وَنَزَعْنَا مَا ف۪ي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهِمُ الْاَنْهَارُۚ وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذ۪ي هَدٰينَا لِهٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَٓا اَنْ هَدٰينَا اللّٰهُۚ لَقَدْ جَٓاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّۜ وَنُودُٓوا اَنْ تِلْكُمُ الْجَنَّةُ اُو۫رِثْتُمُوهَا بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ43
उनके सीनों में एक-दूसरे के प्रति जो रंजिश होगी, उसे हम दूर कर देंगे; उनके नीचें नहरें बह रही होंगी और वे कहेंगे, "प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने इसकी ओर हमारा मार्गदर्शन किया। और यदि अल्लाह हमारा मार्गदर्शन न करतो तो हम कदापि मार्ग नहीं पा सकते थे। हमारे रब के रसूल निस्संदेह सत्य लेकर आए थे।" और उन्हें आवाज़ दी जाएगी, "यह जन्नत है, जिसके तुम वारिस बनाए गए। उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे थे।"