156. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
وَنَادٰٓى اَصْحَابُ الْجَنَّةِ اَصْحَابَ النَّارِ اَنْ قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّا فَهَلْ وَجَدْتُمْ مَا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقًّاۜ قَالُوا نَعَمْۚ فَاَذَّنَ مُؤَذِّنٌ بَيْنَهُمْ اَنْ لَعْنَةُ اللّٰهِ عَلَى الظَّالِم۪ينَ الظَّالِم۪ينَۙ44
जन्नतवाले आगवालों को पुकारेंगे, "हमसे हमारे रब ने जो वादा किया था, उसे हमने सच पाया। तो क्या तुमसे तुम्हारे रब ने जो वादा कर रखा था, तुमने भी उसे सच पाया?" वे कहेंगे, "हाँ।" इतने में एक पुकारनेवाला उनके बीच पुकारेगा, "अल्लाह की फिटकार है अत्याचारियों पर।"
اَلَّذ۪ينَ يَصُدُّونَ عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًاۚ وَهُمْ بِالْاٰخِرَةِ كَافِرُونَۜ45
जो अल्लाह के मार्ग से रोकते और उसे टेढ़ा करना चाहते है और जो आख़िरत का इनकार करते है,
وَبَيْنَهُمَا حِجَابٌۚ وَعَلَى الْاَعْرَافِ رِجَالٌ يَعْرِفُونَ كُلًّا بِس۪يمٰيهُمْۚ وَنَادَوْا اَصْحَابَ الْجَنَّةِ اَنْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَ46
और इन दोनों के मध्य एक ओट होगी। और ऊँचाइयों पर कुछ लोग होंगे जो प्रत्येक को उसके लक्षणों से पहचानते होंगे, और जन्नतवालों से पुकारकर कहेंगे, "तुम पर सलाम है।" वे अभी जन्नत में प्रविष्ट तो नहीं हुए होंगे, यद्यपि वे आस लगाए होंगे
وَاِذَا صُرِفَتْ اَبْصَارُهُمْ تِلْقَٓاءَ اَصْحَابِ النَّارِۙ قَالُوا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِم۪ينَ۟47
और जब उनकी निगाहें आगवालों की ओर फिरेंगी, तो कहेंगे, "हमारे रब, हमें अत्याचारी लोगों में न सम्मिलित न करना।"
وَنَادٰٓى اَصْحَابُ الْاَعْرَافِ رِجَالًا يَعْرِفُونَهُمْ بِس۪يمٰيهُمْ قَالُوا مَٓا اَغْنٰى عَنْكُمْ جَمْعُكُمْ وَمَا كُنْتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ48
और ये ऊँचाइयोंवाले कुछ ऐसे लोगों से, जिन्हें ये उनके लक्षणों से पहचानते हैं, कहेंगे, "तुम्हारे जत्थे तो तुम्हारे कुछ काम न आए और न तुम्हारा अकड़ते रहना ही।
اَهٰٓؤُ۬لَٓاءِ الَّذ۪ينَ اَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ اللّٰهُ بِرَحْمَةٍۜ اُدْخُلُوا الْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَٓا اَنْتُمْ تَحْزَنُونَ49
"क्या ये वही हैं ना, जिनके विषय में तुम क़समें खाते थे कि अल्लाह उनपर अपनी दया-दृष्टि न करेगा।" "जन्नत में प्रवेश करो, तुम्हारे लिए न कोई भय है और न तुम्हें कोई शोक होगा।"
وَنَادٰٓى اَصْحَابُ النَّارِ اَصْحَابَ الْجَنَّةِ اَنْ اَف۪يضُوا عَلَيْنَا مِنَ الْمَٓاءِ اَوْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اللّٰهُۜ قَالُٓوا اِنَّ اللّٰهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى الْكَافِر۪ينَۙ50
आगवाले जन्नतवालों को पुकारेंगे कि ,"थोड़ा पानी हमपर बहा दो, या उन चीज़ों में से कुछ दे दो जो अल्लाह ने तुम्हें दी हैं।" वे कहेंगे, "अल्लाह ने तो ये दोनों चीज़ें इनकार करनेवालों के लिए वर्जित कर दी है।"
اَلَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا د۪ينَهُمْ لَهْوًا وَلَعِبًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَاۚ فَالْيَوْمَ نَنْسٰيهُمْ كَمَا نَسُوا لِقَٓاءَ يَوْمِهِمْ هٰذَاۙ وَمَا كَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَجْحَدُونَ51
उनके लिए जिन्होंने अपना धर्म खेल-तमाशा ठहराया और जिन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल दिया, तो आज हम भी उन्हें भुला देंगे, जिस प्रकार वे अपने इस दिन की मुलाक़ात को भूले रहे और हमारी आयतों का इनकार करते रहे