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158. पृष्ठ
7 · अल-आराफ़
وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِاِذْنِ رَبِّه۪ۚ وَالَّذ۪ي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ اِلَّا نَكِدًاۜ كَذٰلِكَ نُصَرِّفُ الْاٰيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ۟58
और अच्छी भूमि के पेड़-पौधे उसके रब के आदेश से निकलते है और जो भूमि ख़राब हो गई है तो उससे निकम्मी पैदावार के अतिरिक्त कुछ नहीं निकलता। इसी प्रकार हम निशानियों को उन लोगों के लिए तरह-तरह से बयान करते है, जो कृतज्ञता दिखानेवाले है
لَقَدْ اَرْسَلْنَا نُوحًا اِلٰى قَوْمِه۪ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ59
हमने नूह को उसकी क़ौम के लोगों की ओर भेजा, तो उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। मैं तुम्हारे लिए एक बड़े दिन का यातना से डरता हूँ।"
قَالَ الْمَلَاُ مِنْ قَوْمِه۪ٓ اِنَّا لَنَرٰيكَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ60
उसकी क़ौम के सरदारों ने कहा, "हम तो तुम्हें खुली गुमराही में पड़ा देख रहे है।"
قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ ب۪ي ضَلَالَةٌ وَلٰكِنّ۪ي رَسُولٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ61
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगों! किसी गुमराही का मुझसे सम्बन्ध नहीं, बल्कि मैं सारे संसार के रब का एक रसूल हूँ। -
اُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبّ۪ي وَاَنْصَحُ لَكُمْ وَاَعْلَمُ مِنَ اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ62
"अपने रब के सन्देश पहुँचता हूँ और तुम्हारा हित चाहता हूँ, और मैं अल्लाह की ओर से वह कुछ जानता हूँ, जो तुम नहीं जानते।"
اَوَعَجِبْتُمْ اَنْ جَٓاءَكُمْ ذِكْرٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَلٰى رَجُلٍ مِنْكُمْ لِيُنْذِرَكُمْ وَلِتَتَّقُوا وَلَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ63
क्या (तुमने मुझे झूठा समझा) और तुम्हें इस पार आश्चर्य हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हीं में से एक आदमी के द्वारा तुम्हारे रब की नसीहत आई? ताकि वह तुम्हें सचेत कर दे और ताकि तुम डर रखने लगो और शायद कि तुमपर दया की जाए
فَكَذَّبُوهُ فَاَنْجَيْنَاهُ وَالَّذ۪ينَ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ وَاَغْرَقْنَا الَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَاۜ اِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا عَم۪ينَ۟64
किन्तु उन्होंने झुठला दिया। अन्ततः हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ एक नौका में थे, बचा लिया और जिन लोगों ने हमारी आयतों को ग़लत समझा, उन्हें हमने डूबो दिया। निश्चय ही वे अन्धे लोग थे
وَاِلٰى عَادٍ اَخَاهُمْ هُودًاۜ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللّٰهَ مَا لَكُمْ مِنْ اِلٰهٍ غَيْرُهُۜ اَفَلَا تَتَّقُونَ65
और आद की ओर उनके भाई हूद को भेजा। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो, उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या (इसे सोचकर) तुम डरते नहीं?"
قَالَ الْمَلَاُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ قَوْمِه۪ٓ اِنَّا لَنَرٰيكَ ف۪ي سَفَاهَةٍ وَاِنَّا لَنَظُنُّكَ مِنَ الْكَاذِب۪ينَ66
उसकी क़ौम के इनकार करनेवाले सरदारों ने कहा, "वास्तव में, हम तो देखते है कि तुम बुद्धिहीनता में ग्रस्त हो और हम तो तुम्हें झूठा समझते है।"
قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ ب۪ي سَفَاهَةٌ وَلٰكِنّ۪ي رَسُولٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ67
उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मैं बुद्धिहीनता में कदापि ग्रस्त नहीं हूँ। परन्तु मैं सारे संसार के रब का रसूल हूँ।-