163. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
وَلَوْ اَنَّ اَهْلَ الْقُرٰٓى اٰمَنُوا وَاتَّقَوْا لَفَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَرَكَاتٍ مِنَ السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِ وَلٰكِنْ كَذَّبُوا فَاَخَذْنَاهُمْ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ96
यदि बस्तियों के लोग ईमान लाते और डर रखते तो अवश्य ही हम उनपर आकाश और धरती की बरकतें खोल देते, परन्तु उन्होंने तो झुठलाया। तो जो कुछ कमाई वे करते थे, उसके बदले में हमने उन्हें पकड़ लिया
اَفَاَمِنَ اَهْلُ الْقُرٰٓى اَنْ يَاْتِيَهُمْ بَاْسُنَا بَيَاتًا وَهُمْ نَٓائِمُونَۜ97
फिर क्या बस्तियों के लोगों को इस और से निश्चिन्त रहने का अवसर मिल सका कि रात में उनपर हमारी यातना आ जाए, जबकि वे सोए हुए हो?
اَوَاَمِنَ اَهْلُ الْقُرٰٓى اَنْ يَاْتِيَهُمْ بَاْسُنَا ضُحًى وَهُمْ يَلْعَبُونَ98
और क्या बस्तियों के लोगो को इस ओर से निश्चिन्त रहने का अवसर मिल सका कि दिन चढ़े उनपर हमारी यातना आ जाए, जबकि वे खेल रहे हों?
اَفَاَمِنُوا مَكْرَ اللّٰهِۚ فَلَا يَاْمَنُ مَكْرَ اللّٰهِ اِلَّا الْقَوْمُ الْخَاسِرُونَ۟99
आख़िर क्या वे अल्लाह की चाल से निश्चिन्त हो गए थे? तो (समझ लो उन्हें टोटे में पड़ना ही था, क्योंकि) अल्लाह की चाल से तो वही लोग निश्चित होते है, जो टोटे में पड़नेवाले होते है
اَوَلَمْ يَهْدِ لِلَّذ۪ينَ يَرِثُونَ الْاَرْضَ مِنْ بَعْدِ اَهْلِهَٓا اَنْ لَوْ نَشَٓاءُ اَصَبْنَاهُمْ بِذُنُوبِهِمْۚ وَنَطْبَعُ عَلٰى قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ100
क्या जो धरती के, उसके पूर्ववासियों के पश्चात उत्तराधिकारी हुए है, उनपर यह तथ्य प्रकट न हुआ कि यदि हम चाहें तो उनके गुनाहों पर उन्हें आ पकड़े? हम तो उनके दिलों पर मुहर लगा रहे हैं, क्योंकि वे कुछ भी नहीं सुनते
تِلْكَ الْقُرٰى نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ اَنْبَٓائِهَاۚ وَلَقَدْ جَٓاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِۚ فَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا بِمَا كَذَّبُوا مِنْ قَبْلُۜ كَذٰلِكَ يَطْبَعُ اللّٰهُ عَلٰى قُلُوبِ الْكَافِر۪ينَ101
ये है वे बस्तियाँ जिनके कुछ वृत्तान्त हम तुमको सुना रहे है। उनके पास उनके रसूल खुली-खुली निशानियाँ लेकर आए परन्तु वे ऐसे न हुए कि ईमान लाते। इसका कारण यह था कि वे पहले से झुठलाते रहे थे। इसी प्रकार अल्लाह इनकार करनेवालों के दिलों पर मुहर लगा देता है
وَمَا وَجَدْنَا لِاَكْثَرِهِمْ مِنْ عَهْدٍۚ وَاِنْ وَجَدْنَٓا اَكْثَرَهُمْ لَفَاسِق۪ينَ102
हमने उनके अधिकतर लोगो में प्रतिज्ञा का निर्वाह न पाया, बल्कि उनके बहुतों को हमने उल्लंघनकारी ही पाया
ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ مُوسٰى بِاٰيَاتِنَٓا اِلٰى فِرْعَوْنَ وَمَلَا۬ئِه۪ فَظَلَمُوا بِهَاۚ فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِد۪ينَ103
फिर उनके पश्चात हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों के पास भेजा, परन्तु उन्होंने इनकार और स्वयं पर अत्याचार किया। तो देखो, इन बिगाड़ पैदा करनेवालों का कैसा परिणाम हुआ!
وَقَالَ مُوسٰى يَا فِرْعَوْنُ اِنّ۪ي رَسُولٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَۚ104
मूसा ने कहा, "ऐ फ़िरऔन! मैं सारे संसार के रब का रसूल हूँ