168. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
قَالَ يَا مُوسٰٓى اِنِّي اصْطَفَيْتُكَ عَلَى النَّاسِ بِرِسَالَات۪ي وَبِكَلَام۪يۘ فَخُذْ مَٓا اٰتَيْتُكَ وَكُنْ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ144
उसने कहा, "ऐ मूसा! मैंने दूसरे लोगों के मुक़ाबले में तुझे चुनकर अपने संदेशों और अपनी वाणी से तुझे उपकृत किया। अतः जो कुछ मैं तुझे दूँ उसे ले और कृतज्ञता दिखा।"
وَكَتَبْنَا لَهُ فِي الْاَلْوَاحِ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ مَوْعِظَةً وَتَفْص۪يلًا لِكُلِّ شَيْءٍۚ فَخُذْهَا بِقُوَّةٍ وَاْمُرْ قَوْمَكَ يَاْخُذُوا بِاَحْسَنِهَاۜ سَاُر۪يكُمْ دَارَ الْفَاسِق۪ينَ145
और हमने उसके लिए तख़्तियों पर उपदेश के रूप में हर चीज़ और हर चीज़ का विस्तृत वर्णन लिख दिया। अतः उनको मज़बूती से पकड़। उनमें उत्तम बातें है। अपनी क़ौम के लोगों को हुक्म दे कि वे उनको अपनाएँ। मैं शीघ्र ही तुम्हें अवज्ञाकारियों का घर दिखाऊँगा
سَاَصْرِفُ عَنْ اٰيَاتِيَ الَّذ۪ينَ يَتَكَبَّرُونَ فِي الْاَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّۜ وَاِنْ يَرَوْا كُلَّ اٰيَةٍ لَا يُؤْمِنُوا بِهَاۚ وَاِنْ يَرَوْا سَب۪يلَ الرُّشْدِ لَا يَتَّخِذُوهُ سَب۪يلًاۚ وَاِنْ يَرَوْا سَب۪يلَ الْغَيِّ يَتَّخِذُوهُ سَب۪يلًاۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَكَانُوا عَنْهَا غَافِل۪ينَ146
जो लोग धरती में नाहक़ बड़े बनते है, मैं अपनी निशानियों की ओर से उन्हें फेर दूँगा। यदि वे प्रत्येक निशानी देख ले तब भी वे उस पर ईमान नहीं लाएँगे। यदि वे सीधा मार्ग देख लें तो भी वे उसे अपना मार्ग नहीं बनाएँगे। लेकिन यदि वे पथभ्रष्ट का मार्ग देख लें तो उसे अपना मार्ग ठहरा लेंगे। यह इसलिए की उन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे ग़ाफ़िल रहे
وَالَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا وَلِقَٓاءِ الْاٰخِرَةِ حَبِطَتْ اَعْمَالُهُمْۜ هَلْ يُجْزَوْنَ اِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ۟147
जिन लोगों ने हमारी आयतों को और आख़िरत के मिलन को झूठा जाना, उनका तो सारा किया-धरा उनकी जान को लागू हुआ। जो कुछ वे करते रहे क्या उसके सिवा वे किसी और चीज़ का बदला पाएँगे?
وَاتَّخَذَ قَوْمُ مُوسٰى مِنْ بَعْدِه۪ مِنْ حُلِيِّهِمْ عِجْلًا جَسَدًا لَهُ خُوَارٌۜ اَلَمْ يَرَوْا اَنَّهُ لَا يُكَلِّمُهُمْ وَلَا يَهْد۪يهِمْ سَب۪يلًاۢ اِتَّخَذُوهُ وَكَانُوا ظَالِم۪ينَ148
और मूसा के पीछे उसकी क़ौम ने अपने ज़ेवरों से अपने लिए एक बछड़ा बना दिया, जिसमें से बैल की-सी आवाज़ निकलती थी। क्या उन्होंने देखा नहीं कि वह न तो उनसे बातें करता है और न उन्हें कोई राह दिखाता है? उन्होंने उसे अपना उपास्य बना लिया, औऱ वे बड़े अत्याचारी थे
وَلَمَّا سُقِطَ ف۪ٓي اَيْد۪يهِمْ وَرَاَوْا اَنَّهُمْ قَدْ ضَلُّواۙ قَالُوا لَئِنْ لَمْ يَرْحَمْنَا رَبُّنَا وَيَغْفِرْ لَنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ149
और जब (चेताबनी से) उन्हें पश्चाताप हुआ और उन्होंने देख लिया कि वास्तव में वे भटक गए हैं तो कहने लगे, "यदि हमारे रब ने हमपर दया न की और उसने हमें क्षमा न किया तो हम घाटे में पड़ जाएँगे!"