170. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
وَاكْتُبْ لَنَا ف۪ي هٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْاٰخِرَةِ اِنَّا هُدْنَٓا اِلَيْكَۜ قَالَ عَذَاب۪ٓي اُص۪يبُ بِه۪ مَنْ اَشَٓاءُۚ وَرَحْمَت۪ي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍۜ فَسَاَكْتُبُهَا لِلَّذ۪ينَ يَتَّقُونَ وَيُؤْتُونَ الزَّكٰوةَ وَالَّذ۪ينَ هُمْ بِاٰيَاتِنَا يُؤْمِنُونَۚ156
"और हमारे लिए इस संसार में भलाई लिख दे और आख़िरत में भी। हम तेरी ही ओर उन्मुख हुए।" उसने कहा, "अपनी यातना में मैं तो उसी को ग्रस्त करता हूँ, जिसे चाहता हूँ, किन्तु मेरी दयालुता से हर चीज़ आच्छादित है। उसे तो मैं उन लोगों के हक़ में लिखूँगा जो डर रखते और ज़कात देते है और जो हमारी आयतों पर ईमान लाते है
اَلَّذ۪ينَ يَتَّبِعُونَ الرَّسُولَ النَّبِيَّ الْاُمِّيَّ الَّذ۪ي يَجِدُونَهُ مَكْتُوبًا عِنْدَهُمْ فِي التَّوْرٰيةِ وَالْاِنْج۪يلِۘ يَاْمُرُهُمْ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهٰيهُمْ عَنِ الْمُنْكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبَاتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبَٓائِثَ وَيَضَعُ عَنْهُمْ اِصْرَهُمْ وَالْاَغْلَالَ الَّت۪ي كَانَتْ عَلَيْهِمْۜ فَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا بِه۪ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَاتَّبَعُوا النُّورَ الَّذ۪ٓي اُنْزِلَ مَعَهُٓۙ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ۟157
"(तो आज इस दयालुता के अधिकारी वे लोग है) जो उस रसूल, उम्मी नबी का अनुसरण करते है, जिसे वे अपने यहाँ तौरात और इंजील में लिखा पाते है। और जो उन्हें भलाई का हुक्म देता और बुराई से रोकता है। उनके लिए अच्छी-स्वच्छ चीज़ों का हलाल और बुरी-अस्वच्छ चीज़ों का हराम ठहराता है और उनपर से उनके वह बोझ उतारता है, जो अब तक उनपर लदे हुए थे और उन बन्धनों को खोलता है, जिनमें वे जकड़े हुए थे। अतः जो लोग उसपर ईमान लाए, उसका सम्मान किया और उसकी सहायता की और उस प्रकाश के अनुगत हुए, जो उसके साथ अवतरित हुआ है, वही सफलता प्राप्त करनेवाले है।"
قُلْ يَٓا اَيُّهَا النَّاسُ اِنّ۪ي رَسُولُ اللّٰهِ اِلَيْكُمْ جَم۪يعًاۨ الَّذ۪ي لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۚ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ يُحْي۪ وَيُم۪يتُۖ فَاٰمِنُوا بِاللّٰهِ وَرَسُولِهِ النَّبِيِّ الْاُمِّيِّ الَّذ۪ي يُؤْمِنُ بِاللّٰهِ وَكَلِمَاتِه۪ وَاتَّبِعُوهُ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ158
कहो, "ऐ लोगो! मैं तुम सबकी ओर उस अल्लाह का रसूल हूँ, जो आकाशों और धरती के राज्य का स्वामी है उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वही जीवन प्रदान करता और वही मृत्यु देता है। अतः जीवन प्रदान करता और वही मृत्यु देता है। अतः अल्लाह और उसके रसूल, उस उम्मी नबी, पर ईमान लाओ जो स्वयं अल्लाह पर और उसके शब्दों (वाणी) पर ईमान रखता है और उनका अनुसरण करो, ताकि तुम मार्ग पा लो।"
وَمِنْ قَوْمِ مُوسٰٓى اُمَّةٌ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِه۪ يَعْدِلُونَ159
मूसा की क़ौम में से एक गिरोह ऐसे लोगों का भी हुआ जो हक़ के अनुसार मार्ग दिखाते और उसी के अनुसार न्याय करते