172. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
7 · अल-आराफ़
وَاِذْ قَالَتْ اُمَّةٌ مِنْهُمْ لِمَ تَعِظُونَ قَوْمًاۨۙ اللّٰهُ مُهْلِكُهُمْ اَوْ مُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَد۪يدًاۜ قَالُوا مَعْذِرَةً اِلٰى رَبِّكُمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ164
और जब उनके एक गिरोह ने कहा, "तुम ऐसे लोगों को क्यों नसीहत किए जा रहे हो, जिन्हें अल्लाह विनष्ट करनेवाला है या जिन्हें वह कठोर यातना देनेवाला है?" उन्होंने कहा, "तुम्हारे रब के समक्ष अपने को निरपराध सिद्ध करने के लिए, और कदाचित वे (अवज्ञा से) बचें।"
فَلَمَّا نَسُوا مَا ذُكِّرُوا بِه۪ٓ اَنْجَيْنَا الَّذ۪ينَ يَنْهَوْنَ عَنِ السُّٓوءِ وَاَخَذْنَا الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا بِعَذَابٍ بَـ۪ٔيسٍ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ165
फिर जब वे उसे भूल गए जो नसीहत उन्हें दी गई थी तो हमने उन लोगों को बचा लिया, जो बुराई से रोकते थे और अत्याचारियों को उनकी अवज्ञा के कारण कठोर यातना में पकड़ लिया
فَلَمَّا عَتَوْا عَنْ مَا نُهُوا عَنْهُ قُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِـ۪ٔينَ166
फिर जब वे सरकशी के साथ वही कुछ करते रहे, जिससे उन्हें रोका गया था तो हमने उनसे कहा, "बन्दर हो जाओ, अपमानित और तिरस्कृत!"
وَاِذْ تَاَذَّنَ رَبُّكَ لَيَبْعَثَنَّ عَلَيْهِمْ اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِ مَنْ يَسُومُهُمْ سُٓوءَ الْعَذَابِۜ اِنَّ رَبَّكَ لَسَر۪يعُ الْعِقَابِۚ وَاِنَّهُ لَغَفُورٌ رَح۪يمٌ167
और याद करो जब तुम्हारे रब ने ख़बर कर दी थी कि वह क़ियामत के दिन तक उनके विरुद्ध ऐसे लोगों को उठाता रहेगा, जो उन्हें बुरी यातना देंगे। निश्चय ही तुम्हारा रब जल्द सज़ा देता है और वह बड़ा क्षमाशील, दावान भी है
وَقَطَّعْنَاهُمْ فِي الْاَرْضِ اُمَمًاۚ مِنْهُمُ الصَّالِحُونَ وَمِنْهُمْ دُونَ ذٰلِكَۘ وَبَلَوْنَاهُمْ بِالْحَسَنَاتِ وَالسَّيِّـَٔاتِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ168
और हमने उन्हें टुकड़े-टुकड़े करके धरती में अनेक गिरोहों में बिखेर दिया। कुछ उनमें से नेक है और कुछ उनमें इससे भिन्न हैं, और हमने उन्हें अच्छी और बुरी परिस्थितियों में डालकर उनकी परीक्षा ली, कदाचित वे पलट आएँ
فَخَلَفَ مِنْ بَعْدِهِمْ خَلْفٌ وَرِثُوا الْكِتَابَ يَاْخُذُونَ عَرَضَ هٰذَا الْاَدْنٰى وَيَقُولُونَ سَيُغْفَرُ لَنَاۚ وَاِنْ يَاْتِهِمْ عَرَضٌ مِثْلُهُ يَاْخُذُوهُۜ اَلَمْ يُؤْخَذْ عَلَيْهِمْ م۪يثَاقُ الْكِتَابِ اَنْ لَا يَقُولُوا عَلَى اللّٰهِ اِلَّا الْحَقَّ وَدَرَسُوا مَا ف۪يهِۜ وَالدَّارُ الْاٰخِرَةُ خَيْرٌ لِلَّذ۪ينَ يَتَّقُونَۜ اَفَلَا تَعْقِلُونَ169
फिर उनके पीछ ऐसे अयोग्य लोगों ने उनकी जगह ली, जो किताब के उत्ताराधिकारी होकर इसी तुच्छ संसार का सामान समेटते है और कहते है, "हमें अवश्य क्षमा कर दिया जाएगा।" और यदि इस जैसा और सामान भी उनके पास आ जाए तो वे उसे भी ले लेंगे। क्या उनसे किताब का यह वचन नहीं लिया गया था कि वे अल्लाह पर थोपकर हक़ के सिवा कोई और बात न कहें। और जो उसमें है उसे वे स्वयं पढ़ भी चुके है। और आख़िरत का घर तो उन लोगों के लिए उत्तम है, जो डर रखते है। तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
وَالَّذ۪ينَ يُمَسِّكُونَ بِالْكِتَابِ وَاَقَامُوا الصَّلٰوةَۜ اِنَّا لَا نُض۪يعُ اَجْرَ الْمُصْلِح۪ينَ170
और जो लोग किताब को मज़बूती से थामते है और जिन्होंने नमाज़ क़ायम कर रखी है, तो काम को ठीक रखनेवालों के प्रतिदान को हम कभी अकारथ नहीं करते