174. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

174. पृष्ठ
7 · अल-आराफ़
وَلَقَدْ ذَرَاْنَا لِجَهَنَّمَ كَث۪يرًا مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِۘ لَهُمْ قُلُوبٌ لَا يَفْقَهُونَ بِهَاۘ وَلَهُمْ اَعْيُنٌ لَا يُبْصِرُونَ بِهَاۘ وَلَهُمْ اٰذَانٌ لَا يَسْمَعُونَ بِهَاۜ اُو۬لٰٓئِكَ كَالْاَنْعَامِ بَلْ هُمْ اَضَلُّۜ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ179
निश्चय ही हमने बहुत-से जिन्नों और मनुष्यों को जहन्नम ही के लिए फैला रखा है। उनके पास दिल है जिनसे वे समझते नहीं, उनके पास आँखें है जिनसे वे देखते नहीं; उनके पास कान है जिनसे वे सुनते नहीं। वे पशुओं की तरह है, बल्कि वे उनसे भी अधिक पथभ्रष्ट है। वही लोग है जो ग़फ़लत में पड़े हुए है
وَلِلّٰهِ الْاَسْمَٓاءُ الْحُسْنٰى فَادْعُوهُ بِهَاۖ وَذَرُوا الَّذ۪ينَ يُلْحِدُونَ ف۪ٓي اَسْمَٓائِه۪ۜ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ180
अच्छे नाम अल्लाह ही के है। तो तुम उन्हीं के द्वारा उसे पुकारो और उन लोगों को छोड़ो जो उसके नामों के सम्बन्ध में कुटिलता ग्रहण करते है। जो कुछ वे करते है, उसका बदला वे पाकर रहेंगे
وَمِمَّنْ خَلَقْنَٓا اُمَّةٌ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِه۪ يَعْدِلُونَ۟181
हमारे पैदा किए प्राणियों में कुछ लोग ऐसे भी है जो हक़ के अनुसार मार्ग दिखाते और उसी के अनुसार न्याय करते है
وَالَّذ۪ينَ كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا سَنَسْتَدْرِجُهُمْ مِنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَۚ182
रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया, हम उन्हें क्रमशः तबाही की ओर ले जाएँगे, ऐसे तरीक़े से जिसे वे जानते नहीं
وَاُمْل۪ي لَهُمْۜ اِنَّ كَيْد۪ي مَت۪ينٌ183
मैं तो उन्हें ढील दिए जा रहा हूँ। निश्चय ही मेरी चाल अत्यन्त सुदृढ़ है
اَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا مَا بِصَاحِبِهِمْ مِنْ جِنَّةٍۜ اِنْ هُوَ اِلَّا نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌ184
क्या उन लोगों ने विचार नहीं किया? उनके साथी को कोई उन्माद नहीं। वह तो बस एक साफ़-साफ़ सचेत करनेवाला है
اَوَلَمْ يَنْظُرُوا ف۪ي مَلَكُوتِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَمَا خَلَقَ اللّٰهُ مِنْ شَيْءٍۙ وَاَنْ عَسٰٓى اَنْ يَكُونَ قَدِ اقْتَرَبَ اَجَلُهُمْۚ فَبِاَيِّ حَد۪يثٍ بَعْدَهُ يُؤْمِنُونَ185
या क्या उन्होंने आकाशों और धरती के राज्य पर और जो चीज़ भी अल्लाह ने पैदा की है उसपर दृष्टि नहीं डाली, और इस बात पर कि कदाचित उनकी अवधि निकट आ लगी हो? फिर आख़िर इसके बाद अब कौन-सी बात हो सकती है, जिसपर वे ईमान लाएँगे?
مَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَلَا هَادِيَ لَهُۜ وَيَذَرُهُمْ ف۪ي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ186
जिसे अल्लाह मार्ग से वंचित रखे उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं। वह तो तो उन्हें उनकी सरकशी ही में भटकता हुआ छोड़ रहा है
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ السَّاعَةِ اَيَّانَ مُرْسٰيهَاۜ قُلْ اِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ رَبّ۪يۚ لَا يُجَلّ۪يهَا لِوَقْتِهَٓا اِلَّا هُوَۜ ثَقُلَتْ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ لَا تَاْت۪يكُمْ اِلَّا بَغْتَةًۜ يَسْـَٔلُونَكَ كَاَنَّكَ حَفِيٌّ عَنْهَاۜ قُلْ اِنَّمَا عِلْمُهَا عِنْدَ اللّٰهِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ187
तुमसे उस घड़ी (क़ियामत) के विषय में पूछते है कि वह कब आएगी? कह दो, "उसका ज्ञान मेरे रब ही के पास है। अतः वही उसे उसके समय पर प्रकट करेगा। वह आकाशों और धरती में बोझिल हो गई है - बस अचानक ही वह तुमपर आ जाएगी।" वे तुमसे पूछते है मानो तुम उसके विषय में भली-भाँति जानते हो। कह दो, "उसका ज्ञान तो बस अल्लाह ही के पास है - किन्तु अधिकांश लोग नहीं जानते।"