175. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

175. पृष्ठ
7 · अल-आराफ़
قُلْ لَٓا اَمْلِكُ لِنَفْس۪ي نَفْعًا وَلَا ضَرًّا اِلَّا مَا شَٓاءَ اللّٰهُۜ وَلَوْ كُنْتُ اَعْلَمُ الْغَيْبَ لَاسْتَكْثَرْتُ مِنَ الْخَيْرِۚ وَمَا مَسَّنِيَ السُّٓوءُ اِنْ اَنَا۬ اِلَّا نَذ۪يرٌ وَبَش۪يرٌ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ۟188
कहो, "मैं अपने लिए न तो लाभ का अधिकार रखता हूँ और न हानि का,बल्कि अल्लाह ही की इच्छा क्रियान्वित है। यदि मुझे परोक्ष (ग़ैब) का ज्ञान होता तो बहुत-सी भलाई समेट लेता और मुझे कभी कोई हानि न पहुँचती। मैं तो बस सचेत करनेवाला हूँ, उन लोगों के लिए जो ईमान लाएँ।"
هُوَ الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ مِنْ نَفْسٍ وَاحِدَةٍ وَجَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا لِيَسْكُنَ اِلَيْهَاۚ فَلَمَّا تَغَشّٰيهَا حَمَلَتْ حَمْلًا خَف۪يفًا فَمَرَّتْ بِه۪ۚ فَلَمَّٓا اَثْقَلَتْ دَعَوَا اللّٰهَ رَبَّهُمَا لَئِنْ اٰتَيْتَنَا صَالِحًا لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ189
वही है जिसने तुम्हें अकेली जान पैदा किया और उसी की जाति से उसका जोड़ा बनाया, ताकि उसकी ओर प्रवृत्त होकर शान्ति और चैन प्राप्त करे। फिर जब उसने उसको ढाँक लिया तो उसने एक हल्का-सा बोझ उठा लिया; फिर वह उसे लिए हुए चलती-फिरती रही, फिर जब वह बोझिल हो गई तो दोनों ने अल्लाह - अपने रब को पुकारा, "यदि तूने हमें भला-चंगा बच्चा दिया, तो निश्चय ही हम तेरे कृतज्ञ होंगे।"
فَلَمَّٓا اٰتٰيهُمَا صَالِحًا جَعَلَا لَهُ شُرَكَٓاءَ ف۪يمَٓا اٰتٰيهُمَاۚ فَتَعَالَى اللّٰهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ190
किन्तु उसने जब उन्हें भला-चंगा (बच्चा) प्रदान किया तो जो उन्हें प्रदान किया उसमें वे दोनों उसका (अल्लाह का) साझी ठहराने लगे। किन्तु अल्लाह तो उच्च है उससे, जो साझी वे ठहराते है
اَيُشْرِكُونَ مَا لَا يَخْلُقُ شَيْـًٔا وَهُمْ يُخْلَقُونَۘ191
क्या वे उसको साझी ठहराते है जो कोई चीज़ भी पैदा नहीं करता, बल्कि ऐसे उनके ठहराए हुए साझीदार तो स्वयं पैदा किए जाते हैं
وَلَا يَسْتَط۪يعُونَ لَهُمْ نَصْرًا وَلَٓا اَنْفُسَهُمْ يَنْصُرُونَ192
और वे न तो उनकी सहायता करने की सामर्थ्य रखते है और न स्वयं अपनी ही सहायता कर सकते है?
وَاِنْ تَدْعُوهُمْ اِلَى الْهُدٰى لَا يَتَّبِعُوكُمْۜ سَوَٓاءٌ عَلَيْكُمْ اَدَعَوْتُمُوهُمْ اَمْ اَنْتُمْ صَامِتُونَ193
यदि तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुलाओ तो वे तुम्हारे पीछे न आएँगे। तुम्हारे लिए बराबर है - उन्हें पुकारो या तुम चुप रहो
اِنَّ الَّذ۪ينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ عِبَادٌ اَمْثَالُكُمْ فَادْعُوهُمْ فَلْيَسْتَج۪يبُوا لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ194
तुम अल्लाह को छोड़कर जिन्हें पुकारते हो वे तो तुम्हारे ही जैसे बन्दे है, अतः पुकार लो उनको, यदि तुम सच्चे हो, तो उन्हें चाहिए कि वे तुम्हें उत्तर दे!
اَلَهُمْ اَرْجُلٌ يَمْشُونَ بِهَاۘ اَمْ لَهُمْ اَيْدٍ يَبْطِشُونَ بِهَاۘ اَمْ لَهُمْ اَعْيُنٌ يُبْصِرُونَ بِهَاۘ اَمْ لَهُمْ اٰذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَاۜ قُلِ ادْعُوا شُرَكَٓاءَكُمْ ثُمَّ ك۪يدُونِ فَلَا تُنْظِرُونِ195
क्या उनके पाँव हैं जिनसे वे चलते हों या उनके हाथ हैं जिनसे वे पकड़ते हों या उनके पास आँखें हीं जिनसे वे देखते हों या उनके कान हैं जिनसे वे सुनते हों? कहों, "तुम अपने ठहराए हु सहभागियों को बुला लो, फिर मेरे विरुद्ध चालें न चलो, इस प्रकार कि मुझे मुहलत न दो