177. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
8 · अल-अनफाल
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ الْاَنْفَالِۜ قُلِ الْاَنْفَالُ لِلّٰهِ وَالرَّسُولِۚ فَاتَّقُوا اللّٰهَ وَاَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْۖ وَاَط۪يعُوا اللّٰهَ وَرَسُولَهُٓ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ1
वे तुमसे ग़नीमतों के विषय में पूछते है। कहो, "ग़नीमतें अल्लाह और रसूल की है। अतः अल्लाह का डर रखों और आपस के सम्बन्धों को ठीक रखो। और, अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो, यदि तुम ईमानवाले हो
اِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذ۪ينَ اِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَاِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ اٰيَاتُهُ زَادَتْهُمْ ا۪يمَانًا وَعَلٰى رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَۚ2
ईमानवाले तो वही लोग है जिनके दिल उस समय काँप उठे जबकि अल्लाह को याद किया जाए। और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाएँ तो वे उनके ईमान को और अधिक बढ़ा दें और वे अपने रब पर भरोसा रखते हों
اَلَّذ۪ينَ يُق۪يمُونَ الصَّلٰوةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنْفِقُونَۜ3
ये वे लोग हैं जो नमाज़ क़ायम करते है और जो कुछ हमने दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं
اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّاۜ لَهُمْ دَرَجَاتٌ عِنْدَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَر۪يمٌۚ4
वही लोग वास्तव में ईमानवाले है। उनके लिेए रब के पास बड़े दर्जे है और क्षमा और सम्मानित उत्तम आजीविका भी
كَمَٓا اَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِنْ بَيْتِكَ بِالْحَقِّۖ وَاِنَّ فَر۪يقًا مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ لَكَارِهُونَۙ5
(यह बिल्कुल वैसी ही परिस्थित है) जैसे तुम्हारे ने तुम्हें तुम्हारे घर से एक उद्देश्य के साथ निकाला, किन्तु ईमानवालों में से एक गिरोह को यह अप्रिय लगा था
يُجَادِلُونَكَ فِي الْحَقِّ بَعْدَ مَا تَبَيَّنَ كَاَنَّمَا يُسَاقُونَ اِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنْظُرُونَۜ6
वे सत्य के विषय में उसके स्पष्ट हो जाने के पश्चात तुमसे झगड़ रहे थे। मानो वे आँखों देखी मृत्यु की ओर हाँके जा रहे हों
وَاِذْ يَعِدُكُمُ اللّٰهُ اِحْدَى الطَّٓائِفَتَيْنِ اَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ اَنَّ غَيْرَ ذَاتِ الشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُر۪يدُ اللّٰهُ اَنْ يُحِقَّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِه۪ وَيَقْطَعَ دَابِرَ الْكَافِر۪ينَۙ7
और याद करो जब अल्लाह तुमसे वादा कर रहा था कि दो गिरोहों में से एक तुम्हारे हाथ आएगा और तुम चाहते थे कि तुम्हें वह हाथ आए, जो निःशस्त्र था, हालाँकि अल्लाह चाहता था कि अपने वचनों से सत्य को सत्य कर दिखाए और इनकार करनेवालों की जड़ काट दे
لِيُحِقَّ الْحَقَّ وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَۚ8
ताकि सत्य को सत्य कर दिखाए और असत्य को असत्य, चाहे अपराधियों को कितना ही अप्रिय लगे