178. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

178. पृष्ठ
8 · अल-अनफाल
اِذْ تَسْتَغ۪يثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ اَنّ۪ي مُمِدُّكُمْ بِاَلْفٍ مِنَ الْمَلٰٓئِكَةِ مُرْدِف۪ينَ9
याद करो जब तुम अपने रब से फ़रियाद कर रहे थे, तो उसने तुम्हारी पुकार सुन ली। (उसने कहा,) "मैं एक हजार फ़रिश्तों से तुम्हारी मदद करूँगा जो तुम्हारे साथी होंगे।"
وَمَا جَعَلَهُ اللّٰهُ اِلَّا بُشْرٰى وَلِتَطْمَئِنَّ بِه۪ قُلُوبُكُمْۚ وَمَا النَّصْرُ اِلَّا مِنْ عِنْدِ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ عَز۪يزٌ حَك۪يمٌ۟10
अल्लाह ने यह केवल इसलिए किया कि यह एक शुभ-सूचना हो और ताकि इससे तुम्हारे हृदय संतुष्ट हो जाएँ। सहायता अल्लाह ही के यहाँ से होती है। निस्संदेह अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
اِذْ يُغَشّ۪يكُمُ النُّعَاسَ اَمَنَةً مِنْهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيْكُمْ مِنَ السَّمَٓاءِ مَٓاءً لِيُطَهِّرَكُمْ بِه۪ وَيُذْهِبَ عَنْكُمْ رِجْزَ الشَّيْطَانِ وَلِيَرْبِطَ عَلٰى قُلُوبِكُمْ وَيُثَبِّتَ بِهِ الْاَقْدَامَۜ11
यह करो जबकि वह अपनी ओर से चैन प्रदान कर तुम्हें ऊँघ से ढँक रहा था और वह आकाश से तुमपर पानी बरसा रहा था, ताकि उसके द्वारा तुम्हें अच्छी तरह पाक करे और शैतान की गन्दगी तुमसे दूर करे और तुम्हारे दिलों को मज़बूत करे और उसके द्वारा तुम्हारे क़दमों को जमा दे
اِذْ يُوح۪ي رَبُّكَ اِلَى الْمَلٰٓئِكَةِ اَنّ۪ي مَعَكُمْ فَثَبِّتُوا الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۜ سَاُلْق۪ي ف۪ي قُلُوبِ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا الرُّعْبَ فَاضْرِبُوا فَوْقَ الْاَعْنَاقِ وَاضْرِبُوا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍۜ12
याद करो जब तुम्हारा रब फ़रिश्तों की ओर प्रकाशना (वह्य्) कर रहा था कि "मैं तुम्हारे साथ हूँ। अतः तुम ईमानवालों को जमाए रखो। मैं इनकार करनेवालों के दिलों में रोब डाले देता हूँ। तो तुम उनकी गरदनें मारो और उनके पोर-पोर पर चोट लगाओ!"
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ شَٓاقُّوا اللّٰهَ وَرَسُولَهُۚ وَمَنْ يُشَاقِقِ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ فَاِنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعِقَابِ13
यह इसलिए कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करे (उसे कठोर यातना मिलकर रहेगी) क्योंकि अल्लाह कड़ी यातना देनेवाला है
ذٰلِكُمْ فَذُوقُوهُ وَاَنَّ لِلْكَافِر۪ينَ عَذَابَ النَّارِ14
यह तो तुम चखो! और यह कि इनकार करनेवालों के लिए आग की यातना है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِذَا لَق۪يتُمُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا زَحْفًا فَلَا تُوَلُّوهُمُ الْاَدْبَارَۚ15
ऐ ईमान लानेवालो! जब एक सेना के रूप में तुम्हारा इनकार करनेवालों से मुक़ाबला हो तो पीठ न फेरो
وَمَنْ يُوَلِّهِمْ يَوْمَئِذٍ دُبُرَهُٓ اِلَّا مُتَحَرِّفًا لِقِتَالٍ اَوْ مُتَحَيِّزًا اِلٰى فِئَةٍ فَقَدْ بَٓاءَ بِغَضَبٍ مِنَ اللّٰهِ وَمَاْوٰيهُ جَهَنَّمُۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ16
जिस किसी ने भी उस दिन उनसे अपनी पीठ फेरी - यह और बात है कि युद्ध-चाल के रूप में या दूसरी टुकड़ी से मिलने के लिए ऐसा करे - तो वह अल्लाह के प्रकोप का भागी हुआ और उसका ठिकाना जहन्नम है, और क्या ही बुरा जगह है वह पहुँचने की!