179. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
8 · अल-अनफाल
فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ قَتَلَهُمْۖ وَمَا رَمَيْتَ اِذْ رَمَيْتَ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ رَمٰىۚ وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِن۪ينَ مِنْهُ بَلَٓاءً حَسَنًاۜ اِنَّ اللّٰهَ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ17
तुमने उसे क़त्ल नहीं किया बल्कि अल्लाह ही ने उन्हें क़त्ल किया और जब तुमने (उनकी ओर मिट्टी और कंकड़) फेंक, तो तुमने नहीं फेंका बल्कि अल्लाह ने फेंका (कि अल्लाह अपनी गुण-गरिमा दिखाए) और ताकि अपनी ओर से ईमानवालों के गुण प्रकट करे। निस्संदेह अल्लाह सुनता, जानता है
ذٰلِكُمْ وَاَنَّ اللّٰهَ مُوهِنُ كَيْدِ الْكَافِر۪ينَ18
यह तो हुआ, और यह (जान लो) कि अल्लाह इनकार करनेवालों की चाल को कमज़ोर कर देनेवाला है
اِنْ تَسْتَفْتِحُوا فَقَدْ جَٓاءَكُمُ الْفَتْحُۚ وَاِنْ تَنْتَهُوا فَهُوَ خَيْرٌ لَكُمْۚ وَاِنْ تَعُودُوا نَعُدْۚ وَلَنْ تُغْنِيَ عَنْكُمْ فِئَتُكُمْ شَيْـًٔا وَلَوْ كَثُرَتْۙ وَاَنَّ اللّٰهَ مَعَ الْمُؤْمِن۪ينَ۟19
यदि तुम फ़ैसला चाहते हो तो फ़ैसला तुम्हारे सामने आ चुका और यदि बाज़ आ जाओ तो यह तुम्हारे ही लिए अच्छा है। लेकिन यदि तुमने पलटकर फिर वही हरकत की तो हम भी पलटेंगे और तुम्हारा जत्था, चाहे वह कितना ही अधिक हो, तुम्हारे कुछ काम न आ सकेगा। और यह कि अल्लाह मोमिनों के साथ होता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَط۪يعُوا اللّٰهَ وَرَسُولَهُ وَلَا تَوَلَّوْا عَنْهُ وَاَنْتُمْ تَسْمَعُونَۚ20
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करो और उससे मुँह न फेरो जबकि तुम सुन रहे हो
وَلَا تَكُونُوا كَالَّذ۪ينَ قَالُوا سَمِعْنَا وَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ21
और उन लोगों की तरह न हो जाना जिन्होंने कहा था, "हमने सुना" हालाँकि वे सुनते नहीं
اِنَّ شَرَّ الدَّوَٓابِّ عِنْدَ اللّٰهِ الصُّمُّ الْبُكْمُ الَّذ۪ينَ لَا يَعْقِلُونَ22
अल्लाह की स्पष्ट में तो निकृष्ट पशु वे बहरे-गूँगे लोग है, जो बुद्धि से काम नहीं लेते
وَلَوْ عَلِمَ اللّٰهُ ف۪يهِمْ خَيْرًا لَاَسْمَعَهُمْۜ وَلَوْ اَسْمَعَهُمْ لَتَوَلَّوْا وَهُمْ مُعْرِضُونَ23
यदि अल्लाह जानता कि उनमें कुछ भी भलाई है, तो वह उन्हें अवश्य सुनने का सौभाग्य प्रदान करता। और यदि वह उन्हें सुना देता तो भी वे कतराते हुए मुँह फेर लेते
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اسْتَج۪يبُوا لِلّٰهِ وَلِلرَّسُولِ اِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْي۪يكُمْۚ وَاعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِه۪ وَاَنَّهُٓ اِلَيْهِ تُحْشَرُونَ24
ऐ ईमान लानेवाले! अल्लाह और रसूल की बात मानो, जब वह तुम्हें उस चीज़ की ओर बुलाए जो तुम्हें जीवन प्रदान करनेवाली है, और जान रखो कि अल्लाह आदमी और उसके दिल के बीच आड़े आ जाता है और यह कि वही है जिसकी ओर (पलटकर) तुम एकत्र होगे
وَاتَّقُوا فِتْنَةً لَا تُص۪يبَنَّ الَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مِنْكُمْ خَٓاصَّةًۚ وَاعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ شَد۪يدُ الْعِقَابِ25
बचो उस फ़ितने से जो अपनी लपेट में विशेष रूप से केवल अत्याचारियों को ही नहीं लेगा, जान लो अल्लाह कठोर दंड देनेवाला है