18. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
وَقَالَتِ الْيَهُودُ لَيْسَتِ النَّصَارٰى عَلٰى شَيْءٍۖ وَقَالَتِ النَّصَارٰى لَيْسَتِ الْيَهُودُ عَلٰى شَيْءٍۙ وَهُمْ يَتْلُونَ الْكِتَابَۜ كَذٰلِكَ قَالَ الَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَ مِثْلَ قَوْلِهِمْۚ فَاللّٰهُ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ113
यहूदियों ने कहा, "ईसाईयों की कोई बुनियाद नहीं।" और ईसाइयों ने कहा, "यहूदियों की कोई बुनियाद नहीं।" हालाँकि वे किताब का पाठ करते है। इसी तरह की बात उन्होंने भी कही है जो ज्ञान से वंचित है। तो अल्लाह क़यामत के दिन उनके बीच उस चीज़ के विषय में निर्णय कर देगा, जिसके विषय में वे विभेद कर रहे है
وَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ مَنَعَ مَسَاجِدَ اللّٰهِ اَنْ يُذْكَرَ ف۪يهَا اسْمُهُ وَسَعٰى ف۪ي خَرَابِهَاۜ اُو۬لٰٓئِكَ مَا كَانَ لَهُمْ اَنْ يَدْخُلُوهَٓا اِلَّا خَٓائِف۪ينَۜ لَهُمْ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ وَلَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ عَذَابٌ عَظ۪يمٌ114
और उससे बढ़कर अत्याचारी और कौन होगा जिसने अल्लाह की मस्जिदों को उसके नाम के स्मरण से वंचित रखा और उन्हें उजाडने पर उतारू रहा? ऐसे लोगों को तो बस डरते हुए ही उसमें प्रवेश करना चाहिए था। उनके लिए संसार में रुसवाई (अपमान) है और उनके लिए आख़िरत में बड़ी यातना नियत है
وَلِلّٰهِ الْمَشْرِقُ وَالْمَغْرِبُ فَاَيْنَمَا تُوَلُّوا فَثَمَّ وَجْهُ اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ وَاسِعٌ عَل۪يمٌ115
पूरब और पश्चिम अल्लाह ही के है, अतः जिस ओर भी तुम रुख करो उसी ओर अल्लाह का रुख़ है। निस्संदेह अल्लाह बड़ा समाईवाला (सर्वव्यापी) सर्वज्ञ है
وَقَالُوا اتَّخَذَ اللّٰهُ وَلَدًاۙ سُبْحَانَهُۜ بَلْ لَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ كُلٌّ لَهُ قَانِتُونَ116
कहते है, अल्लाह औलाद रखता है - महिमावाला है वह! (पूरब और पश्चिम हीं नहीं, बल्कि) आकाशों और धरती में जो कुछ भी है, उसी का है। सभी उसके आज्ञाकारी है
بَد۪يعُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَاِذَا قَضٰٓى اَمْرًا فَاِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ117
वह आकाशों और धरती का प्रथमतः पैदा करनेवाला है। वह तो जब किसी काम का निर्णय करता है, तो उसके लिए बस कह देता है कि "हो जा" और वह हो जाता है
وَقَالَ الَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَ لَوْلَا يُكَلِّمُنَا اللّٰهُ اَوْ تَاْت۪ينَٓا اٰيَةٌۜ كَذٰلِكَ قَالَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ مِثْلَ قَوْلِهِمْۜ تَشَابَهَتْ قُلُوبُهُمْۜ قَدْ بَيَّنَّا الْاٰيَاتِ لِقَوْمٍ يُوقِنُونَ118
जिन्हें ज्ञान नहीं हैं, वे कहते है, "अल्लाह हमसे बात क्यों नहीं करता? या कोई निशानी हमारे पास आ जाए।" इसी प्रकार इनसे पहले के लोग भी कह चुके है। इन सबके दिल एक जैसे है। हम खोल-खोलकर निशानियाँ उन लोगों के लिए बयान कर चुके है जो विश्वास करें
اِنَّٓا اَرْسَلْنَاكَ بِالْحَقِّ بَش۪يرًا وَنَذ۪يرًاۙ وَلَا تُسْـَٔلُ عَنْ اَصْحَابِ الْجَح۪يمِ119
निश्चित रूप से हमने तुम्हें हक़ के साथ शुभ-सूचना देनेवाला और डरानेवाला बनाकर भेजा। भड़कती आग में पड़नेवालों के विषय में तुमसे कुछ न पूछा जाएगा